हरियाणा पुलिस के हमारे इन योद्धाओं को में सैल्यूट करता हूं, जो शंभू बॉर्डर पर इन तथाकथित आढ़ती रूपी ब्लैकमेलर दंगाइयों के सामने चट्टान की तरह खड़े हैं। अब तक 2 पुलिसकर्मी अपनी जान तक दे चुके हैं, परंतू भारत की राजधानी दिल्ली तक जाने के लिए कोई मौका नहीं दिया है। और एक बार सैल्यूट करता हूं इन बीर बहादुर जवानों को। जय हिन्द...
मेरा कोई अन्नदाता नहीं है..!
मैं मेहनत करके अपने एवं अपने परिवार का पेट भरती हूं.
इसीलिए, किसी को भी अन्नदाता कहकर मेरी मेहनत को शर्मिंदा व अपमानित न करें.
क्योंकि, जितनी मुझे अन्न की जरूरत है उतनी ही किसान को भी उसकी उपज बेचने की जरूरत है.
इस तरह... हम एक दूसरे के पूरक हैं...
ना किसान दाता है और ना ही मैं याचक.
इसका कारण बिल्कुल स्पष्ट है कि कोई किसान यह नहीं कहता कि मैं अपने परिवार के लिए पर्याप्त अन्न के अलावा सारी उपज दान करूंगा.
सो, कृपया जबरदस्ती का अन्नदाता हम पर ना थोपें.
क्योंकि, अगर सही मायने में इस देश में कोई दाता है... तो वह "करदाता" है जो अपनी कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा देश की उन्नति के लिए प्रदान करता है.
वह "करदाता".... जिसका कर पहले कटता है और तनख्वाह बाद में आती है.
वह "करदाता"... जिसके कर से इन तथाकथित अन्नदाताओं को कई प्रकार की सब्सिडियां एवं कर्ज माफी मिलती है.
और हाँ.... अगर इसी तरह अन्नदाता और पानीदाता चलता रहा तो कल को जीवन दाता (डॉक्टर), न्यायदाता (जज, वकील) ज्ञानदाता (शिक्षक) ईंधनदाता (पेट्रोल पंप मालिक) इत्यादि दाताओं के संगठन भी प्रदर्शन के नाम पर सडकें रोक कर अराजकता फैलाने की प्रेरणा लेते रहेंगे...!
है तो ये थोड़ी कठोर भाषा... लेकिन, सच्चाई यही है...!!
@RubikaLiyaquat आगर ऐसी घटनाओं पर सरकार एवं न्यायालय रोक नहीं लगा सकते तो इनको बर्खास्त ही कर देना चाहिए बहुत ही शर्मनाक है
क्यों नही ऐसा कानून बनता कि इन जैसे जानवरों को बीच च��राहे पर काट देना चाहिए जो एक सवक बन जाए जानवरों के लिए। विडीयो मैं दिखने पर भी सरकार एवं न्यायालय सवूत मैं उलझेगा फिर