1984 में सिक्खों का नरसंहार रोकने के लिये राजीव गांधी से निवेदन किया, तो खालिस्तानी आतंकवादी और 2002 में गुजरात में मुस्लिमों का नरसंहार रोकने के लिये राष्ट्रपति को पत्र भेजा तो पाकिस्तानी आतंकवादी बोल दिया; भारतीय प्रशासन का स्तर इस हद तक गिर चुका है।
1984 में सिक्खों का नरसंहार रोकने के लिये राजीव गांधी को लिखे पत्र में रामायण और महाभारत के प्रसंगों का उल्लेख था।
संकट की घडी में यह ध्यान नहीं रहा कि शांति के लिये लिखा गया पत्र नरसंहार और भ्रष्टाचार का प्रेरक बनेगा।@प्रेम चन्द्र श्री नारायण मिश्र
1- राम मंदिर का श्रेय जितने लोगों ने लिया, सब बेईमान हैं।
2- राजीव गांधी ने किसकी प्रेरणा से राम मंदिर का ताला खोलवाया और रामायण सीरियल प्रारंभ कराया, उसका नाम सभी बेईमानो ने छुपाया।
3- श्र�� राम बेईमानो को सजा अवश्य देंगे।
प्रेम चन्द्र श्री नारायण मिश्र
मदारी निर्जीव कठपुतली को नचाता है, यह आसान काम है, परन्तु नेता, अपने जैसे इन्सान को नचाता है, यह नेता की बुद्धिमानी है ? या जनता की बेवकूफी? @प्रेम चन्द्र श्री नारायण मिश्र
@aipn_news चुनाव के समय मोटर गाडिय़ों की तलाशी होती, पैसा बाँटने के लिये तो नहीं जा रहा, सरकारी योजनाओ के माध्यम से खुलेआम पैसा बाँटने पर कोई रोक नहीं है।
भारतीय टी वी चैनल के ऐन्कर और विशेषज्ञ अपनी औकात भूलकर अमेरिका के राष्ट्रपति को" झूँठा" और उनके बयान को " गीदड़ भभकी " बोल देते हैं।@प्रेम चन्द्र श्री नारायण मिश्र
आज ���िपक्ष में सभी दल मुस्लिम समर्थक हैं, चुनाव लडे या गोली बारूद से, अल्पसंख्यकों की सरकार असंभव है। काश्मीर से पंडितों को भगाया फिर भी गुजरात का नरसंहार ब्राह्मण ने रोका।
कितनी भी शिक्षा हो, किसी भी पद पर हो , शारीरिक आवश्यकताये समान होती परन्तु आय में जमीन आसमान का फर्क है जो असहनीय है, इस समानता की बात नेता क्यों नहीं करते?