Ayodhya gets its first Ram Navmi with Ram Lala smiling at his praja from his seat of power.
The ‘Shri’ of Ayodhya stands finally restored 🔥
Here’s to the one civilisation which will RECLAIM IT ALL 💪
#RamNavami
असुर नाग खग नर मुनि देवा।
आइ करहिं रघुनायक सेवा।।
जन्म महोत्सव रचहिं सुजाना।
करहिं राम कल कीरति गाना।।
असुर-नाग, पक्षी, मनुष्य, मुनि और देवता सब अयोध्या में आकर रघुनाथ जी की सेवा करते है���। विद्वान जन प्रभु के जन्म का महोत्सव मनाते हैं और श्री राम की सुंदर कीर्ति का गान करते हैं। #रामनवमी
Asur-Naag, Birds, Humans, Sages, and Devtas all converge in Ayodhya to serve Shri Raghunathji. People celebrate the auspicious occasion of the Prabhu's birth and sing praises of Shri Ram's glorious deeds. #RamNavami
श्री राम नवमी की पावन बेला में आज, श्री राम जन्मभूमि मंदिर में प्रभु श्री रामलला सरकार का दिव्य अभिषेक किया गया।
Divya Abhisheka of Prabhu Shri Ramlalla Sarkar at Shri Ram Janmabhoomi Mandir, on the pious ocassion of Shri Ram Navami.
Today's presentation of Kuchipudi commenced with a performance by Dr. Vasanth Kiran from Andhra Pradesh who gave a soulful performance of "Pibare Ramarasam."
Following this, Dr. Vedantam Ramalinga Sastry ji and his group presented Kuchipudi Prahlada Yakshaganam, showcasing the rich cultural heritage of this traditional dance form.
आज श्री राम राग सेवा के क्रम में प्रथमतः आंध्र प्रदेश के डॉ वसंत किरण ने 'पिबरे राम रसम' की भावपूर्ण प्रस्त��ति की।
तत्पश्चात डॉ वेदांत रामालिंगम शास्त्री जी तथा उनके समूह ने कुचिपुड़ी नृत्य के माध्यम से 'प्रहलाद यक्षगानम' की प्रस्तुति की।
भगवान श्री रामलला सरकार के दिव्य दर्शन - श्री राम जन्मभूमि मंदिर, अयोध्या धाम
माघ कृष्ण द्वादशी, विक्रमी संवत् २०८०
Divya Darshans of Bhagwan Shri Ram Lalla - Shri Ram Janmabhoomi Mandir, Ayodhya Dham
Magha Krishna Dwadashi, Vikrami Samvat 2080
अपने महा प्रासाद में भगवान श्री रामलला जी दिव्य आभूषणों और वस्त्रों से सज्ज होकर विराजमान हैं।
इन दिव्य आभूषणों का निर्माण अध्यात्म रामायण, श्रीमद्वाल्मीकि रामायण, श्रीरामचरिमानस तथा आलवन्दार स्तोत्र के अध्ययन और उनमें वर्णित श्रीराम की शास्त्रसम्मत शोभा के अनुरूप शोध और अध्ययन के उपरान्त किया गया है।
इस शोध के अनुरूप श्री यतींद्र मिश्र की परिकल्पना और निर्देशन से, इन आभूषणों का निर्माण श्री अंकुर आनन्द की संस्थान हरसहायमल श्यामलाल ज्वैलर्स, लखनऊ ने किया है।
भगवान बनारसी वस्त्र की पीताम्बर धोती तथा लाल रंग के पटुके / अंगवस्त्रम में सुशोभित हैं। इन वस्त्रों पर शुद्ध स्वर्ण की ज़री और तारों से काम किया गया है, जिनमें वैष्णव मंगल चिन्ह- शंख, पद्म, चक्र और मयूर अंकित हैं। इन वस्त्रों का निर्माण श्री अयोध्या धाम में रहकर दिल्ली के वस्त्र सज्जाकार श्री मनीष त्रिपाठी ने किया है।