डीडवाना-कुचामन के कुचामन सिटी राजकीय आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद 7 मरीजों की हालत गंभीर होना और आंखों की रोशनी जाने का खतरा पैदा होना बेहद चिंताजनक है। सरकारी अस्पताल में मरीज ठीक होने गया था, वहां से नई बीमारी लेकर लौटा।
प्रसूताओं की मौतें, किडनी फेलियर के मामले और अब यह हादसा, भाजपा सरकार में स्वास्थ्य तंत्र किस कदर चरमरा चुका है, यह इसका जीता-जागता ��दाहरण है। हमारी कांग्रेस सरकार में निःशुल्क दवा-जांच योजना, चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना एवं RGHS से आमजन को भरोसेमंद इलाज मिलता था। आज वह भरोसा टूट चुका है।
सवाल बहुत हैं, पर सरकारी जवाबदेही किसी की नहीं। सरकार तुरंत जांच कराए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करे।
आज सिविल लाइंस, जयपुर आवास पर पूर्व मंत्री श्री महेन्द्रजीत सिंह मालवीय के साथ पधारे आदिवासी समाज के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर आत्मीय संवाद किया।
कांग्रेस और आदिवासी समाज का रिश्ता आजादी की लड़ाई से लेकर आज तक बेहद मजबूत और आत्मीय रहा है। हमारी कांग्रेस सरकार म��ं वनाधिकार अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन, आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा-स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार और TSP क्षेत्र के बजट में लगातार वृद्धि इसका प्रमाण है।
कांग्रेस सदैव आदिवासी समाज के हक और सम्मान के लिए संघर्षरत रही है और आगे भी रहेगी।
राजस्थान समेत बीजेपी शासित अन्य राज्यों में हाहाकार मचा हुआ है :
चारों ओर हाहाकार मचा हुआ है। बीजेपी के राज्यों में जहां-जहां सरकारें इनकी है हाहाकार मचा हुआ है। ऐसी लूट कभी आज तक कभी सुनी नहीं, देखी नहीं और समझी नहीं है। हालात बड़े गंभीर हैं। एक के बाद एक घोटाले खुल रहे हैं जिसमें आपके मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री का नाम भी आया है। जवाब इनके पास कुछ नहीं है, या तो चुप रहते हैं, प्रतिक्रिया नहीं देते हैं। देते हैं तो खाली फॉर्मेलिटी करते हैं।
इसलिए मैंने कहा राजस्थान में भी करप्शन की हदें खत्म हो गई हैं। गाँव से लगा कर ��े जयपुर तक लोग दुखी हैं। मर्डर, रेप, डकैतियां अलग हो रही हैं, तो कहाँ जाए आदमी । मुख्यमंत्री खुद को समझ लेना चाहिए हालात क्या हैं और उसे ठीक करने का प्रयास करना चाहिए।
मॉरली हम उनको सपोर्ट करेंगे। हमारी कोई दुश्मनी नहीं है मुख्यमंत्री से। हम मॉरली सपोर्ट करेंगे, विपक्ष का सहयोग लें, पर स्थिति बहुत नाजुक है, उनके हाथ से निकलती जा रही है।
आज राजस्थान की धरती से, कोटा से श्री @RahulGandhi ने 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम का आगाज़ किया है।
राहुल जी ने अपार जनसमूह, खासतौर पर बच्चों और उनके माता-पिता के सामने पूरी स्पष्टता से देश की शिक्षा प्रणाली पर अपनी बात रखी है और उनके मन की बात सुनी है। यह देश में अपने आप में एक नया प्रयोग है। यह एक गैर-राजनीतिक कार्यक्रम था और बच्चों के भविष्य को लेकर इस पर ध्यान केंद्रित था।
तमाम दबाव के बावजूद कोटा निवासियों और विद्यार्थियों ने इस कार्यक्रम में शिरकत की, उसके लिए उनका आभारी हूँ।
Heartfelt birthday greetings to the Leader of the Opposition, Shri @RahulGandhi .
A tireless champion for the youth, women, and underprivileged, Rahul ji has become a powerful voice for the unheard across India. His unwavering commitment to protecting constitutional values, social justice, and democratic principles continues to inspire millions.
Praying for his long life, good health, and continued strength to serve the nation with resolve.
राजस्थान की भाजपा सरकार के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा द्वारा आज ACB मुख्यालय में की गई प्रेस वार्ता ने भाजपा सरकार की आपसी कलह को उजागर कर दिया है। कृषि मंत��री ने ACB पर सीधे उन्हें किसी दबाव में आकर फँसाने के आरोप लगाए हैं। कृषि मंत्री ने ACB को "पॉलिटिकल वैपन" यानी राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है।
ACB सीधे मुख्यमंत्री के अधीन है। क��या कृषि मंत्री सीधे मुख्यमंत्री पर उन्हें फँसाने का आरोप लगा रहे हैं? अब ज़िम्मेदारी मुख्यमंत्री की है कि वह सच्चाई बताएँ कि कृषि मंत्री इस रिश्वत प्रकरण में लिप्त हैं या मुख्यमंत्री के अधीन ACB उन्हें फँसा रही है?
पांचना बांध एवं सीमावर्ती जिलों में चल रही कार्रवाई पर प्रतिक्रिया:
सवाल: हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पांचना बांध पर तनाव बना हुआ है?
जवाब: एक- एक घटना ऐसी हो रही है राजस्थान के अंदर कि ये लगता ही नहीं कोई सरकार नाम की चीज राजस्थान में और उसी में पांचना बांध की समस्या भी आती है। अभी तक 15-20 दिन होने आए हैं। कम से कम दोनों समुदाय चाहे गुर्जर समाज हो, चाहे वो मीणा समाज हो, उनके पंच पटेल और जनप्रतिनिधियों को बुला के बात तो करते कि भाई रास्ता कैसे निकल सकता है। हाई कोर्ट आदेश दे रहा है बार-बार। अधिकारी लोग डरे हुए हैं कि कंटेंप्ट लग जाएगा।
एक तरफ कोई बात आगे बढ़ नहीं रही है। वो धरने दे रहे हैं और पटरियों पर बैठे वो भी मैंने देखा है।
तो ये मैं कहना चाहूंगा सरकार के मुखिया माननीय मुख्यमंत्री जी से कि इसको आप गंभीरता से लें। आप गंभीरता से लें और उसी रूप में बुलाकर शीघ्र बात करें। एक टीम बनाएं। आपके मंत्रियों की हो टीम और या ��पकी पार्टी के लोगों की हो जो समझाइश कर सकते हैं। बुलाकर बात करनी चाहिए और समय रहते हुए रास्ता निकालना चाहिए जिससे कि शांतिपूर्ण तरीके से हल निकल सके और सबके साथ न्याय हो सके। ये मेरा मानना है।
सवाल: जातीय संघर्ष जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं :
जवाब: ये तो सरकार खुद कर रही है। जो सरकार का रवैया है उससे जातीय संघर्ष पैदा करने की जो इनकी नीति लगती है, मुझे नीयत लगती है वो पूरे देश के अंदर ही लगत��� है।
��ब पाकिस्तान के बॉर्डर बाड़मेर-जैसलमेर, बीकानेर बॉर्डर पर आजादी के बाद आज तक वहां दंगे की बात छोड़ो तनाव भी नहीं हुआ, जबकि बड़ी तादाद में माइनरिटी के लोग वहां रहते हैं। आज तक ना तनाव हुआ न दंगे हुए।
कुछ एरिया के अंदर भी जो मस्जिदें हैं, दरगाह है, उनको चुन-चुन के आप गिरा रहे हो, भड़का रहे हो लोगों को । क्या तुक है भड़काने का? ये जो घटनाएं आ रही हैं तो ये समझ के परे है सरकार आखिर चाहती क्या है?
ये एजें���ा जो उनका ध्रुवीकरण का है, इन सब बातों को मैं उसी का पार्ट मानता हूं। जिससे कि चुनाव में धर्म आधारित जीत हासिल कर रहे लोग,वो जीत इनकी बनी रहे। चुनाव आते रहते हैं। पांच राज्यों में चुनाव आ रहे हैं। इन बातों का मैसेज पूरे मुल्क में जाता है। वो चाहते हैं मुल्क में मैसेज जाए और ध्रुवीकरण हो और उसका लाभ हमें मिले,
संक्षिप्त में बात तो देखो ये है।
कोई कारण नहीं कि आप चुन-चुन करके मस्जिदों को और दरग��हों को गिराओ��� एक दरगाह तो ऐसी है जहां पर हिंदू लोग ही वहां जाकर उसकी इबादत करते हैं। पूरे गांव में मुसलमान है ही नहीं। हिंदुओं ने हल्ला किया कि भाई आप क्या कर रहे हो? हम तो यहां हमारा खुद का स्थल है, हमने बनाया इसको। भील समाज भी वहां पर है। उसके बावजूद उन्होंने किसी की नहीं सुनी और उसको सबको तहस-नहस कर दिया। ये हरकतें जो हो रही है, जिला प्रशासन को देखना चाहिए कि क्या आप सही काम कर रहे हैं? क्या संविधान के अंतर्��त जो भावना संविधान की है, उसके अनुकूल आप न्याय दिला रहे हो वहां लोगों को? प्रशासन कलेक्टर हो, एसडीओ हो एसपी हो, जो भी अधिकारी हैं, चाहे कमिश्नर या आईजी क्यों नहीं हो, उन सब की जिम्मेदारी है कि जो ये बॉर्डर एरिया है जहां शांति, प्यार, मोहब्बत से वहां पर साथ में लोग रह रहे हैं वहां फ्यूचर में क्या स्थिति बने क्या चाहते हो आप ? ये स्थिति बनी हुई है खतरनाक स्थिति है।
केंद्रीय गृहमंत्री श्री @AmitShah के मई 2026 में हुए बीकानेर दौरे के बाद, सरकार द्वारा राजस्थान के पाकिस्तान से सटे सीमावर्ती जिलों (Border Areas) में अतिक्रमण हटाने के नाम पर मुस्लिम समुदाय के धार्मिक स्थलों को चिह्नित कर उन्हें ढहाने की कार्रवाई शुरू की गई है। इस दमनकारी कार्रवाई के तहत क�� दशकों पुराने ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों को भी निशाना बनाया जा रहा है।
भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे इन संवेदनशील क्षेत्रों में विविध धार्मिक आबादी होने के बावजूद इतिहास में कभी कोई सांप्रदायिक तनाव नहीं रहा है। यहाँ सभी धर्मों के आस्था स्थल परस्पर जुड़े हैं और समाज के सभी वर्गों में इनके प्रति गहरी मान्यता है। यहाँ स्थित मंदिरों या अन्य धार्मिक स्थलों की कानूनी स्थिति भी एक समान है। इस पूरे इलाके में कई ऐसी मस्जिदें और मजारें हैं, जिनकी देखभाल व रखरखाव वर्षों से हिंदू समाज करता आ रहा है। प्रशासन की इस एकतरफा कार्रवाई का स्थानीय हिंदुओं द्वारा मुखर विरोध करना यहाँ के गहरे सांप्रदायिक सौहार्द की एक अनूठी मिसाल है।
एक शांत सीमांत क्षेत्र में अनावश्यक रूप से एक विशिष्ट धर्म को लक्षित कर की जा रही यह कार्रवाई केवल राजनीतिक ध्रुवीकरण (Polarisation) पैदा करने और सामाजिक ताने-बाने को बिगाड़ने के उद्देश्य से प्रेरित प्रतीत होती है। इस दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई के कारण स्थानीय जनता में भयंकर आक्रोश व्याप्त है। इस संवेदनशील कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा की जानी चाहिए। देश के गृह मंत्रालय को इस विषय पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, क्योंकि सीमावर्ती क्षेत्रों में अमन-चैन और सुरक्षा बनाए रखना उनका संवैधानिक कर्तव्य भी है। इस कार्रवाई को अविलंब रोका जाना चाहिए। @HMOIndia
कांग्रेस की एकजुटता पर बार बार सवाल उठाने वालों को जवाब :
कांग्रेस एकजुट है।
राजस्थान में कोई गुटबाजी नहीं है, देश में कोई गुटबाजी नहीं है। कांग्रेस एकजुट है और अगर किसी को ये कन्फ्यूजन है तो हट जाना चाहिए, बार बार ये क्वेश्चन करते हैं लेकिन इसमें कोई दम नहीं है।
भाजपा में गुटबाजी को लेकर प्रतिक्रिया :
हमने तो कभी आरोप लगाया नहीं,कभी उनके उनके फैसलों को लेकर कुछ कहा क्या ? हमने कहा क्या कि अभी चुनाव हुए राज्यसभा के, आपने राजेंद्र राठौड़ को टिकट क्यों नहीं दिया? मैंने कही क्या यह बात ?
भाजपा के बारे में कहने की बातें बहुत हो सकती हैं। हम तो बोलते नहीं लेकिन वो बोलते रहते हैं हमारे पार्टी के बारे में।
पंचायती राज और स्थानीय निकाय चुनाव का इंतजार बढ़ते जाने कर पत्रकार के सवाल का जवाब :
सबको मालूम है कि इतने घबराए हुए हैं कि चुनाव के अंदर साफ हो सकते हैं। हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद में भी दुस्साहस देखिए कि ये उसके बाद भी चुनाव नहीं करवा रहे। केंद्र में सरकार इनकी है इसलिए किसको कहें? वरना यह तो बर्खास्त करने लायक सरकार है। गवर्नर को रिपोर्ट देनी चाहिए राष्ट्रपति के पास में कि क्यों नहीं चुनाव करवा रहे हैं?
संविधान में जो कानून पास किया हुआ है, आप धज्जियां उड़ा रहे हो। जब वर्ष 98 में हमारी सरकार थी और कर्मचारियों की स्ट्राइक चल रही थी तो हमने कहा कि चुनाव कैसे होंगे, हड़ताल चल रही है। तब भी हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि चाहे स्ट्राइक हो चाहे कुछ भी हो आपको टाइम पर चुनाव करवाने पड़ेंगे, इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है। आज आप देख लीजिए बार बार हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट कह रहे हैं। उसके बाद भी स्थिति बनी हुई है।
मुख्यमंत्री जी द्वारा माउंटआबू में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरक��र को लेकर बयानबाजी पर पत्रकार के सवाल का जवाब :
अब देखिए भजन लाल जी की बातों को मुझे कहना पड़ेगा कि गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। गंभीरता से मत लो, क्योंकि वो जब से मुख्यमंत्री बने हैं, उनकी पार्टी के लोग ही उनके बारे में बातें बोल रहे हैं जो मैं कह रहा हूं कि हमारे काम होते नहीं है, हमारे मंत्री कोई बात करें तो सुनते नहीं हैं और मंत्री भी ऐसे ऐसे हैं जो गाली गलौज कर देते हैं थानों में जाकर के, कोई क���ेक्टर को धमका देते हैं। किरोड़ीलाल मीणा जी तो कह रहे कि एसीबी दबाव में काम कर रही है, मेरे खिलाफ मुकदमा झूठा बना रही है। एसीबी तो मुख्यमंत्री के पास है तो किस पर आरोप लगा रहे हैं वो ?
जिस सरकार क�� ऐसी स्थिति हो, उनके मुख्यमंत्री के बारे में क्या कमेंट करूं? वो आपसे मिल लिए बड़ी बात है। मीडिया को आज तक तो उन्होंने कोई जवाब दिया नहीं है। उन्होंने आज तक मीडिया के क्वेश्चन का कोई जवाब नहीं दिया है। ज्यादा से ज्यादा वो कभी बोल गए होंगे मीडिया के सामने, बोलकर रवाना हो गए होंगे। उनको मीडिया को फेस करना चाहिए, क्वेश्चन का जवाब देना चाहिए। उससे उनको ही फायदा है। कई बातें मीडिया वाले बताएंगे। जम���नी हकीकत क्या है? फायदा किसको होता है? सरकार को होता है पर ये इनकी फितरत में नहीं है।
कोटा और बीकानेर के बाद अब जोधपुर के पावटा जिला अस्पताल में सिजेरियन प्रसव के बाद 8 प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने और दो माताओं की हालत गंभीर होने का समाचार बेहद चिंताजनक है।
प्रसूताओ��� को सेप्टीसीमिया होना और किडनी खराब होने जैसी गंभीर स्थिति पैदा होना चिकित्सा व्यवस्था में आई भारी गिरावट और गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। हैरान करने वाली बात है कि एक तरफ शहर में सरकारी आयोजन और वीआईपी दौरों की चमक बिखेरी जा रही थी, वहीं दूसरी तरफ हमारी माताओं-बहनों की जिंदगी खतरे में थी और प्रशासन सच्चाई छुपाने में जुटा रहा।
आज जोधपुर पहुंचकर पीड़ितों से मुलाकात करूंगा।
आज जालौर पहुंचकर जन अभियोग निराकरण समिति के पूर्व अध्यक्ष श्री पुखराज पाराशर के आवास पर पहुंचकर उनके पिताजी स्व. श्री छौगालाल जी सुथार को श्रद्धांजलि अर्पित की एवं शोकाकुल परिजनों को ढांढस बंध��या।
पत्रकार का सवाल: अशोक गहलोत साहब अब राजस्थान में ही राजनीति करेंगे या दिल्ली जाएँगे?
मेरा जवाब: देखिए, मैंने पहले भी कहा है और आज फिर दोहराता हूँ- 'मैं थांसू ��ूर नहीं' (मैं आपसे दूर नहीं हूँ)। अब मैं चाहे लंदन जाऊँ, दिल्ली जाऊँ, जयपुर रहूँ, जोधपुर जाऊँ या जालौर जाऊँ, मैं राजस्थान की जनता से कभी दूर नहीं हो सकता। मैं कहीं भी रहूँ, राजस्थान वासियों की सेवा करना ही मेरा परम कर्तव्य और धर्म है। राजस्थान की जनता ने मुझे पाँच बार सांसद बनाया, छह बार विधायक बनाया, केंद्रीय मंत्री बनाया और तीन-तीन बार मुख्यमंत्री की ज़िम्मेदारी दी। तीन बार मुख्यमंत्री बनना क��ई छोटी बात नहीं होती!
श्रीमती सोनिया गांधी जी और राहुल गांधी जी ने मुझ पर भरोसा जताकर न सिर्फ मुझे तीन बार मुख्यमंत्री बनाया, बल्कि हर बार पूरे पाँच-पाँच साल तक काम करने का अवसर दिया। पूरे हिंदुस्तान के राजनीतिक इतिहास में ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है, जहाँ अक्सर मुख्यमंत्री बदलते रहते हैं। मुझे इस पार्टी और जनता से सब कुछ मिला है।
अब मेरा यह फ़र्ज़ बनता है कि मैं अपने लिए किसी पद की माँग न ���रूँ। पार्टी मुझे जो भी ज़िम्मेदारी देगी, चाहे वह जोधपुर की ह��, जालौर की हो, पूरे राजस्थान की हो, या दिल्ली में संगठन के किसी पद की हो, मैं उसे सहर्ष स्वीकार करूँगा, लेकिन खुद से कोई माँग नहीं करूँगा। हाईकमान जो भी फैसला करेगा, मुझे मंज़ूर है। मैं देश का सबसे संतुष्ट राजनीतिज्ञ (Politician) हूँ। जब मुझे पार्टी से बिना माँगे सब कुछ मिला है, मैं इंदिरा गांधी जी के समय ही केंद्रीय मंत्री बन गया था तो फिर अब मैं किसी पद की लालसा क्यों रखूँ?
आज देश और पार्टी के सामने बहु�� बड़ी चुनौतियाँ हैं, जिन्हें हमें गहराई से समझना होगा। हमारा एकमात्र लक्ष्य पार्टी को हर स्तर पर मज़बूत करना है। राहुल गांधी जी ने स्पष्ट रूप से आह्वान किया है कि दलितों, आदिवासियों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों (Minorities) पर कहीं भी कोई अन्याय या अत्याचार हो, तो कांग्रेस कार्यकर्ता तुरंत उनके पास पहुँचे, उनके सुख-दुख का साथी बने और ज़रूरत पड़ने पर उनके हक के लिए बड़ा आंदोलन खड़ा करे। राहुल जी की इस बा��� में हमारी भविष्य की प���री राजनीति और सेवा का मर्म आ जाता है।
भाजपा द्वारा लगातार सांसदों की खरीद-फरोख्त करना सीधे तौर पर जनमत को एक खुली चुनौती है। भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनावों में जनता से '400 पार' सीटें जिताने का आह्वान किया था, लेकिन देश की सजग जनता ने उन्हें बहुमत से दूर केवल 240 सीटों पर ही समेट दिया।
आज केंद्र में एनडीए (NDA) गठबंधन की सरकार चल रही है, जिसमें फिलहाल कोई खींचतान भी नज़र नहीं आती। इसके बावजूद तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना और बीजेडी (BJD) जैसे दलों के सांसदों को तोड़कर भाजपा और एनडीए में शामिल करना यह साफ़ दिखाता है कि भाजपा धनबल और बाहुबल के आगे जनता के जनादेश को कुछ नहीं समझती।
पहले तोड़-फोड़ का यह खेल केवल गुजरात तक सीमित था, जहाँ पूर्ण बहुमत की स्थिर सरकार होने के बावजूद भाजपा पाँच साल तक लगातार वि��क्षी विधायकों को तोड़ती रहती थी। अब यही तथाकथित 'गुजरात मॉडल' पूरे देश में लागू कर दिया गया है।
देश की जनता को सत्ता के इस खतरनाक खेल को गहराई से समझना होगा। मतदाताओं को न सिर्फ भाजपा से, बल्कि अब पाला बदलकर एनडीए में जा रहे उन सांसदों से भी कड़े सवाल पूछने चाहिए कि जब जनता ने उन्हें पाँच साल के लिए एनडीए की नीतियों के खिलाफ वोट देकर जिताया था, तो वे अब किस मुंह से एनडीए की गोद में जाकर बैठ गए?
विशेषकर देश की युवा पीढ़ी को सोचना होगा कि आखिर इस देश में हो क्या रहा है? आज महँगाई, बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार और पेपर लीक जैसे आमजन से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर सरकार का कोई ध्यान नहीं है, लेकिन पर्दे के पीछे सांसदों की अनैतिक खरीद-फरोख्त लगातार जारी है। क्या यह सरकार विपक्ष और विरोध की हर लोकतांत्रिक आवाज़ को पूरी तरह कुचल देना चाहती है? क्या भारत का महान लोकतंत्र अब दम तोड़ने की कगार पर है?
श्री @RahulGandhi लगातार संसद के अंदर और बाहर संविधान की बात उठा रहे हैं। बार-बार राहुल जी देशवासियों से आह्वान कर रहे हैं कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए आगे आएं। युवाओं को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और हर दल की विचारधारा व उसकी नीतियों को समझकर देश की राजनीति में सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए।
जोधपुर के पावटा अस्पताल और एम्स (AIIMS) पहुंचकर हाल ही में गंभीर संक्रमण का शिकार हुईं प्रसूताओं से मुलाकात की। उनके परिजनों ढांढस बंधाया और डॉक्टरों से बात कर प्रसूताओं के स्वास्थ्य की स्थिति तथा चल रहे इलाज की विस्तृत जानकारी ली।
प्रसूताओं की बिगड़ती तबियत और किडनी फेलियर जैसी स्थितियां बेहद चिंताजनक हैं। स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ा यह मामला अत्यंत संवेदनशील है, जिसमें सरकार को राजनीति से ऊपर उठकर टॉप प्रायोरिटी पर पूरी गंभीरता के साथ कड़े कदम उठाने चाहिए।
हमारी बेटियों-बहनों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पत्रकार का सवाल : बॉर्डर के इलाक़े में जो कार्रवाई हुई है उसको लेकर आपका क्या कहना है?
जवाब : बॉर्डर एरिया में एकतरफ़ा हो रहा है। अगर मान लो नेशनल हाईवेज़ बने थे, तो एक लाइन खींच गई थी कि भाई हमें तो फोर लेन बनानी है, सिक्स लेन बनानी है, तो जो इस लाइन में आएँगे, वो सब एन्क्रोचमेंट, चाहे बंगला है, चाहे दुकान है, चाहे कुछ भी, टूटेंगे, तभी सड़कें चौड़ी होंगी। किसी को एतराज़ नहीं हुआ।
यहाँ पर चुन-चुन करके, चुन-चुन करके सिर्फ़ माइनॉरिटी, मुस्लिम माइनॉरिटी के जो दरगाह या मस्जिद हैं, बल्���ि एक गाँव तो ऐसा है बड़ा, जहाँ हिंदू लोग, भील भी हैं, दूसरी जाति रायका भी है, उन लोगों ने उसको बनाया, उनकी वहाँ उस दरगाह पर आस्था है। उन्होंने कहा, "एक मुस्लिम का घर है हमारे गाँव के अंदर, बाक़ी सब हम हिंदू लोग रहते हैं।" उसको गिरा दिया। तो यह क्या कारण है कि आप चुन-चुन करके इस प्रकार की हरकतें कर रहे हो?
अमित शाह जी को जवाब देना चाहिए कि क्या आप क्या चाहते हो अल्टीमेटली? वो आके गए बीकानेर, उसके बाद में हरकतें हुई हैं। कल रात को आए थे डेल��गेशन उनके, बाड़मेर वालों के, मैंने उनको तसल्ली दी कि आप शांति बनाए रखें। हमने गृह मंत्री जी को टैग किया है मेरे ट्वीट में, तो मैं उम्मीद करता हूँ जनता को कोई-न-कोई जवाब देंगे।
क्या सरकार इंतज़ार कर रही है कि यूपी अग्निकांड की तरह घटना यहाँ पर हो? कोचिंग हब क्यों नहीं कर रहे शुरू?
अशोक गहलोत का बयान: जो घटना हुई है कल लखनऊ में, 15 बच्चे मर गए। यह घटना भी कोई मामूली नहीं है। क्या हमारी सरकार इंतज़ार कर रही है क्या ऐसी घटना का? मैं सरकार को कहना चाहूँगा, हमने क़रीब ₹400-500 करोड़ खर्च करके ज��पुर में कोचिंग हब बना दिया है 240 इंस्टिट्यूशंस के लिए। 140 लोगों ने जमा करा दिए पैसे। इस सरकार की बेवकूफ़ी से 100 लोगों ने पैसे वापस ले लिए। हम तो आईआईटी का वहाँ ब्रांच खोलेंगे वहाँ पर, मज़ाक बना रखी है इन्होंने। आईआईटी की अगर आपको एक यूनि�� खोलनी है वहाँ पर, नया भवन बना दीजिए उनके लिए।
पर जो हमने काम किया कि जो क़रीब 1 लाख बच्चे तो गोपालपुरा बायपास पर पढ़ रहे होंगे। घटना हो चुकी है दिल्ली में, बच्चे मर चुके हैं पानी के अंदर डूब करके अंडरग्राउंड में। गोपालपुरा में गैस से 25-30 बच्चे घायल हो गए। तो क्या सरकार इंतज़ार कर रही है कि यूपी की तरह घटना यहाँ पर हो? क्या चाहती है सरकार? क्यों उसको बंद कर रखा है? पड़ी-पड़ी बिल्डिंग टूट जाएगी, उसमे�� लाइब्रेरी भी है उसके अंदर, सारी सुविधाएँ हैं, फ़ूड कोर्ट भी है बच्चों के लिए, अच्छे माहौल में बच्चे पढ़ सकते हैं, अच्छा माहौल उनको मिलेगा सब तरह से। समझ के परे है कि क्यों इस प्रकार की हरकतें कर रही है?
हरकतें वहाँ ही नहीं कर रही है, जोधपुर में चार अस्पताल बिल्डिंग खड़ी पड़ी है। सुमेर पब्लिक लाइब्रेरी की बिल्डिंग बन चुकी है, वहाँ पड़ी है। स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट पड़ा हुआ है। मैंने मुख्यमंत्री ���ुद को रिक्वेस्ट करी, टेलीफ़ोन पर बात करके, जब मेरे बर्थडे पर बात हो रही थी। मैंने कहा, "श्रीमान जी, आप आइए, हम स्वा��त करेंगे आपका वहाँ। आप इनका क्यों नहीं फीता काट देते हो?" कि "नहीं, मैं जल्दी करूँगा।" वो जल्दी आज तक नहीं आई है।
कल मुझे किसान मिले, 2025 का मुआवज़ा अभी तक नहीं मिला उन किसानों को। पहले 23-24 का रुका हुआ था। यह आपके लूणी के जो हमारे मंत्री महोदय हैं, इनके क्षेत्र का ही था वो। और भी कई जगह से शिकायत आ रही थी। पर सरकार मुआवज़ा टाइम पर दे नहीं पा रही है और तमाम डिपार्टमेंट के पेमेंट रुके पड़े हैं। सरकार को ���्पष्ट करना चाहिए कि हमारी फाइनेंशियल स्थिति बहुत ही नाज़ुक है, हम पेमेंट नहीं कर पाएँगे 6 महीना, साल भर, कुछ तो कहे। सारे डिपार्टमेंट में पेमेंट रुक गए, ₹2 करोड़ के चेक नहीं कट रहे हैं। डबल इंजन सरकार है, दिल्ली में इनकी खुद की सरकार है, इनको एक्स्ट्रा इमदाद मिल सकती है, मिल भी रही होगी। पर मैनेजमेंट ऐसा बकवास कर दिया है, कोई डिपार्टमेंट का पेमेंट नहीं है। बर्बाद हो गए लोग-बाग, दुखी हो गए हैं। समझ नहीं पड़ रही है ��ेंशन टाइम पर नहीं मिलती, कुछ नहीं हो रहा है। मतलब यह स्थिति बनी है।
ख़बर है गंगानगर, हनुमानगढ़ के अंदर और भी कई जगह कि गेहूँ की ख़रीद नहीं हो रही है। वहाँ हड़तालें चल रही हैं, लोग दुखी हैं, बारदाना नहीं आ रहा है। जो टारगेट फिक्स करते हैं, वो पूरा ख़रीद भी नहीं पा रही सरकार उनको और टाइम जो है पहले 30 जून तक का होता था ख़रीदारी का, इस बार 31 मई कर दिया, उसके कारण से अब बार-बार आगे बढ़ा रहे हैं और 30 जून भी आ ज���एगा। तो किसान बर्बाद हो रहा है राजस्थान का, यह मैं कहना चाहूँगा।