There can be no filthier type of man than one who defends rapists.
Pralhad Joshi is an insult to our education system and an insult to every student in it. Crores of young women study in the institutions he now oversees.
India’s women will never accept PM Modi’s new Education Minister.
महत्वपूर्ण सूचना:
बिहार , उत्तर प्रदेश और बंगाल में सैकड़ों छात्रों को गिरफ्तार किया गया है,
दिल्ली व अन्य राज्यों में सैकड़ों लोगों की निगरानी की जा रही है,
उ��्हें परेशान किया जा रहा है,
दिल्ली से ऐसी कई खबरें आ रही हैं कि प्रदर्शनकारियों को लॉजिस्टिक्स में मदद करने वाले वॉलंटियर्स को हिरास�� में लिया जा रहा है।
हमारी मांग है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ़ सभी FIR तुरंत वापस ली जाएं,
छात्रों को रिहा किया जाए और भविष्य में कोई FIR दर्ज न की जाए (दिल्ली समझौते के अनुसार)।
चाहे वह दिल्ली पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसियों या BJP सहयोगी राज्यों की पुलिस द्वारा हो।
पूरे देश के सूचनार्थ: बेहद गंभीर ख़बर
प्रयागराज प्रोटेस्ट के नाम पर बहुत सारे छात्रों को यूपी पुलिस की विशेष टीम बिना नंबर की गाड़ी में उठाकर ले गई है।
जब केंद्र सरकार ने वादा किया था कि किसी भी छात्र के विरुध्द कोई कार्रवाई ���हीं होगी तो फिर ऐसी धोखाधड़ी किसके कहने पर हो रही है। क्या उत्तर प्रदेश की पुलिस प्रधानमंत्री जी के आश्वासन और वादे को जुमला साबित करना चाहती है।
उठाए गए सभी छात्रों की तुरंत रिहाई हो और इस अवैध गतिविधि में लिप्त सभी पुलिसकर्मियों और उच्च अधिकारियों को निलंबित करके उनके विरुद्ध सख़्त स��� सख़्त कार्रवाई की जाए।
माननीय न्यायालय से आग्रह है कि इन छात्रों के जीवन पर मंडरा रहे ख़तरे का तत्काल संज्ञान ले।
बेशर्मों की फ़ौज है .
हज़ारों छात्रों ने सड़क पर उतरकर मंत्री का इस्तीफा लिया , इनके नकारेपन की वजह से बीस बच्चों की जान जा चुकी है और इनका स्वागत ऐसे हो रहा है, जैसे कोई किला फतह करके आए हों
आज छात्रों को बहुत बड़ी जीत मिली है।
याद रहे, प्रदर्शन में जिन छात्रों पर घातक हमले हुए - किसी का हाथ टूटा, किसी का पैर, किसी की पसली, पेलेट गन जैसे जानलेवा हथियार का इस्तेमाल किया गया, तो कई चोट खा कर critical हो गए - इन सबके सीधे ज़िम्मेदार गृह मंत्री अमित शाह हैं।
मांग साफ है, इस हमले के organisers से लेकर implementors तक, सभी की जवाबदेही तय हो और ��नपर ऐसी कार्रवाई हो जो छात्रों को दिखे - तब जा कर होगा इंसाफ़।
अमित शाह जी, आपको जवाब तो देना ही पड़ेगा।
सिवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने छात्रों पर सीधी फायरिंग की। AK-47 से भी फायरिंग की गई।
जब 7 हत्याओं का आरोपी अपराधी मुख्यमंत्री बन जाए तब लोकतंत्र में प्रदर्शन कर रहे निर्दोष छात्रों पर पुलिस ऐसे ही गोलियां चलाती है। दोषी अधिकारियों के ख��लाफ कार्रवाई हो। #Bihar
ये कतई सही नहीं है,
छात्रों के ऊपर ऐसे गोली चलाना असंवैधानिक है,
ऐसे पुलिस वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए,
बिहार के मुख्यमंत्री जी से यही कहेंगे कि आप भी दिल्ली समझौते को माने।
₹4,700 करोड़ की लागत वाले लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के सिर्फ़ 13 दिन बाद ही इसके एक हिस्से में कथित तौर पर खराबी आ गई,
जिससे इसके निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं और जांच की मांग की जा रही है।
इस बंदे को एक बार जंतर - मंतर आना चाहिए था .
ये न किसानों के आंदोलन में गया . न पहलवानों के आंदोलन में गया . न नौजवानों के आंदोलन में आया क्योंकि इसे पता है कि आया तो क्या लेकर जाएगा .
ऐसे लोगों ने देश के जनमानस को ख़राब करने में बहुत अहम भूमिका निभाई है .
इस भाजपाई ��ुंडे सत्यम की गुंडई को वीडियो में देखिए और साथ संलग्न इसकी तस्वीरें भी देखिए
समझिये लीजिए कि इन गुंडों को ताकत कहां से मिलती है
इस गुंडे को जंतर मंतर से लौट रहे छात्रों को पीटने के लिए मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने भेजा था या मुख्यमंत्री रेखा जी ने या ब्रजेश पाठक ने?
भाजपा के नेता कल दिन में युवाओं छात्रों पर टेसुवे बहा रहे थे, शाम को इन्हीं भाजपाइयों का असली चेहरा भी सामने था
जान लीजिए, पहचा�� लीजिए, ये भाजपा के शीर्ष से लेकर कोई भी नेता आपके बच्चों की शिक्षा, रोजगार, नौकरी के पक्ष में नहीं हैं, ये भाजपाई आपके बच्चों को अनपढ़, मजदूर बनाना चाहते हैं इसीलिए पेपर लीक करवाते हैं, इसीलिए बच्चों को पिटवाते हैं
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हमारे education system को फिर से संवारने की दिशा में बहुत बड़ा कदम है।
शाबाश देश भर के छात्रों, आप सभी पर गर्व है।
सड़कों पर आ कर लोकतंत्र, संविधान और अपने भविष्य की रक्षा में डट कर खड़े होने वाले हर एक युवा, हर छात्र को बहुत-बहुत बधाई।
2 मांगें अभी भी बाकी हैं - प्रधानमंत्री छात्रों और भारत के भविष्य को सम्मान देते हुए माफ़ी मांगें और छात्रों पर हिंसा के दोषियों पर कार्रवाई हो।
ये समाज के दूसरे वर्गों किसानों, मजदूरों, गरीबों, हर वो व्यक्ति जिसे इस सरकार ने दबाया है, कुचला है - अपने सम्मान के लिए संवैधानिक तरीके से डटकर खड़े होने में ही असली साहस है।
इस सरकार को हटाने का वक्त आ गया है।
डरो मत!
जंतर मंतर से निकलते समय एक ज़ेन-ज़ी पुलिस वालों से कहता है कि “ अंकल जी बाय ,,
पुलिस वाला— बाय
ज़ेन-ज़ी — अंकल जी , अब नितिन गडकरी के टाइम मिलेंगे🤣🤣
और हाँ , इस बार डंडा से काम नहीं चलेगा , अगली बार बंदूक लेकर आना 🤣🤣
पुलिस वाले भी ये सब सुन कर मुस्कुराने लगे।