फा���नली.. योगजी In Action 🔥
UP पुलिस ने लखनऊ में जबरन सड़क रोककर
ईरानी धार्मिक कट्टरपंथी खामनेई के लिए उपद्रव कर रहे मज़हबी कट्टरपंथियों पर लाठीयां बरसाईं
3000 से ज़्यादा जूते चप्पल बिखरे पड़��� मिले
BSD वालों UP पुलिस से निपट नहीं पा रहे
इजराइल से लड़ने की बात कर रहे.. दोगले🖐️
1. डॉ. अदील अहमद राठर — 360 किलो RDX और असॉल्ट राइफल्स के साथ गिरफ़्तार
2. डॉ. मुझमिल शकील — 360 किलो RDX और असॉल्ट राइफल्स के साथ पकड़े गए
3. अहमद मोहियुद्दीन सय्यद — “रिसिन” ज़हर के साथ गिरफ़्तार
4. ज़ुबैर हंगरगेकर — IED मैनुअल और अल-कायदा से जुड़े लिंक के साथ गिरफ्तार
जब अपने ही देश में ऐसे गद्दार और उनको सपोर्ट करने वाले बैठे हो तो दुश्मनों की क्या ही जरूरत है ����
जम्मू कश्मीर श्रीनगर के एक दरगाह में लगे अशोक चिन्ह को तोड़ दिया गया
भारत की आत्मा का अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे
अशोक चक्र के प्रतीक को फाड़ना सिर्फ अनादर नहीं है यह राष्ट्रद्रोह है
जहां इनकी संख्या बढ़ेगी इनका आतंक बढ़ेगा
इनका इलाज योगी स्टाइल बुलडोजर से ही संभव है
��्यू वर्ल्ड ऑर्डर दुनिया में आकार ले रहा है।
सबसे बड़ा दांव अमेरिका के नेतृत्व में पश्चिम के वर्चस्व पर लगा है। डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और उनकी सनक का खामियाजा यूरोप के देशों को भी भुगतना पड़ सकता है -और अब ये बात उन्हें भी समझ में आने लगी है।
चीन में हुए SCO सम्मेलन के बाद यूरोप और अमेरिका से आवाजें उठने लगी हैं कि अगर भारत दूसरे खेमे में चला गया, तो पश्चिम का पूरा खेल बिगड़ सकता है।
यही चेता��नी दे रहे हैं फिनलैंड के राष्ट्रपति एलेक्स स्टब। उन्होंने कहा:
"शंघाई सहयोग संगठन (SCO) में जो हमने देखा, वही है जो हम लंबे समय से पर्दे के पीछे होते हुए देख रहे हैं। एक प्रयास चल रहा है कि ग्लोबल वेस्ट की एकता को कमजोर किया जाए। मेरा संदेश न केवल अपने यूरोपीय सहयोगियों के लिए है, बल्कि विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए भी है -अगर हम खासकर ��ारत जैसे ग्लोबल साउथ देशों के साथ अधिक सहयोगी और सम्मानजनक विदेश नीति नहीं अपनाते, तो हम यह खेल हार जाएंगे।"
भारत में अधिकांश लोग पशु प्रेमी हैं -और यह प्रेम इंस्टाग्राम के क्यूट ऐनिमल वीडियो के चलन से बहुत पहले से रहा है। चूंकि भारतीय समाज लंबे समय तक ग्रामीण और कृषक समाज रहा है, इसलिए पशुओं और पक्षियों के साथ उसका रिश्ता सिर्फ सहानुभूति का नहीं, बल्कि सहचर्य का रहा है। इसमें गौधन से लेकर घोड़े, हाथी, बकरी जैसे पशु और कुत्ते भी शामिल ह���ं।
लेकिन हाल के वर्षों में एक शहरी वर्ग उभरा है, जिसे लगता है कि वही असली dog lovers है और बाकी सभी dog haters हैं। यह उनकी सबसे बड़ी गलतफहमी हैं। बाकी लोग भी कुत्तों से प्रेम करते हैं, लेकिन इतना नहीं कि कुत्तों के काटने की समस्या, जो अब महामारी का रूप ले चुकी है, को नजरअंदाज कर दें।
केंद्रीय मंत्री एस.पी. सिंह बघेल द्वारा 22 जुलाई को संसद में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष देश में लगभग 37 लाख कुत्ते के काटने के मामले दर्ज हुए, जबकि रेबीज़ की वजह से 54 लोगों की मौत हो गई। ये आंकड़े समस्या की गंभीरता को खुद बयान करते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया उसका dog lovers विरोध कर रहे हैं, उन्हें पहले ही सामूहिक प्रयास करने चाहिए थे जैसे नसबंदी, टीकाकरण और शेल्टर मैनेजमेंट- ताकि यह स्थिति ही पैदा न होती।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री कह रहें हैं
"श्रीनगर में चारों तरफ धमाके की आवाज...ये कोई सीजफायर न��ीं है। श्रीनगर के बीचोंबीच एयर डिफेंस यूनिट्स फायर कर रही हैं।"
देश का राजनीतिक नेतृत्व सेना को खुली छूट दे
भारतीय सशस्त्र बलों को पता है कि उन्हें क्या करना है
रणवीर अलाहबादिया की बातें सिर्फ़ एक "गलती" नहीं हैं, ये इसकी सोच का साफ़ आईना है। माँ-बाप जैसे पवित्र रिश्ते पर ऐसा comment करना सिर्फ़ शब्दों की चूक नहीं, बल्कि समाज के मूल्यों को तार-तार करने वाली मानसिकता है।
ये वो गलती नहीं ��ै जिसे माफ़ कर दिया जाए। ऐसे लोगों के पॉडकास्ट पर जाने के लिए B prak की तरह सबको मना कर देना चाहिए - क्या हम ऐसी बेहूदगी को प्लेटफॉर्म देकर समाज को गलत संदेश देना चाहते हैं?
रणवीर जैसे लोगों को यह समझना होगा कि "ट्रेंड" करने के चक्कर में वे कितनी हदें पार कर रहे हैं। समाज के मूल्यों के साथ खिलवाड़ करने की कीमत चुकानी पड़ती है।
#संस्कार_बचाओ #रणवीर_अलाहबादिया_माफ़ी_नहीं_चाहिए #सोशलमीडिया_की_गंदगी
ये और इनके जैसे कई लोगों ने सस्ती लोकप्रियता और hate farming को इंटरनेट पर धंधा बना लिया है.
पहले कुछ विवादास्पद बोलो, ट्रेंड में आओ, नेगेटिव पब्लिसिटी बटोरों। फिर जब मामला गरम हो जाए, तो एक फैंसी सा SORRY पोस्ट और इंस्टाग्राम स्टोरी डाल दो,
"हमारी नीयत गलत ��हीं थी, किसी की भावनाएं आहत हुई हों तो खेद है."
इसके बाद अगला खेल शुरू होता है-
कुछ बड़े इन्फ्लुएंसर्स को पैसे देकर अपने पक्ष में पोस्ट और वीडियो बनवाओ.
"यार, फलाना को मैं पर्सनली जानता हूं, वो ऐसा इंसान नहीं है, बस मजाक में निकल गया!"
अगर इससे भी बात नहीं बनती, तो किसी संगठन से विरोध करवा द��� ताकि जाति-धर्म, महिला-पुरुष का एंगल बन जाए. लोग पक्ष-विपक्ष में बंट जाएं और असली मुद्दा भटक जाए उल्टा, सहानुभूति भी मिल जाए!
यह सब तब तक नहीं रुकेगा जब तक इन्हें आर्थिक नुकसान नहीं होगा.
जब तक लोग इन्हें फॉलो करते रहेंगे, इनके वीडियो वायरल करते रहेंगे, इनकी ब्रांड डील्स चलती रहेंगी,तब तक ये बार-बार वही दोहराते रहेंगे.
इनकी कमाई ही विवादों से होती है. ब्रांड्स को भी जवाबदेह ठहराना होगा, जो ऐसे कंटेंट क्रिएटर्स को पैसा देते हैं. जब तक इनका रेवेन्यू ठप नहीं होगा, इनकी बेशर्मी बंद नहीं होगी.
जब तक फूहड़ता और अश्लीलता को लोकप्रियता मिलती रहेगी, इंटरनेट पर यह गंदगी बढ़ती रहेगी.
लेकिन सवाल उठता है-एक व्यूअर या इंटरनेट यूजर के तौर पर हम क्या कर सकते हैं?
बहुत से लोग ऐसे कंटेंट नहीं देखना चाहते, लेकिन प्लेटफॉर्म का एल्गोरिदम बार-बार इसे दिखात�� है.
दरअसल, ये जानबूझकर एक लूप क्रिएट करते हैं-
कुछ विवादास्पद बोलो → नेगेटिव प्रतिक्रिया आनी शुरू होती है → कंटेंट को पब्लिक अटेंशन मिलती है → प्लेटफॉर्म का एल्गोरिदम इसे और पुश करता है → आपके स्क्रीन पर बार-बार वही दिखने लगता है.
आप इस लूप को तोड़ सकते हैं-
चैनल पर जाइए और रिपोर्ट कीजिए.
ताकि यह लूप टूट सके.