आज गिरेगी, कल गिरेगी, अब गिरि.. तब गिरी..
वो रोज़ नरेंद्र मोदी की सरकार गिरने के सपने ही बेचते रह गए
और नरेंद्र मोदी आम आदमी के सपने पूरे करने के अथक प्रयास से सबसे लंबे कार्यकाल वाले निर्वाचित पीएम का रिकॉर्ड बना गए। गजबे है।
बहुत बधाई और शुभकामनाएं पीएम @narendramodi जी।
बंगाल से बड़ी खबर!
शुभेंदु सरकार का बड़ा फैसला, बंगाल में CBI को जांच की खुली छूट।
बंगाल सरकार ने CBI को केंद्रीय कर्मचारियों और पीएसयू से जुड़े मामलों की जांच की अनुमति दी है।
हालांकि, राज्य कर्मचारियों की जांच के लिए पहले सूबे की सरकार से मंजूरी लेनी होगी।
हिन्दू कालगणना के अनुसार कोई ढाई हजार वर्ष पहले #आदि_शंकराचार्य ने #जगन्नाथ_मंदिर को दो व्यवस्थाएं दीं।
■ प्रथम, नित्य महाप्रभु का प्रसाद #मिट्टी_के_पात्र में बनेगा, और हर दिन नया पात्र बनेगा।
■ दूसरे हर वर्ष महाप्रभु की यात्रा के लिए #रथ का निर्माण होगा। #हर वर्ष #नया_रथ बनेगा। और रथ निर्माण के लिए विशेष किस्म के उतने ही वृक्ष रोपे, बड़े किए जाएंगे, जितनों का प्रयोग रथ निर्माण में हुआ। इसके लिए ���़ासी, धौरा, आसन और सिमल वृक्ष हर वर्ष लगाए जाते हैं, जतन किया जाता है। यह भी #धर्मप्रदत_दायित्व है।
आदि शंकराचार्य श्री की यह व्यवस्था ढाई हजार वर्षों से बिना विराम चल रही है। लाखों करोड़ों #कुम्हार और #काष्ठ_शिल्पी की #जीविका बिना किसी #अवरोध के गतिमान है। संरक्षित है।
सवाल है, क्या संसार में कोई भी मानव निर्मित व्यवस्था ऐसी #दीर्घजीवी हुई है? कोई ��ॉरपोरेट या कंपनी की आयु 100-200 साल से अधिक रही है? वह बिना #विवाद या #बंटवारे के?
यही कारण है, हमेशा कहता हूं, धर्म, मजहब, रिलीजन, वामपंथ, लोकतंत्र #व्यवस्थाएं हैं। इसलिए, जब भी विमर्श करो तो #एकांगी नहीं, #तुलनात्मक करो।
कृपया वामपंथी इतिहासकारों के स्थापित #आदि_शंकर के काल-समय पर निर्रथक बहस ना करें। कम से कम मुझसे तो एकदम ना करें।
जगन्नाथ पुरी में रथ निर्माण का कार्य गति पर है।
-सुमंत कबीर
कल #नेहरू_संस्मरण पर आभासी पटल ने कलम तोड़ कर रख दी। खासकर वामपंथी और छद्म ���ामपंथी मित्रों ने। कुछेक ने तो येन-केन-प्रकारेण #प्रभु_श्रीराम से नेहरू जी की तुलना कर दी। ताज्जुब हुआ, जिन्हें आज तक #मिथकीय_नायक बताते आए, उनकी तुलना #वास्तविक_नायक से? लगता है, वक्त ने करवट ले ली है या फिर बाजार में #नव_बौद्ध की तरह #नव_अंधभक्त जन्म ले चुके हैं।
खैर, कहना तो कुछ ��र था। नेहरू जी के बहाने कुछ और याद आ गया।
एक बार निजी विमर्श में पुरी पीठाधीश्वर श्री निश्चलानंद जी ने कहा था, "..."क्या कभी चंद्रशेखर आजाद, भगतसिंह, खुदीराम, सावरकर या सुभाष बोस सरीखे अनगिनत क्रांतिकारियों के विचारों पर चर्चा होगी? कभी यह जानने का प्रयास होगा, क्या था इनके #सपनों_का_भारत?"
एक #जीवित के लिए शंकराचार्य श्री के ये दो वाक्य विचलित करने वाले हैं। बेहोशी की नींद से झकझोर कर जगाने वा��े हैं। #मुर्दों की क्या चर्चा की जाए?
पर इस कार्य को करने में ना हम सक्षम हैं? ना हमारे पास इतनी #बौद्धिक_योग्यता है।
कमोबेश बौद्धिक समाज #सत्ता_पाबोश है। जो अपने बीच से #नायक खड़े करने में सक्षम नहीं रहा। उसे इंतजार रहता है, सातवें आसमान से नायक के उतरने का।
#नेहरू
#मां_गंगा को हिन्दू पूजेगा। मां गंगा के साथ अपने रिश्तों की परिभाषा हर हिन्दू अपनी #आस्था से करेगा? और मां गंगा पर नियंत्रण होगा #सत्ता का?
बात बहुत पुरानी नहीं है, अंग्रेजी हुकूमत के साथ एक अंग्रेज आया लॉर्ड डलहौजी। उसने सन 1854 में CPWD महकमा बना कर हिन्दू समाज से नदी, पोखर, कुएं, सड़क, जंगल, समाज की सुरक्षा..सब कुछ छीन लिया। असहाय हिन्दू समाज खड़ा देखता रहा। बौद्धिक सत्ता की गुलामी, जी-हुजूरी में लग ��ए।
फिर आजाद भारत की हुकूमत ने बनाया "गंगा स्वच्छता अभियान"। जो अब तक लाखों करोड़ डकार चुकी है। नेता, ठेकेदार, अफसर मां गंगा की सफाई के नाम पर मुटा-मुटा कर मर गए। पर मां गंगा जस की तस। शहरी आबादी का मैला अपने वक्ष पर समेटे चुपचाप बहती आ रही है। एक ऐसी मां, जो ह्रदय में अपने हिन्दू पुत्रों के #नपुंसकता की असीम वेदना लिए हुए है। पर मां है, अपने जने पुत्रों को कैसे कोसे?
आज #मंदिर_मुक्ति से पहले जरूरत है, #मां_गंगा_मुक्ति।
हुकूमत की गुलामी से मां गंगा को मुक्त किया जाए। मेरी समझ से बाहर है, मदर्स डे! फादर्स डे! की तरह #गंगा_दशहरा की शुभकामनाओं की क्या सार्थकता? इस मंगलकामना में #मां है कहां? इसे ही कहते हैं #पाखंड!
हम सभी नपुंसक संतान को मां गंगा का आशीर्वाद। स्नेह।
#गंगा_दशहरा की शुभकामनाएं। मंगलकामनाएं!
रात्रि बेला में संगम तट पर। ना जाने इस जीवन म���ं कितना दुःख-सुख साझा किया मां के साथ, यहां खड़े होकर। मां भी चुप। अपन भी चुप। मौन संवाद।
@narendramodi
@PushkarBham
@myogiadityanath
@samrat4bjp
@SuvenduWB
बंगाल से बड़ी खबर!
मुख्यमंत्री सुवेन्दु अधिकारी का बड़ा ऐलान!
2021 में TMC की जीत के बाद हुए चुनावी हिंसा में मारे गए 321 लोगों के परिवार को मिलेगी सरकारी नौकरी।
2021 में TMC ने जीत के बाद पूरे राज्य में चुन चुनकर विरोधियों को निशाना बनाया था जिसके कारण कई हजार परिवार को बंगाल से पलायन कर असम-बिहार में शरण लेनी पड़ी थी।
सबसे बड़ा #कायर होता है #सत्ताश्रित_व्यक्ति..! सत्ता की ताकत व्यक्ति को उच्छृंखल बना देती है। जबकि #समाजाश्रित व्यक्ति हमेशा मर्यादा में रहेगा।
तृणमूल कांग्रेस का प्रवक्ता रहा #रिजु_दत्ता पर से जैसे ही सत्ता का संरक्षण उठा, गली-गली घूम कर माफी मांग रहा है। आज ना सत्ता के भरोसे का रहा, ना समाज के भरोसे का। डगरे का बैंगन हो चुक�� है। जीवन की भीख मांग रहा है। पर ऐसे जीवन का क्या लाभ? जिस जीवन में कोई सम्मान ही नहीं बचा।
@SuvenduWB
"जिस देश में #सुअरपालन_मंत्रालय हो सकता है, उस देश में कोई #धार्मिक_मंत्रालय नहीं है।"
सच तो यह है, काशी, अयोध्या को पर्यटन स्थल बनाने का मुद्दा कोई एकांतिक विषय नहीं है, इसे #व्यापक_फलक पर देखने, जानने और उठकर खड़े होने का विषय है।
#आचार्य_मिथिलेशनन्दिनी_शरण जी के विचार एक स्पष्ट मार्ग दे रहा है.. #राजसत्ता और राजस्व के मुकाबले धर्म का धर्मस्व, सामाजिक प्रभाव का प्रभाव क्षेत्र कहीं अधिक व्यापक और गहन होने के बाद भी संविधान में #हिन्दू_धर्म उपेक्षित क्यों है?
यह निर्णय तो हिन्दू समाज की #साझा_चेतना को करना होगा। आदि षंकराचार्य ने भारत के चार कोनों में चार मठों की स्थापना किसी #राजसत्ता या #पर्यटन_स्थली की स्थापना के लिए नहीं, #धर्म_की_स्थापना के लिए किया था।
पूरा सुनिए, फिर विमर्श में उतरिए।
@narendramodi@AmitShah@RSSorg
एक बंगाली भद्रलोक सपरिवार हावड़ा से ट्रेन में बैठ मुंबई रवाना हुआ। रास्ते में एक बिहारी से झगड़ा हो गया। बिहारी ने एक रपटा दे दिया। बंगाली बाबू को ध्यान नहीं रहा, आसनसोल तो पार हो चुका है। अपनी चौहद्दी नहीं रही।
खैर! भद्रलोक बोला, हमको मारा तो मारा, हमारी बीवी को हाथ लगाया तो देखना! बिहारी ने पत्नी को भी धर दिया।
बिहारी बोला, अब बता? भद्रलोक बोल���, कुछ नहीं...अब ठीक, घर जाकर किसी को नहीं बताएगी।
@BhagwantMann की ललकार देख कर ना जाने क्यों भदलोक जी याद आ गए।
कृपया! बंगाली-बिहारी, सांस्कृतिक अस्मिताओं को मजाक में लें। कुछ समय पहले तक ऐसे मजाक खूब चलते थे। यही हमारी भारतीयता थी। आज मायने संकुचित हो चुकी है।
@ArvindKejriwal भाई! अपने लौंडे को संभाल। सात लौंडे निकल चुके, कहीं यह आठवां ना हो।
पढ़कर हैरानी हुई भी और नहीं भी हुई। ये प्रोफेसर लाल बहादुर वर्मा के पुत्र #सत्यम_वर्मा हैं और #नोएडा_श्रमिक_कांड में गिरफ्तार हुए। प्रो वर्मा और मेरा संबन्�� "इलाहाबाद विश्विद्यालय" से रहा। प्रो वर्मा, लोकोक्तियों, लोककथाओं और लोक गीतों में भारत का #खोया_इतिहास खोज रहे थे।
दरअसल, यह एक तरह से इतिहास के #सबाल्टर्न_स्टडीज का ही विस्तार है। हालांकि आज सबाल्टर्न के प्रमुख इतिहाकारों सुमित सरकार, रणजीत गुहा या ज्ञान पांडेय का कोई नामलेवा नहीं बचा। पता नहीं ये महानुभाव कहां हैं? क्या कर रहे हैं? ज्ञान पांडेय के बारे में जरूर सुना था, अमेरिका की #कोक_यूनिवर्सिटी में हैं। कोकाकोला की यूनिवर्सिटी।
प्रो वर्मा से दो चार मुलाकातें हुई थी, प्रयागराज में उनके महदोरी निवास पर। मेरे समय विश्वविद्यालय नहीं थे। सुना है, फ्रांस की किसी यूनिवर्सिटी से शोध किया। फ्रेंच के अच्छे जानकार थे। लौटकर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में पढ़ाया भी। पर तब तक विश्वविद्यालय छोड़ चुका था।
एक पत्रिका भी निकाली #इतिहासबोध.. पढ़ने-लिखने वालों को जानकारी होगी। फ्रांसीसी क्रांति पर उनकी पुस्तक है #फ्रेंच_रिवयोल्यूशन। हिंदी में।
हैरानी इस बात पर हुई, वैचारिक क्रांति और लोककथाओं में भारत का इतिहास खोजने वाले प्रोफेसर के पुत्र ने खुले मैदान की बजाय #राजनीतिक_षड्यंत्र का मार्ग क्यों चुना? क्यों नक्सलियों की तरह #अंडरग्राउंड_मूवमेंट से जुड़े? हैरानी इसलिए नहीं हुई, क्योंकि आखिर बीज तो पिता ही बोकर गए थे।
प्रो वर्मा आज इस दुनिया में नहीं हैं। कम्युनिस्ट थे तो पुनर्जन्म, परलोक पर उनका विश्वास नहीं था। खैर जहां भी हों, भावी सन्तति को देख रहे होंगे। मुझे आशा है, लोककथाओं से उन्हें दृष्टि मिल रही होगी। "भारत एक खोज" की बजाय, "पुत्र एक खोज" पर शोध कर रहे होंगे।
एक सूचना आप सब मित्रों से स���झा करनी है ----गुजरात की प्रतिष्ठित इंडस यूनिवर्सिटी ने मुझे डीलिट ( Doctor of Literature (D.Litt.) की मानद उपाधि से सम्मानित किया है ---विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित एक भव्य समारोह में मुझे यह डिग्री प्रदान की गई ---इस सम्मान के लिए इंडस यूनिवर्सिटी का हृदय से आभार ---
कल 90 वर्षीय शादीलाल जी वॉयलेट लाइन मेट्रो में अकेले सफर करते मिले। सीनियर सिटीजन की सीट पर उनके बगल में बैठने के बाद मुझे लगा वो कुछ बेचैन हैं।
बार बार वे मुझसे ��ूछते ये कौन सा स्टेशन है?
जब मैंने पूछा कि आपको जाना कहाँ है तो वो माथे पर हाथ रख कर बोले-" वही तो मैं भूल गया हूँ"
फिर आप जाएंगे कहाँ?"- मैंने हैरानी से पूछा।
शादी लाल बोले- "एक बड़ा सा स्टेशन है न ?"
मैंने- नई दिल्ली, राजीव चौक, कई नाम लिए, उन्होंने सबको नकार कर कहा-"ये नहीं, एक स्टेशन है न सेंटर में जहाँ गाड़ी बदलते हैं।"
मैंने पूछा-" सेंट्रल सेक्रेटेरिएट ?"
ख़ुशी से चमकते चेहरे से शादीलाल जी बोले-" जी हां, जीहां, थैंक्यू! थैंक्यू !"
मैंने पूछा- "सेन्ट्रल सेक्रेटेरिएट से किधर जाएंगे?"
"वो तो मुझे याद नही, आई एम नाइंटी इयर ओल्ड, कुछ आप बताइए।" पहले की सारी खुशी को अलविदा कह एकबार फिर शादी लाल पुरानी अवस्था में आ गए।
मैंने धैर्य से पूछा-" आप पहले गए हैं? कितनी देर लगती है?"
शादीलाल-" बस तुरंत आ जाता है।"
मैं ने कहा-" पटेल चौक?"
शादीलाल जी का चेहरा हज़ार वाट के बल्ब सा चमका,
-"बिल्कुल बिल्कुल, अब याद आ गया, पटेल चौक ही जाना है मुझे।"
मैंने एक स्लिप पर पटेल चौक लिख कर उनको दिया और कहा-"सेंट्रल सेक्रेटेरिएट आने वाला है, मेट्रो से बाहर निकल कर किसी को ये स्लिप दिखाइयेगा, वो सही मेट्रो में आपको बैठा देगा।"
शादी लाल जी ने दुआओं की बरसात करते हुए जब मेरा हाथ पकड़ कर दबाया, तो पता नही क्या हुआ, मैं उनके साथ सा��� येलो लाइन मेट्रो तक न केवल चला आया बल्कि उसमे सवार हो उनको पटेल चौक तक छोड़ने भी चला गया।
"सम्हाल कर उतरिये, यही पटेल चौक है।" मैंने मेट्रो के दरवाजे पर रुकते हुए कहा।
शादीलाल जी उतरे, पर आगे बढ़ने की बजाय वापस मुड़ कर मेट्रो का दरवाज़ा बन्द होने और ट्रेन चलने तक मेरी ओर देखते हुए यूँ हाँथ हिलाते रहे मानो वे ही मुझे ट्रेन में बैठाने आये हों।
शादीलाल जी की समस्या समझने, निदान सोचने, एक मेट्रो से दू��री में जाने और उनका अगला स्टेशन आने की पूरी प्रक्रिया ताबड़तोड़ 5 मिनट में ऐसी गतिमान हुई कि कई जिज्ञासाएं अनुत्तरित रहीं जैसे
इस उम्र में अकेले क्यों निकलना पड़ा ?
किससे मिलने की बेताबी में यूँ घर से निकाल पड़े ?
अभी भी बच्चों के साथ रहने का सौभाग्य है या नही?
ईश्वर ने कभी फिर मुलाक़ात कराई तो ज़रूर पूछूँगा ।
( निवेदन: अगर आपके घर के कोई बुज़ुर्ग अकेले यात्रा करते हों तो उनको घर और गन्तव्य का पता, मोबाइल नम्बर लिख कर अवश्य देदें या गले मे टांग दें जिससे ज़रूरत पड़ने पर कोई उनकी सहायता कर सके)
पता नहीं किसका अनुभव है? किसका आलेख है? इसे बिना पूछे शेयर करें, ताकि किसी और शादी लाल के साथ खड़े हो सके।
कल ही कहा था, "....@narendramodi ने गेंद विपक्ष के पाले में डाल दी है, ���ब विपक्ष घूम-घूम कर नारी शक्ति वंदन और परिसीमन बिल को #अलग_अलग बताता फिरे..! #भाजपा_साजिश बताता रहे।
@yadavakhilesh जी..आप जल्दबाज और सत्ता को अधीर नेताओं की पहली पोल 4 मई को बंगाल में खुलेगी..! इस जीवन में आप स्वयं सत्ता राजनीति में #अछूत हो गए। लालू की तरह।
#बदलते_भारत को आप सब समझ नहीं आप रहे हैं। इस सोशल मीडिया के #शोर को ही जमीनी हकीकत समझ बैठे हैं। बार-बार सलाह देता हूं, "सत्ता संघर्ष" में शोर नहीं, #मौन को ���ुन��े-समझने की योग्यता लाइए।
#मुस्लिम_गोलबन्दी की हिमायत में रखे आपके इस कदम को #बहुसंख्य_समाज याद रखेगा।
@RahulGandhi
@MamataOfficial
@Office_of_Udhay