@AmanChopra_ धन्य हो मोदी सरकार का जिनकी वजह से लोकतंत्र को मजबूती देने वाले पत्रकारिता के दीमकों की पहचान हो सकी है।
1. किसान आंदोलन करे तो ये दीमक उसे खालिस्तानी बताते हैं।
2. बेरोजगार छात्र आंदोलन करें तो ये बेरोजगारी के फायदे बताने लगते हैं।
3. अब सोनम वांगचुक को देश���्रोही बता रहे हैं।
5 साल पहले यानी 2020 ���ें जब साकेत नगरी की खुदाई हुई थी तो वहां पर सम्राट अशोक कालीन प्राप्त प्राचीन अवशेषों और कलाकृतियों को संरक्षित करने की याचिका को पूरी तरह से तुच्छ बताते हुए किसने खारिज किया था ?
याचिकाकर्ता बौद्ध भिक्षु थे. उनकी केवल एक छोटी सी मांग थी की अवशेष बौद्ध सभ्यता दौर के हैं. इन्हें सुरक्षित रखकर जांच की जाए ।
सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मनुवादी जज अरुण मिश्रा को गुस्सा आ गया उन्होंने पूजनीय बौद्ध भिक्षुओं को अपमानित किया, अनाप शनाप बोला और एक एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगा दिया.
और एक काल्पनिक जिसका कोई प्रामाणिक साक्ष्य नहीं है उसके पक्ष में फैसला दिया ।
तब उस समय क्या बौद्ध धर्म का अपमान नही हुआ ? बौद्ध भिक्षुओं का अपमान नही हुआ. इतिहासकार डॉ राजेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा था अवशेष बौद्ध कलाकृतिय���ं लग रही हैं.
#We_Stand_With_BR_Gavai
@REAL___HINDUVT गया जी को भी जोड़ लीजिए उनका भी आशीर्वाद है। उड़ीसा की तरफ चुनाव आयेगा तो जगन्नाथ जी का भी आशीर्वाद ���ोगा और झारखंड का चुनाव आने पर देवघर का भी आशीर्वाद मिलेगा।
@chitraaum बात महिलाओं के सम्मान की है ही नहीं बात सिर्फ इतनी है कि बाबा ���े "घर के बाहर सिंगल" पर काउंटर क्यों किया। ये न बोला होता तो अपुन को महिला सम्मान से कोई लेना देना नहीं होता। अपुन तो बस अजैविक का भजन जपता है।
@kpmaurya1@narendramodi इससे हास्यास्पद क्या ही होगा, विपक्षी नेता ने मां को कुछ कहा भी नहीं।
जबकि इन्होंने राहुल को बछड़ा और उनकी मां को जर्सी गाय बोला। RSS ने दुष्प्रचार में बार डांसर तक बनाया। भाजपा के बड़े नेताओं की भाषा रोजाना निम्नता के रिकॉर्ड तोड़ रही है।
और पीएम चुनावी आंसू बहा रहे हैं।
@kpmaurya1 बेरोजगारी अपने रिकॉर्ड तोड़ेगी,सरकार भर्तियां निकालेगी नहीं, आउटसोर्स��ंग के जरिए आरक्षण को ताक पर रखकर, खास-खास को पदों पर भरा जायेगा।
इससे सामाजिक न्याय डाउनवर्ड होगा...
इसे आप उपलब्धि मान रहे हैं?