एक मर्द का दर्द कोई नहीं देखता, वो हर पल अपने आसपास रहने वालों के इच्छाओं का बोझ उठाए हुए चलता है।
ये पोस्ट हर उस बेटे को समर्पित जो अपने प्रियजनों के लिए चुपचाप अपने खुशियों, अपनी इच्छाओं , अपने सपनों को हर दिन तिलांजलि दे देता है 😥😥
इससे पहले आपने इंसानों का इतना जबरदस्त आपसी तालमेल नहीं देखा होगा!
इंसान जब अनुशासन तालमेल और समर्पण को एक साथ जोड़ देता है तब कला सिर्फ दिखायी नहीं देती बल्कि इतिहास बन जाती है!
यह सिर्फ कोरियोग्राफी नहीं सेकड़ों लोगों की एक धड़कन बनकर चलती हुईं मेहनत है
रिपोर्टर: क्या मोदी सरकार विपक्षी शासित राज्यों के प्रति प्रतिशोधी रवैया अपना रही है?
उमर अब्दुल्ला : नहीं, मुझे कोई शिकायत नहीं है।
“अगर मोदी सरकार चाहती तो हमें घुटने टेकने पर मजबूर कर सकती थी। इसके बजाय, उसने हमें बाकी सभी से कहीं ज़्यादा धनराशि दी है।”🔥
राजा बलि की दानवीरता और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु उनके द्वारपाल बनने पर मजबूर हो गये थे तब मॉं लक्ष्मी ने राजा बलि को रक्षा सूत्र बांधकर उनसे भगवान विष्णु को मुक्त करने का वचन लिया,उस दिन से #रक्षाबंधन की शुरुआत हुई💖🙏🌹💫
जय हो🙏
शुभ रक्षाबंधन 💖 🙏 💖
#RakshaBandan 💖
कथा का संदेश:
सच्ची भक्ति में विधि-विधान से ज्यादा समर्पण और प्रेम आवश्यक है।
भगवान किसी के जाति, ज्ञान, या स्तर को नहीं देखते – वे केवल हृदय की भक्ति को देखते हैं।
कन्नप्पा नयनार जैसे भक्त आज भी "परम भक्त" माने जाते हैं।
🌟 भगवान शिव का वरदान:
भगवान शिव ने थिन्न�� को रोकते हुए कहा:
"वत्स, तुमने जो अनन्य भक्ति दिखाई, उससे मैं अत्यंत प्रसन्न हूं। तू मेरा सच्चा भक्त है।"
भगवान शिव ने उन्हें अपनी कृपा से दृष्टि लौटा दी और उन्हें "कन्नप्पा नयनार" का नाम दिया।
🔱 दूसरी आंख की बलि:
कुछ समय बा�� शिवलिंग की दूसरी आंख से भी रक्त बहने लगा। इस बार थिन्नन ने अपना पैर शिवलिंग पर रखा ताकि निशाना ठीक हो — क्योंकि वह अब एक आंख से देख नहीं सकते थे।
जैसे ही वह दूसरी आंख निकालने को तैयार हुए, तभी भगवान शिव साक्षात प्रकट हो गए!
शिवलिंग की एक आंख से खून बहने लगा। मुनिवर घबरा गए, पर थिन्नन ने आते ही देखा कि भगवान की आंख से खून निकल रहा है। उन्होंने देर न करते हुए अपनी ���क आंख नाखून से निकालकर शिवलिंग पर रख दी।
खून बहना बंद हो गया।
फूल अपने बालों में लगाकर चढ़ाते — यानी जैसा जानता था, वैसा प्रेमपूर्वक अर्पण करता था।
इस विधि को देखकर साधु शिवगिरी मुनिवर दुखी हो गए, पर भगवान शिव मुस्कराते रहे – क्योंकि वे भक्ति को विधि से ऊपर मानत��� हैं।
एक दिन भगवान शिव ने उनकी भक्ति की परीक्षा लेने का निश्चय किया।