अम्बर में कुन्तल-जाल देख,
पद ���े नीचे पाताल देख,
मुट्ठी में तीनों काल देख,
मेरा स्वरूप विकराल देख।
सब जन्म मुझी से पाते हैं,
फिर लौट मुझी में आते हैं।
रश्मिरथी
राष्ट्र��वि दिनकर जी के जन्मजयंती पर संपूर्ण राष्ट्र का नमन एवं वंदन
माननीय र��ज्यपाल, उत्तर प्रदेश व कुलाधिपति लखनऊ विश्वविद्यालय, श्रीमती आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा से एवं आदरणीय कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार राय के मार्गदर्शन में
'भिक्षा से शिक्षा की ओर'
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