@BatmanTweetzz@grok Villains with their basic abilities/powers: 1. Knull, 2. Darkseid, 3. Thanos, 4. Doomsday, 5. Magneto, 6. Dr. Doom, 7. Kang, 8. Lex Luthor, 9. Amanda Waller. But with prep-time & intelligence, Dr. Doom, Kang, & Lex Luthor can beat the others by gaining some ability somehow
Based on all trade rumours, could this be #CSK in 2027: Ayush, Samson, Ruturaj, Brevis, Stokes, Hardik, Ashutosh, Overton, Noor, Kamboj, Sai Kishore, Mukesh (imp sub)? While the batting looks splendid, bowling still lacks teeth, missing a lethal Indian bowler. #IPL#IPLAuction
🚨 5 Indian states cross World Bank’s upper middle-income threshold.
Delhi ($6,217)
Karnataka ($5,579)
Telangana ($5,407)
Tamil Nadu ($5,329)
Gujarat ($4,734)
@prasannalara Why would you have Kamboj as imp sub when he can also contribute with the bat? And Karthik over Urvil. He seems the closest we can get to a Rayudu and a Badrinath kind of stable role.
I'm absolutely fine with this, as long as you pay as much as you had paid for an IT job. These are just ways to say learn to be poorer for more hard work.
🚨 “The era that favoured software jobs and MBA degrees is coming to an end and that the country must place greater value on trade skills such as welding, plumbing, electrical work and carpentry.”
- CEA Anantha Nageswaran.
@princeforreason Batting stops at 7. Kuldeep can contribute a bit but then nothing. So will have to replace one of Siraj or Singh with Harshit Rana. And in some pitches, can use Washi in place of Kuldeep.
क्यों नहीं बचाया भगवान कृष्ण ने अपने माता-पिता को? जानिए दिव्य रहस्य :
अत्याचारी कंस के वध के बाद श्री कृष्ण और बलराम उस कारागार की ओर बढ़े जहां उनके माता-पिता वर्षों से बंदी थे। कारागार के भीतर माता देवकी और पिता वासुदेव बैठे थे। जैसे ही उन्होंने सामने श्री कृष्ण को देखा, उनकी आंखों से अश्रुओं की धारा बह निकली।
देवकी ने कांपते हाथों से कृष्ण क�� मुख को छुआ। वासुदेव ने भी अपने पुत्र को हृदय से लगा लिया। उस क्षण पूरे कारागार का वातावरण भावनाओं से भर गया लेकिन माता के हृदय में एक प्रश्न वर्षों से जल रहा था। पुत्र को सामने पाकर भी वह प्रश्न शांत नहीं हुआ। कुछ समय बाद देवकी ने कहा पुत्र, लोग तुम्हें भगवान कहते हैं। तुम्हारी दिव्य शक्तियों का वर्णन करते हैं। यदि तुम वास्तव में ईश्वर हो, तो हमें इतने वर्षों तक इस कारागार में कष्ट क्यों सहने दिए? जब तुम सर्वशक्तिमान थे तो हमें पहले ही मुक्त क्यों नहीं करा दिया?
माता का यह प्रश्न सुनकर वहां गहरा मौन छा गया। श्री कृष्ण माता का हाथ अपने हाथों में लेकर शांत स्वर में बोले, माता इस संसार में हर कार्य एक निश्चित समय और कर्म के अनुसार होता है। ईश्वर भी जब अवतार लेते हैं तो वे धर्म और कर्म के नियमों का पालन करते हैं। यदि मैं अपनी इच्छा से हर नियम को तोड़ दूं तो संसार की व्यवस्था ही नष्ट हो जाएगी।
देवकी ने आश्चर्य से कृष्ण की ओर देखा। श्री कृष्ण आगे बोले, माता आपको अपने पूर्व जन्म का स्मरण नहीं है। समय बदल जाता है, जन्म बदल जाते हैं, नाम बदल जाते हैं, पर कर्मों का परिणाम मनुष्य का पीछा नहीं छोड़ता।
यह सुनकर देवकी और वासुदेव दोनों ध्यान से कृष्ण की बात सुनने लगे। तब श्री कृष्ण ने एक रहस्य प्रकट करत�� हुए कहा कि पूर्व जन्म में आप महारानी कैकई थीं और पिता वासुदेव राजा दशरथ थे। उसी जन्म में मैं राम के रूप में अवतरित हुआ था। उस समय आपके एक निर्णय के कारण मुझे चौदह वर्षों का वनवास मिला। धर्म की स्थापना के लिए मैंने उस वनवास को स्वीकार किया, लेकिन कर्म का नियम अपना कार्य करता रहा।
यह सुनते ही देवकी स्तब्ध रह गईं। उन्होंने कांपते स्वर में पूछा, तो क्या इस जन्म में हमारा कारागार का कष्ट उसी कर्म क��� परिणाम था?
श्री कृष्ण ने शांत भाव से कहा, माता संसार में जो कुछ भी होता है वह केवल दंड नहीं होता, वह आत्मा की यात्रा का एक भाग होता है। कर्म केवल दुख देने के लिए नहीं आते, वे आत्मा को शुद्ध करने और उसे सत्य के निकट लाने के लिए भी आते हैं।
कुछ क्षण रुककर देवकी ने फिर पूछा, पुत्र यदि मैं कैकई थी तो उस जन्म की माता कौशल्या इस जन्म में कौन बनी?
यह प्रश्न सुनकर श्री कृष्ण के मुख पर मधुर मुस्कान आ गई। उन्होंने कहा, ��ाता वही कौशल्या इस जन्म में यशोदा बनीं। जिस मातृत्व का पूर्ण सुख उन्हें उस जन्म में नहीं मिल पाया था, वही सुख उन्हें इस जन्म में भरपूर मिला। उन्होंने मुझे गोद में खिलाया, मेरे बाल रूप की लीलाएं देखीं और मातृत्व का सम्पूर्ण आनंद प्राप्त किया।
यह सुनकर देवकी की आंखों से फिर आंसू बहने लगे। अब उन आंसुओं में शिकायत नहीं थी, केवल सत्य की अनुभूति थी। उन्हें समझ आ गया कि ईश्वर का न्याय मनुष्य की समझ से कहीं अधिक गहरा और व्यापक होता है।
श्री कृष्ण ��गे बोले, माता मनुष्य अक्सर सोचता है कि ईश्वर उसके कष्ट तुरंत दूर कर दें। लेकिन कभी-कभी कष्ट भी आत्मा के विकास का मार्ग बन जाते हैं। यदि मैं आपको पहले ही मुक्त करा देता, तो संसार यह कैसे सीखता कि कर्म का नियम स्वयं भगवान पर भी समान रूप से लागू होता है? अब देवकी और वासुदेव के हृदय में कोई प्रश्न शेष नहीं था। उन्हें समझ आ गया था कि भगवान केवल चमत्कार करने नहीं आते, बल्कि धर्म और सत्य की स्थापना के लिए स्वयं भी नियमों का पालन करते हैं।
माता देवकी ने अपने पुत्र के चरणों में सिर झुका दिया और कहा, पुत्र आज मुझे समझ आया कि ईश्वर का न्याय कितना अद्भुत है। मनुष्य वर्तमान को देखता है, लेकिन भगवान तीनों कालों को एक साथ देखते हैं।
श्री कृष्ण ने अपनी माता को उठाया और प्रेमपूर्वक कहा, माता जो कुछ भी होता है, वह अंततः आत्मा के कल्याण के लिए ही होता है। इसलिए कभी भी ईश्वर की व्यवस्था पर संदेह मत करना।
उस दिन कारागार की दीवारों के भीतर केवल माता-पिता और पुत्र का मिलन नहीं हुआ था। उस दिन कर्म, धर्म और ईश्वर के न्याय का एक महान रहस्य भी प्रकट हुआ था। तभी से यह शिक्षा दी जाती ह�� कि जन्म बदल सकते हैं, परिस्थितियां बदल सकती हैं, लेकिन कर्म का लेखा कभी समाप्त नहीं होता। और जब समय आता है, तो स्वयं भगवान भी उसी नियम का पालन करते हैं जिसे उन्होंने संसार के लिए बनाया है।
🙏 जय श्री कृष्ण🙏🏻
@InvestidorCaut1 While playing sports like soccer they need high calorie intake, and it becomes a habit. Once they retire they stop having as much calorie expenditure but cant reduce calorie intake. So they appear unfit once they retire. After so much fame & attention they also stop caring.