घर उजड़ने की तकलीफ़ - बेचैनी - असहाय होना. किससे न्याय ���ाँगे, कहाँ जाये?
राजस्थान के बाड़मेर में भील आदिवासी परिवारों के घर तहस नहस कर दिए गए
आदिवासियों के जंगल ज़मीन धन्ना ��ेठों को देकर शहर में उनके सिर के ऊपर की छत उजाड़ देंगे - यह कैसा देश बना रहे हैं मोदी जी?
हमने तो पहले ही कहा था कि CCTV का नाम ‘चढ़ावा-चोरी TV’ साबित होगा। जिन लोगों ने ‘सत्रह’ बार लूटा वो सैंकड़ों साल से इतिहास में बदनाम हैं, जिन्होंने केवल 40 दिन में ‘सत्तर’ बार लूटा वो तो इतिहास में इस महापाप के लिए ‘सात’ जन्मों के लिए काले अक्षरों में दर्ज़ हो जाएंगे। ये सोचा जाए जिन्होंने सात हफ़्ते में इतनी चोरी कर ली है, उन्होंने पिछले इतने सालों में कितना चुराया होगा, कितना आपस में बाँटा होगा, कितना चुपके से छुपाया-दबाया होगा और कितना अपने मुखिया तक पहुँचाया होगा।
अखंड निंदनीय!
एक तरफ़ आदिवासी सम्मान के बड़े-बड़े दावे, दूसरी तरफ़ आदिवासियों के उजड़ते घर।
बाड़मेर में भील आदिवासी परिवारों के आशियाने तोड़ दिए गए। महिलाएँ और मासूम बच्चे खुले आसमान के नीचे हैं।
सत्ता से सवाल है - बुलडोज़र चलाने की इतनी जल्दी थी, लेकिन पुनर्वास की कोई जल्दी क्यों नहीं थी?
आदिवासी समाज को सिर्फ़ चुनावी मंचों पर याद करना और ज़मीन पर उसे बेघर छोड़ देना, यही क्या "सम्मान" की राजनीत�� है?
अगर विकास किसी गरीब की छत छीनकर आगे बढ़ता है, तो उस विकास की संवेदनशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
आदिवासी समाज को भाषण नहीं, न्याय चाहिए।
खान सर जैसा पूरा आदमी पूरे देश में दूसरा कोई नही मिलेगा. खान सर ने जो किया है उसके लिए उन्हें उम्रकैद की सजा मिलनी चाहिए ?
खान सर कौन कौन से अपराध किए हैं यह रही पूरी लिस्ट.
खान सर 200 रुपए फीस में छात्रों को पढ़ाकर दरोगा, असफर और इंजीनियर बनाया.
खान सर गरीबों के इलाज के लिए अस्पताल बनाया जहां MRI 10,000 में नही, 1000 र���पए में किया जा रहा है. CT स्कैन 8000 में नही, केवल 900 रुपए किया जा रहा है.
ब्लड टेस्ट CBC 7 रुपए, ECG 25 रुपए, X-रे 35 और किडनी डायलीसिस 350 रुपए में किया जा रहा है.
महंगी शिक्षा लॉबी और महंगी स्वास्थ्य लॉबी को नुकसान पहुंचाने के आरोप में खान सर को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए.
माननीय न्यायालय में आज हुई सुन��ाई के दौरान Anjana & Anr. मामले में कोई Interim Relief प्रदान नहीं की गई। मामले की अगली सुनवाई 17 जून को निर्धारित की गई है।
हम न्यायिक प्रक्रिया का पूर्ण सम्मान करते हैं और न्यायालय के समक्ष अपना विस्तृत उत्तर प्रस्तुत करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर उपलब्ध तथ्यों, साक्ष्यों एवं विधिक सलाह के आधार पर अपने अधिकारों की रक्षा हेतु उचित कानूनी कदमों तथा Counter Claim पर भी विचार किया जाएगा।
हमें भारतीय न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है। हमारा मानना है कि किसी भी विवाद का समाधान न्यायालय में ���थ्यों और कानून के आधार पर होना चाहिए, न कि मीडिया ट्रायल या सोशल मीडिया की बहसों के आधार पर।
अब 17 जून को न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखने की प्रतीक्षा करेंगे।
मैं ब्राह्मण हूं, मेरी 5 पीढ़ियां पढ़ी-लिखी और कॉलेज-यूनिवर्सिटी पहुंची। लेकिन मेरे दोस्त जो OBC, SC, ST समाज से आते हैं, वे आज भी कॉलेज का सिर���फ गेट देख पाए हैं। यही फर्क बताता है कि सबको बराबरी का मौका अभी नहीं मिला। इसलिए शिक्षा और अवसर में न्याय जरूरी है।
ममता बनर्जी जी लगभग 5 घंटे तक उस स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर बैठी रहीं, जहाँ ईवीएम मशीनें रखी गई थीं। उनके बैठने की वजह यह थी कि बिना पार्टी के अधिकृत एजे���ट हुए कुछ लोग स्ट्रॉन्ग रूम के अंदर घुस आए थे।
घुसने वाले वही लोग हैं जो डकैती से बिहार में चुनाव जीते हैं।
मध्यप्रदेश के सिंगरौली में एक असहाय आदिवासी आदमी को भद्दी भद्दी गालियाँ देकर बुरी तरह से पीटने का यह वीडियो मानवता को शर्मसार करता है
आदिवासियों की ज़मीन छीनने के साथ ही साथ उनके साथ खुलेआम जानवरों से भी बदतर व्यवहार हो रहा है
डबल इंजन सरकार में यह बर्बरता हो रही है और BJP में सुई टपक सन्नाटा है
इन दरिंदों को पुलिस, प्रशा���न, सरकार किसी का डर क्यों नहीं है?
कितना दुखद है ��ि आदिवासियों के साथ हमारे देश में यह अराजकता तब हो रही है जब हमारी महामहिम राष्ट्रपति स्वयं आदिवासी समाज से हैं - लेकिन दुर्भाग्य से वह बिल्कुल मौन हैं
📍 सिंगरौली, मप्र
खान सर का तगड़ा तंज 😄🔥
“अगर 10 दिन के लिए Strait of Hormuz बंद हो गया, तो गोदी मीडिया आपको लकड़ी पर खाना बनाने के फायदे गिनाने लगेगा।”
और हां, सबसे पहले ज्ञान देने पहुंचेंगे @sudhirchaudhary दोस्तों, आज हम आपको बताएंगे कि लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने के 10 फायदे।
किसान आंदोलन के शहीदों को मेरी तरफ से एक छोटी-सी श्रद्धांजलि
वर्ष 2026–27 के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगों पर चर्चा एवं मतदान के दौरान अपनी बात रखते हुए।
1. कृषि पर 50% आबादी निर्भर लेकिन जीडीपी में सिर्फ 15–16% योगदान।
2. किसानों की कम आय -आर्थिक व सामाजिक अन्याय
3. कृषि बजट ज़मीनी जरूरतों के मुकाबले कम।
4. पीएम किसान सम्मान निधि 6,000 रुपये सालाना अपर्याप्त है 1,00,000 रुपये करने की मांग।
5. सभी फसलों पर एमएसपी की कानूनी गारंटी।
6. घोषित एमएसपी वास्तव में कितने किसानों को मिल रही।
7. किसान को फसल का उचित मूल्य नहीं मिलना।
8. फसल बीमा योजना को प्रभावी बनाने की मांग।
9. किसा��� आत्महत्याएँ-सरकार की जिम्मेदारी तय हो।
10. पिछले 10 वर्षों में उत्तर प्रदेश में किसान आत्महत्या के आंकड़े व रोकथाम उपाय।
11. गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग।
12. गन्ना भुगतान 14 दिन में सुनिश्चित हो।
13. आलू किसानों को उचित दाम।
14. यूरिया की उपलब्धता सुनिश्चित हो।
15. जर्ज��� नहरों की मरम्मत।
16. समय पर सिंचाई का पानी उपलब्ध कराया जाए।
17. वर्ष 2022 में यूपी सरकार ने वादा किया था कि बिजली का दाम आधे कर देंगे, लेकिन नहीं हुये।
@LokSabhaSectt
@AgriGoI
@ChouhanShivraj
#Budget2026