मेट्रो बंद करो।
रास्ते बंद करो।
दुकानें बंद करो।
Internet बंद करो।
खाना बंद करो।
अपना हक़ मांग रहे छात्रों के ख़िलाफ़ सरकार ने ���े क्रूर कदम उठाए।
बस एक चीज़ बंद नहीं कर पाए, मोदी जी - पेपर लीक।
प्रधानमंत्री मोदी भारत के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री हैं - इतने युवा विरोधी कि एक नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी नहीं ले सकते।
152 पेपर लीक। 7.5 करोड़ छात्र पीड़ित। और सज़ा एक दोषी को भी नहीं। सजा किसे मिली? मेहनती युवाओं को।
और जब इन बच्चों ने शिक्षा के जाय��़ सवाल उठाए - तो जवाब में मिली लाठी और हिरासत। लीक करने वाले अपराधी आज़ाद - और वाजिब मुद्दे उठाने वाले छात्र घसीटे जाते हैं, पीटे जाते हैं।
यह सरकार सिर्फ़ युवाओं को नाकाम नहीं कर रही - उनपर टूट पड़ी है।