हमें अपनी संस्कृति में लौटना है और अपनी मानवीय व्यवस्था के अनुसार जीवन जीना है।
सुभाष नगर में पहली बार अपनी धम्म संस्कृति के अनुरूप मुक��ति यात्रा निकाली गई। यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आशा और विश्वास है कि समाज के अन्य लोग भी इससे प्रेरणा लेकर अपनी संस्कृति को सशक्त बनाने का कार्य करेंगे।
तथागत बुद्ध का मार्ग मानवता, करुणा, विवेक और मुक्ति का मार्ग है। इसलिए यह आवश्यक नहीं कि इस मार्ग पर चलने के लिए कोई औपचारिक रूप से बौद्ध धम्म ग्रहण करे। धम्म का अर��थ ही है—मुक्ति का मार्ग। इस मार्ग पर कोई भी व्यक्ति चलना प्रारंभ कर सकता है।
हमारा समाज आज भी अनेक गलत परंपराओं और कुप्रथाओं का बोझ ढो रहा है। इन्हें बदलने के लिए कोई दूसरा नहीं आएगा। परिवर्तन की शुरुआत हमें स्वयं अपने घर और अपने परिवार से करनी होगी। धीरे-धीरे यह परिवर्तन समाज में भी दिखाई देगा और एक दिन निश्चित रूप से सकारात्मक परिणाम सामने आएँगे।
इस पहल से पहले हमने परिवार के मुखिया की सहमति भी प्राप्त की थी।
बुद्धं शरणं गच्छामि। 🙏🙏
जब तक अच्छे विचार केवल पढ़े या सुने जाते रहेंगे, तब तक वास्तविक परिवर्तन दिखाई नहीं देगा। परिवर्तन तभी आता है, जब हम उन विचारों को अपने जीवन में अपनाते हैं और व्यवहार में उतारते है���। जैसे सामने रखा भोजन अपने आप पेट में नहीं जाता, उसे स्वयं उठाकर खाना पड़ता है; उसी प्रकार महान विचारों का लाभ भी तभी मिलता है, जब उन्हें जीवन का हिस्सा बनाया जाए।
जय भीम | नमो बुद्धाय | जय जोहार | जय मूलनिवासी। 🙏🙏
चलो भोपाल… चलो वेरावल (गिर सोमनाथ)…
"वेरावल (जिला: गिर सोमनाथ, गुजरात) में
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की 135वीं जयंती के उपलक्ष्य में
महारैली,महासलामी और महासभा का आयोजन किया गया है।
हमें एक मानवतावादी राष्ट्र का निर्माण करना है।
स्वयम् सैनिक दल (SSD)
हमें मानवतावादी राष्ट्र का निर्माण करना है
३६५ दिन महानायकों का कारवां आगे बढ़ा ने की मुहिम को लेकर
आगामी १४एप्रिल कार्यक्रम का गांव गांव में फूल प्रचार प्रसार
एरिया - राहुल नगर,भोपाल,मध्य प्रदेश
दिनांक : १२/०४/२०२६
स्वयम् सैनिक दल
फिल्ड वर्क
हमें मानवतावादी राष्ट्र का निर्माण।
ग्राम: सेमला गोगा,राजगढ़ (नरसिंहगढ़),मध्य प्रदेश मैं 14 अप्रैल को भोपाल में आयोजित होने वाले डॉ. बाबासाहब अंबेडकर जन्मोत्सव के राष्ट्रीय कार्यक्रम हेतु प्रचार-प्रसार और निमंत्रण पत्रिका वितरण।
दिनांक: 06/04/2026
स्वयम सैनिक दल (SSD)
मैंने अनुभव किया है कि जो लोग गुलामी की वास्तविकता को समझ लेते हैं और जिन्हें सच्ची आज़ादी चाहिए, वे कभी भी किसी प्रकार के स्वार्थपूर्ण प्रपंचों में नहीं पड़ते। वे जीवन के अंतिम क्षण तक अपने मिशन के प्रति समर्पित रहकर कार्य करते रहते हैं।
*365 दिन महानायकों का कारवां आगे बढ़ाने की मुहिम।*
*मूलनिवासी माता होलिका के शहादत दिन पर जन जागृति चिंतन शिबिर।*
*दि - 03/03/2026, मंगलवार।*
*गांव - पेपलू।*
*तहसील -लाखणी।*
*जिला- बनासकांठा। गुजरात।*
*स्वयम सैनिक दल। S.S.D.*
*DATE - 03/03/2026*
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‼️ *पंचशील नगर (भोपाल)* ‼️
*✍️ 365 दिन महानायक��� का कारवा आगे बढ़ाने की मुहिम*
👉 *14 अप्रैल 2026 आंबेडकर जयंती के अवसर पर स्वयम् सैनिक दल SSD के माध्यम से भोपाल के अलग अलग बौद्ध विहार और भवनों में बेनर लगाए*
👉*हमें मानवतावादी राष्ट्र का निर्माण करना है*
*अजाक्स भवन,पंचशील नगर(भोपाल)*
*💥 *स्वयम् सैनिक दल-SSD* 💥
पाटन ज़िले में स्पर्धात्मक परीक्षाओं क��� तैयारी कर रहे बहुजन मूलनिवासी समाज के विद्यार्थी साथियों के लिए, आज परम पूज्य बाबासाहेब और महान महापुरुषों की विचारधारा से प्रेरित होकर
स्वयम सैनिक दल (SSD) द्वारा संचालित
“तथागत एकेडेमी” का शुभारंभ किया गया।
रायगढ़ किले पर उत्सव का वातावरण था।
ढोल–नगाड़ों की गूंज, सैनिकों की अनुशासित पंक्तियाँ और सरदारों की गरिमामयी उपस्थिति वर्षों के संघर्ष के बाद छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक ��ोने वाला था।
यह स्वराज्य की औपचारिक स्थापना का ऐतिहासिक क्षण था।
किन्तु इस उल्लास के बीच एक अनदेखा तनाव भी मौजूद था…
राज्याभिषेक वैदिक विधि से संपन्न होना था।
दरबार में उपस्थित कुछ ब्राह्मण विद्वानों के बीच चर्चा उठी:
“वैदिक राज्याभिषेक के लिए क्षत्रिय वंश की मान्यता आवश्यक है।”
कुछ ने संदेह व्यक्त किया:
“भोसले वंश की क्षत्रिय वंशावली का प्रमाण क्या है?”
यह प्रश्न धीरे–धीरे पूरे दरबार में फैल गया,
��र आनंद के बीच एक गंभीर मौन छा गया।
क्या आपको ज्ञात है कि छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक में यह अड़चन किन कारणों से उत्पन्न हुई थी?
Ravidas was a revolutionary thinker far ahead of his time. He rejected caste, religious hypocrisy, and birth-based hierarchy, and placed human dignity, labor, and equality at the center of life.
His vision of Begumpura imagined a society free from caste, poverty, fear, and injustice where everyone lives with dignity.
Ravidas was not just a saint, but a modern voice of social justice.
Remember Ravidas. Reclaim equality.
Jai Bhim Namo Buddhaya Jay Johar Jay Mulnivasi ✊☸️
राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले के जन्म दिन के उपलक्ष्य मे भीमासर अंजार (गुजरात) चिंतन शिबिर बुद्ध वंदना ओर महानायको को सलामी दी गई।
हमें मानवतावादी राष्ट्र का निर्माण करना है।