वो आख़िरी फ़ोन कॉल-
“पापा मुझे बचा लो, मैंने आग से बचने के लिए अपने आपको एक बाथरूम में लॉक कर लिया है, लेकिन धुआँ अंदर आ रहा है. लगता नहीं मैं बच पाऊँगा.”
और सचमुच वो बचा नहीं.
लखनऊ में जो हुआ वो मानवीय सहनशक्ति से परे है.
प्रशासन, शासन, सिस्टम, ब्यूरोक्रेसी, या व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए दूसरों की परवाह न करने वाला हमारे अंदर बैठा हुआ जानवर, सब मिल के भी ज़िम्मेदारी ले लें, तो वो बच्चे वापस नहीं लौटेंगे और वो आख़िरी फ़ोन कॉल्स नहीं भूलेंगी.
#Lucknow #CoachingCenterFire #LucknowFireTragedy #UttarPradesh
CJP Protest: 'वो लोग हैं बेशर्म...' प्राइवेट कंपनी का उदाहरण दे लड़के ने Dharmendra Pradhan के इस्तीफे पर कही सौ टके की बात!
देखिए पूरी रिपोर्ट, @Saurabh_Pinch के साथ.
Full Video:
https://t.co/h8nHAB3jrk
मुझे नहीं पता आप इसे किस नज़र से देखेंगे, और न ही मैं आपका नज़रिया तय करना चाहता हूँ।
लेकिन कुछ बातें ध्यान देने लायक हैं, जैसे कि –
9वीं में पढ़ने वाले इस लड़के को पता है कि सार्वजनिक मंच पर अपनी बात कैसे रखी जाती है।
• राजनीतिक शिष्टता (Political Correctness) क्या होती है।
• सही शब्दों का चयन कैसे किया जाता है।
• असहमति के बावजूद जो सही है, उसे स्वीकार करते हुए अपना पक्ष कैसे रखा जाता है।
• अपनी बात बिना किसी पर अनावश्यक हमला किए कैसे कही जाती है।
• और सबसे महत्वपूर्ण, अपनी पहचान को लेकर स्पष्टता।
सच कहूँ तो, इसकी बातें प्रभावित कर गईं।
हमारे पक्ष के नेता हों या विपक्ष के, अगर थोड़ा भी इससे सीख लें तो सार्वजनिक विमर्श का स्तर बेहतर हो सकता है।
हाँ, यह मुस्लिम है, लेकिन किसी व्यक्ति का मूल्यांकन उसकी पहचान से नहीं, उसकी बात और उसके आचरण से होना चाहिए।
कई बार सामने वाले खेमे से भी कोई अपनी समझ, शालीनता और ईमानदारी से प्रभावित कर जाता है।
ऐसा हो तो उसे स्वीकार करने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिए।
न च सीतां विना स्वर्गं, न च लक्ष्मणमृते सुखम्।
भाई को खोकर युद्ध जीत भी लिया, तो वह विजय किस काम की?
आसान नहीं होता किसी के ऊपर गुजर रही स्थिति को समझना। कुछ दर्द समय के साथ नहीं मिटते , अमर हो जाते हैं।💔
Bhai jb pta hii ki exam hii to exam special trains ko green signal dena chahiye na jaruri nhi hii vande Bharat or ye shatabdi apne record time pr chle .....
Bhai youth ko bhi dekhna hoga tabhi bharat age kuchh achha kr payega ...
Thank you 🙏
@khurpenchh सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाकर क्या हासिल होगा नहीं पता लेकिन अपनी व्यथा को अलग दिशा दे रहें हैं।
आक्रोश है संदेह नहीं लेकिन आक्रोश की परिणती अराजकता नहीं होनी चाहिए।
Paisa jyada hii inke pass isliye esi bate har teesre kr deti hiii ...
Middle class candidate k pass kalam k siva kuchh nhi hii smjo is bat ko 14k me bo ghr or apna pet bhi paal lega kya ....
Thoda vivek buddhhii ka istemaal krke bole to jyada thik rhega
@KraantiKumar व्यवस्थाओं कि कमी भी है इसमें सिर्फ युवा या बच्चों कि गलती नहीं है ये तो एग्जाम है अगर Normaly भी किसी ट्रेन के जरनल कोच मै चढ़ना हो तो पहले धोती टाइट करनी पड़ती है।
Life After Rank 1: IAS Realities with Dr. Anuj Agnihotri (AIR1, 2025) & Collector IAS Gaurav Agarwal (AIR1,2013)
TIMESTAMPS:
00:00 Intro and guests
02:00 AIR-1 to AIR-1 letter
04:00 Gaurav Sir blog and transition
05:00 DM view vs citizen view
09:30 A DM day in detail
12:30 Urban flooding Jodhpur
23:00 IIT failure and arrogance
38:50 Education inequality
40:30 School dropout root cause
43:00 AI based student assessment
46:15 NEET online shift debate
49:00 IAS role in Viksit Bharat
1:18:40 Success vs happiness
1:19:35 Rapid fire round
1:22:00 Stock market outlook
1:23:00 Time machine question
1:27:40 Three things IAS carries
1:30:00 Closing
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Maths मेरे नाम में विषय नहीं, सोचने का तरीका,तर्क और विश्लेषण भी है। है।
जहाँ आँकड़े होंगे, वहाँ Maths होगी।
चाहे EXAM का Paper हो या देश की अर्थव्यवस्था।
लोग कहते हैं मेरे tweet Maths के syllabus से बाहर है।
मैं कहता हूँ बेरोज़गारी, GDP, बजट, महंगाई, टैक्स, शेयर बाज़ार - सब Numbers की भाषा हैं।
Maths सिर्फ़ HCF-LCM तक सीमित नहीं है।
देश की अर्थव्यवस्था से लेकर शेयर बाज़ार तक, पूरी दुनिया Numbers पर चलती है।
इसलिए Abhinay Maths नाम है, Abhinay Chapter-7 Exercise-3 नहीं।
MATHS = Mindset, Analysis, Truth, Humanity & Statistics
MATHS = Mindset And Thinking Handling Society
इसलिए सवाल चाहे परीक्षा का हो, अर्थव्यवस्था का हो या समाज का - चर्चा जारी रहेगी।
सवाल विपक्ष या पक्ष का नहीं है।
जब हर दिन शिक्षा व्यवस्था कोई नया ज़ख्म दे रही हो,तब केवल कारण गिनाने से काम नहीं चलेगा
सवाल यह है कि अगर देश की सबसे बड़ी परीक्षाएँ और संस्थाएँ लगातार Fail हो रही हो तो इसकी जवाबदेही शिक्षामंत्री की क्यों नहीं ?
फिर क्यों न कहा जाए कि शिक्षा मंत्री से शिक्षा संभल नहीं रही?
अंजना ने हमारे विरुद्ध मानहानि का दावा दायर किया है - 2 करोड़ का हरज़ाना (सब कुछ 2 ही -कोड़ी से करोड़ )
यह उनका वैधानिक अधिकार है और हम उसका सम्मान करते हैं।
उसी प्रकार हमें भी अपने पक्ष, अपनी प्रतिष्ठा और अपने अधिकारों की रक्षा का पूरा अधिकार है। हमारे पास भी तथ्य हैं, प्रश्न हैं और प्रतिदावे हैं, जिन्हें हम रखेंगे।सत्य और तथ्य अंततः वहीं तय होंगे, सोशल मीडिया की अदालत में नहीं।
पहली बार ऐसा दिखाई पड़ रहा है कि एक आदमी के चलते पूरी शिक्षा व्यवस्था खोखली होती दिख रही है।
Education system से लेकर Exam System तक, सब तमाम सवालों के घेरे में हैं। Special Protest सिर्फ एक आदमी के इस्तीफे को लेकर हो रहे हैं।
मगर ऐसा क्या है कि धर्मेंद्र प्रधान को नहीं हटाया जा सकता, चाहे देश का भविष्य दांव पर हो ,युवाओं के भविष्य के चलते!
ये बात एकदम समझ से परे है। हर अति का अंत है और जल्दी ही सरकार को इन्हे हटाना होगा। कोई शिक्षित आदमी ही अब देश की शिक्षा की जिम्मेदारी लेगा।
अगला नंबर रेल मंत्री और वित्तमंत्री का आना है |
विकसित भारत क़ि दिशा देश का युवा तय करेगा |
दिल्ली होटल में आग लगी वहां मैट्रेस की दुकान के मालिक रियाजुद्दीन मंसूरी ने अपने बेटे अरमान के साथ तुरंत रिएक्ट किया, अपनी दुकान के सारे मैट्रेस और क्विल्ट बाहर बिछा दिए ताकि ऊपर से कूदने वाले लोगों को कुशन मिले, उन्होंने 8 से ज्यादा लोगों की जान बचाई।
इस दौरान रियाजुद्दीन और उनका बेटा दोनों घायल हो गए, फिर भी उन्होंने हाथ नहीं रोका।
वो मुस्लिम में भी एक हीरो है, इंसानियत हर धर्म से ऊपर है, रियाजुद्दीन जैसे लोग ही असली मिसाल हैं।
रियाजुद्दीन और इनके बेटे की हिम्मत और इंसानियत को सलाम।🙏✍️
मुश्किल में दिखे तो साथ खड़े हो जाना,
मगर सच को नज़रअंदाज़ मत कर जाना।
कई चेहरे बेगुनाह निकलते हैं,
और कई चेहरों से नकाब देर से हटता है।
मुश्किल में साथ खड़े रहिए, मगर इतना भी नहीं कि सच सामने आए और आपको अपनी ही ताली पर अफसोस हो।
सहानुभूति रखिए, अंध-समर्थन नहीं।
@anjanaomkashyap तुम जैसे गटर छाप, चापलूस गोदी मीडिया की विश्व रैंकिंग "157" है...😂😂
पत्रकारिता जब वैश्यावृति करने लगे और सरकार के साथ हमबिस्तर हो जाये तब सरकार आवारा हो जाती है और देशहित, जनहित से जुड़े मुद्दे गौण हो जाते हैं.