THIS IS MASSIVE BRUTAL 🔥🔥
UPI was India’s pride.
Built to stay free.
Dr Manmohan Singh planned the project.
Law kept it charge-free for the people.
Then Modi arrived.
Cut the ribbon.
Took the credit.
Sold Digital India as his personal invention.
And now?
Charges on UPI.
Gurdeep Sappal says the real pressure is from America.
And this government folds.
The man who marketed free UPI…
surrenders it the moment power asks for rent.
Build nothing.
Steal the applause.
Tax the one thing that worked.
Manmohan built the system.
Modi built the toll booth. 🗿💸🔥😭
मोदी सरकार को RBI से ₹3 लाख करोड़ डिविडेंड,
बैंकों का ₹4.11 लाख करोड़ मुनाफा,
NPCI का ₹1,888 करोड़ सरप्लस...
फिर भी जनता से UPI पर चार्ज क्यों?
डिजिटल इंडिया नहीं,
PM का डिजिटल वसूली मॉडल!
The whole concept of PayTM is “Pay to Modi”…
— Rahul Gandhi Ji in 2016
No matter how much BJP mocks him, he always turns out be correct. The man was never wrong….
प्रोपेगैंडा का पर्दाफ़ाश 🚨⚡
राहुल कंवल कन्हैया कुमार का इंटरव्यू ले रहे थे और UPI पेमेंट के लिए नरेंद्र मोदी की तारीफ़ कर रहे थे
कन्हैया ने सिर्फ़ 40 सेकंड में उनके प्रोपेगैंडा की धज्जियाँ उड़ा दीं और बताया कि कांग्रेस ने ऑनलाइन मनी ट्रांसफ़र को कैसे आकार दिया 🔥
बेशर्म @rahulkanwal पूरे इंटरव्यू में आम गोदी एंकर की तरह BJP के लिए बैटिंग कर रहे थे।
बहुत बढ़िया #KanhaiyaKumar 👏
आदिवासियों के 30 से ज़्यादा बच्चे इस पानी को पी कर मर गए।
इंदौर में गंदा पानी पीने से कितनों की मौत हुई। कोई सबक मिला था?
इस नल के पानी की एक बूँद महामानव अपने जुबान पर रख कर दिखाएँ।मोहन जी आप पी पाएंगे?
यही पानी भाजपाई अपने बच्चों को पिला पायेंगे ?
नरेंद्र मोदी ने पहले लोगों से कहा- UPI transaction करो, लेकिन अब उसी पर टैक्स लगा रहे हैं।
• पिछले साल 2025-26 में टोटल UPI ट्रांजेक्शन था- ₹314 लाख करोड़
• जिसका 66% मतलब ₹207 लाख करोड़ ₹2000 वाले transaction से ज़्यादा था
दरअसल, मोदी को वसूली की आदत है- वो जैसे ही लोगों को खर्च करते हुए देखते हैं, वसूली करने पहुंच जाते हैं।
ये दिखाता है कि इनकी नीयत में ही खोट है। इन्हें जनता की कोई चिंता नहीं है।
: AICC सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म चेयरपर्सन @SupriyaShrinate जी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से प्रेस कांफ्रेंस में सवाल करने वाली महिला पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव परेशान हो गई है ये बताते कि मुझे
कोई विपक्ष के नेता नहीं भेजा था..
लेकिन फिर भी ट्रेलिंग गैंग उसके पोस्ट में गंदे गंदे कमेंट किए जा रही है..
मै इस बहन से इतना ही कहूंगा यही करने के लिए हर दिन करोड़ों रूपये खर्चा किए जाते है...
“ये प्रेस वार्ता क्यों लिखा है?इसे तो होना चाहिए प्रेस संबोधन” : महिला पत्रकार
जब हिम्मत नहीं है मीडिया के सवालों का जवाब देने का तो फालतू में ही प्रेस कांफ्रेंस कर बैठे 🙁
‘नारी वंदन’ और ‘स्वतंत्र पत्रकारिता’ दोनों को चुनौती देता उप्र भाजपा का शासन-प्रशासन एक ईमानदार महिला पत्रकार की जान के पीछे सिर्फ़ इसलिए पड़ गया है क्योंकि उसने मुख्यमंत्री जी से ‘सवाल’ करना चाहा था।
भाजपा पत्रकारों को मूक श्रोता बनाना चाहती है।
तानाशाही और दानाशाही को चुनौती देनेवाली साहसिक पत्रकारिता की आवाज़ अब और नहीं दबाई जा सकती है।
पत्रकारों का अगर कोई संगठन सक्रिय हो तो वो संज्ञान ले और महिला आयोग भी।
घोर निंदनीय!