ख़ुदा के, इतने रास्ते क्यूं हैं
वफ़ा के, इतने वास्ते क्यूं हैं
रब अकेला है, चैन से कब है
सारी उम्मीदें, साथ से क्यूं हैं
खुदाई सारा जहां मान भी लूं
सच है तो, ये हादसे क्यूं हैं
मौत के बाद, हम्हें मिलना है
ज़ुदा-ज़ुदा से, राज़ से क्यूं हैं
-पुष्कर
#पुष्कर_अयन
खान ही है खुद बनाकर खाओं लेकिन इन उन्मादियों के यहां से थूका मूता धीमा जहर युक्त कुछ मत खाओं पीओं
बिरयानी खाने वाले हिन्दुओं देख लो, हिन्दुओं को कितना भी समझाओ पर मानते नहीं है, इन लोगों का सम्पूर्ण बहिष्कार करो, जागो हिन्दुओं
#बिरयानी#हिंदुत्व#trending#सनातन_परिवार
❤️ के. अन्नामलाई का युवाओं के लिए बड़ा संदेश
“दुनिया में कहीं भी जाओ, अपने सपनों को पूरा करो, सफलता की नई ऊंचाइयों को छुओ। लेकिन जब आपके माता-पिता को आपकी ज़रूरत हो, तो उनके साथ खड़े रहो।”
जीवन में बड़ी से बड़ी उपलब्धि भी माता-पिता की सेवा और उनके प्रति अपने कर्तव्य से बढ़कर नहीं हो सकती। जिन्होंने हमें चलना सिखाया, उनके मुश्किल समय में साथ देना ही सच्ची सफलता है। 🙏
देहरादून
इम्तियाज अली अपने 25- 30 साथियों और अपने परिवार की महिलाओं के साथ भाजपा युवा मोर्चा के नेता विनोद कुमार पर धावा बोलता है
फ़ावड़ा से बेलचा शॉवेल से और हथौड़ियों से 50 की संख्या में मुसलमान विनोद कुमार पर टूट पड़ते हैं और उनकी मोब लिंचिंग करके क्रूर हत्या कर दी जाती है
लेकिन जो माहौल किसी मुसलमान के मोब लिंचिंग पर बना दिया जाता है मतलब राहुल गांधी अखिलेश यादव सहित पूरा विपक्ष ट्वीट करता है घटनास्थल पर जाता है मामले को पूरी दुनिया में उठता है
अब सब चुप है
क्योंकि मुसलमानो की भीड़ ने एक हिंदू का मोब लिंचिंग किया है
पुष्कर सिंह धामी @pushkardhami जी सभी आरोपियों का एनकाउंटर होना चाहिए बुलडोजर एक्शन होना चाहिए और देहरादून को इन जेहादियों से आजाद करवाइए
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चार युगों में स्पष्ट अंतर का कारण देखिए :-
सतयुग-
देवता और दानव अलग अलग लोकों में रहते थे !
त्रेता युग-
देवता और दानव एक ही लोक में रहते थे ,
जैसे श्रीराम और रावण !
द्वापर युग-
देवता और दानव एक ही परिवार में रहते थे ,
जैसे धर्मराज युधिष्ठिर और दुर्योधन !
कलियुग-
देवता और दानव अब एक ही शरीर में रहते हैं ,
जैसे सनातनी होते हुये भी सैक्यूलर !!
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#औ_का
@sattire_nameles
चंदन गुप्ता हत्या केस को लेकर NIA कोर्ट के स्पेशल जज विवेकानंद शरण त्रिपाठी का फैसला
🫵🏻
3 जनवरी, 2025 को, NIA कोर्ट के स्पेशल जज विवेकानंद शरण त्रिपाठी (वी.एस. त्रिपाठी) ने 26 जनवरी, 2018 को कासगंज के अभिषेक उर्फ चंदन गुप्ता की क्रूर हत्या में मुस्लिम समुदाय के 28 आरोपियों को दोषी ठहराया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
यह भयावह हत्या चंदन की तिरंगा यात्रा के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोगों ने की थी।
आजीवन कारावास की सजा के अलावा, जज त्रिपाठी ने अपने फैसले में एक और महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है और वह है पैसे के लिए किसी का भी प्रतिनिधित्व करने के लिए महंगे वकीलों की तैयारी!
आज तक सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के किसी भी जज द्वारा इस मुद्दे पर कभी टिप्पणी नहीं की गई है।
सजा सुनाते हुए, जज त्रिपाठी ने अपराधियों को बचाने में शामिल राष्ट्रीय और विदेशी NGO की भूमिका पर सवाल उठाए और उन्हें रोकने के लिए अपने आदेश की एक कॉपी केंद्रीय गृह मंत्रालय और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को भेजी है।
जज त्रिपाठी ने अपने आदेश में कहा था कि, “इन एनजीओ को कहां और कौन फंडिंग कर रहा है, उनका अंतिम उद्देश्य क्या है, इसकी पूरी जांच करने की जरूरत है।
ऐसा आरोप है कि जब भी कोई आतंकवादी पकड़ा जाता है, तो ऐसे एनजीओ तुरंत उसका बचाव करने के लिए बहुत महंगे वकील उपलब्ध कराते हैं।
यह राष्ट्रीय सुरक्षा चिंता का विषय है।”
कोर्ट ने अपने आदेश में निम्नलिखित 7 एनजीओ/संगठनों के नाम दिए हैं।
1. सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस, मुंबई
2. पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज, दिल्ली
3. रिहाई मंच
4. अलायंस फॉर जस्टिस एंड अकाउंटेबिलिटी, न्यू यॉर्क
5. इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल, वॉशिंगटन डीसी
6. साउथ एशिया सॉलिडेरिटी ग्रुप, लंदन
7. जमीयत उलेमा हिंद
जस्टिस त्रिपाठी का यह आदेश वास्तव में ऐतिहासिक है और उन्होंने सरकार से समान मांग की है। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों की फीस सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होनी चाहिए और उनकी संपत्ति की घोषणा भी सार्वजनिक जानकारी के लिए प्रकाशित करनी चाहिए।
उन्होंने हर साल कितना आयकर चुकाया है, यह भी सार्वजनिक करना चाहिए; वकीलों की फीस केवल चेक/बैंकिंग चैनलों के माध्यम से ही वसूली जानी चाहिए; सुप्रीम कोर्ट के शीर्ष वकीलों से वकील फीस की प्राप्ति के बारे में शपथपत्र मांगने चाहिए कि उनकी फीस किसने चुकाई थी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किसी आतंकवादी संगठन को फंडिंग की गई थी या नहीं।
जज त्रिपाठी के इस ऐतिहासिक आदेश का सभी देशभक्त भारतीयों द्वारा स्वागत और समर्थन किया जाना चाहिए!
रोहिंग्या बांग्लादेशी घुसपैठियों को देश से निकालने की मांग करने वाली एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय की याचिका 2017 से लंबित है।
दो रोहिंग्या, मोहम्मद सलीमुल्लाह और मोहम्मद शाकिर, जो भिखारी जैसे दिखते थे और खराब हालत में रहते थे, उनके लिए छह उच्च स्तर के वकील सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए।
ये वकील थे - डॉ. राजीव धवन, प्रशांत भूषण, डॉ. अश्विनी कुमार, कॉलिन गोंसाल्विस, फली एस. नरीमन और कपिल सिब्बल।
जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय की याचिका का 10 महंगे शीर्ष वकील विरोध कर रहे हैं।
पूजा स्थल कानून को चुनौती देने वाली उपाध्याय की याचिका का 22 शीर्ष वकील विरोध करते हुए देखे गए हैं। इनमें सांसद, विधायक और पूर्व कानून मंत्री, गृह मंत्री, विदेश मंत्री और शिक्षा मंत्री भी शामिल हैं।
ऐसे शीर्ष वकीलों के कारण यह याचिका लंबे समय से लंबित है।
सिर्फ अक्टूबर 2024 में, एक अन्य NGO - सोशल ज्यूरिस्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की और केंद्र से "रोहिंग्या शरणार्थियों के बच्चों को" सरकारी स्कूलों में प्रवेश देने की अनुमति मांगी।
जब हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी कि रोहिंग्या विदेशी हैं और उनके पास देश में प्रवेश की कानूनी अनुमति नहीं है और वे देश की सुरक्षा के लिए खतरा हैं, तब यह NGO सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और SC ने कहा कि रोहिंग्याओं के बच्चों को शिक्षा दी जाएगी।
ऐसे कई वकील और NGO हैं, उन सभी के फंड की जांच होनी चाहिए।
ताकि हमारी निरंकुश और असंवेदनशील न्यायपालिका भी जवाबदेह बन सके ।
सिर्फ तीन तलाक पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को यूपी सरकार द्वारा घर देने के निर्णय का विरोध होना चाहिए... उत्तरप्रदेश सरकार का यह निर्णय हर तरीके से आलोचना योग्य है... संविधान प्रदत्त समानता के सिद्धांत का विरोधी है !
हिन्दू तलाक पीड़ित स्त्रियों को यह सुविधा क्यों नहीं दी जा रही है ? हर हिन्दू स्त्री को एलिमनी नहीं मिलती है... बमुश्किल शहरी क्षेत्रों की 5 % स्त्रियां एलिमनी, कानून की लंबी लड़ाई लड़कर ले पाती हैं....
यूपी में अपने वकील मित्रों से निवेदन करूँगा कि हाईकोर्ट में इस निर्णय की समीक्षा हेतु याचिका डालें ... प्रधानमंत्री ग्रह निर्माण योजना में मुस्लिमों को जितने घर मिले हैं....वह मुस्लिम स्त्रियों के ही नाम हैं... यूपी में तो इस योजना में मुस्लिम 50% beneficiary हैं....
मुस्लिमों में तलाक आसान है तो वहां पुनर्विवाह भी आसान है,खूब होते हैं... यह पक्का जानिए कि तलाकशुदा महिला.... पुनर्विवाह (निकाह) कर लेती है तो वह बना हुआ घर तो सरकार को कभी वापस नहीं करेगी ! न सरकार वापस माँग सकती है ! हलाला पश्चात यदि मुस्लिम पति ही अपनी तलाक शुदा पत्नी से निकाह कर लेता है तो गिफ्ट में मिले इस नए मकान का क्या होगा ? भ्रष्टाचार और दिखावटी (फ़र्ज़ी ) तलाक के मामले सामने आएंगे..
सिर्फ मुस्लिम तलाकशुदा महिलाओं को घर देना,तुष्टिकरण की पराकाष्ठा है... निरीह हिन्दू स्त्रियों के मुँह पर तमाचा है.... हमें इसका विरोध करना चाहिए !
Courtesy fb post pawan Saxena
कभी मीट भात खाकर
कभी जाति
कभी भाषा
कभी लिंग भेद के नाम पर वोट करने वाले हिंदुओं!!!
ठीक से समझो
बंगाल में हिंदुओं ने जैसे ही हिंदू बनकर वोट किया....
देश की सीमाएं सुरक्षित होने लगी
इसीलिए
वोट देने से पहले देश समाज और धर्म की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले को पहचानो।।
👇🙏👌
डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के बयान की ऐसी धज्जियां उड़ाईं कि सुनने वाले भी हैरान रह गए! 🔥😄
राहुल गांधी बोले — "1980 में मैं और प्रियंका घर में लेई बनाकर रात को पोस्टर चिपकाते थे..."
इस पर सुधांशु त्रिवेदी ने तंज कसते हुए कहा — "Z सिक्योरिटी में रहने वाले राहुल-प्रियंका रात को लेई लेकर पोस्टर चिपकाने निकलते थे?" 🤔
फिर PMO में SC और OBC के साथ भेदभाव देखने के राहुल गांधी के दावे पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि 13-14 साल की उम्र में आखिर PMO के अंदर क्या-क्या देख लेते थे?
SIR के मुद्दे पर भी सुधांशु जी ने कहा कि राहुल गांधी खुद ही जांच की मांग करके अपने आरोपों को कमजोर कर रहे हैं।
धांसू डिबेट में एक के बाद एक सवालों की ऐसी बौछार हुई कि कांग्रेसियों की बेचैनी बढ़ गई! 🚩
#SudhanshuTrivedi
#RahulGandhi
#Congress
#PoliticalDebate
#Politics
@SudhanshuTrived@RahulGandhi
आपका एक शेयर इस अवैध मस्जिद को ध्वस्त कर सकता है।
आदरणीय मुख्य्मंत्री @myogiadityanath जी,
इस जि हादी अतिक्रमण को तुरंत ध्वस्त करवाएं, दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। भविष्य में बड़ी समस्या बन सकती है।
कांग्रेस ने पार कर दी भ्रष्टाचार की सारी हदें!
कर्नाटक में मुर्दों के खाते में भेजे जा रहे पैसे...
'गृहलक्ष्मी' योजना में महा-फर्जीवाड़ा कर डकार गए ₹128 करोड़!
यही है राहुल गांधी के खटाखट मॉडल की असलियत!
Cockroach 🪳 जनता पार्टी का आगंकी कनेक्शन एक बार फिर साबित हो गया।
इनका एक कॉकरोच 🪳 लीडर मुनावर पाकिस्तानी भिखारिस्तानी शाहिद अफ़रीदी से मिल रहा है।🥹🥹
यह कीड़े मकोड़े मुस्लिम मुस्लिम की राजनीति करना चाहते है इसलिए हिंदू मुस्लिम जैसी चीज समझ नहीं आएगी।🧐
यह तिलचट्टे देश विरोधी एजेंडा चला रहे है बस।
यह वही अफ़रीदी है जो ऑपरेशन सिंदूर का मज़ाक़ उड़ाया था और पहलगाम हमले पर हँसा था।🧐
5 टाइम का नमाजवादी यदि बॉम्बे फोड़े फिर भी उसके मजहब पर न जाए। चलो ठीक है, लेकिन
मजहब पर ना भी जाए तो नाम अकबर, अब्दुल, कसाब, और रहमान डकैत ही होगा न, समझे?
बात सन 1853 की है एक अंग्रेज अधिकारी ने
काशी के काल भैरव को चुनौती दे डाली ।
उसके बाद भैरव बाबा ने जो किया वो बिल्कुल अलग लेवल इलाज था 👇
जय काल भैरव। जय काशी विश्वनाथ 🙏