बंगाल में भाजपा को शून्य से शिखर तक पहुँचाने की यात्रा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले कार्यकर्ताओं की पावन स्मृति में बना यह मेमोरियल, शपथ ग्रहण स्थल पर उपस्थित हर कार्यकर्ता के हृदय में भावनाओं का ज्वार उत्पन्न कर रहा है।
उन पुण्यात्माओं का त्याग, संघर्ष और बलिदान आज सार्थक होने जा रहा है।
राष्ट्र और संगठन के लिए अपना सर्वस्व अर्पित करने वाले उन सभी हुतात्माओं को कोटि-कोटि नमन।
বাংলায় বিজেপিকে শূন্য থেকে শিখরে প���ঁছে দেওয়ার যাত্রায় নিজেদের প্রাণের আহুতি দেওয়া সেই সব কার্যকর্তাদের পবিত্র স্মৃতিতে নির্মিত এই মেমোরিয়াল, শপথ গ্রহণ স্থলে উপস্থিত প্রতিটি কর্মীর হৃদয়ে আবেগের জোয়ার সৃষ্টি করছে। তাঁদের ত্যাগ, সংগ্রাম ও বলিদান আজ সার্থক হতে চলেছে।
যাঁরা দেশ ও সংগঠনের জন্য নিজেদের সর্বস্ব উৎসর্গ করেছেন, সেই সমস্ত শহীদদের কোটি কোটি প্রণাম।
अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर मुझे श्री अजितनाथ भगवान श्वेतांबर जैन मंदिर में प्रार्थना करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। अहिंसा, करुणा, आत्मसंयम और सादगी जैसे जैन धर्म के शाश्वत मूल्य हमें उद्देश्यपूर्ण, विनम्र और जिम्मेदार जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं।
तार���गा पहाड़ियों में वनीकरण के कार्य से जुड़ना भी हमारे लिए अत्यंत संतोष का विषय है। यह प्रकृति के संरक्षण और समस्त जीवों के प्रति श्रद्धा तथा संवेदनशीलता का एक विनम्र प्रयास है।
इस पावन अवसर पर मैं सभी के लिए शांति, समृद्धि, सद्भाव और नई आशा की कामना करता हूँ।
मुगलों के आगमन से पूर्व, भारत में विवाह दिन में ही संपन्न होते थे। @DrKumarVishwas जी की सुपुत्री का विवाह भी दिन में ही संपन्न हुआ।
दक्षिण भारत में यह परंपरा आज भी है।
अपने घर-परिवार में पावन कार्यों का आयोजन दिन में ही करें, यही हमारी संस्कृति है।
तप, त्याग और सेवा के प्रतिबिंब परम पूज्य आचार्य गुरुवर श्री विद्यासा���र जी महामुनिराज का जीवन सभी के लिए अनुकरणीय है।
आज उनकी स्मृति में ₹100 का स्मारक सिक्का, डाक विभाग द्वारा तैयार विशेष लिफाफा, उनके 108 चरण चिन्ह व चित्र का अनावरण और प्रस्तावित समाधि स्मारक ‘विद्यायतन’ का शिलान्यास किया। यह स्मारक भावी पीढ़ी को आचार्य श्री विद्यासागर जी के आदर्शों व सिद्धांतों पर चलने के लिए प्रेरित करेगा।
परम पूज्य आचार्य गुरुवर श्री विद्यासागर जी महामुनिराज ने समाज कल्याण के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।
कल, डोंगरगढ़ (छत्तीसगढ़) में आचार्य श्री विद्यासागर जी के ‘प्रथम समाधि स्मृति महोत्सव’ में संतों और उनके अनुयायियों के बीच रहने का सौभाग्य प्राप्त होगा। साथ ही, उनकी स्मृति में ₹100 का स्मारक सिक्का, डाक विभाग का विशेष लिफाफा, 108 चरण चिन्हों व चित्र का लोकार्पण और प्रस्तावित समाधि स्मारक ‘विद्यायतन’ का शिलान्यास होगा।
नाली का निर्माण कार्य कराया गया था कुछ समय पूर्व, जिसमे ��िना प्लानिंग के नाली को गहरा कर दिया, और पुरानी नाली मुख्य सड़क जिसमे ये पानी मिलता था उसे गहरा नहीं किया,
जिसके कारण गहरी नाली में जल जमाव के कारण अत्यधिक कीड़े व मच्छर हो रहे है, कई बार 181 पर भी शिकायत कर चुका हु
नाली का निर्माण कार्य कराया गया था कुछ समय पूर्व, जिसमे बिना प्लानिंग के नाली को गहरा कर दिया, और पुरानी नाली मुख्य सड़क जिसमे ये पानी मिलता था उसे गहरा नहीं किया,
जिसके कारण गहरी नाली में जल जमाव के कारण अत्यधिक कीड़े व मच्छर हो रहे है, कई बार 181 पर भी शिकायत कर चुका हु
@DrMohanYadav51@KailashOnline माननीय मंत्री जी आप कृप�� करके इस समस्या का समाधान करने में मदद कीजिए!
नगर निगम सागर के अधिकारी न तो स्वच्छता पर ध्यान दे रहे है, और न ही सीवेज लाइन आधी जुड़ी और आधी को ऐसे ही छोड़ दिया गया!swachh उधारण _ मेरा ही कनेक्शन नहीं जोड़ा
@narendramodi
Pujya Shri Vidyasagar Ji Maharaj, the great Acharya of Jainism who embodied the best traditions of the great Tirthankaras in his life, completed his earthly journey in Dongargarh-Rajnandgaon (Chhattisgarh). Pujya Shri Vidyasagar Ji Maharaj took Diksha in 1968. Since then, by continuously practicing truth, non-violence, Aparigraha, Achaurya, and Brahmacharya, he dedicated himself to the nationwide propagation of these Panch Mahavratas. Inspired by the spirit of public welfare, Pujya Acharya Shri Maharaj gave Diksha to hundreds of saints and Aryikas in his life and always inspired and blessed them for philanthropic works. During this life, he took many initiatives for the public welfare such as opening of Gaushalas, educational institutions, handloom centers and other initiatives across Bharat. With his blessings, many unprecedented works, that have brought radical changes in the life of workers who are working there, are successfully being run. His wish was that Bharat should stand up again with its noble teachings and ideals, and provide a new direction to the world in the present times. His entire life was completely dedicated to these ideals. He remained Tapasvi till his last breath. Millions of people are following his footsteps and ideals today. It is natural for everyone to feel sad after hearing about his Sadgati. Rashtriya Swayamsevak Sangh prays to Bhagwan that all of us continue to move forward on the path shown by him with more determination and dedication. We have to propagate his ideals with more dedication. On behalf of Rashtriya Swayamsevak Sangh, we pay our humble tribute to this great Atman.
Dr. Mohan Bhagwat
Sarsanghachalak
Dattatreya Hosabale
Sarkaryavah,
Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS)
अनंत यात्रा पर ज्ञान के सागर !!!
संत शिरोमणि, परम श्रद्धेय आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज जी की संलेखना पूर्वक समाधि का समाचार स्तब्ध करने वाला है। मुझे सदैव उनका असीम स्नेह और आशीर्वाद प्राप्त हुआ। उन्होंने अपने ज्ञान से समाज को अभिसिंचित किय���।
महाराजश्री के दर्शन मात्र से मेरा मन अनंत प्रकाश से भर जाता था। समाज के लिए महाराज जी द्वारा किए गए कार्य, उनका त्याग, तपस्या और तपोबल सदैव उन्हें हमारे बीच शाश्वत रख���गा। उनकी दिव्य उपस्तिथि हमें जनसेवा की प्रेरणा देती रहेगी।
महाराजश्री के चरणों में बारंबार प्रणाम, नमन🙏