दिनांक 11.07.2026 : जैसाकि सर्वविदित है कि बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी), दूसरी पार्टियों की तरह अपना राजनीतिक व चुनावी स्वार्थ साधने के लिये धरना-प्रदर्शन, सड़क जाम, हल्लाबोल, सरकारी व प्राइवेट सम्पत्तियों के तोड़फोड़ व दूसरी हिसंक घटनाओं तथा हवाहवाई वादों-दावों एवं मिथ्या प्रचार-प्रसार आदि के माध्यम से जनता को गुमराह करने आदि में विश्वास नहीं करती है।
अर्थात् बी.एस.पी. ऐसी तमाम राजनीतिक व चुनावी चालबाज़ियों से पूरी तरह से पाक-साफ देश की एकमात्र ऐसी अम्बेडकरवादी पार्टी है जो ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के सिद्धान्त व नीति पर चलकर यहाँ सर्वसमाज में भी ख़ासकर ग़रीबों, मज़दूरों, शोषितों-पीड़ितों व उपेक्षितों के हित व कल्याण हेतु समर्पित है, और जिसका जीता-जागता प्रमाण यहाँ उत्तर प्रदेश में बी.एस.पी. के नेतृत्व में चार बार रही सरकार में व्यापक जनहित, जनकल्याण व विकास का तथा अपराध-नियंत्रण व क़ानून-व्यवस्था के मामलों में ’क़ानून द्वारा क़ानून का बेहतरीन राज’ रहा है।
इससे यहाँ यूपी जैसे विशाल राज्य में एक आदर्श संवैधानिक सरकार देने के साथ-साथ यह भी सूरज की रौशनी की तरह पूरी तरह से स्पष्ट है कि बी.एस.पी., व���रोधी पार्टियों व उनके इशारे पर चलने वाले दलित संगठनों व पार्टियोें आदि की तरह छल व छलावा की राजनीति तथा उनके लिये मगरमच्छ के आँसू नहीं बहाती और ना ही संकीर्ण स्वार्थ हेतु गिरगिट की ही तरह रंग बदलती है, बल्कि करोड़ों दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों, मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के ��ाथ-साथ अपरकास्ट समाज के ग़रीबों के वास्तविक हित व कल्याण के लिये ’बहुजन समाज’ में समय-समय पर जन्मे महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों में भी ख़ासकर महात्मा ज्योतिबा फुले, श्री नारायणा गुरु, राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर व बहुजन नायक मान्यवर श्री कांशीराम जी के बताये रास्तों पर चलकर मुख्यतः सत्ता की मास्टर चाबी के माध्यम से ’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक उत्थान’ का महान लक्ष्य हासिल करना चाहती है।
और अब यहाँ ख़ासकर उत्तर प्रदेश विधानसभा के आगामी आमचुनाव में बी.एस.पी के प्रभाव को तेज़ी से आगे बढ़ता हुआ देखकर विरोधी पार्टियाँ में द्वेष व बेचैनी स्वाभाविक है और इसीलिये वे अपने साम, दाम, दण्ड, भेद आदि हथकण्डों के तहत् कुछ दलित संगठनों व पार्टियों आदि को आगे करके दलित व बहुजन समाज के अन्य विभिन्न अंगों को तरह-तरह से भटकाने व गुमराह करने में लगे हुये हैं,
जबकि शोषितों-पीड़ितों व उपेक्षितों को अच्छी तरह से मालूम है कि ’मा. बहन कुमारी मायावती जी’ के नेतृत्व वाली सरकार ही उनकी सभी राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक समस्याओं का उसी प्रकार से बेहतरीन निदान है जैसाकि उनकी सभी सरकारों में होता रहा है जब सत्ता की शक्ति, संसाधन व ऊर्जा तथा सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल भी हर स्तर पर सबके साथ न्याय एवं सबको न्याय दिलाने के लिये समर्पित व तत्पर रहा।
साथ ही, चुनाव नज़दीक आता देख विरोधी पार्टियाँ अपने हथकण्डों आदि के साथ-साथ दलित संगठनों व गुलाम मानसिकता रखने वाले लोगों के कंधे पर बंदूक रखकर बी.एस.पी. व बाबा साहेब के मूवमेन्ट-विरोधी राजनीतिक स्वार्थ का अपना खेल आगे बढ़ाना चाहती हैं, जिससे सर्वसमाज के लोगों को व विशेषकर दलित एवं ’बहुजन समाज’ के सभी लोगों को बहुत ही ज़्यादा सचेत व सतर्क रहने की ज़रूरत है ताकि विरोधियों केे नापाक इरादे सफल ना हों सकें।
इसको लेकर बी.एस.पी. की असली चिन्ता यही है कि ��र्वसमाज के ग़रीब, मज़दूर व बेरोज़गार नौजवान आदि के साथ-साथ समाज के शोषित-पीड़ित व अन्य उपेक्षित लोग, अपनी समस्याओं को लेकर सड़क पर उतरने के क्रम में सरकारी द्वेष, उत्पीड़न व आतंक आदि का शिकार ना बनने पायें,
क्योंकि नौजवान अगर सरकारी ज्यादती के कारण यदि मुकदमा व जेल आदि में उलझ जायेंगे तो इससे उनका भविष्य ख़तरे में पड़ जाने की आशंका है तथा अगर परिवार का मुखिया इन चक्कर में पड़ जायेगा तो उनका घरबार तबाह हो जायेगा और उनके पूरे परिवार के इस प्रकार से अंधकार में डूब जाने का खतरा है, जो बी.एस.पी. कतई भी नहीं चाहती है, क्योंकि बी.एस.पी. का अम्बेडकरवादी मिशन प्रभावित हो सकता है जो कि विरोधियों की असल चाल है।
इसके साथ ही, सर्वविदित है कि दलित-विरोधी सहारनपुर काण्ड में जातिवादी, सामंती व सरकारी आतंक के विरुद्ध बी.एस.पी. व उसके नेतृत्व ने सड़क से लेकर संसद तक में जबरदस्त लड़ाई लड़ी, किन्तु संसद में भी इसका सही से निदान नहीं मिलने के विरोध में तब बी.एस.पी. नेतृत्व ने, दलितों व अन्य पिछड़ों आदि के हक क�� अनदेखी करने पर परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर द्वारा देश के पहले कानून मंत्री पद से इस्तीफा देने का अनुसरण करते हुये, राज्यसभा से ही इस्तीफा दे दिया था कि जब संसद में भी हमारी बात नहीं सुनी जाती है तो ऐसी संसद में रहने का फायदा ही क्या?
इस प्रकार यह उन जबरदस्त उदाहरणों में एक है जो बी.एस.पी. नेतृत्व ने अपने संघर्ष के क्रम में दिया है अर्थात् स्पष्ट है कि बी.एस.पी. को अपनी तरह ही मगरमच्छ के आँसू बहाने की सलाह देेने वाले संकीर्ण स्वार्थी लोग विरोधी पार्टियों के जातिवादी व विशैले षडयंत्र का शिकार ना बनें तो यह बेहतर होगा।
वैसे भी सभी जानते हैं कि मान्यवर श्री कांशीराम जी ने बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) का गठन देश में जाति के आधार पर सदियों से सताये, तोड़े व पछाड़े गये उन लोगों को ’बहुजन समाज’ को आपसी भाईचारा के आधार पर एकता में जोड़कर राजनीतिक शक्ति अर्थात् ’’हुकमरान जमात’’ बनाने के लिये इसलिये किया था ताकि इन वर्गों के मसीहा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के सत्ता की मास्टर चाबी के माध्यम से आत्म-सम्मान व स्वाभिमान मूवमेन्ट को मंज़िल तक पहुँचाया जा सके, और यह क्रम लगातार जारी है, जिसकी राह में रोड़ा बनकर खड़ा होना बी.एस.पी के मिशन 2027 को प्रभावित करने का घोर बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर-विरोधी अनुचित कृत्य होगा। जय भीम, जय भारत।
#DalitLivesMatter
भतीजी को कोई छेड़ा उसके बाद उसके मामा की हत्या करी,
उसके बाद आक्रोशित दलितों की भीड़ ने आरोपी के घर में आग लगा दी, बहुत अच्छा किया जब न्याय ना मिले या पुलिस लापरवाही करे तो जो इन आंदोलनकारियों ने किया एकदम न्यायसंगत और तार्किक है, दलितों को ऐसे उदाहरण एक नहीं लाखों उदाहरण देने होंगे, ऐसे समाज में सामान्यत आपको जगह नहीं मिलेगी आपको वो अपने दम पर लेनी होगी, शोषक कोई भी हो उसको अंजाम पता होना चाहिए, #Baba_Manish
बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी को, आज उनकी जयंती पर मेरे व मेरे नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश भर में उनके अनुयायियों द्वारा शत्-शत् नमन व अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित, जिन्होंने परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर की ‘सोच एवं मूवमेन्ट’ को पूरे देश में ��़िन्दा करके व उनके कारवाँ को आगे बढ़ाकर सत्ता की मंज़िल तक पहुँचाने के मिशन हेतु अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित करके लगातार कड़ा संघर्ष किया तथा जाति के आधार पर तोड़े और पछाड़े गये लोगों को ’बहुजन समाज’ की एकता में जोड़ने के उस ऐतिहासिक योगदान की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुये, बी.एस.पी. के ’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति’ मूवमेन्ट को तन, मन, धन से मज़बूत बनाने व पूरी ज़िद के साथ चुनावी सफलता अर्���ित करने के संकल्प को दोहराया, जिसके लिए मैं पार्टी प्रमुख के रूप में, सभी लोगों का तहेदिल से आभार, धन्यवाद व शुक्रिया अदा करती हूँ।
साथ ही, यह आह्वान भी है कि ’बहुजन समाज’ के लोग ’बी.एस.पी. मूवमेन्ट से जुड़कर मिशनरी व ईमानदार अम्बेडकरवादी बने’ और अपने वोटों की शक्ति से सत्ता की मास्टर चाबी हासिल करें ताकि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर द्वारा संविधान में देश के बहुजनों के हित, कल्याण, उत्थान तथा उनकी सुरक्षा व आत्म-स��्मान हेतु प्रदत्त अधिकारों को ज़मीन पर लागू करके वे भी, गुलामी और लाचारी के त्रस्त जीवन से मुक्ति पाकर, रोटी-रोज़ी-युक्त अच्छे दिन वाला ख़ुश एवं ख़ुशहाल जीवन व्यतीत कर सकें, जो कि मान्यवर श्री कांशीराम जी का मिशन व उनका जीवन संदेश भी है। धन्यवाद।
1. जैसा कि सर्वविदित है कि कांग्रेस पार्टी ने काफी वर्षो तक केन्द्र की सत्ता में रहकर दलितों के मसीहा व भारतीय संविधान के मूल निर्माता परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का कभी भी आदर-सम्मान नहीं किया और ना ही उनको ’भारतरत्न’ की उपाधि से भी सम्मानित किया। भला फिर यह पार्टी अब मान्यवर श्री कांशीराम जी को कैसे इस उपाधि से सम्मानित कर सकती है?
2. इसी कांग्रेस पार्टी ने केन्द्र में अपनी सत्ता के रहते हुये इनके (मान्यवर श्री कांशीराम जी के) देहान्त होने पर एक दिन का भी राष्ट्रीय शोक घोषित नहीं किया तथा ना ही उस समय यू.पी. की सपा सरकार ने भी राजकीय शोक घोषित किया। इसी प्रकार दूसरी पार्टियों के हाथों में खेल कर दलित समाज के बने अनेकों संगठन व पार्टियाँ आदि भी इनके नाम को भुनाने की कोशिश में हमेशा लगी रहती हैं।
3. अब ये सभी पार्टियाँ आएदिन क़िस्म-क़िस्म के हथकण्डे इस्तेमाल करके मान्यवर श्री कांशीराम जी द्वारा बनाई गई पार्टी बी.एस.पी. को कमजोर करने में लगी हैं। अतः इनके अनुयायी व समर्थक हमेशा इनसे सचेत रहें। ख़ासकर कांग्रेस पार्टी से ज़रूर सजग रहें, जिसकी दलित-विरोधी सोच व मानसिकता होने की वजह से ही बी.एस.पी. ��नानी पड़ी है।
4. साथ ही, कल दिनांक 15 मार्च 2026 को मान्यवर श्री कांशीराम जी की जयन्ती पर, इनकी द्वारा निर्मित पार्टी बी.एस.पी. के सभी कार्यक्रर्मों को उ.प्र. सहित पूरे देश में पार्टी के लोग ज़रूर कामयाब बनायें , यही अपील।
जैसाकि सर्वविदित है कि समाजवादी पार्टी (सपा) का चाल, चरित्र और चेहरा हमेशा से ही दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं बी.एस.पी.-विरोधी तथा ’बहुजन समाज’ में जन्���ें महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों के आदर-सम्मान का नहीं बल्कि जग-ज़ाहिर तौर पर इनके अनादर, अपमान व तिरस्कार का ही रहा है, इस बारे में मीडिया सहित इनका पीडीए (PDA) भी अच्छी तरह से जानता है।
साथ ही, ’बी.एस.पी. के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी की जयंती पर सपा पीडीए दिवस मनायेगी’, जो कि यह सपा की समय-समय पर की जाने वाली विशुद्ध राजनीतिक नाटकबाज़ी के सिवाय कुछ भी नहीं है अर्थात् सपा का इस प्रकार का व्यवहार शुद्ध रूप से इन उपेक्षित वर्गों के वोटों का स्वार्थ हेतु केवल छलावा व दिखावा है, जैसाकि अन्य विरोधी पार्टियाँ भी इन वर्गों के वोटों के स्वार्थ की ख़ातिर अक्सर कई मौकों पर ऐसे ही दिखावा व छलावा आदि करती हुईं नज़र आती हैं।
वास्तव में दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग व बी.एस.पी.-विरोधी रवैये के साथ-साथ बहुजन समाज में जन्में महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों के अनादर, अपमान व तिरस्कारी रवैये तथा इन वर्गों के शोषण, अत्याचार व जुल्म-ज़्यादती आदि का लम्बा इतिहास है, जिसे कभी भी भुलाया जाना मुश्किल ही नहीं बल्कि असंभव लगता है।
वैसे सपा के इस जातिवादी इतिहास की शुरूआत ख़ासकर सन 1993 में सपा व बी.एस.पी. की गठबंधन से होती है जब गठबंधन सरकार तथा दलित एवं अन्य कमजोर वर्गों के लोगों पर अन्याय-अत्याचार रोकने की पहली शर्त के बावजूद तत्कालीन सीए�� श्री मुलायम सिंह यादव ने अपना रवैया नहीं बदला और जिसके फलस्वरूप अन्ततः बी.एस.पी. को दिनांक 1 जून सन 1995 को सपा सरकार से अपना समर्थन वापस लेना पड़ा था और फिर ��सके बाद दिनांक 2 जून सन् 1995 को लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस काण्ड कराकर मेरे ऊपर जो जानलेवा हमला कराया गया वह सब काली क्रूरता सरकारी रिकार्ड के साथ-साथ इतिहास के पन्नों में भी दर्ज है।
इसी प्रकार, बहुजन समाज में जन्में महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों के अनादर, अपमान व तिरस्कारी रवैये की भी काफी लम्बी श्रंखला है, जिसमें सपा को सत्ता में बैठाने वाले ख़ासकर मान्यवर श्री कांशीराम जी के आदर-सम्मान से जुड���े मामले में उनके नाम पर नया ज़िला बनाने को सपा सरकार द्वारा बदल दिया गया था।
और जब बी.एस.पी. की सरकार ने कासगंज को ज़िला मुख्यालय का दर्जा व सम्मान देते हुये कांशीराम नगर नाम से नया ज़िला बनाया, तो यह वर्तमान सपा मुखिया श्री अखिलेश यादव के भी गले के नीचे से नहीं उतरा जिसे फिर सपा ने अपनी सरकार बनते ही अपनी घोर जातिवादी व द्वेषपूर्ण नीति एवं दलित विरोधी रवैया अपनाते हुये अन्य ज़िलों व संस्थानो��� आदि के नामों की तरह इसका नाम भी बदल दिया, जो कि बहुजन समाज के साथ विश्वासघात नहीं तो और क्या है?
इतना ही नहीं बल्कि सर्वसमाज में से ख़ासकर ग़रीबों, दलितों, अन्य पिछड़े वर्गों एवं धार्मिक अल्पसंख्यकों आदि को साथ मिलाकर इन्हें सत्ता की मास्टर चाबी दिलाकर इन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने के मिशन के लिये अपना पूरा जीवन इसी संघर्ष में लगा देने वाले मान्यवर श्री कांशीराम जी की दिली ख़्वाहिश के मुताबिक बी.एस.पी. की सरकार ने जब पूर्वांचल में वाराणसी के पास भदोही में महान संतगुरु के नाम पर संत रविदास नगर नाम से नया ज़िला बनाया, तो उसे भी सपा सरकार ने अपनी जातिवादी व बी.एस.पी. विरोधी रवैया अपनाते हुये बदल दि���ा था।
साथ ही, मुस्लिम समाज को दिये गये वादे के मुताबिक मान्यवर श्री कांशीराम जी के नाम से नया उर्दू-फारसी अरबी यूनिवर्सिटी लखनऊ में आईआईएम के पास बनाया गया, जिसका भी नाम सपा सरकार ने बदल डाला और अब जिसे भाजपा सरकार ’लैंगवेज यूनिवर्सिटी’ के रूप में प्रचारित करती है।
सहारनपुर में भी मान्यवर श्री कांशीराम जी के नाम पर बनाये गये सरकारी अस्पताल का नाम भी सपा सरकार ने बदल दिया। क्या यही सब है सप�� का मान्यवर श्री कांशीराम जी के प्रति आदर व सम्मान?
इसके अलावा, अपने इस दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग व बहुजन समाज विरोधी कृत्यों के साथ-साथ सपा का रवैया मुस्लिम विरोधी भी रहा है। कांग्रेस पार्टी की तरह ही सपा की सरकारों में भी काफी घातक साम्प्रदायिक दंगों में भारी जान-माल की हानि के साथ-साथ लाखों परिवार प्रभाव��त हुये हैं।
हक़ीक़त में सपा के भड़काऊ आचरण आदि के कारण बीजेपी को राजनीतिक रोटी सेंकने का भरपूर मौक़ा मिलता रहा और इस प्रकार सपा व भाजपा दोनों एक-दूसरे की ज़रूरत बनकर यहाँ जातिवादी व साम्प्रदायिक राजनीति करते रहे और जिसका परिणाम है यूपी में भाजपा का राज और उससे पीड़ित मुस्लिम व बहुजन समाज तथा साथ ही हर प्रकार से त्रस्त प्रदेश की करोड़ों आमजनता है।
कुल मिलाकर, सपा का दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग, मुस्लिम व बहुजन समाज विरोधी जो जातिवादी व साम्प्रदायिक रवैया शुरू से अभी तक भी रहा है तो यह किसी से छिपा नहीं है।
इसके साथ ही सपा, लोगों को इस बात का भी जवाब दे कि बहुजन नायक मान्यवर श्री कांशीराम जी को उनके जीते-जी आदर-सम्मान देना तथा बहुजन एकता के लिये उनके योगदान की सराहना करना तो बहुत दूर, बल्कि उनके देहान्त के बाद एक दिन का भी राजकीय शोक घोषित करके उन्हें श्रद्धांजलि आदि क्यों नहीं अर्पित ���ी गयी थी? सपा बहुजन समाज को जवाब दे।
अतः सपा के इन सब दलित विरोधी व जातिवादी कृत्यों को ध्यान में रखकर बहुजन समाज के लोगों को हमेशा सावधान रहना चाहिये, यही बी.एस.पी. की अपील है। धन्यवाद। जय भीम, जय भारत।
बहुजन मिशन के लिए समर्पित, सामाजिक परिवर्तन की महानायिका, मेरी आदर्श, करोड़ों देशवासियों की प्रेरणा स्त्रोत, और हमारे समाज की मार्गदर्शक, पूर्व सांसद और यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री व बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय बहन कु. @mayawati जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं।
कुदरत आपको लंबी एवं स्वस्थ आयु दे।
हमारा गर्व, गुमान, घमंड, मान, सम्मान, अभिमान, स्वाभिमान, नेतृत्व, देवी, दाता, देवता, महानायिका, आयरन लेडी, पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व सांसद, राष्ट्रीय अध्यक्ष, रक्षक, संरक्षक हमारी परम् आदर���ीया नेता माननीया बहनजी के 70वें जन्मदिन की समस्त बहुजन समाज को ढेरों बधाई एवं मंगलकामनाएं।
#BSP#HappyBirthDayBhenJi
सामाजिक परिवर्तन आंदोलन की महानायिका; साम���जिक लोकतंत्र को केवल संवैधानिक अवधारणा नहीं बल्कि जीवंत जन-अभ्यास के रूप में स्थापित करने वाली; और इसी सामाजिक लोकतंत्र के माध्यम से भारतीय राजनीतिक लोकतंत्र को वास्तविक अर्थों में सार्थक, उत्तरदायी और समावेशी बनाने वाली आदरणीय बहनजी—
सदियों से वंचित बहुजन समाज को सत्ता, सम्मान और प्रतिनिधित्व के केंद्र में लाने का ऐतिहासिक कार्य करने वाली; बहुजन क्रांतिकारियों के संघर्ष, त्याग और बल���दान को राष्ट्रीय स्मृति और लोकतांत्रिक विमर्श में पुनर्स्थापित करने वाली; लोकतंत्र को केवल मतदान की प्रक्रिया नहीं बल्कि सामाजिक समानता, आत्मसम्मान और न्याय की निरंतर प्रक्रिया के रूप में परिभाषित करने वाली दूरदर्शी नेता—
जनकल्याण को शासन का मूल सिद्धांत बनाकर प्रशासन को सामाजिक न्याय का औज़ार बनाने वाली कुशल प्रशासक; संगठन, अनुशासन और वैचारिक स्पष्टता के माध्यम से लोकतांत्रिक शक्ति निर्माण की मिसाल; अडिग संकल्प और संघर्षशील नेतृत्व की प्रतीक आयरन लेडी—
आदरणीय बहनजी को उनके 70वें जन्मदिन पर क्रांतिकारी बधाई एवं शुभकामनाएँ। सामाजिक परिवर्तन, सामाजिक लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित आपका नेतृत���व भारतीय लोकतंत्र को उसके वास्तविक उद्देश्य—समानता, गरिमा और न्याय—की ओर अग्रसर करता रहे, यही कामना और विश्वास है।
जय भीम! ✍🏻 Professor Rajkumar
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आज नामांकन के दौरान पधारे सभी वरिष्ठजनों, वरिष्ठ नेताओं,पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं, युवा साथियों का बहुत बहुत धन्यवाद व आभार।
आपका साथ, सहयोग व समर्थन इसी प्रकार बना रहे।
#हरिमोहन__बौद्ध#प्रत्याशी_जिला_पंचायत_क्षेत्र_क्र_01
जिला प्रभारी श्री हरिमोहन बौद्ध जी के नेतृत्व में बसपा का प्रतिनिधि मंडल आज ग्राम जैनी पहुंचा, जहां 50 वर्षीय किसान श्री कैलाश मीणा ने आत्महत्या कर ली। बसपा प्रतिनिधि मंडल ने पीड़ित परिवार को ढाढस बंधाया और कहा कि बसपा उनके साथ हैं और इस लड़ाई आखिर दम तक लड़ा जाएगा।
#BSP_SHEOPUR
#BSP#BiharElections2025
बसपा अकेले चुनाव क्यों लड़ रही है ?
वोट ट्रांसफर करवाना भारत में हर किसी नेता के औकात से बाहर रहा है, यहां तक की नरेंद्र मोदी भी जम्मू कश्मीर में अपना वोट पीडीपी को ट्रांसफर नहीं करवा सके, राहुल गांधी , अखिलेश तेजस्वी के कहने से तो क्या ही वोट खिसकेगा,
भारत में कोई अपना वोट ट्रान्सफर करवाने का दम रखता हैं तो वो बसपा की बहन कु मायावती जी इसके अलावा कोई नेता अपने वोटर का वो��� ट्रांसफर करवाने का दम नहीं रखता !
अब बसपा क्यों गठबंधन से बचती है मूलतः मान्यवर कांशीराम ही कहते थे, हम चुनाव बाद ही सरकार बनाने में स��्रियता दिखाएंगे चुनाव से पहले गठबंधन करने के हमारे अनुभव अच्छे नहीं थे,
अब उसका कारण समझने के लिए आपको बिहार के पिछले दो विधानसभा चुनाव ही देख लेने चाहिए,
2015 बिहार विधानसभा चुनाव में जब बसपा अकेले सभी सीटों पर लड़ती है तब 243 सीटों पर बसपा 49 सीटों पर सीधा टक्कर राष्टीय और क्षेत्रीय दलों को देती है, इन 49 सीटों पर बसपा उम्मीदवार हराने का वोट का अंतर मात्र 1000 से लेकर 450 तक का था,
इसके साथ बिहार की राज���ीति में 4.17% प्रतिशत वोट शेयर लाती है, बसपा की इस मजबूती को देख अन्य दल कंपित हो जाते है, लेकिन बसपा मजबूत दावेदारी होते हुए भी एक भी अपना विधायक नहीं बनावा पाई !!
अब बिहार 2020 बिहार चुनाव का आकलन करते है, चुकी बहन जी अनेक गंठबंधन ना करने हो कह चुकी थी किंतु संगठन से विचार विमर्श से इस बार गठबंधन जाने का मन बनाया फिर एक कुल 6 दल मिलकर एक गठबन्धन तैयार हुआ !
Grand Democratic Secular Front (GDSF) इसमें The All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen ( ओवैसी) with Samajwadi Janata Dal Democratic ( सौहेल देव ) , RLSP (उपेंद्र कुशवाह) बहुजन समाज पार्टी और PSP को मिलकर बना !
243 सीटों में RLSP 104 , BSP 80, SJD 24 JPS 5, AIMIM 25 सीट कुछ अन्य !
उपेन्द्र कुशवाह जी गठबंधन को लीड कर रहे थे, कोरी जाति का बिहार में दबदबा भी था, तो सबसे ज्यादा 104 सीट उन्हीं के पास थी !
अब चुनाव में बसपा के कहने पर दूसरे दलों को तो वोट हस्तांतरित हुआ उनके सभी के वोट प्��तिशत में सुधार आया किंतु बसपा को भारी नुकसान हुआ, मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों से ओवासी भी बसपा के लिए वोट ट्रांसफर नहीं करवा पाए और उपेंद्र कुशवाह तो बिल्कुल भी नहीं करवा पाए
किन्तु बसपा 80 में से 1 सीट पर अपना विधायक बनवा पाई जबकि पिछली बार 49 सीटों पर बसपा उम्मीदवार टक्कर दे रहे थे, ओवासी का दलित मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में यकायक वोट प्रतिशत बड़ा और 5 सीट जीत गए और गठबंधन को लीड करने वाले कुशवाह जी एक सीट भी नहीं जीत पाए ,
अब आप तय करे क्या गठबंधन बसपा को करना चाहिए ?
जबकि हाली में हुए बिहार उपचुनाव में बसपा ने फिर दम दिखाया क्षेत्रीय पार्टी को पछाड़ते हुए 5 सीटों पर बीजेपी को सीधा टक्कर दी जिसमे एक सीट तो बहुत ही मामूली अंतर से बसपा हारी !
( पोस्ट शेयर करते रहे क���योंकि एक प्रोपेगेंडा बसपा के खिलाफ चलाया जा रहा है जब BJP जैसी पार्टी गठबंधन कर रही है वहां बसपा अकेले क्यों लड़ रही है मेरे ये लेख उसी का जवाब है 🙏🏻)
! जय बसपा , विजय बसपा, तय बसपा !
#Baba_Manish
#akashanand
राहुल गांधी, अखिलेश यादव , नरेंद्र मोदी किसी की भी रैली का ऐसा फोटो देखा दो जहां बिना किसी संगीत बिना किसी नाटक मनोरंजन के लड़के सीधे खड़े हो अपने नेता फोटो ले रहा हो,
एक मिनट नहीं लगाऊंगा ये कहने में बसपा कमजोर हो गई, दूसरों पार्टियों की रैली में मनोरजन में नचनिया और धनबल पर भीड़ आती है,
बसपा में दोनों नहीं ( बोल्ड व कैपिटल में लिखा समझो)
सबको मालूम है बस एक बसपा का नेता आया हुआ सुना हो सुनो नहीं सुना मत सुनो कोई बाध्यता नहीं अन्य पार्टियां के दृश्य ��िक्योरिटी गार्ड कार्यकर्ताओं को जूते से पिटाई कर रहा है नचनिया बुला लडको को रोका जा रहा है,
इतना बहुत समझो बसपा की मजबूती जाने के लिए #genz होते होंगे तुम्हारे कुनबे में यहां तो #बसपाई अ��तार लेवे !
#BSP
#Baba_Manish :– PR एजेंसियों का बाप 😎
ग्राम बर्धा बुजुर्ग के युवा साथियों ने अपने गांव बुलाकर जो भव्य स्वागत किया उसके लिए समस्त ब��्धा बुजुर्ग ग्रामवासियों का बहुत बहुत धन्यवाद साथ ही हमारे पार्टी कोषाध्यक्ष श्री बालचंद जारोलिया जी, सेक्टर अध्यक्ष श्री नरेंद्र भाई जोनवार जी, श्री मंगल जी ठेकेदार।
बसपा जिंदाबाद,
गत रात्रि JCI श्योपुर द्वारा आयोजित 'आपकी अदालत' कार्यक���रम के तहत् "आमना-सामना" एपिसोड में अपनी पार्टी का बसपा का पक्ष रखा।
माननीया बहनजी जिंदाबाद
माननीय आकाश आनंद जी जिन्दाबाद
बहुजन समाज पार्टी जिंदाबाद 🐘🐘🐘
#BSP_SHEOPUR 🙏🐘
भारत के संविधान के अनुसार भारत एक धर्मनिरपेक्��� देश है जहाँ पर विभिन्न धर्मों एवं जातियों के लोग रहते हैं तथा हर धर्म के लोगों के अपने-अपने पूजास्थल हैं, जिसके तहत् ही कानपुर नगर में बुद्ध पार्क स्थित है जो यह बौद्ध धर्म एवं अम्बेडकर अनुयायियों के आस्था का केन्द्र है। लेकिन प्राप्त जानकारी के मुताबिक सरकार द्वारा इस बुद्ध पार्क में जो दूसरे धर्म के पूजा स्थल का निर्माण प्रस्तावित है, यह कतई भी उचित नहीं है। सरकार इसे तत्काल रोके, वरना यहाँ लोगों के बीच अशान्ति एवं घृणा फैल सकती है।
आज दिनांक 08/08/2025 को बहुजन समाज पार्टी श्योपुर के वरिष्ठ नेता एवं हमारे मार्गदर्शक श्रद्धेय Ramlal Suryavanshi जी के आकस्मिक हुए परिनिर्वाण पर उनकी शोकसभा एवं श्रृद्धांजलि कार्यक्रम में BSP MP के प्रदेशाध्यक्ष आदरणीय @PippalRamakant जी ने उपस्थित होकर ��्रद्धासुमन अर्पित किए।
ब्रिक्स देश ब्राज़ील की तरह ही भारत पर भी कुल मिलाकर 50 प्रतिशत का भारी भरकम टैरिफ (शुल्क) लगाकर अमेरिका ने जो भारत को आघात पहुँचाने का प्रयास किया है, उसे भारत सरकार ने अपने संयमित बयान में ’���नुचित, अन्यायपूर्ण व अविवेकी’ बताया है, किन्तु देश की जनता डोनाल्ड ट्रम्प का ’मित्र’ देश भारत के प्रति इसे प्रथम दृष्टया विश्वासघाती एवं देश को कमज़ोर करने वाला कदम ज़्यादा मानती है, जिससे निपटने के लिए सभी को पूरी परिपक्वता दिखाते हुये राजनीतिक स्वार्थ, संकीर्णता, मतभेद एवं द्वेष आदि से ऊपर उठकर, दीर्घकालीन रणनीति के तहत्, देश में पूरे अमन-चैन और कानून व्यवस्था के अच्छे माहौल के साथ पूरी मुस्तैदी से कार्य करना ज़रूरी है।
देश के सामने आई इ��� बड़ी चुनौती पर गंभीर चिन्तन के लिए सम्बंधित विषय पर वर्तमान संसद सत्र में चर्चा हो तो यह जन व देशहित में बेहतर होगा, किन्तु केन्द्र व राज्य सरकारें अगर आन्तरिक संकीर्ण मुद्दों में ही अधिकतर उलझी रहेंगी तो यह कैसे संभव हो पायेगा?
वैसे इस बारे में यहाँ उल्��ेखनीय है कि बी.एस.पी. की राजनीति हमेशा से देश के मानवतावादी संविधान की मंशा के मुताबिक ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की रही है, किन्तु यहाँ देश में केन्द्र व राज्य सरकारों के बीच आपसी अविश्वस के कारण जो राजनीतिक टकराव और खींचतान आदि लगातार बनी हुई है वह अब समाप्त होना चाहिए, यही व्यापक जन व देशहित में है।