@Vpsingh1234511 @AslamChopdar11 4 दोस्त एक साथ नौकरी लगे क्रमशः
1 कांस्टेबल बना 2400 ग्रेड पे
2. पटवारी बना 2400 ग्रेड पे
3. ग्रामसेवक बना 2400 ग्रेड पे
4.कृषि पर्यवेक्षक बना 2400 ग्रेड पे
फिर आगे नौकरी करते रहे , भर्ती हुए 2400 ग्रेड पे में चारों दोस्त,,,पटवारी, VDO, कृषि पर्यवेक्षक 9 साल सेवा पे 3600जीपी
@Vpsingh1234511 @AslamChopdar11 जब पटवारी, ग्रामविकास अधिकारी, कृषि पर्यवेक्षक 2400 ग्रेड पे में भर्ती होकर 9 साल की सेवा के बाद डायरेक्ट 3600 ग्रेड पे वेतन लेता है,,वो ही वेतन कॉन्स्टेबल को 18 साल की सेवा के बाद मिलता है,,ये अन्याय कब तक कॉन्स्टेबल को 9 साल सेवा के उपरान्त 2800 ग्रेड पे वेतन प्रथम एसीपी मिलती
खाकी पहनने वाला कांस्टेबल सिर्फ एक कर्मचारी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की सबसे मजबूत नींव है।
त्योहार हो या आपदा, रात हो या कड़ाके की ठंड — जब पूरा समाज अपने परिवार के साथ होता है, तब कांस्टेबल अपने परिवार से दूर, दूसरों की सुरक्षा में खड़ा होता है।
लेकिन सबसे बड़ा अन्याय वेतन और पदोन्नति में हो रहा है।
ग्राम सेवक, पटवारी और कृषि पर्यवेक्षक जैसे पद, जिनकी भर्ती 2400 ग्रेड पे ���र होती है, उन्हें 9 वर्ष की सेवा के बाद प्रथम ACP में 3600 ग्रेड पे दिया जा रहा है।
वहीं दूसरी ओर, कांस्टेबल जो 24 घंटे कानून-व्यवस्था संभालता है, अपराधियों से सीधे भिड़ता है, उसे इस समान अधिकार से वंचित रखा गया है।
क्या खाकी पहनना उसकी गलती है?
क्या कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी सजा है?
और हाल ही में मेस भत्ते में मात्र ₹2.5 की डाइट वृद्धि करके मानो जले पर नमक छिड़कने का काम किया गया है।
जिस जवान की ड्यूटी 12–16 घंटे तक चलती है, उसके भोजन और सम्मान के साथ यह मज़ाक आखिर कब तक चलेगा?
का कांस्टेबल विशेषाधिकार नहीं, सिर्फ समानता और न्याय मांग रहा है।
क्योंकि मजबूत कानून-व्यवस्था वही होती है, जहां सबसे निचले स्तर का जवान भी मजबूत और सम्मानित हो।
अब समय आ गया है कि इस अन्याय को समाप्त किया जाए और कांस्टेबल को उसका हक दिया जाए।
@BhajanlalBjp (माननीय मुख्यमंत्री, )
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