JSSC JE पेपर लीक के दावे को लेकर ट्विटर पर आज #jssc_je_scam ट्रेंड कर रहा है.!
कुछ छात्र दावा कर रहे हैं कि JSSC JE परीक्षा कराने का टेंडर JSSC ने Satvat infosol Chennai नामक एक निजी कंपनी को दिया था. और उसने Binsys Technology Dilhi से Question पेपर प्रिंटिंग कराया था.!
किसी आंदोलनकारी छात्र को “मामले से अनजान”, “भाजपाई” या सरकार के खिलाफ जबरन माहौल बनाने वाला कह देना बहुत आसान है…
लेकिन ज़रा इस अख़बार की कटिंग को भी देख लीजिए।
छात्र किसी पार्टी के झंडे के लिए नहीं,
अपने भविष्य की पारदर्शिता के लिए सड़क पर उतरता है।
इसलिए भाई, छात्रों को प्रमाणपत्र बांटने से पहले उनकी पीड़ा समझिए।
अख़बार की यह कटिंग सिर्फ खबर नहीं है—किसी छात्र की मेहनत, उम्मीद और भविष्य पर उठे सवाल की गवाही है।
"सारे रिश्तेदार अफसर बनेंगे, तो आम छात्र कहाँ जाएंगे?"
#JSSC_CGL परीक्षा में अभय तिवारी ने ऐसा 'पारिवारिक कल्याण' चलाया कि साले से लेकर साढू के बेटे तक, सब एक ही बार में साहब बन गए!
ये कोई संयोग नहीं, बल्कि ₹40 करोड़ का सुव्यवस्थित सिंडिकेट है जिसने पूरी व्यवस्था को खोखला कर दिया।
झारखंड के युवाओं की प्रतिभा को पैसे के दम पर बेचा गया है!
@RahulGandhi@kharge@HemantSorenJMM@INCJharkhand_
नेहा बोरा पर स्याही फेंकने वाले इस युवक को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। इसकी पहचान अमर पांडेय के रूप में हुई है। नेहा बोरा ने उसे RSS से जुड़ा बताया। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा लेने का बदला BJP और RSS ले रही है।
रांची में नेहा पर स्याही फेंकी। जंतर मंतर पर अभिजीत के साथ भी यही हुआ। स्पष्ट है कि मोदी, भागवत चाहे जितना रफू कर लें, उनके लोगों को शिक्षा-परीक्षा से कोई लगाव नहीं। JPSC मामले में इन्हें सिर्फ इतना मतलब है कि इससे JMM कांग्रेस को बदनाम कर सकें।
मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी से एक भावनात्मक अपील...
आज आंदोलनकारी छात्रों के पाँच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए बुलाया गया है। संवाद की पहल निश्चित रूप से स्वागतयोग्य है, क्योंकि लोकतंत्र में बातचीत ही समाधान का सबसे बेहतर रास्ता है।
जब आपको पता है छात्र 10 तारीख को विधानसभा घेराव की रणनीति बना रहे है तो क्यों 7 तारीख का ऐलान करके आप रोटी सेक रहे है।
हमारा AISA या उनके लोगो से या उनको कोई कृत्य से कोई संबद्ध नहीं है।
छात्र आंदोलन जितना लंबा चलेगा, सरकार के लिए उतनी ही राजनीतिक चुनौती बढ़ेगी। अभी भी समय है—मुख्यमंत्री स्वयं छात्रों से मिलें, उनकी जायज़ मांगों पर सकारात्मक निर्णय लें और दोषियों पर तेज़ कार्रवाई करें। संवाद ही सबसे बड़ा समाधान है, क्योंकि राजनीति खाली जगह कभी नहीं छोड़ती।