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देश में लोकसभा और विधानसभा के परिसीमन का खाका तैयार! राजस्थान में लोकसभा की करीब 10 सीटें और विधानसभा की 66 सीटें बढ़ने की संभावना। ऐसे में राजस्थान में लोकसभा की कुल 35 सीटें और विधानसभा की कुल 266 सीटें हो जाएंगी। वहीं पूरे देश में लोकसभा की सीटें 543 से बढ़कर करीब 750 सीटें होने की संभावना। यानी पूरे देश में लोकसभा की 207 सीटें बढ़ सकती है। विश्वस्त सूत्रों के हवाल��� से खबर।
गोविंद सिंह डोटासरा की कल दिल्ली में मलिकार्जुन खड़गे ने उनके काम की तारीफ की। बताया जा रहा है कि राजस्थान कांग्रेस का मॉडल पूरे देश में कांग्रेस लागू करेगी। जिससे सभी राज्यों में कांग्रेस मजबूत हो। @GovindDotasra
कांग्रेस अब 1 महीने पूरा भाजपा सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरेगी। ब्लॉक, जिला और प्रदेश स्तर प��� विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करेगी। सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा, चिकित्सा जैसे मुद्दों को कांग्रेस उठाएगी। अगले 1 -2 दिन में कांग्रेस सर्कुलर जारी करेगी। राजस्थान में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के नेतृत्व में कांग्रेस करेगी भाजपा सरकार का विरोध।
आदेश रावल जी, फिक्स एजेंडा ना चलाया कीजिये।
25 सितम्बर 2022 को ���ो घटनाक्रम हुआ था तब पर्यवेक्षक मलिकार्जुन खड़गे और पायलट के समर्थक नेता अजय माकन जो बतौर पर्यवेक्षक आये थे उनसे उन सभी सरकार बचाने वाले 100 विधायकों ने कहा था कि उनमे से किसी को सीएम बना दीजिये सब सहमत है, लेकिन कांग्रेस की सरकार गिराने की कोशिश करने वाले सचिन पायलट क�� सीएम बनाने का प्रस्ताव पर्यवेक्षक लाए थे इसलिए विधायको ने सिर्फ पायलट की खिलाफत की ना कि हाईकमान की। उस वक़्त अशोक गहलोत को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की बात नहीं हुयी, वो सिर्फ साजिश थी। पायलट के समर्थक नेता अजय माकन उस साजिश में योगदान दे रहे थे। अजय माकन का बाद में एक वीडियो भी वायरल हुआ था जिसमें वे गहलोत पर तंज कर रहे थे। आदेश रावल जी आप मानेसर प्रकरण पर क्यों चुप हैं, बार बार 25 सितम्बर को य��द करते हो, खुद की पार्टी की सरकार गिराने की किसने कोशिश की थी।
ये सब सच्चाई है -
@AadeshRawal
नेशनल मीडिया, प्रायोजित नैरेटिव और राजस्थान कांग्रेस का मौजूदा घटनाक्रम
दिल्ली में साल 2016 से 2023 तक विभिन्न बड़े मीडिया संस्��ानों में कार्य करने के दौरान मुझे राष्ट्रीय मीडिया की कार्यशैली को बेहद करीब से देखने और समझने का अवसर मिला। इस अनुभव के आधार पर मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि देश के अनेक प्रतिष्ठित माने जाने वाले पत्रकारों की राज्यों की राजनीति और जमीनी घटनाक्रमों पर पकड़ उतनी मजबूत नहीं होती, जितनी आम धारणा बनाई जाती है।
वास्तविकता यह है कि अधिकांश राष्ट्रीय मीडिया के पत्रकार राज्यों से जुड़ी राजनीतिक खबरों, समीकरणों और अंदरूनी घटनाक्रमों की जानकारी के ��िए क्षेत्रीय मीडिया के पत्रकारों पर निर्भर रहते हैं। चाहे राजस्थान की राजनीति हो, बिहार में सत्ता परिवर्तन के घटनाक्रम हों, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, केरल, बंगाल या अन्य राज्यों की उठापटक, दिल्ली में बैठा पत्रकार अक्सर स्थानीय पत्रकारों द्वारा जुटाई गई सूचनाओं के आधार पर ही अपनी रिपोर्ट तैयार करता है।
मैंने स्वयं कई अवसरों पर देखा है कि राष्ट्रीय मीडिया के बड़े-बड़े पत्रकार राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियों को समझने और खबरों की पुष्टि करने के लिए क्षेत्रीय पत्रकारों से लगातार संपर्क साधते थे। लेकिन विडंबना यह है कि जब खबर प्रसारित होती है तो उसका श्रेय राष्ट्रीय मीडिया को मिलता है, जबकि जमीनी तथ्य और सूचनाएँ क्षेत्रीय पत्रकारों की मेहनत का परिणाम होती हैं।
राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 इसका एक बड़ा उदाहरण है। टिकट वितरण से लेकर मुख्यमंत्री चयन की लंबी प्रक्रिया और उसके ब��द सरकार के भीतर उत्पन्न राजनीतिक संकट तक, हमने पूर��� घटनाक्रम को बेहद नजदीक से कवर किया। उस दौर में भी राष्ट्रीय मीडिया के अनेक पत्रकार पूर्व निर्धारित एजेंडे के तहत खबरें चला रहे थे, जबकि वास्तविक जानकारी के लिए वे राजस्थान के पत्रकारों पर ही निर्भर थे।
दिल्ली स्थित 24 अकबर रोड और 10 जनपथ की बैठकों से लेकर जोधपुर और राजस्थान हाउस में होने वाली राजनीतिक गतिविधियों तक, अधिकांश सूचनाएँ क्षेत्रीय पत्रकारों के माध्यम से ही बाहर आती थीं। इसके बा���जूद राष्ट्रीय स्तर पर अक्सर ऐसा माहौल बनाया जाता था मानो राजनीतिक घटनाक्रमों की पूरी समझ केवल दिल्ली के कुछ चुनिंदा पत्रकारों के पास ही हो।
आज राजस्थान कांग्रेस से जुड़े हालिया घटनाक्रम को देखकर वही पुराना पैटर्न फिर दिखाई देता है। कुछ वरिष्ठ पत्रकार एक विशेष राजनीतिक नैरेटिव को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। प्रदेश के कुछ छोटे-मोटे नेताओं को यह विश्वास दिलाया जाता है कि यदि वे कुछ व���शेष बयान देंगे तो उन्हें राष्ट्रीय मीडिया में प्रमुखता मिलेगी, केंद्रीय नेतृत्व का ध्यान आकर्षित होगा और उनकी राजनीतिक हैसियत बढ़ेगी। इसी लालच या भ्रम में कई नेता ऐसे बयान दे बैठते हैं जो न तो उनके राजनीतिक भविष्य के लिए लाभकारी होते हैं और न ही उस नेतृत्व के लिए जिसके प्रति वे अपनी निष्ठा व्यक्त करते हैं। अंततः उन्हें न कोई बड़ा राजनीतिक लाभ मिलता है और न ही संगठन में कोई विशेष स्थान। उलटे ऐसे बयान पार्टी के भीतर अनावश्यक विवाद और भ्रम की स्थिति पैदा करते हैं।
हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से जुड़े बयानों और उनके बाद उत्पन्�� राजनीतिक चर्चाओं को भी इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए। राजस्थान की राजनीति को समझने वाले लोग जानते हैं कि प्रदेश की वास्तविक परिस्थितियाँ और राजनीतिक समीकरण अक्सर दिल्ली में बैठकर बनाई गई धारणाओं से अलग होते हैं। लेकिन फिर भी कुछ पत्रकार प्रायोजित एजेंडे और पूर्व निर्धारित निष्कर्षों के आधार पर खबरों को प्रस्तुत करने का प्रयास करते हैं। कई टीवी बहसों, राजनीतिक रिपोर्टों और विश���लेषणों में यह दृष्टिकोण बार-बार सामने आया। कुछ नामों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएँ होती रही हैं कि उनकी रिपोर्टिंग और विश्लेषण अक्सर एक विशेष एजेंडे के अनुरूप दिखाई देते थे, जिसके कारण उनकी निष्पक्षता पर भी सवाल उठते रहे।
वास्तविकता यह है कि राजस्थान की राजनीति केवल किसी एक नेता, एक धड़े या एक नैरेटिव के इर्द-गिर्द नहीं घूमती। यहाँ के राजनीतिक समीकरण, सामाजिक संरचना, क्षेत्रीय प्रभाव, संगठनात्मक ताकत और नेतृत्व क्षमता जैसे अनेक कारकों से तय होते हैं। लेकिन राष्ट्रीय मीडिया के पत्रकारों का एक वर्ग अक्सर इन जटिलताओं को नजरअंदाज कर सरल और सनसनीखेज राजनीतिक कथानक प्रस्तुत करता है।1/2
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आदेश रावल जी, AICC सहित उत्तर भारत, दक्षिण भारत और पश्चिम भारत कांग्रेस की खबरों में राजस्थान से हमारे साथी पत्रकार दिनेश डांगी जी का कोई मुक़ाबला नहीं है, वे कभी किसी ए��ेंडे की ख़बरें नहीं चलाते है। कांग्रेस में कोई पत्ता हिलता है तो भी उनके पास सबसे पहले खबर पहुँच जाती है। बिना एजेंडे की और सबसे सटीक खबर देते है. डांगी जी लिखने में कभी लाग लपेट नहीं रखते। इसलिए एजेंडे वाली ख़बरों से बचना जरुरी है।
ये बात पब्लिक पर छोड़ देते है पब्लिक से पूछते है कि कांग्रेस में सबसे सटीक ख़बरें देने वाला कौन है ?
@AadeshRawal @dineshdangi84
राजस्थान में राज्यसभा की 3 सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन हो गया है। 2 सीटों पर भाजपा के सतीश पूनिया, अलका गुर्जर और 1 सीट पर कांग्रेस के नीरज डांगी ने ज���त दर्ज की है। आज नाम वापसी का समय खत्म होने के बाद तीनों उम्मीदवारों को निर्विरोध चुने जाने की घोषणा कर दी गई।
विधानसभा सचिव और चुनाव अधिकारी ने तीनों उम्मीदवारों के निर्वाचन सर्टिफिकेट जारी कर दिए हैं। राज्यसभा चुनावों के लिए 18 जून को वोटिंग होनी थी, लेकिन तीन सीटों पर तीन ही उम्मीदवार होने के कारण वोटिंग की जरूरत नहीं पड़ी। तीनों सांसदों का कार्यकाल जून 2032 तक रहेगा।
कांग्रेस राज के दौर���न राज्यसभा चुनावों के दौरान कड़ा मुकाबला होने के कारण विधायकों की बाड़ेबंदी की गई थी, लेकिन इस बार ऐसी जरूरत नहीं पड़ी। राज्यसभा की तीनों सीटों पर संख्या बल के हिसाब से 2 पर भाजपा और 1 पर कांग्रेस की जीत के समीकरण थे।
राज्यसभा से राज्यसभा के 10 सांसद हैं। कांगेस और बीजेपी दोनों के बराबर 5-5 सांसद हैं। अगले चुनावों के बाद से बीजेपी संख्या बल में कांग्रेस से आगे निकल जाएगी। अब 2 साल बाद राज्यसभा चुनाव होंगे।
बीेजपी से ये 5 राज्यसभा सांसद-: मदन राठौड़, घनश्याम तिवाड़ी, चुन्नीलाल गरासिया, सतीश पूनिया, अलका सिंह।
कांग्रेस ��े ये 5 राज्यसभा सांसद -: सोनिया गांधी, मुकुल वासनिक, रणदीप सिंह सुरजेवाला, प्रमोद तिवारी, नीरज डांगी।
अब 2 साल बाद जून 2028 में होंगे 4 सीटों पर राज्यसभा चुनाव
राजस्थान में अब 2 साल बाद जून 2028 में 4 सीटों पर राज्यसभा चुनाव होंगे। जून 2028 में कांग्रेस के राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला, मुकुल वासनिक, प्रमोद तिवारी, बीजेपी सांसद घनश्याम तिवाड़ी का कार्यकाल पूरा होगा।
सचिन पायलट को लेकर अपने बयान पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा मैंने जो कहा दिल से कहा है। मैंने किसी पर आरोप नहीं लगाया। जो घटनाएं हुई उन्हें मैं एक बार देश के सामने रखना चाहता था क्योंकि देश में एक माहौल बन गया था कि अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री रहने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष का पद स्वीकार नहीं किया। कौन उस पद पर नहीं रहना चाहता। मैंने तथ्य सामने रखे थे। अगर उनमें कोई तथ्य गलत है तो वे मुझसे बात कर सकते हैं, मैं उन्हें जवाब दे दूंगा।
25 सितंबर 2022 की घटना का खुलासा खुद अशोक गहलोत ने कर दिया!
उस दिन मैं दिल्ली में था और हमने रिपोर्ट किया था — कांग्रेस के कुछ लोग अशोक गहलोत के खिलाफ बड़ी साजिश रच रहे थे। वरना गहलोत सोनिया गांधी और अलाकमान के आदेश की अवहेलना करने वाले नहीं थे।
राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव से ठीक पहले इतनी जल्दबाजी में CLP बैठक बुलाने की कोई जरूरत नहीं थी। एक तरफ गहल���त को अध्यक्ष बनाने की चर्चा, दूसरी तरफ दिग्विजय सिंह को उनके खिलाफ तैयार किया जा रहा था।
गहलोत ने साजिश भांप ली। 25 सितंबर 2022 को बड़ा राजनीतिक भूचाल आया।
29 सितंबर को गहलोत ने सोनिया गांधी से मुलाकात की, माफी मांगी और पूरी साजिश की जानकारी दी। कुछ दिनों बाद सबसे पहली गाज प्रदेश प्रभारी पर गिरी।
उस समय कई लोगों ने मानेसर वाली घटना से भी ज्यादा 25 सितंबर को गंभीर माना। इस मामले में अशोक को बदनाम किया गया लेकिन असल में साजिश ही थी।
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इंडिया न्यूज के वरिष्ठ पत्रकार अजीत मेंदोला की रिपोर्ट के अनु���ार -
जयपुर में रविवार को अशोक गहलोत ने दिए बयान को राहुल गांधी ने गंभीरता से लिया, अब इस बयान पर राहुल गांधी खुद काम करेंगे, सच्चाई की तह तक जाएंगे।
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से बंद कर दिया है। ईरान की शीर्ष संयुक्त सैन्य कमान ने गुरुवार को इसका ऐलान किया है। ईरानी सेना ने कहा है कि किसी भी तेल टैंकर या कमर्शियल जहाज को इस समुद्री गलियारे से जाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। कमान की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि जो जहाज होर्मुज से गुजरने की कोशिश करेगा, उसक��� निशाना बनाते हुए गोली चलाई जाएगी। ऐसे में यहां से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी उनकी खुद की होगी।
#StraitOfHormuz #IranUSConflict #USStrikes
यूथ कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष उदयभानू चिब पहुँचे जयपुर, यूथ कांग्रेस प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष यशवीर सुरा, सुधींद्र मूढ़, अभिषेक चौधरी ने एयरपोर्ट पर किया स्वागत। @yashveershoora