मेरे मन का विचार है एक बार पढ़ना गलत लगे तो माफ करे 🙏🙏
देश में लोग जातिओ के नाम पर लड़ मर रहा है , सवर्णो�� द्वारा शोषण किया वो भी कब 3 हजार साल पहले आजकल सवर्णों के खिलाफ नई-नई कहानियाँ गढ़ी जा रही ��ैं और समाज में नफरत फैलाई जा रही है। चलिए, एक पल के लिए मान भी लें कि
अतीत में शोषण हुआ था, लेकिन क्या कभी चोरी करने वाले के बच्चे को चोरी की सजा दी जाती है? क्या हत्या करने वाले के बच्चे को हत्या की सजा दी जाती है? तो फिर आज के सवर्णों के साथ यह अत्याचार क्यों?आज निचले स्तर से लेकर राष्ट्रपति पद तक पर दलित समाज के लोग आसीन हैं,
नेताओं से सवाल पूछिए कि:
���न्होंने आपके लिए कितनी सड़कें बनवाईं?
कितने नए स्कूल और अस्पताल खोले?
कितनी नौकरियां पैदा कीं?
उसने यह किया या इसने वह किया" की रट छोड़कर अब जागरूक बनने का समय है। अब यह ��दले की भावना छोड़ देनी चाहिए कि "इन्होंने शोषण किया तो अब हम इन्हें मारेंगे।
जब तक जनता खुद जागरूक नहीं होगी, तब तक कुछ नहीं बदलेगा। जब तक जाति के नाम पर हिंसा और वोट मिलना बंद नहीं होगा, तब तक आम आदमी ऐसे ही पिसता रहेगा और राजनेता व उनके परिवार जनता को लूटकर विदेशों में मौज मनाते रहेंगेहमें जाति के नाम पर क्यों लड़ना है? लड़ना है तो विकास के लिए लड़िए।
और नेताओं से सवाल पूछेंगे। यदि ऐसा हुआ, तो ये नेता भ्रष्टाचार का पैसा खाकर अपने बच्चों को विदेशों में कैसे भेजेंगे? शोषण के नाम पर राजनीति करके जनता को कैसे लूटेंगे? जब तक सिर्फ जाति के नाम पर वोट मिल रहे हैं, तब तक नेताओं को बेरोजगारी और विकास जैसे मुद्दों से कोई मतलब नहीं है
तो फिर अब जाति प्रथा खत्म क्यों नहीं की जा रही? आपको किसने रोका है? सच तो यह है कि राजनीतिक पार्टियाँ कभी जाति खत्म नहीं करेंगी। अगर जाति खत्म हो गई, तो वे राजनीति कैसे करेंगे? लोगों को आपस में लड़ाएंगे कैसे?अगर जाति खत्म हो गई, तो लोग विकास की बात करेंगे
ममता मिश्रा ने आवेश में आकर तीखी बहस की लेकिन you shut up , just shut up के बदले SC/ST की संगीन धाराएँ ?
ये कतई स्वीकार नहीं है, प्रिंसिपल ने माफ़ी भी माँग ली!
क्या ठाकुर,ब्राम्हण बनिया होना इतना बड़ा जुर्म है,😭की चारो तरफ से हम सवर्णो को दबाने कुचलने की कोशिश की जा रही है😡
सब जातियों धर्मो के लिए कुछ न कुछ है ,तो हमने कौन सा गुनाह किया है कि हमारे खिलाफ सिर्फ कानून है ,आरक्षण है इससे भी पेट नही भरा तो UGC बिल ला दिए😡😡,
ब���्द करो ये अनदेखी,अन्याय🙏😭✍️
#UGC_काला_कानून_वापस_लो
पूरे देश में शिक्षा माफिया चरम पर है लेकिन फंसाया गया एक ब्राह्मण को वो भी #SCSTAct में यही है इस महान एक्ट का फर्जीवाड़ा।
लाखों की फीस,स्कूल से ही ड्रेस और स्टेशनरी लेना हर साल किताबें बदलना ऊपर से एक्टिविटी के नाम पर पैस��� वसूलना और कमाल की बात ये है कि सबको सबकुछ पता हैं।
एक पक्ष सुनकर ममता मिश्र का चरित्रहनन किया गया।
हमने भी उस भाषायी मर्यादा का विरोध किया था लेकिन अब इनका पक्ष सुना जाए।
पूरे घटनाक��रम का विवरण बता रही हैं, तो यही सिद्ध होता है कि यह एकदम नीच कृत्य किया है अभिभावकों ने।👇✊
ब्राह्मण हो तो जिंदा खोद के गा*"ड" दूंगा...ये कहना है एक दलित प्रधान का ब्राह्मण युवक से....
उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के हरचं��पुर थाना क्षेत्र के जोहवाशर्की गांव से के ग्राम प्रधान शिवलाल ने एक ब्राह्मण युवक को कथित तौर पर जातिसूचक शब्द कहे और धमकी दी...
@neetusi86329772 Jat gurjar brahmin baniya rajput sab ek hi hai ab arakshan mangna unki majburi hai kyu ki jb oro ko mil raha hai to unko bhi milna chahiye varna sabhi arakshan nhi chahte
प्रिंसिपल ममता मिश्रा ��र SC/ST एक्ट लगा दिया गया है। तुरंत फांसी का प्रावधान है नहीं, वरना अब तक वो फंदे से लटकाई जा चुकी होतीं! 3 हजार साल से शोषण की आरोपी जाति की महिला को इससे कम सजा मिलनी भी नहीं चाहिए!
ह��दोई के सनबीम स्कूल की प्रिंसिपल ममता मिश्रा ने 24 अप्रैल को एक स्टूडेंट की मां से बद्तमीजी की, ट्रोल हुईं, समाज के साथ - साथ सरकार के निशाने पर आईं। किसी ने भी उनके व्यवहार का समर्थन नहीं किया। ममता मिश्रा ने अपने व्यवहार के लिए माफी भी मांगी। इसके बावजूद सरकारी जांच और संभावित कार्रवाई तय दिख रही थी।
इतने से, वास्तविक पीड़ित का दुख तो कम हो जाता, लेकिन जिन लोगों को पीड़ा का प्रदर्शन करने और "मुनाफा" लेने की आदत हो गई है, उन्हें इससे राहत नहीं मिल सकती। बिना SC/ST एक्ट लगवाए मुआवजा नहीं मिल सकता।
SC/ST एक्ट लगने के बाद, ये भी हो सकता है, कि मामले को रफा - दफा करने के लिए ममता मिश्रा का परिवार भी "रंगदारी" देने के लिए मजबूर हो जाए। दूसरी ओर, इसी एक्ट के तहत सरकार से मिलने वाला मुआवजा भी अब शिकायत करने वालों को ��िलेगा। यानी कि दोनों हाथों में लड्डू। ये एक्ट नहीं लगता तो शायद उनके हाथ खाली रह जाते। इसलिए, दोष कितना, अब इससे मतलब नहीं, किसी को दोषी बताकर फायदा कितना बटोरा जाए, सारा फोकस इस बात पर आकर टिक गया है।
ममता मिश्रा का व्यवहार बहुत खराब था, अशोभनीय था, उनके पद की गरिमा के मुताबिक नहीं था। लेकिन जिस परिवार ने आज उन्हें SC/ST एक्ट में फंसाया है, उनका एक बच्चा पिछले 3 साल से उसी स्कूल में पढ़ रहा।
प्रिंसिपल का कहना है कि वो परिवार उनसे काफी समय से बहस कर रहा था। वायरल वीडियो कुछ मिनट का था, बहस उससे काफी पहले से हो रही थी। मामला बाहर से कॉपी खरीदने के अलावा शायद फीस कम करवाने का भी था, जिसका प्रूफ उनके पास है।