#बांग्लादेश
एक रोते हुए #हिन्दू लड़के ने अपनी मृत माँ के शव को पुलिस स्टेशन ले जाने के लिए एक साइकिल वैन किराए पर ली। अपनी छोटी बहन को सीने से लगाए हुए, उसने वहाँ मौजूद लोगों को बताया कि एक #मौलाना (इस्लामिक शिक्षक) और दो अन्य लोगों ने ��सके और उसके छोटे भाई-बहनों के सामने उसकी माँ के साथ दुष्कर्म किया और बेरहमी से उनकी हत्या कर दी। उनका अब कोई दूसरा जीवित रिश्तेदार नहीं बचा है।
#इस्लाम #मोहमद
वीडियो बांग्लादेश की है जहां इन हिंदू बच्चों के सामने ही इनकी माँ का बलात्कार और फिर हत्या कर दी गई | 😡
आप इन हालातों को देख बांग्लादेश की व्यवस्था को गाली दे रहे होंगे पर ध्यान रखना यही स्थिति बंगाल की थी |
ममता राज में बंगाल के संदेश खाली में हिंदू महिलाओं को नंगा कर बिस्किट लेने के।लिए बाहर भेजा गया |
बाहर भेजने वाले भारत के गुंडे होते तो भी चलता पर कांड करने वाले घुसपैठिये थे | इसलिए बंगाल में सत्ता परिवर्तन जरूरी था | 😡
B.H.U. में फिर पीएचडी एडमिशन को लेकर विवाद!
कॉमर्स फैकल्टी की एक छात्रा ने आरोप लगाया है कि OBC वर्ग में पहला रैंक हासिल करने के बावजूद उसे मेन कैंपस की जगह DAV कॉलेज आवंटित कर दिया गया, जबकि उससे कम रैंक वाले कई छात्रों को मेन कैंपस दे दिया गया।
छात्रा का कहना है कि उसका चयन अनारक्षित श्रेणी में दिखा दिया गया, लेकिन उससे यह तक नहीं पूछा गया कि वह किस श्रेणी में एडमिशन लेना चाहती है। उस��े पूरी प्रक्रिया को “अन्यायपूर्ण और भेदभावपूर्ण” बताते हुए राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
अब मामला राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग तक पहुंच चुका है। आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 338-बी के तहत BHU प्रशासन को नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर जवाब और दोबारा जांच रिपोर्ट मांगी है।
नोटिस में साफ कहा गया है कि तय समय में जवाब नहीं मिलने पर आयोग सिविल कोर्ट की शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कुलपति (VC) या उनके प्रतिनिधि को तलब कर सकता है।
छात्रा का आरोप है कि केंद्रीय कार्यालय में हुई पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया नियमों के खिलाफ रही और उसके साथ गलत व्यवहार किया गया। आयोग की एंट्री के बाद अब BHU प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल उठने लगे हैं।
अब सवाल ये है —
अगर टॉप रैंक लाने के बाद भी छात्रों को न्याय नहीं मिलेगा, तो फिर मेहनत और मेरिट का मतलब क्या रह जाएगा?
#BHU #PhDAdmission #Varanasi #OBC #UttarPradesh #pmo #ट्रेंडिंग
#सोशलमीडिया #कॉकरोचCJPपार्टी
😌 दिल दहला देने वाला।
बांग्ला���ेश के शरियतपुर ज़िले के जजीरा में, एक 10 साल का हिंदू लड़का अपनी माँ के बेजान शरीर को एक साइकिल वैन पर लादकर पुलिस स्टेशन ले जाता है। जिहादियों ने उसके अपने ही बच्चों के सामने उसकी बेरहमी से बलात्कार और हत्या कर दी थी।
अब दो छोटे बच्चे अनाथ हो गए हैं और इंसाफ़ की गुहार लगा रहे हैं। दुनिया बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को नज़रअंदाज़ करना कब बंद करेगी?
एक ज़माना था जब हर कोई हिंदू था; देखिए, बहुत पहले एक बर्बर रेगिस्तानी पंथ में धर्मांतरण करने के बाद अब वे हिंदुओं के साथ क्या कर रहे हैं।
#Bangladesh
😢 Heart-wrenching.
In Jajira, Shariatpur, Bangladesh, a 10 year old Hindu boy carries his mother’s lifeless body to the police station on a cycle van. She was brutally raped and murdered in front of her own children.
Now two little kids are orphaned, begging for justice. When will the world stop ignoring the persecution of Hindus in Bangladesh? #HinduLivesMatter #BangladeshHinduGenocide
बांग्लादेश
सतखिरा में हिंदू टीचर गौरंगा सरकार ईशनिंदा में गिरफ्तार
मुसलमान का सिर्फ यह कहना कि फलाने गैर मुस्लिम ने हमारे नबी या अल्लाह की शान में गुस्ताखी की है गिरफ्तारी हो जाती है
किसी गवाह या सबूत की जरूरत इस लिए नहीं होती क्यूंकि अल्लाह के वज़ूद का कोई ��बूत नहीं।
😡👇
पहली जांच रिपोर्ट में दोनों अस्पताल एकदम सही थे । पुलिस कमिश्नर साहब उसी रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल के खिलाफ कार्यवाही नहीं कर रहे थे ।
जब आईटीबीपी के कमांडेंट साहब मिलकर वापस गए तो डॉक्टर्स की ज्वाइंट कमेटी ,जिसमें आईटीबीपी के मेडिकल प्रोफेशनल्स भी शामिल थे , उनकी जांच के आधार पर उसी सीएमओ ने यह रिपोर्ट लगाई कि इलाज में लापरवाही बरती गई । वही कमिश्नर साहब अब FIR करने की बात कर रहे हैं।
भले ही कमिश्नर साहब ने आईटीबीपी के DG को अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए पत्र लिखा है । लेकिन डीजी साहब अगर थोड़ा सा भी लॉजिकल होकर देखेंगे तो पता चलेगा कि कमिश्नर साहब कितनी मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी कर रहे थे। अगर कमांडेंट साहब इतनी फोर्स लेकर न गए होते और अकेले में एक कमरे में मुलाकात करके वापस आ गए होते ,
अगर मामला इतना ज्यादा मीडिया पर न आया होता ,
तो क्या लगता है कि जांच रिपोर्ट ���ें खामी पकड़ में आती या नहीं ??
अच्छा माननीय बृजेश पाठक जी,क्या ��प अब उस सीएमओ पर भी कोई कार्यवाही करेंगे जो अपने पहली रिपोर्ट में क्लीन चिट दे चुका था ?? जब आईटीबीपी के डॉक्टर के साथ ज्वाइंट रिपोर्ट तैयार की गई तब जाकर लापरवाही पकड़ में आई । नहीं तो आपके सीएमओ साहब तो क्लीन चिट दे चुके थे ।
क्या पुलिस कमिश्नर साहब उस सीएमओ के खिलाफ विभागीय कार्यवाही के लिए भी मंत्रालय को पत्र लिखेंगे ?? जिसके कारण इतना सारा बवाल हुआ ।
या सारा नियम कानून सिस्टम के बाहर रहने वाले लोगों के लिए ही है । सिस्टम के अंदर वालो का सारा गुनाह माफ है ?
पता नहीं ये सब देखकर भी लोग सचेत होने के बजाय, उल्टा मिशनरियों के चमत्कार के झांसे में आकर कैसे कन्वर्ट हो जाया करते हैं🤔🤔
भारत के लिए यह दृश्य केवल एक दुर्भाग्��� ही कहा जा सकता है, जहाँ मिशनरियों की साजिश को अंजाम देने वाले लोग केवल छूने भर से ऐसे व्यवहार करते हैं, जैसे उनको पागलपन का दौरा पर गया हो।
इन दृश्यों को देखकर तो यही लगता है कि यीशु की शक्ति का प्रभाव आजकल चन्द पैसों के लिए बिक चुके भारत के लोगों पर ही अधिक हो रहा है शायद। क्योंकि भारत के बाहर वही शक्ति अपने ही लोगों को इस्लाम मे कन्वर्ट होने से नहीं बचा पा रही है।
वहीं दूसरी तरफ उछल कूद और अ��्य प्रपंच के माध्यम से भारत मे लगातार धर्म परिवर्तन की साजिशों के माध्यम से अपनी संख्या बढ़ा रहे हैं, जबकि भारत के बाहर लगातार इनकी संख्या घट रही है।
लोगों को इन मिशनरियों से पूछना चाहिए उनके अनुयायियों पर किसी भी प्रकार की कृपा भारत मे ही क्यों होती है, भारत के बाहर क्यों नहीं होती ?
पुलिस वालों का टोन देखिये कैसे बात कर रहे हैं वो भी एक ITBP के जवान से..
जवान ने बताया कि सांस लेने में दिक़्क़त थी लेकिन माँ का हाथ काट दिया है कृष्णा हॉस्पिटल वालों ने। तीन दिन से जगह जगह भटकने पर एक FIR नहीं लिखी गयी थी।
हे प्रभु ये सब क्या हो रहा है
• कानपुर पुलिस कमिश्नरेट को ITBP ने घेरा...🔊
• इतिहास मे पहली बार, पुलिस पर फ़ौजी कब्जा.. 🔊
ये मैं नहीं भारत की टुच्ची मीडिया चिल्ला रही है। कितनी घिनौनी और घटिया न्यूज़ लाइन है ये.. देश की शांति को खतरा ऐसे हीं चु���लखोर चैनलों से हैं।
वास्तव मे ITBP के जवान का ईलाज कानपुर के किसी अस्पताल मे चल रहा था और किसी गलत इंजेक्शन की वजह से हाथ काटना पड़ा। जवान कई बार पुलिस थाने जाकर अस्पताल के खिलाफ FIR दर्ज करने की कोशिश की, लेकिन FIR दर्ज नहीं किए पुलिस वाले।
जवान ने अपने कमांडेंट को आपबीती सुनाई। कमांडेंट ने फोन घुमाया मगर फिर भी कुछ नहीं हुआ..
तब कमांडेंट खुद हीं पुलिस कमिश्नरेट के ऑफिस पह���ंचे। ये जरूर है कि जरूरत से ज्यादा जवान गाड़ी लेकर गए। लेकिन इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं कीवे पुलिस ऑफिस पर कब्जा जमाने गए.. या लड़ाई करने गए, या युद्ध छेड़ने गए.
न्यूज़ की लाइन क्या लिखना है, उसकी गंभीरता क्या है, उसके क्या क्या मायने हो सकते हैं,, सोचें बिना कुछ भी..
ऐसे लिख रहें हैं जैसे देश मे गृह युद्ध छिड़ गया है।
मै @Uppolice, @kanpurnagarpol से विनम्र निवेदन करता हूं कि जिस जिस पोर्टल ने ऐसी भ्रामक, सनसनी खबरें चलायी हैं, आप उनके दुकान पर हंटर चलाएं।
#kanpur
उत्तराखंड की डेमोग्राफी तेज़ी से पूरे षड्यंत्र के साथ बदला जा रहा है अल्मोड़ा मे 450 नाली ज़मीन में बाउंड्री मारकर हाइवे पर मस्जिद बनाने की तैयारी है
अगर @pushkardhami आपके रहते ऐसा होगा तो कैसे काम चलेगा , हमारी देवभूमि पर इतने बड़े पैमाने पर ये होना एक हिंदू होने के नाते क़तई बर्दाश्त नहीं है 🙏
एक सिपाही ने पूरे पुलिस डिपार्टमेंट पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नीचे से ऊपर तक सब घूस लेते हैँ। यहाँ तक कि पुलिस वालों को भी घूस देना पड़ता है ड्यूटी लगानें के लिए।
ये आरोप खुद एक पुलिस वाले का है। सुनिए
“सिस्टम” को सबसे ज़्यादा डर सवाल पूछने वालों से लगता है।
और जब कोई छोटा कर्मचारी एक सिपाही, एक क्लर्क, एक शिक्षक अपने ही विभाग की सच्चाई सामने रखता है, तब उसे “अनुशासन” का पाठ पढ़ाकर चुप कराने की कोशिश शुरू हो जाती है।
सिपाही सुनील कुमार शुक्ला ने जो किया, वो आसान नहीं था।
न कोई बड़ी राजनीतिक ताकत,
न कोई संगठन,
न करोड़ों की फंडिंग…
फिर भी उन्होंने कैमर�� के सामने खड़े होकर वो कहा, जो अक्सर लोग बंद कमरों में भी कहने से डरते हैं।
लेकिन इस देश में “क्रांति” का अधिकार भी शायद बराबरी से नहीं मिला।
बड़े लोग बोलें तो “सुधार की आवाज़”,
छोटे लोग बोलें तो “अनुशासनहीनता”।
सबसे दुखद बात ये नहीं कि कार्रवाई हुई…
दुखद ये है कि जिन मुद्दों को उठाया गया, उन पर बहस कम हुई और आवाज उठाने वाले पर कार्रवाई ज़्यादा।
एक सिपाही सस्पेंड हो गया,
लेकिन उसके सवाल अभी भी ड्यूटी पर खड़े हैं
थानों में, बैरकों में, सिस्टम के अंदर…
जहाँ कई लोग सच जानते हैं,
पर बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाते।