सवाल बस इतना बचा है...
किसी का रक्त से सना चेहरा देखकर तुम्हारी आँख भीगती है, या तुम उसके मार खाने का तर्क खोजने लगते हो? तुम मरहम लगाने दौड़ते हो या ज़ख्मी की जात पूछते हो?
इतिहास के नाम पर, मार खाते लोगों पर ठहाके लगाने वालों... तुमने वो सब खो दिया है जो ज़िंदा कहलाने के लिए ज़रूरी है। तुम्हारी यह हँसी, इस देश का सबसे उदास चेहरा है। 💔🇮🇳
#Humanity #Empathy #Compassion #India #HumanRights
Hii..
I use punch ev 35 76k km odo always charging to 100% regularly taking to 10% even taking to 5% in a month or 2 all fine no problem
The catch is mine is second batch with 1.5c cells 34cc compressor and supporting 43kw dcfc.
But
I know many people with first batch with 1c cells 27cc compressor and 25kw dcfc having soc drop issue from as high as 25-30% even after multiple replacements their issue isn't solved
Why?
Only tata can answer this....
This is really serious @Tataev is not doing anything on this
क्या आपको जवाबदेही (Accountability) का मतलब याद है? 🤔
26/11 मुंबई हमले के बाद (कांग्रेस सरकार):
✅ गृह मंत्री शिवराज पाटिल, महाराष्ट्र CM विलासराव देशमुख और डिप्टी CM आर.आर. पाटिल ने जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया।
✅ तत्कालीन PM मनमोहन सिंह ने मीडिया के सामने प्रेस कॉन्फ्रेंस क��।
✅ कसाब को पकड़ा गया, फांसी हुई और अगले 8 साल तक कोई बड़ा आतंकी हमला नहीं हुआ।
2014 के बाद (BJP सरकार):
❌ उरी, पठानकोट, पुलवामा, और अमरनाथ जैसे कई बड़े हमले हुए।
❌ किसी भी बड़े नेता या मंत्री ने इस्तीफा नहीं दिया।
❌ PM ने इस मुद्दे पर कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की।
❌ पूर्व गवर्नर सत्यपाल मलिक के खुलासे के अनुसार: पुलवामा हमारी गलती थी, लेकिन उन्हें 'चुप रहने' को कहा गया और शहादत का इस्तेमाल वोटों के लिए किया गया।
जिस सरकार को पिछली सरकार की विफलताओं के कारण लाया गया था, क्या वह आज सवालों के घेरे से बाहर है? अंधभक्ति छोड़िए और सवाल पूछिए! 🇮🇳
#IndianPolitics #Accountability #Pulwama #2611Attack #SatyaPalMalik #Democracy
क्या कोई समझा सकता है कि जो भारत, नेपाल (₹123) और भूटान (₹97.40) को सस्ता Pure पेट्रोल (E0) दे रहा है, उसी देश में आम जनता को Pure पेट्रोल के लिए ₹167 क्यों देने पड़ रहे हैं? 😡 पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी जी और OMCs इसका जवाब क्यों नहीं देते?
एक तरफ आम आदमी को लूटा जा रहा है, और दूसरी तरफ बिना किसी असेसमेंट के E20 (एथेनॉल ब्लेंडेड) फ्यूल हम पर जबरदस्ती थोपा जा रहा है। हमारी गाड़ियों के इंजन बर्बाद हो रहे हैं, और नितिन गडकरी जी का कहना है कि जिन्हें Pure पेट्रोल चाहिए वो ज्यादा कीमत चुकाएं!
आखिर यह सब क्यों हो रहा है?
एथेनॉल का खेल: कहा जा रहा है कि मंत्री जी के बेटे उसी कंपनी से जुड़े हैं जिसे एथेनॉल अप्रूवल से फायदा हो रहा है।
टैक्स ट��ररिज्म: आम आदमी टैक्स के बोझ तले दब रहा है, लेकिन BCCI और IPL जैसी संस्थाओं पर कोई टैक्स नहीं, जहाँ इनके अपने भाई-भतीजे राज कर रहे हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर की पोल: अमेरिका जैसी सड़कों का वादा किया गया था, लेकिन ₹4,200 करोड़ की लागत से बना लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे उद्घाटन के 13 दिन बाद ही धंस गया!
तानाशाही: लद्दाख के लिए आवाज़ उठाने वाले सोनम वांगचुक जैसे एक्टिविस्ट पर NSA लगाकर उन्हें जेल में डाल दिया जाता है।
4 अगस्त 2026 को E20 फ्यूल और इन नीतियों के खिलाफ दिल्ली टैक्सी और ट्रांसपोर्ट यूनियन्स जो प्रोटेस्ट कर रही हैं, मैं उसका पूरी तरह से समर्थन करता हूँ। मेरे पास गाड़ी हो या ना हो, मैं इस प्रोटेस्ट में जरूर शामिल होऊंगा।
वक्त आ गया है कि पेट्रोलियम मिनिस्ट्री और फाइनेंस मिनिस���ट्री की जवाबदेही तय की जाए! ✊
#E20 #PetrolPrices #ProtestOn4thAug2026 #TaxTerrorism #India #RoadSafety #NitinGadkari #HardeepPuri
क्या E20 फ्यूल पॉलिसी में जल्दबाजी की गई है? 🚨
हम अपना 90% तेल इंपोर्ट करते हैं, इसलिए सरकार खराब चावल और गन्ने से एथेनॉल बनाकर पेट्रोल में मिलाने (E20) की पॉलिसी लाई। यह बेहतरीन प्लान 2030 के लिए था, लेकिन इसे आनन-फानन में अभी लागू कर दिया गया। समस्या यह है कि गाड़ियों का रिप्लेसमेंट साइकिल 7 से 10 साल का होता है, और हमारी मौजूदा गाड़ियाँ इसके लिए पूरी तरह तैयार (रिप्लेस) ही नहीं हुई हैं! 🚗⛽
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माइलेज पर सीधा असर! 📉
इस पॉलिसी में एक बड़ा कैच है। चाहे आपकी गाड़ी E20 कंपैटिबल हो, या सिर्फ E10 कंपैटिबल, एक बात पक्की है—एथेनॉल वाले फ्यूल से आपकी गाड़ी का माइलेज (एवरेज) कम होना तय है।
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सबसे बड़ा सवाल: कीमत का क्या? 💸
अगर आप पेट्रोल में एथेनॉल मिला रहे हैं, तो फ्यूल सस्ता होना चाहिए ना? लेकिन इसे ग्राहकों को पेट्रोल के पूरे दाम पर ही बेचा जा रहा है।
ये तो वही बात हो गई कि दूध वाल�� दूध में पानी भी मिलाए (और बताकर मिलाए), लेकिन पैसे पूरे 100% शुद्ध दूध के ही वसूले (उसे ₹50 का तो दो)! 🥛💧
#E20 #Ethanol #NitinGadkari #IndianAuto #PetrolPrice
एक पेप्सी का कैन "विश्वगुरु" और सुपरपावर बनने के सपने की कड़वी सच्चाई खोल देता है। 🥤🇮🇳
भारत दुनिया में एल्युमिनियम के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है। हमारे पास इतने बॉक्साइट रिज़र्व हैं कि अगले 350 सालों तक कोई तकलीफ नहीं होने वाली। फिर भी, हम मैन्युफैक्चरिंग की रेस में पिछड़ रहे हैं। यहाँ जान���ए क्यों... 🧵👇
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एक कैन का सफर: पत्थर (बॉक्साइट) ➡️ एल्युमिना ➡️ एल्युमिनियम मेटल ➡️ एल्युमिनियम शीट ➡️ कैन।
भारत सबसे मेहनत वाला काम करता है: पत्थर से मेटल बनाना। लेकिन आखिरी और सबसे ज्यादा मुनाफे वाला काम—शीट से कैन बनाना—सा��थ कोरिया, यूएई (UAE) और श्रीलंका जैसे देशों में होता है। 🏭
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मुनाफे का अंतर आपको हैरान कर देगा। 🤯
1 टन कच्चा बॉक्साइट बेचने पर हमारी कमाई लगभग $40 होती है। वहीं विदेशी देश हमारे कच्चे माल से कैन बनाते हैं और 1 टन को लगभग $4,000 में बेचते हैं!
मज़ेदार बात: UAE के पास 1 ग्राम बॉक्साइट भी नहीं है, फिर भी वे हमारे कच्चे माल से पैसा छाप रहे हैं। 💸
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तो फिर हमारे अपने MSMEs (लघु उद्योग) ये कैन क्यों नहीं बना रहे हैं? सरकार के इम्पोर्ट टैक्स (आयात कर) के नियम इसे असंभव बना देते हैं। 📜
❌ कच्ची एल्युमिनियम शीट मंगाने पर = 7.5% टैक्स
✅ तैयार कैन मंगाने पर = 0% टैक्स
जब तैयार माल मंगाना सस्ता है, तो कोई इसे यहाँ मैन्युफैक्चर क्यों करेगा?
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पत्थर बेचने से हम विश्वगुरु नहीं बनेंगे। अभी जो चल रहा है वो "Make in India" नहीं, बल्कि "Assemble in India" है।
आगे बढ़ने के लिए, आखिरी और सबसे ज्यादा मार्जिन वाले प्रोसेस भारत की धरती पर ही होने चाहिए। लेकिन असली सवाल यह है: सरकार से ये कड़े सवाल पूछेगा कौन? 🤔
हाल ही में हुए छात्र प्रदर्शनों ने भारतीय राजनीति में एक नया मोड़ ���ा दिया है! 🚨 शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद, अब राहुल गांधी ने छात्रों पर हुए कथित पुलिस बल प्रयोग को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से जवाबदेही की मांग की है। आइए इस राजनीतिक रणनीति को समझते हैं 🧵👇
टाइमिंग का खेल ⏱️: राहुल गांधी ने यह मांग 26 जुलाई को क्यों उठाई, ठीक उस दिन के बाद जब CJP ने अपना प्रदर्शन वापस ले लिया था? यह दर्शाता है कि छात्र आंदोलन खत्म होने के बावजूद, विपक्ष केंद्र सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है।
टारगेट पर अमित शाह क्यों? 🎯
गृह मंत्री के तौर पर रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और दिल्ली पुलिस उनके अधीन आती है। छात्रों पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों के कारण, विपक्ष सीधे तौर पर उन्हें और उनके मंत्रालय को निशाना बना रहा है।
विपक्ष बनाम छात्र आंदोलन 🤝:
पहले विपक्षी नेता प्रदर्शन स्थल पर सिर्फ 'मेहमान' की तरह जाते थे, जबकि छात्र 'मेजबान' थे। लेकिन अब पत्राचार और नई मांगों के जरिए, राहुल गांधी इस सार्वजनिक जनआक्रोश का नेतृत्व अपने हाथों में लेने की कोशिश क��ते दिख रहे हैं।
सरकार का काउंटर-नैरेटिव 🛡️:
सरकार यह संदेश दे रही है कि मुद्दा सुलझ गया है। पेपर लीक पर नए कानून और टास्क फोर्स का गठन इसी का हिस्सा है। साथ ही, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को 'दबाव में हार' के बजाय सरकार के एक प्रो-एक्टिव (सक्रिय) कदम के रूप में पेश किया जा रहा है।
बड़ा सवाल 🤔:
क्या धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने BJP के लिए तीन बड़ी राजनीतिक चुनौतियों (UGC विवाद, राम मंदिर निर्माण से ���ुड़े आरोप और E20 ईंधन मुद्दा) को बेअसर कर दिया है? क्या नैरेटिव अब सत्ता पक्ष के पक्ष में शिफ्ट हो रहा है? आपकी इस पर क्या राय है? कमेंट्स में बताएं! 👇
#StudentProtests #IndianPolitics #RahulGandhi #AmitShah #DharmendraPradhan
असम में बाढ़ केवल एक वार्षिक आंकड़ा नहीं, बल्कि बार-बार डराने वाला एक भयानक सपना है। 68 से अधिक लोगों की जान जाने और 6.5 लाख से अधिक लोगों के प्रभावित होने के साथ, संपर्क से कटे हुए दूरस्थ क्षेत्रों में वास्तविक मानवीय नुकसान शायद कहीं अधिक है। यह एक विनाशकारी और प्रणालीगत (सिस्टम की) विफलता है। 🧵👇
'बादल फटने' का मिथक: अधिकारियों ने शुरुआत में इस तबाही के लिए नागा��ैंड में बादल फटने को जिम्मेदार ठहराया था। हालांकि, IMD के आंकड़े बताते हैं कि हालांकि बारिश बहुत भारी थी, लेकिन यह बादल फटने की तकनीकी परिभाषा में फिट नहीं बैठती। हमें तथ्यों पर आधारित जवाबदेही चाहिए, न कि सुविधाजनक बहाने। यह संकट काफी हद तक मानव निर्मित है। इस आपदा को और भी भयानक बनाने ��ाले असली कारण:
⚠️ 3,000 किमी के संरचनात्मक रूप से कमजोर और खराब रखरखाव वाले तटबंध
⚠️ प्राकृतिक जल निकासी को रोकने वाली बेतरतीब सड़कें
⚠️ आर्द्रभूमियों (बील) का दुखद नुकसान, जो पारंपरिक रूप से बाढ़ के पानी को सोख लिया करती थीं
हमारे टैक्स के रुपये कहाँ जा रहे हैं? असम में बाढ़ नियंत्रण पर हर साल हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन कोई भी सुधार दिखाई नहीं देता। अब समय आ गया है पूर्ण पारदर्शिता का, इस खर्च के विस्तृत सार्वजनिक ऑडिट का और संभावित भ्रष्टाचार की सख्त जांच का। 🔍💰
हमें ओडिशा के प्रोएक्टिव आपदा प्रबंधन मॉडल को अपनाने की सख्त जरूरत है: अपडेटेड खतरे वाले नक्शे, उन्नत पूर्व-चेतावनी प्रणालियां (early warning systems), और स्थायी बाढ़ आश्रय स्थल। मैं सीएम @himantabiswa से आग्रह करता हूं कि वे घटना के बाद केवल राहत कार्यों पर निर्भर रहना बंद करें और दीर्घकालिक, स्थायी समाधान लागू करें। असम इससे बेहतर का हकदार है।#AssamFloods #Assam