अगर आप जनरल हो और डीएम हैं तो किसी को झूठे केस में जेल भेज दीजिए। हाईकोर्ट से पांच लाख का जुर्माना सुप्रीमकोर्ट माफ कर देगा। लेकिन मीडिया चुप रहेगा। आप दलित हैं तो झूठे आरोप लगाकर मरने के लिए मजबूर कर देगा। मीडिया आप को दोषी ठहरा देगी। जातिवादी मीडिया दोषी को निर्दोष और निर्दोष को दोषी ठहरा देती है। आप लोकतंत्र को भी खा जा सकते हैं।
30 मैनस्ट्रीम न्यूज़ चैनलों के 100 सवर्ण न्यूज़ एंकर CCTV फुटेज के क्लिप को वायरल कर के झूठ फैला रहे हैं.
इस वायरल CCTV फुटेज से बिल्कुल साबित नही होता है साहिल वकोडे नकल कर रहा था.
वो एग्जाम खत्म कर के अपना पेपर सम्मिट करके क्लासरूम से बाहर जाता है दिख रहा है.
पीछे की बेंच पर एक स्टूडेंट ने Calculator इस्तेमाल कर रहा है. साहिल भी Calculator ही इस्तेमाल कर रहा है.
साहिल ने अपना पेपर दिया, कैलकुलेटर और पानी का बोतल उठाया और चलता बना.
साहिल को जिस तरह बदनाम किया जा रहा है, कहना ही होगा न्यायपालिका को बंद कर देना चाहिए और न्यूज़ चैनलों को न्यायपालिका और डिप्लोमा धारी न्यूज़ एंकरों को जज बना देना चाहिए. दिन रात बीजेपी के लिए PR करने वाले न्यूज़ एंकर तीन दिनों से जज बनकर ही एक बच्चे का चरित्र हनन कर रहे हैं.
IIT में जातिवाद कैसे होता है सुन लो, जिंदा दलित स्टूडेंट से।
जो मर गया है उसके नाम पर तो कोई भी कहानी बनाकर बदनाम कर ही रहे हो।
क्या इसके भी मर जाने का इंतजार कर रहे हो?
#dalitstudent#iitbombay ने पहले बोल दिया साहिल मोबाइल chatgpt से नकल करते पकड़ा गया जबकि एग्जामरूम के चारों कौनो में कैमरे लगे हुए है, मूढ से मूढ छात्र भी ऐसी हरकत नहीं करेगा वो मोबाइल निकाल के नकल करे !!
जब उसके पिता ने SC ST ACT में मुकदमा दर्ज किया उसने तीन महीने हो रहे जातिय शोषण के सबूत रखे तो IIT ने अपना स्टैंड एकदम पलट दिया अपने बयान पर माफ़ी मांग ली !!
अब आईआईटी बोम्बे बोल रहे है, कम्युनिकेशन गैप हुए जिसके चलते ये जानकारी गलती से सार्वजनिक बिना की जांच के हुई,
ये पूरा प्री प्लान मर्डर प्रोफेसर कर रहा था, जैसी ही साहिल के पिता ने जांच की मांग करी प्रोफेसर फिल्मी स्टाइल में धरने पर बैठ गया और जैसी मुकदमा दर्ज हुआ तो इस्तीफा दें स्वैग दिखाने लगा, साहिल ने कोई सुसाइड नोट नहीं लिखा अब किस आधार पर संस्था ने इसे अपनी तरफ से आत्म ह त्या घोषित कर दिया ? और पुलिस ने उसका मोबाइल जांच में पाया उस समय तक किसी प्रकार की CHATGPT का उपयोग नहीं हुआ , ये पुलिस की फॉर्मल रिपोर्ट में आया है !!
कोई भी साधारण से साधारण बुद्धि वाला इतना बेवकूफ नहीं जो नकल को उचित ठहरा दे पर भारत में ऐसे मूढ की भरमार है, जिनका रोम रोम बस दलितों को गलत दिखाना चाहता है, किसी भी प्रकार दलित छात्र के साथ भारतीय समाज सहानुभूति नहीं रखता,
अब ये प्रोफेसर जिसको जांच में सहयोग करना चाहिए था, जब उसे पूछा नकल के दौरान जिस गैजेट का उपयोग होगा उसकी जब्त किया जाता उसकी इनफॉर्मेशन दर्ज होती है तो अपने ही बयान पलट रहा है, बोल रहा में साहिल को मॉरल सपोर्ट देता था, यकायक नकल से सीधा सहानुभूति अर्जित करने लगा जो कल तक इस्तीफा फेंक के दिखा रहा था,
खैर अगर आप दलित हो तो आपको इतना मनोबल सदा ऊंचा रखना चाहिए, भारतीय संस्कृति और भारत का साढ़ा हुआ समाज सदा से दलित के प्रति नफरत रखे हुए है,
भारत में sc st act का उपयोग करना पड़ रहा है, इन्हें इस बात का खेद नहीं हमने अपने समाज को कितने नीचे स्तर तक गिरा दिया जो उनके लिए हमें अलग कानून लाने पड़े
दलितों के प्रति हीनता का कोई ईलाज नहीं अब सबल दलित नफरत के बदले नफरत लौटा रहा है, जब दलित अधिक सबल हो जाएंगे तो जरूरत पड़ी तो सवर्ण बचाव नियम भी लाएंगे हम भी नहीं चाहेंगे किसी सवर्ण छात्र में भविष्य में किसी दलित प्रोफेसर अनन्य करे तब सवर्ण बचाओ नियम के तहत मुकदमा जरूर लिखा जाएगा पर मोबाइल खोल के ChatGPT से नकल करी ऐसा बचकाना बचाव तो बिल्कुल अनुचित है,
इंजिनियरिंग कॉलेज में 10 प्वाइंट का CGPA - Cumulative Grade Point Average से किसी की बौद्धिकता आसानी से पता चल जाती है, अगर में किसी के हाथ लैपटॉप भी दे दु तो उसका CGPA 5 या 6 होगा इसे ऊपर नहीं जा सकता परिजन से बात कर मुझे आश्चर्य इसे हुआ साहिल की ऑल इंडिया रैंक 614 और साथ में गणित ओलंपियाड में गोल्ड मेडलिस्ट और उसका CGPA 8.5 है अर्थात गूगल और माइक्रोसॉफ्ट , टेस्ला जैसी अंतर्राष्ट्रीय कंपनियां ऐसे छात्रों से सब्जेक्टिव सवाल नहीं करती सीधा कट ऑफ कर ज्वाइनिंग लेटर हाथ में देती है,
जो यूट्यूबर SC ST ACT को टारगेट करके साहिल की क्षमता पर वीडियो बनाए तो आपको लगा डर जाएंगे और चार कदम आगे बढ़ के छाती पर पैर रखेंगे, अपनी बात सही कारण के साथ स्थापित करेंगे और क्या लगा उस प्रोफेसर को बचा लोगे हाथों से फाड़ के हृ/दय निकालेंगे,
नकल करने वाले छात्र गले में फंदे ना लगाते ना उनका CGPA 8.5 होता वो मेरे जैसे छात्र होवे जो नकल करे जिनका cgpa आठ सेमेस्टर में 7 से ऊपर नहीं जाता और प्रोफेसर के पकड़ने पर फंदे ना लगाते उल्टा प्रोफेसर का मटर कर, i am very innocent sir बोलते है, नमस्ते !
#Baba_Manish
जब न्याय की कुर्सी पर महिलाओं के प्रति संकीर्ण सोच रखने वाले ऐसे मनुवादी काबिज हों, तो नारी अस्मिता कैसे सुरक्षित रहेगी? दरअसल यह सब कॉलेजियम सिस्टम का नतीजा है.
सुप्रीम कोर्ट में जज साहिब चौंक रहे हैं कि देश में कैंसर की 2700 की दवा 27000 में बिक रही है।
वैसे 27 हजार क्या अगर 27 लाख की भी मिले तो बस कैंसर के मरीजों और उनके परिजनों को फर्क पड़ेगा बाकि लोगों को फर्क नहीं पड़ेगा वो तो टीवी पर हिंदू-मुस्लिम की डिबेट और हिंदू राष्ट्र की कल्पना में ही खुश रह लेंगे...
पिछले साल ही प्रोफेसर डुल्ला ने स्टूडेंट्स अफेयर के डीन रहते हुए एक अक्षय सावंत नाम के दलित पीएचडी के छात्र को 8 महीने के लिए सस्पेंड करवा दिया था। छात्र की बस इतनी गलती थी, उसने एक न्यूज़ चैनल को बाईट दे दी थी, और इसमें कोई भी संस्थान के बारे में कमेंट नहीं था। वो छात्र मानसिक रूप से मजबूत था, उसने अपने लिए संघर्ष किया, कोर्ट तक गया, और आदेश वापस करवा लिया। पर सब इतनी मजबूती से लड़ नहीं पाते। 👇👇
IIT बॉम्बे दुनिया भर में 134वें नंबर पर है और भारत के टॉप संस्थानों में से एक है वो कह रहा है कि साहिल वाकोड़े एग्जाम में चीटिंग कर रहा था
फिर लोगो ने चीटिंग करने के CCTV फुटेज मांगे जब IIT इसका जवाब नहीं दे पाया तो माफी मांग रहा है
और लोग जिस sahil पर चीटिंग का इल्ज़ाम लगा रहे हैं उसकी 614वीं ऑल इंडिया रैंक थी और 1st year में छात्र का OCPA 8.5 है।
इतना प्रतिभाशाली बच्चे की जान एक IIT संस्थान में फैले जातिवाद ने ले ली।
एक गरीब, आम upper-caste पर अचानक SC-ST एक्ट में FIR हो जाती और पूरा Twitter समर्थन करता तो अलग बात थी।
लेकिन IIT Bombay का वो प्रोफेसर कोई बेसहारा नहीं है। voiceless या powerless नहीं है। उसका डायरेक्टर उसके साथ है। IIT के सारे फैकल्टी उसके साथ हैं। उसने गलत नहीं किया तो गिरफ्तारी से पहले जमानत उसे मिल सकती है। हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट वो मिनटों में जा सकता है।
लेकिन पुलिस को कुछ तो मिला होगा तभी FIR की होगी। उसने गलत किया या नहीं, जांच के बाद तय होगा, लेकिन उसे निर्दोष बताने का कैंपेन कौन लोग चला रहे हैं?
ये जाति पर proud फील करने वाले लोग तो नहीं?
◆ IIT बॉम्बे छात्र आत्महत्या कांड !
SC/ST एक्ट का नाम आते ही सामंती लोग बिलबिलाने क्यों लगते है?
ऐसा पहली बार तो नहीं हो रहा है जहां IIT/AIIMS जैसे बड़े संस्थान के संचालन कर्ता, प्रोफेसर पर जातिगत भेदभाव के आरोप लगे हो।
इससे पहले सफदरजंग अस्पताल में जाति देखकर रिटेन में कम अंक देने के मामले में, जांच के उपरांत प्रोफेसरों को सजा हुई थी और उनके सैलरी से छात्रों को कंपनसेशन दिया गया था। तुम ये क्यों भूल जाते हो।
यदि परिवार आरोप लगा रहा है कि विगत 3 महीने से छात्र को प्रतारित किया जा रहा था। तो जांच हो जाने दो ना बिलबिला क्यों रहें हो।
और IIT जैसा एग्जाम क्रैक करने वाला छात्र इतना भी कमजोर नहीं हित है कि एक एग्जाम में चीटिंग करता हुआ पकड़ा जाए तो आत्महत्या कर लें।
थोड़ा धैर्य रखो जांच होने दो...
IIT Bombay के प्रोफेसर पर FIR होने से लोग ज्यादा परेशान हैं.
छात्र की आत्महत्या से हुई मौत पर कम.
IIT Bombay के डायरेक्टर कहते हैं- उनके कैंपस में कोई caste-based discrimination नहीं होता. ये बात अपने-आप में सवाल खड़े करता है.
जब समाज में जातिगत भेदभाव है, तो IIT क्या, हर संस्थान, हर जगह होगा. होता है. कम या ज्यादा. आपको दिखे या ना दिखे.
नहीं तो एक कानून बनाकर घोषित कर देना चाहिए, sc st act, IIT कैंपस में लागू नहीं होगा.
और इस केस में मृत छात्र Sahil Wakode के ऊपर casteist remarks किए गए या नहीं, इसके लिए जांच पूरी होने का इंतजार क्यों नहीं किया जा सकता?
आरोप है तो जांच होनी चाहिए. जांच से पहले हम-आप प्रोफेसर को सर्टिफिकेट क्यों दे रहे हैं.
वैसे भी, परीक्षा में निजी तौर पर चीटिंग करना कोई serious criminal offense नहीं है.
लेकिन हमारी सोसाइटी और सिस्टम छात्रों को दूसरे तरह से अहसास कराता ही है.
वहीं सिस्टम जिसमें फेल होने पर भी छात्र आत्महत्या कर लेते हैं. NEET रद्द होने पर भी करते हैं. और नंबर कम आने पर भी करते हैं.
लेकिन आत्महत्याओं के root cause पर बात करने और उसे solve करने से हम अभी बहुत दूर हैं.
छत्तीसगढ़ में खनिज संपदा से कमाई तो हुई, लेकिन जिस जनता की जमीन से कोयला और लोहा निकला, उसके हिस्से में विकास नहीं आया, यह CAG की रिपोर्ट में सामने आई हकीकत है।
1,734 खनन प्रभावित गांवों में से 754 गांवों में एक भी विकास कार्य नहीं हुआ। प्रभावित क्षेत्रों की पहचान में 65 महीने की देरी हुई, लेकिन उससे पहले ही ₹1,060 करोड़ के काम स्वीकृत कर दिए गए। सरकारी दफ्तरों की मरम्मत और सुविधाओं पर करोड़ों रुपये खर्च हुए, वहीं ₹709 करोड़ के सामान वितरण और ₹17.49 करोड़ की खरीद प्रक्रिया में भी अनियमितताएं दर्ज की गईं।
यह पैसा किसी सरकार या अफसर का नहीं, बल्कि खनन से प्रभावित जनता के अधिकार का पैसा है। आदिवासियों और किसानों की जमीन से निकली खनिज संपदा का लाभ सबसे पहले उन्हीं गांवों तक पहुंचना चाहिए। DMF का पैसा प्रभावितों के विकास के बजाय व्यवस्था की लापरवाही और अनियमितताओं की भेंट चढ़ना बेहद गंभीर वास्तविकता है।
अब जरूरत है कि पूरे मामले में जिम्मेदारी तय हो, दोषियों पर कार्रवाई हो और खनन प्रभावित गांवों को उनका वास्तविक हक मिले।
@narendramodi@vishnudsai@jualoram@rashtrapatibhvn
Mirzapur फिल्म में त्रिपाठी परिवार और पंडित परिवार की कहानी को मल्टीप्लेक्स में दिखाया गया.
Haiwaan में अक्षय कुमार को मराठी ब्राह्मण परशुराम गोखले के किरदार में दिखाया गया.
Hanuman Ansh सिनेमा हॉल में चल ही रही है जो नीम करौली बाबा के जीवन पर आधारित है जिनका नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था.
कल रात प्राइम वीडियो पर Waiting Hai वेब सीरीज देखना शुरू किया, जिसमें लीड करैक्टर नाम सुगम मिश्रा है.
इस वेब सीरीज़ में सुगम मिश्रा का किरदार Divyenndu Sharma ने निभाया है. अन्य प्रमुख कलाकारों का नाम है Kumud Mishra, Yashpal Sharma और Dayashankar Pandey.
इस देश में अन्य जातियां रहती हैं या नही. फिल्मों और वेब सीरीज़ में केवल सवर्ण जातियों का सरनेम लीड करैक्टर में क्यों दिखाया जाता है ?
Family Man में श्रीकांत तिवारी ?
कैसे बिना आवाज उठाए आप लोगों को खाना हजम होता है. इसे ही कहते हैं Savarna Hegemony जिसे हम चुप रहकर स्वीकृति प्रदान करते आ रहे हैं.
यह National Emergency है.
सिंधु घाटी सभ्यता में अनेक स्तूप मिलते हैं. लेकिन वहां खुदाई के दौरान तथागत बुद्ध की एक भी मूर्ति नही मिली.
हड़प्पा और मोहनजोदड़ो के साइट पर साफ साफ लिखा ऊंचा चबूतरा Buddhist Stupa है.
इसलिए सिंधु घाटी सभ्यता के स्तूप तथागत गोतम बुद्ध से पहले के बने हुए हैं.
द्विज इतिहासकार गलत जानकारी दे रहे हैं कि स्तूप कुषाण काल के हैं. यदि स्तूप कुषाण काल के होते तो सिंधु घाटी की हर विकसित गली गली और नुक्कड़ चौराहे पर गोतम बुद्ध की मूर्ति के पटे होते.
भारत का इतिहास सही क्रम में इसलिए नही लगता कारण वैदिक काल और संस्कृत भाषा को प्राचीन बताने के चक्कर में अन्य इतिहास को इधर उधर एडजस्ट करते हैं और पकड़े जाते हैं.
1757 में भारत की आबादी 17-18 करोड़ के आसपास थी.
1857 में भारत की आबादी 24 करोड़ थी.
1925 में भारत की आबादी 32 करोड़ थी.
भारत की आबादी चाहे 18 करोड़ थी या कभी 32 करोड़ थी, भारत में अंग्रेजों की आबादी कभी 2,50,000 से ज्यादा नही थी.
0.07% अंग्रेज भारत पर राज करते थे. उसी तरह सवर्णों की आबादी कितनी भी हो, सत्ता ब्यूरोक्रेसी शिक्षा बैंकिंग मीडिया में बिना किसी परीक्षा के वही टॉप पोजीशन में हैं.
2012 में PSU बैंकों यानी राष्ट्रीय बैंकों के 293 Directors में सिर्फ 9 SC-ST थे.
2026 में 9 राष्ट्रीय बैंकों के कुल 98 बोर्ड मेंबर्स में
SC-6
ST-1
इन आंकड़ों को उल्टा कर दीजिए. 98 बोर्ड मेंबर्स में SC-ST 70, OBC 15 और जनरल केवल 3 ?
तब पता है क्या होता, न्यूज़ रूम का तापमान 44 डिग्री हो जाता. चारों तरफ हो हल्ला शुरू हो जाता कि ये तो जातिवाद है.
OBC SC ST नेताओं ने आप लोगों की सारी ऊर्जा केवल चुनावी राजनीति की ओर मोड़ दी है. विधायक, सांसद और मुख्यमंत्री बनाने के लिए अपने गांव की चर्बी गला रहे हो. अपने अधिकारों के लिए खुद आवाज उठानी पड़ती है.
एक चम्मच तक ना बना सकने वाला हमारा महान देश विश्वगुरु होने का दावा करता है ।
सोचिये की संसाधनो पर किन जातियों का कब्जा है ? सोचिये की किसने देश को इतना पीछे धकेल दिया ?
सोचिये कि दुनिया की टाप 300 यूनिवर्सिटी में हमारा एक भी क्यों नहीं है?
यक्ष सोच रहा था ...
तेल खाने को मना किया पीएम मोदी ने तो जलाने को क्यों नहीं मना किया?
बहरहाल 7.8 ग्रोथ रेट वाली अर्थव्यवस्था में आम जन के लिए दीए के तेल की क़ीमत जाननी हो तो ये वीडियो देखिए…
नीरज चोपड़ा ने टोक्यो ओलंपिक में जिस जेवलिन से गोल्ड मेडल जीता था. नीरज चोपड़ा ने वो जेवलिन मोदी को गिफ्ट किया था.
बाद में ये जेवलिन 1.5 करोड़ में बेच दिया गया.