"सिर सांटे, रूंख रहे, तो भी सस्तो जांण"
ये अमर वाक्य उस महान बलिदान की गवाही देता है, जब अमृता देवी बिश्नोई जी ने खेजड़ी की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर किए थे। उनके साथ 363 अन्य लोगों ने भी खेजड़ी वृक्षों को बचाने में अपने जीवन का बलिदान दिया था।
आज राजस्थान में उसी खेजड़ी को बचाने की पुकार एक बार फिर गूंज रही है। बीकानेर में प्रदेशभर से उमड़ा ये जनसैलाब पेड़ों की रक्षा, जीवन की सुरक्षा का संदेश दे रहा है।
भाजपा सरकार के कुशासन में विकास के नाम पर खेजड़ी के लाखों पेड़ों की कटाई एक भयावह पर्यावरणीय त्रासदी है। एक ओर सरकार जहां हरियाळो राजस्थान जैसे अभियान चलाकर खुद को पर्यावरण संरक्षण की प्रहरी का ढोंग कर रही है, वहीं दूसर�� ओर हजारों साल पुराने रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ कहे जाने वाले खेजड़ी की अंधाधुंध कटाई पर मौन बैठी है।
राज्य सरकार को इस संवेदनशील मुद्दे का संज्ञान लेना चाहिए एवं पेड़ों की कटाई पर तत्काल रोक लगाकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और पर्यावरण संरक्षण क�� लिए कठोर नीति लागू करनी चाहिए। @RajCMO
#खेजड़ी_बचाओ
"सिर सांटे, रूंख रहे, तो भी सस्तो जांण"
ये अमर वाक्य उस महान बलिदान की गवाही देता है, जब अमृता देवी बिश्नोई जी ने खेजड़ी की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर किए थे। उनके साथ 363 अन्य लोगों ने भी खेजड़ी वृक्षों को बचाने में अपने जीवन का बलिदान दिया था।
आज राजस्थान में उसी खेजड़ी को बचाने की पुकार एक बार फिर गूंज रही है। बीकानेर में प्रदेशभर से उमड़ा ये जनसैलाब पेड़ों की रक्षा, जीवन की सुरक्षा का संदेश दे रहा है।
भाजपा सरकार के कुशासन में विकास के नाम पर खेजड़ी के लाखों पेड़ों की कटाई एक भयावह पर्यावरणीय त्रासदी है। एक ओर सरकार जहां हरियाळो राजस्थान जैसे अभिया�� चलाकर खुद को पर्यावरण संरक्षण की प्रहरी का ढोंग कर रही है, वहीं दूसरी ओर हजारों साल पुराने रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ कहे जाने वाले खेजड़ी की अंधाधुंध कटाई पर मौन बैठी है।
राज्य सरकार को इस संवेदनशील मुद्दे का संज्ञान लेना चाहिए एवं पेड़ों की कटाई पर तत्काल रोक लगाकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और पर्यावरण संरक्षण के लिए कठोर नीति लागू करनी चाहिए। @RajCMO
#खेजड़ी_बचाओ
“सिर साँठे रूंख रहे तो भी सस्तो जाण"
खेजड़ी साधारण पेड़ नहीं, यह हमारे लिए देववृक्ष है। जो हमारी आस्था और भावनाओं से जुड़ा है। हमारे यहाँ खेजड़ी की पूजा की जाती हैं। मैं स्वयं भी खेजड़ी की पूजा करती हूँ। जिसकी हम पूजा करें, उस देवता का संरक्षण हमारा दायित्व है।
राजनीति से ऊपर ���ठकर हमें इसके संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए। इसे बचाना चाहिए। मैं खेजड़ी और ओरण (गौचर भूमि) को बचाने की मुहिम में सबके साथ हूँ।
#Bikaner #Orans #Jaisalmer
खेजड़ी बचाओ आंदोलन।
प्रकृति, परंपरा और भविष्य की रक्षा का संकल्प।
खेजड़ी केवल एक वृक्ष नहीं, यह मरुस्थल की जीवनरेखा, हमारी संस्कृति और पर्यावरण संतुलन की पहचान है।
सरकार की पर्यावरण-विरोधी नीतियों के कारण खेजड़ी और प्रकृति पर बढ़ते खतर��� के खिलाफ अब निर्णायक संघर्ष का समय है।
आइए, खेजड़ी की रक्षा के लिए एकजुट हों। यह लड़ाई केवल पेड़ों की नहीं, आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की है। आपकी उपस्थिति ही इस आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत बनेगी।
दिनांक:- 02 फरवरी 2026
स्थान:- बीकानेर महापड़ाव
आप सभी पर्यावरण प्रेमी अधिक से अधिक संख्या में पधारें और इस ऐतिहासिक आंदोलन को सफल बनाएं।
#खेजड़ी_बचाओ_महापड़ाव
खेजड़ी बचाओ महा पड़ाव….!!!
ऐसा तगड़ा माहौल….
और ऐसी सकारात्मक ऊर्जा….
पहली बार देखने को मिल रही है….!!!
पूरी उम्मीद है कि मामले का हल ज़रूर निकलेगा…!!
#खेजड़ी_बचाओ_महापड़ाव
@alokrajRSSB नमस्कार सर
बार-बार आप जो Normalization कर रहें हो इस पूरे खेल को बंद करो | आप यदि 247 नंबर ला रहें हो और आपके 242 नंबर कर दे आपको कैसा लगेगा? किसी परीक्षार्थी के नंबर किस आधार पर कम कर सकते हो?
एक तो आरक्षण ले डूबा दूसरी ओर ये Normalization आखिर क्या चल रहा हैं?
लोक देवता वीर तेजाजी महाराज की जन्म स्थली खरनाल व बिश्नोई समाज की आस्था के प्रमुख केंद्र,गुरु जम्भेश्वर भगवान के समाधि स्थल मुकाम को धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने को लेकर केंद्र सरकार के पास कोई कार्य योजना नहीं है,अभी चल रहे लोक सभा के शीतकालीन सत्र के प्रथम दिन सोमवार को मेरे द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब में केंद्रीय पर्यटन मंत्री श्री @gssjodhpur ने यह जानकारी सदन में दी है | मैंने मे���े मूल प्रश्न में खरनाल व मुकाम दोनों का जिक्र किया गया था मगर अपने जवाब में केंद्रीय पर्यटन मंत्री द्वारा मुकाम शब्द का जिक्र तक नहीं करना पूर्णतया गलत है,विगत सत्र में भी मैंने दोनों स्थलों के विकास को लेकर प्रश्न पूछा था जिस पर केंद्रीय मंत्री ने इनकार कर दिया वहीं इस सत्र में सोमवार को पहले ही दिन जहां तेजाजी के जन्म स्थली के आस - पास विकास को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं होने का जिक्र किया वहीं मुकाम का जिक्र तक मंत्री जी ने नहीं किया | केंद्रीय पर्यटन मंत्री शेखावत स्वयं राजस्थान से आते है मगर उन्हें लोक देवताओं से जुड़े इन प्रमुख धर्म स्थलों के विकास ��े उन्हें कोई मतलब नहीं है ,अगर प्रस्ताव नही आये हुए है वो स्वयं प्रस्ताव मंगवा सकते थे मगर प्रश्न के जवाब की भाषा से मंत्री जी की मंशा स्पष्ट नजर आ रही है,मैं जल्द ही प्रधानमंत्री जी को इन दोनों स्थानों के विकास को लेकर पत्र लिखूंगा |
@tourismgoi @RLPINDIAorg
गजेन्द्र सिंह शेखावत साहब,
जोधपुर की सियासी फ़िज़ा में आपकी जीत का पूरा ढांचा बिश्नोई और जाट समाज की ताइद, भरोसे और ��नमत पर खड़ा रहा है– यह हक़ीक़त इतनी रौशन है कि इसे कोई भी सियासी बयान धुंधला नहीं कर सकता।
सच यह है कि इन दोनों समाजों की हिमायत के बिना न आपका क़द इतना ऊँचा होता और �� ही दिल्ली तक जाने वाली सियासी राह इतनी हमवार होती।
मगर अफ़सोस, जिस कौम ने आपको सर-आँखों पर बिठाया,
उसी कौम के लोकदेवताओं और आस्थाओं के प्रति आपका यह संगदिल, तंग-नज़र और मुतअस्सिब रवैया न सिर्फ़ हैरान करता है, बल्कि आपकी असल सियासी सोच को भी बेनक़ाब करता है।
जम्भेश्वर भगवान के मुकाम जैसे पवित्र तीर्थ को बजट से महरूम रखना—
यह कोई चूक नहीं, बल्कि एक सियासी अदावत की बू देता फ़ैसला है।
और हनुमा��� बेनीवाल के प्रश्न में “मुकाम” का साफ़ ज़िक्र होने के बावजूद आपका नाम तक न लेना—
यह जान-बूझकर की गई बे-एहतरामी है, जो अब आपकी नीयत पर कई सवाल खड़े करती है।
जो समाज आपकी सियासत को साँसें देता रहा,
उनकी आस्थाओं को यूं कुचलना—
यह न सिर्फ़ नाइंसाफ़ी है, बल्कि एक सोज़िश्ताना तौहीन है, ज���से अब किसी भी क़ीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
और अब, वक़्त आ गया है कि
बिश्नोई और जाट समाज—दोनों—अपनी ख़ामोशी का गला घोंटकर,
इस सियासी तकब्बुर और बेख़याली के खिलाफ़ बुलंद आवाज़ उठाएँ।
क्योंकि जो नेता आपकी आस्था का मान नहीं रख सकता,
वह आपके वोटों का भी कभी हक़दार नहीं हो सकता।
@gssjodhpur @kkvishnoibjp @AnantramBhanwar @biharibishnoi @bishnoikuldeep @bbhavyabishnoi @hanumanbeniwal @narendramodi @AmitShah