@anuraagmuskaan कोई भी शेत्र मे पूरे ही नॉलेज की ज़रूरी है। घोड़े की तरह काम करने के लिए पहले गधे की तरह काम करना पड़ता है,
"जैसे की विश्राम लिये बगैर भार वहन करना, ताप-ठंड न देखना, और सदा संतोष रखना – ये तीन गधे से सीखकर ही"
*****कोई भी घोड़ा बन सकता है। *****
@samajwadiparty भारतीय सेना के इतिहास के सबसे जांबाज और वीर सपूतों में से एक, 'नौशेरा का शेर' और महावीर चक्र विजेता ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान जी के शहादत दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। 🇮🇳
कारगिल युद्ध के महानायक, परमवीर चक्र विजेता कैप्टन मनोज कुमार पांडे जी के बलिदान दिवस पर उन्हें और उनकी अमर वीरता को कोटि-कोटि नमन। 🙏
"कुछ कर गुजरने की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजु-ए-कातिल में है।"
इन पंक्तियों को अपने साहस से चरितार्थ करने वाले कैप्टन मनोज पांडे ने बटालिक सेक्टर की खालूबार पहाड़ी पर जो पराक्रम दिखाया था, वह आज भी हर भारतीय के रोंगटे खड़े कर देता है।
अत्यंत दुर्गम परिस्थितियों में, जब दुश्मन ऊंचाई पर था, तब भी उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए बंकरों को ध्वस्त किया और गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद अपनी अंतिम सांस तक "जय महाकाली, आयो गोरखाली" के उद्घोष के साथ दुश्मनों का काल बने रहे।
"यदि मेरी मातृभूमि को साबित करने के लिए मेरे खून की आवश्यकता है, तो मैं कसम खाता हूँ कि मैं अपनी मौत से पहले मौत को भी मार डालूँगा।"
— कैप्टन मनोज कुमार पांडे (SSB इंटरव्यू के दौरान कहे गए उनके अमर शब्द)
उनका यह सर्वोच्च बलिदान, अद्भुत नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र के प्रति अटूट निष्ठा आने वाली हर पीढ़ी को देशभक्ति की प्रेरणा देती रहेगी। ऐसे महान सपूत को पूरा देश सदैव कृतज्ञता के साथ याद रखेगा।
जय हिंद! जय भारत! 🇮🇳
कारगिल युद्ध के महानायक, परमवीर चक्र विजेता कैप्टन मनोज कुमार पांडे जी के बलिदान दिवस पर उन्हें और उनकी अमर वीरता को कोटि-कोटि नमन। 🙏
"कुछ कर गुजरने की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजु-ए-कातिल में है।"
इन पंक्तियों को अपने साहस से चरितार्थ करने वाले कैप्टन मनोज पांडे ने बटालिक सेक्टर की खालूबार पहाड़ी पर जो पराक्रम दिखाया था, वह आज भी हर भारतीय के रोंगटे खड़े कर देता है।
अत्यंत दुर्गम परिस्थितियों में, जब दुश्मन ऊंचाई पर था, तब भी उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए बंकरों को ध्वस्त किया और गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद अपनी अंतिम सांस तक "जय महाकाली, आयो गोरखाली" के उद्घोष के साथ दुश्मनों का काल बने रहे।
"यदि मेरी मातृभूमि को साबित करने के लिए मेरे खून की आवश्यकता है, त�� मैं कसम खाता हूँ कि मैं अपनी मौत से पहले मौत को भी मार डालूँगा।"
— कैप्टन मनोज कुमार पांडे (SSB इंटरव्यू के दौरान कहे गए उनके अमर शब्द)
उनका यह सर्वोच्च बलिदान, अद्भुत नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र के प्रति अटूट निष्ठा आने वाली हर पीढ़ी को देशभक्ति की प्रेरणा देती रहेगी। ऐसे महान सपूत को पूरा देश सदैव कृतज्ञता के साथ याद रखेगा।
जय हिंद! जय भारत! 🇮🇳
कारगिल युद्ध के महानायक, परमवीर चक्र विजेता कैप्टन मनोज कुमार पांडे जी के बलिदान दिवस पर उन्हें और उनकी अमर वीरता को कोटि-कोटि नमन। 🙏
"कुछ कर गु���रने की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजु-ए-कातिल में है।"
इन पंक्तियों को अपने साहस से चरितार्थ करने वाले कैप्टन मनोज पांडे ने बटालिक सेक्टर की खालूबार पहाड़ी पर जो पराक्रम दिखाया था, वह आज भी हर भारतीय के रोंगटे खड़े कर देता है।
अत्यंत दुर्गम परिस्थितियों में, जब दुश्मन ऊंचाई पर था, तब भी उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए बंकरों को ध्वस्त किया और गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद अपनी अंतिम सांस तक "जय महाकाली, आयो गोरखाली" के उद्घोष के साथ दुश्मनों का काल बने रहे।
"यदि मेरी मातृभूमि को साबित करने के लिए मेरे खून की आवश्यकता है, तो मैं कसम खाता हूँ कि मैं अपनी मौत से पहले मौत को भी मार डालूँगा।"
— कैप्टन मनोज कुमार पांडे (SSB इंटरव्यू के दौरान कहे गए उनके अमर शब्द)
उनका यह सर्वोच्च बलिदान, अद्भुत नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र के प्रति अटूट निष्ठा आने वाली हर पीढ़ी को देशभक्ति की प्रेरणा देती रहेगी। ऐसे महान सपूत को पूरा देश सदैव कृतज्ञता के साथ याद रखेगा।
जय हिंद! जय भारत! 🇮🇳
कारगिल युद्ध के महानायक, परमवीर चक्र विजेता कैप्टन मनोज कुमार पांडे जी के बलिदान दिवस पर उन्हें और उनकी अमर वीरता को कोटि-कोटि नमन। 🙏
"कुछ कर गुजरने की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजु-ए-कातिल में है।"
इन ��ंक्तियों को अपने साहस से चरितार्थ करने वाले कैप्टन मनोज पांडे ने बटालिक सेक्टर की खालूबार पहाड़ी पर जो पराक्रम दिखाया था, वह आज भी हर भारतीय के रोंगटे खड़े कर देता है।
अत्यंत दुर्गम परिस्थितियों में, जब दुश्मन ऊंचाई पर था, तब भी उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए बंकरों को ध्वस्त किया और गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद अपनी अंतिम सांस तक "जय महाकाली, आयो गोरखाली" के उद्घोष के साथ दुश्मन��ं का काल बने रहे।
"यदि मेरी मातृभूमि को साबित करने के लिए मेरे खून की आवश्यकता है, तो मैं कसम खाता हूँ कि मैं अपनी मौत से पहले मौत को भी मार डालूँगा।"
— कैप्टन मनोज कुमार पांडे (SSB इंटरव्यू के दौरान कहे गए उनके अमर शब्द)
उनका यह सर्वोच्च बलिदान, अद्भुत नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र के प्रति अटूट निष्ठा आने वाली हर पीढ़ी को देशभक्ति की प्रेरणा देती रहेगी। ऐसे महान सपूत को पूरा देश सदैव कृतज्ञता के साथ याद रखेगा।
जय हिंद! जय भारत! 🇮🇳
#EtherealThoughtNo_1107
Goodmorning!
"He doesn't need a brand to feel important. The ₹500 slippers stay on because his wealth speaks louder than your EMI shoes. That’s Silent Wealth."
#नेहमिचाच_विचार_क्र_1107
सुप्रभात!
"५०० रुपयांची चप्पल घालणारा माणूस: त्याला तो कोण आहे हे कोणालाही सिद्ध करून दाखवण्याची गरज नसते. त्याचा आत्मविश्वास त्याच्या खिशातील पैशांमधून येतो, पायातील बुटांमधून नाही. यालाच म्ह���तात 'सायलेंट वेल्थ'."
#हमेशा_काही_विचार_क्र_1107
सुप्रभात!
"कपड़े और जूते चाहे जितने भी महंगे पहन लो, अगर जेब खाली है तो दुनिया तुम्हें 'सर' जरूर कहेगी, लेकिन वक्त आने पर कोई ₹10 का उधार भी नहीं देगा। असली रूतबा ब्रांडेड दिखने में नहीं, बल्कि फाइनेंशियली इंडिपेंडेंट होने में है।"
कारगिल युद्ध के महानायक, परमवीर चक्र विजेता कैप्टन मनोज कुमार पांडे जी के बलिदान दिवस पर उन्हें और उनकी अमर वीरता को कोटि-कोटि नमन। 🙏
"कुछ कर गुजरने की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजु-ए-कातिल में है।"
इन पंक्तियों को अपने साहस से चरितार्थ करने वाले कैप्टन मनोज पांडे ने बटालिक सेक्टर की खालूबार पहाड़ी पर जो पराक्रम दिखाया था, वह आज भी हर भारतीय के रोंगटे खड़े कर देता है।
अत्यंत दुर्गम परिस्थितियों में, जब दुश्मन ऊंचाई पर था, तब भी उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए बंकरों को ध्वस्त किया और गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद अपनी अंतिम सांस तक "जय महाकाली, आयो गोरखाली" के उद्घोष के साथ दुश्मनों का काल बने रहे।
"यदि मेरी मातृभूमि को साबित करने के लिए मेरे खून की आवश्यकता है, तो मैं कसम खाता हूँ कि मैं अपनी मौत से पहले मौत को भी मार डालूँगा।"
— कैप्टन मनोज कुमार पांडे (SSB इंटरव्यू के दौरान कहे गए उनके अमर शब्द)
उनका यह सर्वोच्च बलिदान, अद्भुत नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र के प्रति अटूट निष्ठा आने वाली हर पीढ़ी को देशभक्ति की प्रेरणा देती रहेगी। ऐसे महान सपूत को पूरा देश सदैव कृतज्ञता के साथ याद रखेगा।
जय हिंद! जय भारत! 🇮🇳
कारगिल युद्ध के महानायक, परमवीर चक्र विजेता कैप्टन मनोज कुमार पांडे जी के बलिदान दिवस पर उन्हें और उनकी अमर वीरता को कोटि-कोटि नमन। 🙏
"कुछ कर गुजरने की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजु-ए-कातिल में है।" इन पंक्तियों को अपने साहस से चरितार्थ करने वाले कैप्टन मनोज पांडे ने बटालिक सेक्टर की खालूबार पहाड़ी पर जो पराक्रम दिखाया था, वह आज भी हर भारतीय के रोंगटे खड़े कर देता है।
अत्यंत दुर्गम परिस्थितियों में, जब दुश्मन ऊंचाई पर था, तब भी उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए बंकरों को ध्वस्त किया और गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद अपनी अंतिम सांस तक "जय महाकाली, आयो गोरखाली" के उद्घोष के साथ दुश्मनों का काल बने रहे।
"यदि मेरी मातृभूमि को साबित करने के लिए मेरे खून की आवश्यकता है, तो मैं कसम खाता हूँ कि मैं अपनी मौत से पहले मौत को भी मार डालूँगा।"
— कैप्टन मनोज कुमार पांडे (SSB इंटरव्यू के दौरान कहे गए उनके अमर शब्द)
उनका यह सर्वोच्च बलिदान, अद्भुत नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र के प्रति अटूट निष्ठा आने वाली हर पीढ़ी को देशभक्ति की प्रेरणा देती रहेगी। ऐसे महान सपूत को पूरा देश सदैव कृतज्ञता के साथ याद रखेगा।
जय हिंद! जय भारत! 🇮🇳
"The breath you just took inside was the most expensive thing in this entire universe, because it will never return. So, stop scrolling through the reels of the past, quit worrying about the live-stream of the future, and live the 'Present' that is in your hands right now to the absolute fullest!"
@awasthis चाहे गाड़ी हो या जिंदगी... अगर वर्तमान में ईंधन नया और आधुनिक हो, तो उसे चलाने के लिए इंजन और सोच भी आधुनिक होनी चाहिए। अतीत के कबाड़ में आज का कीमती ईंधन बर्बाद करना समझदारी नहीं है।
"मेहनत की चाबी" से जो ताला खुलता है, उससे मिलने वाली सफलता स्थाई होती है, क्योंकि वह इंसान के ज्ञान, कौशल और चरित्र का निर्माण करती है। लेकिन जब कुछ लोग "पेपर लीक जैसी नकली चाबी" का इस्तेमाल करके शॉर्टकट चुनते हैं, तो वे न सिर्फ एक ईमानदार छात्र का हक मारते हैं, बल्कि पूरे सिस्टम के भरोसे को भी तोड़ देते हैं।
@awasthis प्रशांत किशोर के लिए बांकीपुर का यह उपचुनाव "आर-पार की लड़ाई" है। यह चुनाव तय करेगा कि जन सुराज बिहार की राजनीति में एक वास्तविक विकल्प बन पाएगी या फिर सिर्फ एक राजनीतिक बुलबुला बनकर रह जाएगी। खेल बड़ा है, और पीके ने अपनी साख दांव पर लगा दी है!
इसे कहते हैं डिजिटल और कागज़ी तरक्की का चरम रूप! जहाँ नेता और अधिकारी मंचों से विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाओं का ढिंढोरा पीटते हैं, वहीं ज़मीनी हकीकत यह है कि अस्पताल से लेकर एक्स-रे तक, सब कुछ सिर्फ कागज़ों पर सिमट कर रह गया है। जनता टैक्स के पैसे दे रही है और बदले में उसे मिल रहा है—फाइलों में दौड़ता हुआ अस्पताल और कागज़ का इलाज!
@TNNavbharat@RubikaLiyaquat चाहे पैसा किसी ईमानदार भक्��� की गाढ़े पसीने की कमाई हो या किसी भ्रष्टाचारी का काला धन—अगर मंदिर या धार्मिक व्यवस्था में बैठे लोग उसका दुरुपयोग करते हैं, तो वे सिर्फ एक वित्तीय अपराध नहीं कर रहे, बल्कि वे धर्म और मानवीय विश्वास की नींव को कमजोर कर रहे हैं।
@TNNavbharat@awasthis@sahu_rajiv86285 "Revered Sumit ji, I feel truly blessed to experience a deep sense of oneness with your profound knowledge. Your unwavering grace is an invaluable gift to me. Please accept my heartfelt gratitude and highest regards."
@awasthis