यथा प्रजा तथा राजा
कल बाड़मेर के विशाला में एक व्यक्ति पर दिनदहाड़े कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला किया गया। महेश नामक वह व्यक्ति इस समय अस्पताल में जीवन-मरण की जंग लड़ रहा है।
इस घटना के बाद भाजपा नेता स्वरूप सिंह खारा घटनास्थल पर पहुँचे, जहाँ उनकी मौजूदगी में आरोपियों को गिरफ्तार ��रवाया गया और कुछ अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी की गई। लेकिन असल सवाल यह है कि ऐसी कार्रवाइयाँ अक्सर इसी तरह के घटनाक्रम के बाद ही क्यों होती हैं?
बाड़मेर में अब यदि कोई कंकरी भी उछलती है तो उसे तुरंत वोट बैंक की राजनीति के चश्मे से देखा जाने लगता है कि इस मुद्दे को कौन और कैसे भुनाएगा। यहाँ की जनता को जै��े हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने की आदत-सी पड़ गई है। लोगों को इस बात से कम सरोकार रहता है कि कार्रवाई उचित है या अनुचित, निर्णय सही है या गलत, और उसका समाज पर क्या प्रभाव पड़ेगा। शांत रहकर विकास को प्राथमिकता देने वाले नेताओं की अपेक्षा, हंगामा करने वाले, तोड़-फोड़ मचाने वाले, टेबल बजाने वाले, बैरिकेड फांदने वाले और ऊँची आवाज़ में बोलने वाले नेता ही अधिक पसंद किए जाते हैं।
ऐसा भी नहीं है कि मुद्दों ���ो लपकने में केवल भाजपा ही आगे रहती है; कांग्रेस भी इससे अछूती नहीं है। आज विशाला घटनाक्रम पर कांग्रेस नेताओं का रुख भी काफी हद तक राजनीति और वोट बैंक को ध्यान में रखकर ही तय होता दिखाई देता है। मेरा स्पष्ट मानना है कि अपराधी और पीड़ित की कोई जाति नहीं होती महत्वपूर्ण उनका अपराध और उनकी पीड़ा होती है। लेकिन आम लोगों की इन त्रासद ��टनाओं को राजनेताओं के लिए अक्सर जाति और धर्म का रंग देकर एक बड़े वर्ग को साधने का अवसर बना दिया जाता है।
थोड़ा कड़वा जरूर है, मगर सच यही है कि यदि विशाला घटनाक्रम में आरोपी एक बड़े जातिय समाज (समझदार को इशारा ही काफ़ी) से होता, तो संभवतः कांग्रेस के कई नेता यहाँ धरना-प्रदर्शन और बड़े आंदोलनों के साथ दिखाई देते, क्योंकि तब वोट बैंक की राजनीति का समीकरण अलग होता। वहीं ऐसी स्थिति में भाजपा के नेत�� शायद दूरी बनाते नजर आते, क्योंकि तब यहाँ चलने वाली जेसीबी अपराधियों के घरों पर नहीं, बल्कि उनके अपने वोट बैंक पर असर डालती।
सच्चाई यही है कि जब तक हम मतदाता रूपी प्रजा अपने मत को जातियों की आड़ में देते रहेंगे, जब तक अपराध और पीड़ा को जाति के तराजू पर तौलते रहेंगे, तब तक हमारे लोकतंत्र के राजा हर छोटी-सी घटना में भी जाति तलाशते नजर आएँगे। निर्बल और गरीब लोगों के घर यूँ ही गिरते रहेंगे, और आप-हम दया भाव दिखाते हुए याचक बने रहेंगे। मगर यही नेता हमारे हर अच्छे प्रयास पर खरपतवार की तरह उगते रहेंगे।
जैसलमेर के दबड़ी गांव के ख्यातनाम सूफी गायक सावन खान के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। उनके जाने से लोक एवं सूफी संगीत की दुनिया ने एक अनमोल हीरा खो दिया है।
सावन खान ने अपनी मधुर आवाज़ और विशिष्ट गायन शैली से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जैसलम���र की संस्कृति और लोक परंपरा का मान बढ़ाया। उनका संगीत ��दैव लोगों के दिलों को जोड़ने और हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दुनिया तक पहुँचाने का माध्यम बना। श्रद्धांजलि।
आरक्षण व्यवस्था को तो देखिए!
10 हजार पदो की LDC भर्ती मे OBC को 21% आरक्षण की जगह 15% आरक्षण दिया गया😳 जिसके कारण OBC वर्ग के 475 पद कम कर दिए गए😲
सुपरवाइजर भर्ती मे SC को 16% आरक्षण होना चाहिए लेकिन उसको 0% आरक्षण दिया गया
Assistant Professor 2025 भर्ती मे SC/ST का आरक्षण आधा कर दिया गया ये घोर अन्याय सरकार द्वारा सं���्थागत तरीके से किया जा रहा है
- मनीष यादव