I work for the rightful share of the discriminated and marginalised. Also, editor of @eprabuddhbharat, a lawyer, President @VBAforIndia, and a 3-time MP.
20 जून – सिद्धार्थ महाविद्यालय स्थापना दिवस
आज, 20 जून हा भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर यांनी स्थापन केलेल्या सिद्धार्थ महाविद्यालयाच्या स्थापना दिनाचा ऐतिहासिक दिवस आहे.
20 जून 1946 रोजी मुंबई येथे पीपल्स एज्युकेशन सोसायटीच्या माध्यमातून डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर यांनी सिद्धार्थ महाविद्यालयाची स्थापना केली. शिक्षणापासून वंचित असलेल्या बहुजन, शोषित आणि दुर्बल घटकांपर्यंत उच्च शिक्षणाची दारे खुली करण्याच्या त्यांच्या दूरदृष्टीतून या संस्थेचा जन्म झाला.
सिद्धार्थ महाविद्यालय हे केवळ एक शैक्षणिक संस्थान नसून सामाजिक परिवर्तन, समता आणि ज्ञानाच्या क्रांतीचे प्रतीक आहे.
"शिका, संघटित व्हा आणि संघर्ष करा" या बाबासाहेबांच्या विचारांना अभिवादन करत सिद्धार्थ महाविद्यालयाच्या स्थापना दिनानिमित्त सर्व विद्यार्थी, शिक्षक आणि माजी विद्यार्थ्यांना हार्दिक शुभेच्छा! 💙
#SiddharthCollege #DrBabasahebAmbedkar #PeoplesEducationSociety
आरएसएस-भाजपा इस देश को तोड़ने में लगी हुई है। डिलिमिटेशन बिल का सबसे बड़ा असर दक्षिण भारत पर पड़ेगा, जबकि इसका राजनीतिक फायदा उत्तर भारत को होगा। भाजपा का राष्ट्रवाद केवल एक नौटंकी है।
जो लोग वर्षों से वंचित बहुजन आघाड़ी को "बी टीम" कहकर बदनाम करने की कोशिश कर रहे थे, आज वही लोग असलियत में किसकी "बी टीम" हैं, यह देश की जनता के सामने स्पष्ट हो गया।
#Delimitation #VBAForIndia
Mumbai, Maharashtra: Vanchit Bahujan Aghadi chief Prakash Ambedkar says, "Today, the matter related to Agniveer was listed before the bench of the Acting Chief Justice. The defence side sought time to file a rejoinder, and the court granted time to submit it before the 3rd. The matter has now been scheduled for final hearing on the 7th. It was argued that while service conditions for regular soldiers, territorial soldiers, and Agniveers may differ, once they are engaged in war or battlefield duties, there should be no discrimination between them in terms of recognition and support..."
जो कुछ सियासी हालात महाराष्ट्र में हैं, वो कोई ऑपरेशन टाइगर नहीं है। इन्हें अपने सांसद संभालने नहीं आते। इनके ही लोग मुख्यमंत्री फडणवीस और अमित शाह से मिलते हैं और वापस आने की बात करते हैं, और कार्यकर्ताओं से उम्मीद करते हैं कि ईमानदारी से रहें।
आप अपनी पार्टी के प्रति वफादार नहीं हो, तो कार्यकर्ता कहाँ से वफादार रहेगा? खुलेआम कहिए कि आपको भाजपा के साथ जाना है। कार्यकर्ता एक जगह रहेंगे।
एक तरफ भाजपा पर लाइन मार रहे हो और दूसरी तरफ कांग्रेस के साथ शादी कर रहे हो। जो सांसद शिवसेना (उबाठा) को छोड़कर चले गए, वो कोई नई बात नहीं है।
शहीद मुरली नाईक केस अपडेट —
शहीद अग्निवीर जवान मुरली नाईक केस की आज बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। आज सरकारी पक्ष ने कोर्ट से रिजॉइंडर दाखिल करने के लिए समय मांगा है। कोर्ट ने 3 तारीख से पहले दाखिल करने को कहा है और 7 तारीख को अंतिम सुनवाई के लिए रखा है।
हम उम्मीद करते हैं कि रेग्युलर सैनिक, अग्निवीर सैनिक और प्रादेशिक सैनिकों में जो अलग-अलग किस्म की समस्याएं हैं, युद्ध में यदि कोई भी सैनिक शहीद होता है, तो उसमें अंतर नहीं होना चाहिए। शहीद होने के बाद जो सरकारी बेनिफिट में भेदभाव होता है, वह नहीं होना चाहिए। सभी को एक जैसा न्याय मिलना चाहिए।
हम उसी को लागू करने की मांग कर रहे हैं। कोर्ट ने कहा है कि हम उस पर सुनवाई करेंगे।
#MuraliNaik #Agniveer
I will be appearing tomorrow on behalf of the mother of Agniveer Murali Naik in the matter of Jyoti Sriram Naik v. Union of India, which is scheduled to be heard by a Division Bench presided over by Hon'ble Justice Ravindra V. Ghuge.
Agniveer Murali Naik was killed in cross-border shelling in Jammu & Kashmir during Operation Sindoor. Agniveer Murali Naik’s mother had challenged the denial of full death benefits granted to families of regular soldiers.
जेव्हा काँग्रेसकडे एक स्वतंत्र आंबेडकरवादी आणि भाजप-विरोधी ताकद असलेल्या वंचित बहुजन आघाडीच्या उमेदवाराला, म्हणजेच मला पाठिंबा देणे आणि दुसरीकडे भाजपशी संबंधित उमेदवाराला पाठिंबा देणे, या दोन पर्यायांपैकी एकाची निवड करायची होती; तेव्हा काँग्रेसने भाजपशी संबंधित उमेदवाराला पाठिंबा देणे पसंत केले.
काँग्रेसला भाजपचा विजय मान्य आहे, पण वंचित बहुजन आघाडीचा उमेदवार मान्य नाही. त्यांना त्यांची 'चड्डी गँग' मान्य आहे, पण आंबेडकरवादी मान्य नाहीत!
: इंजि. प्रशांत इंगोले
उमेदवार - नांदेड विधानपरिषद
वंचित बहुजन आघाडी
#Nanaded #Election #VidhanParishad
काँग्रेस एका भाजपच्या “चड्डी गँग” उमेदवाराला किंवा भाजपने उभ्या केलेल्या उमेदवाराला जिंकताना पाहू शकते, पण त्यांना एका दलिताचा विजय, वंचित बहुजन आघाडीचा विजय सहन होऊ शकत नाही. हेच त्यांचे राजकारण आहे!
जेव्हा काँग्रेसकडे दोन पर्यायांपैकी एकाची निवड करण्याची वेळ आली होती, एकतर वंचित बहुजन आघाडीच्या (जी एक स्वतंत्र आंबेडकरवादी आणि भाजप-विरोधी पार्टी आहे) उमेदवाराला पाठिंबा देणे, किंवा दुसरीकडे, भाजपशी संबंधित उमेदवाराला पाठिंबा देणे; तेव्हा काँग्रेसने भाजपशी संबंधित उमेदवाराला पाठिंबा देणे पसंत केले.
काँग्रेस दलित-विरोधी आहे!
काँग्रेस = भाजप!
भाजपा = कांग्रेस का एक बहुत बड़ा उदाहरण।
नांदेड़ महानगरपालिका चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार रामदास पाटील सुमठाणकर थे।
रामदास पाटिल सुमथानकर कौन हैं? ये वही रामदास पाटिल सुमथानकर हैं जिन्होंने जो 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा के हिंगोली लोकसभा प्रभारी के रूप में काम किया था। उन्होंने एक निर्दलीय नामांकन भी दाखिल किया था, लेकिन भाजपा के गिरीश महाजन और देवेंद्र फडणवीस के साथ चर्चा के बाद इसे वापस ले लिया था।
यानी नांदेड़ कांग्रेस की पहली पसंद एक ऐसा व्यक्ति था जो गहराई से भाजपा से जुड़ा हुआ था।
वंचित बहुजन आघाड़ी की नांदेड़ टीम ने कांग्रेस से अनुरोध किया था कि वह वंचित बहुजन आघाड़ी के उम्मीदवार प्रशांत इंगोले का समर्थन करे। कांग्रेस ने इनकार कर दिया।
इसके बजाय, कांग्रेस ने शिवसेना (UBT) के उम्मीदवार कृष्णा पाटिल का समर्थन करने का फैसला किया।
और कृष्णा पाटिल कौन हैं? वह हिंगोली के सांसद नागेश पाटिल आष्टिकर के बेटे हैं, जो भाजपा की सहयोगी शिवसेना (शिंदे) में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। नागेश पाटिल आष्टिकर, वही हैं जिनके खिलाफ भाजपा ने रामदास पाटिल सुमथानकर को अपना नामांकन वापस लेने के लिए कहा था, जिसके बाद नागेश पाटिल जीतकर आए।
कड़ियों को आपस में जोड़कर देखिए -
🔴 कांग्रेस के पहले उम्मीदवार भाजपा से जुड़ा हुआ व्यक्ति था।
🔴 कांग्रेस कांग्रेस की दूसरी पसंद ऐसे नेता के बेटे हैं, जो भाजपा गठबंधन की तरफ बढ़ रहे हैं और जिसे भाजपा ने लोकसभा चुनाव में जिताया था।
जब कांग्रेस के पास वंचित बहुजन आघाड़ी (एक स्वतंत्र आंबेडकरवादी और भाजपा-विरोधी ताकत) का समर्थन करने और भाजपा से जुड़े उम्मीदवार का समर्थन करने के बीच एक को चुनने का विकल्प था, तो कांग्रेस ने दूसरा रास्ता चुना।
ऐसा क्यों? क्योंकि नांदेड़ में कांग्रेस नेतृत्व की रुचि भाजपा को हराने में नहीं, बल्कि वोटों के बदले सौदेबाजी करने में दिखाई देती है।
उन्हें भाजपा की जीत स्वीकार है, लेकिन वंचित बहुजन आघाड़ी का उम्मीदवार स्वीकार नहीं है।
नांदेड़ कांग्रेस को भाजपा के नेता देवेंद्र फडणवीस और अशोक चव्हाण चला रहे हैं।
यदि कांग्रेस के 92 नगरसेवक कृष्णा पाटील को वोट देते हैं और वंचित बहुजन आघाड़ी के प्रशांत इंगोले को नहीं, तो यह पूरा देश मान जाएगा कि कांग्रेस भाजपा की A से Z टीम है और भाजपा से लड़ने की उसकी बातें महज़ राजनीतिक दिखावा, बकवास और खोखली बयानबाज़ी हैं।
भाजपा = कांग्रेस का एक बहुत बड़ा उदाहरण।
नांदेड़ महानगरपालिका चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार रामदास पाटील सुमठाणकर थे।
रामदास पाटिल सुमथानकर कौन हैं? ये वही रामदास पाटिल सुमथानकर हैं जिन्होंने जो 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा के हिंगोली लोकसभा प्रभारी के रूप में काम किया था। उन्होंने एक निर्दलीय नामांकन भी दाखिल किया था, लेकिन भाजपा के गिरीश महाजन और देवेंद्र फडणवीस के साथ चर्चा के बाद इसे वापस ले लिया था।
यानी नांदेड़ कांग्रेस की पहली पसंद एक ऐसा व्यक्ति था जो गहराई से भाजपा से जुड़ा हुआ था।
वंचित बहुजन आघाड़ी की नांदेड़ टीम ने कांग्रेस से अनुरोध किया था कि वह वंचित बहुजन आघाड़ी के उम्मीदवार प्रशांत इंगोले का समर्थन करे। कांग्रेस ने इनकार कर दिया।
इसके बजाय, कांग्रेस ने शिवसेना (UBT) के उम्मीदवार कृष्णा पाटिल का समर्थन करने का फैसला किया।
और कृष्णा पाटिल कौन हैं? वह हिंगोली के सांसद नागेश पाटिल आष्टिकर के बेटे हैं, जो भाजपा की सहयोगी शिवसेना (शिंदे) में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। नागेश पाटिल आष्टिकर, वही हैं जिनके खिलाफ भाजपा ने रामदास पाटिल सुमथानकर को अपना नामांकन वापस लेने के लिए कहा था, जिसके बाद नागेश पाटिल जीतकर आए।
कड़ियों को आपस में जोड़कर देखिए -
🔴 कांग्रेस के पहले उम्मीदवार भाजपा से जुड़ा हुआ व्यक्ति था।
🔴 कांग्रेस कांग्रेस की दूसरी पसंद ऐसे नेता के बेटे हैं, जो भाजपा गठबंधन की तरफ बढ़ रहे हैं और जिसे भाजपा ने लोकसभा चुनाव में जिताया था।
जब कांग्रेस के पास वंचित बहुजन आघाड़ी (एक स्वतंत्र आंबेडकरवादी और भाजपा-विरोधी ताकत) का समर्थन करने और भाजपा से जुड़े उम्मीदवार का समर्थन करने के बीच एक को चुनने का विकल्प था, तो कांग्रेस ने दूसरा रास्ता चुना।
ऐसा क्यों? क्योंकि नांदेड़ में कांग्रेस नेतृत्व की रुचि भाजपा को हराने में नहीं, बल्कि वोटों के बदले सौदेबाजी करने में दिखाई देती है।
उन्हें भाजपा की जीत स्वीकार है, लेकिन वंचित बहुजन आघाड़ी का उम्मीदवार स्वीकार नहीं है।
नांदेड़ कांग्रेस को भाजपा के नेता देवेंद्र फडणवीस और अशोक चव्हाण चला रहे हैं।
यदि कांग्रेस के 92 नगरसेवक कृष्णा पाटील को वोट देते हैं और वंचित बहुजन आघाड़ी के प्रशांत इंगोले को नहीं, तो यह पूरा देश मान जाएगा कि कांग्रेस भाजपा की A से Z टीम है और भाजपा से लड़ने की उसकी बातें महज़ राजनीतिक दिखावा, बकवास और खोखली बयानबाज़ी हैं।
राजमाता जिजाऊ यांना विनम्र अभिवादन!
स्वराज्याचे स्वप्न पाहणाऱ्या आणि त्या स्वप्नाला वास्तवात उतरविणाऱ्या छत्रपती शिवाजी महाराजांना घडविण्याचे महान कार्य राजमाता जिजाऊ यांनी केले. न्याय, स्वाभिमान, पराक्रम, लोककल्याणाचे संस्कार देऊन त्यांनी एका युगपुरुषाची जडणघडण केली.
राजमाता जिजाऊ यांनी प्रतिकूल परिस्थितीतही धैर्य, दूरदृष्टीच्या बळावर स्वराज्याची पायाभरणी केली. त्यांच्या विचारांमधून स्त्रीशक्ती, नेतृत्व, सामाजिक बांधिलकी आणि राष्ट्रनिर्माणाचा संदेश मिळतो.
आजच्या काळातही राजमाता जिजाऊ यांचे जीवन आणि कार्य प्रत्येक पिढीसाठी प्रेरणादायी आहे. त्यांच्या स्मृतींना अभिवादन करताना समता, न्याय, स्वाभिमान आणि लोककल्याणाची मूल्ये जपण्याचा संकल्प करूया.
राजमाता जिजाऊ यांना कोटी कोटी प्रणाम!
#राजमाता_जिजाऊ
16th June #TheDayInHistory#OTD in 1956, Dr #BabaSahebAmbedkar established the ‘Bombay State Inferior Village Watandar Association’ under his own chairmanship. He was the “first legislator in India to introduce a bill for the abolition of the serfdom of agricultural tenants.
#DrAmbedkar wanted to solve the problem of Mahar Watans by all legislative & constitutional means. He introduced a bill in Poona session of Bombay Legislative Council 0n 17th September 1937 to abolish the Mahar Watan, for which he had been agitating since 1927. Clarifying the objectives of the Association, #DrAmbedkar stated that if the Government did not solve the problem amicably, then expressed his desire to prosecute the Government. When the question of giving land to Watandar came up, the villagers opposed it.
#DrAmbedkar said that Government accepted the principle of “land to tiller” but was not ready to include Government lands under the jurisdiction of the Act. He believed that the Watan Act and the Watan system were contrary to the provision of the constitution of India. He opined that a writ petition should be filed in the High Court in this matter & if it was unsuccessful, it must be taken to the Supreme Court. In a letter to Gaekwad, he wrote that he did not want to turn the agitation against Watan system into Satyagraha due to war emergency.
Subsequently, Mahar Watan was abolished under the Bombay Inferior Village Watan Abolition Act 1959.
M FILES!
M FILES, जिसमें कई तरह के रिकॉर्ड किए गए निजी राज़ शामिल हैं, अमेरिका के पास है!
और इसीलिए वह आदमी अमेरिकी धुनों पर मुजरा कर रहा है और उसने भारत को फिर से गुलाम देश बना दिया है।
🚨 Massive controversy erupt in Wadala (East) ahead of #MumbaiMonsoon.
While private contractors were paid crores for mechanical drain cleaning, residents of LBS Nagar & Korba Salt Pans caught them using child laborers to manually haul toxic garbage out of deep nullahs with zero protective equipment.
This isn't just a scam; it’s a criminal violation of child rights. Strict action needed NOW! 🚨
#MumbaiNews #BMC #ChildExploitation @mybmc@CPMumbaiPolice@NCPCR
भारतीय जहाजों पर अमेरिका की ओर से हमला किया गया, जिसमें 3 लोगों की जान गई और 24 लोग जख्मी हुए। प्रधानमंत्री मोदी ने इस पर न शोक जताया, न कोई टिप्पणी की। क्या प्रधानमंत्री मोदी ट्रम्प के इशारे पर नया मुजरा करने जा रहे हैं?
प्रधानमंत्री ने कम से कम उन परिवारों को फोन करके उनका सांत्वन करना चाहिए था, लेकिन ऐसा होते नहीं दिखाई दिया। न प्रधानमंत्री ने, न किसी मंत्री ने इस घटना की निंदा की है।
ट्रम्प की बात आती है तो भारतीय प्रधानमंत्री गूंगा हो जाता है। इसकी हम निंदा करते हैं।
#IranWar #MujaraModi
#TrumpModi #Indian
मोदी एक चूहा हैं।
किसी भी प्रधानमंत्री ने अपने तीन नागरिकों की मौत पर अमेरिका से जवाब मांगा होता, अमेरिका को जवाबदेह ठहराया होता और सख्त कदम उठाए होते। लेकिन नरेंद्र मोदी चूहा हैं।
मोदी या तो किसी बिल में छिप जाते हैं, और नहीं तो विदेशों में टॉफियां-चॉकलेट बांटने निकल पड़ते हैं।
मोदी अमेरिका की धुन पर मुजरा कर रहे हैं।
मोदी भारत को एक बार फिर गुलाम देश बना रहे हैं।
मोदी एक चूहा हैं।
हमें और कितने सबूत चाहिए कि मोदी बिक चुके हैं?!
मोदी अमेरिकी धुन पर राजनीतिक मुजरा कर रहे हैं!
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अमेरिकी नौसेना के हमलों में 3 भारतीय नाविकों के मारे जाने पर कोई पछतावा नहीं जताया और इसके बजाय भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को चेतावनी दी कि "सभी वाणिज्यिक जहाजों को तुरंत अमेरिकी सेना के आदेशों का पालन करना चाहिए... अमेरिकी नाकाबंदी का उल्लंघन और ईरानी तेल के अवैध परिवहन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"
पाकिस्तान ने दशकों तक अमेरिका की कठपुतली बनकर अपनी नीतियाँ अमेरिकी इशारों पर बदलीं। भारतीयों ने पाकिस्तान का मज़ाक उड़ाया कि वह अमेरिका की कठपुतली है। फिर भी मोदी के नेतृत्व में, हम भारत को उसी दिशा में बढ़ते देख रहे हैं, फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार इसे कूटनीति के रूप में पैक किया गया है और राष्ट्रीय गौरव के नाम पर बेचा जा रहा है। अगर अमेरिकी हितों के साथ आँख मूँदकर संरेखित होना पाकिस्तान को एक कठपुतली देश बनाता था, तो जब मोदी ऐसा करते हैं तो उसी व्यवहार का जश्न क्यों मनाया जाना चाहिए?
भारत एक स्वतंत्र विदेश नीति का हकदार है, न कि अमेरिका के अगले आज्ञाकारी गुलाम की भूमिका का!
How much more proof do we need that Modi is compromised?!
Modi is doing a political mujra to American interests!
The US Secretary of State Marco Rubio Secretary expressed NO REGRET over the killing of 3 Indian sailors by the US Navy strikes and instead WARNED the Indian Minister of External Affairs Dr. S. Jaishankar that “all commercial vessels should immediately comply with orders from U.S. forces…Violations of the U.S. blockade and illicit transport of Iranian oil with not be tolerated”
Pakistan spent decades being US’ puppet, adjusting its policies whenever the US snapped its fingers. Indians mocked Pakistan for being America's puppet. Yet under Modi, we're watching India move in the same direction except this time it has been packaged as diplomacy and sold as national pride. If blindly aligning with American interests made Pakistan a puppet state, why should the same behavior be celebrated when Modi does it?
India deserves an independent foreign policy, not the role of America's next obedient partner!
How much more proof do we need that Modi is compromised?!
Modi is doing a political mujra to American interests!
The US Secretary of State Marco Rubio Secretary expressed NO REGRET over the killing of 3 Indian sailors by the US Navy strikes and instead WARNED the Indian Minister of External Affairs Dr. S. Jaishankar that “all commercial vessels should immediately comply with orders from U.S. forces…Violations of the U.S. blockade and illicit transport of Iranian oil with not be tolerated”
Pakistan spent decades being US’ puppet, adjusting its policies whenever the US snapped its fingers. Indians mocked Pakistan for being America's puppet. Yet under Modi, we're watching India move in the same direction except this time it has been packaged as diplomacy and sold as national pride. If blindly aligning with American interests made Pakistan a puppet state, why should the same behavior be celebrated when Modi does it?
India deserves an independent foreign policy, not the role of America's next obedient partner!
Forget apologizing to India for the U.S Navy strike that killed 3 Indian Sailors, America is instead warning.
“The Secretary stressed that all commercial vessels should immediately comply with orders from U.S. forces.. Violations of the U.S. blockade and illicit transport of Iranian oil with not be tolerated”