@alokrajRSSB RSSB पर्यावरण विषय को भर्ती में शामिल क्यूँ नहीं करती.
RSSB पर्यावरण विषय को भर्ती में शामिल क्यूँ नहीं करती.
RSSB पर्यावरण विषय को भर्ती में शामिल क्यूँ नहीं करती.
RSSB पर्यावरण विषय को भर्ती में शामिल क्यूँ नहीं करती.
RSSB पर्यावरण विषय को भर्ती में शामिल क्यूँ नहीं करती.
@DrRumaDevi रहम कीजिए. आक को कोमोडीटी ना बनाईये. आक को बख्श दीजिए. मरु प्रदेश से खत्म हो जाएगा प्राकृतिक रूप से उगा हुआ आक. बहुत से जीव इस पर निर्भर है. बिजनेस करने के ओर भी हजार रास्ते हैं.
@AmitKum93475857@hridayeshjoshi सब उगाया जा रहा. एग्री यूनिवर्सिटी और कृषि विभाग जीएम ट्रायल में मुख्य भागीदारी निभाते. कुछ जगहें तो खुलकर बोल रही. क्यूंकि उनको विभिन्न मंत्रालय ने अनुमति दे रखी.
@hridayeshjoshi आप की ओपिनियन पर विश्वास करने का कोई आधार नहीं है. आप सरकार के विरुद्ध एक शब्द नहीं बोलते. भारत में 2016 से illegally, GM फसलों के ट्रायल चल रहे. कई सब्जियों, कैश क्रॉप के हुए. चिप्स आदि में जी एम आलू 2016 से आ रहा. चावल के देशज बीज़ को खत्म करने के लिए एक दशक से काम चल रहा.
⚡️ Images from #Starobelsk — foreign journalists from 19 nations are witnessing the aftermath of the Kiev regime's terrorist attack at the Starobelsk College that took lives of 21 young students, injuring another 40+ people.
#NoStatuteOfLimitations
@arvindchotia यूक्रेन ने रूस के अंदर एक टीचर ट्रेनिंग कॉलेज और बीएड कर रहे टीचर्स के होस्टल की बिल्डिंग पर 5 बम गिराए. 25 ट्रेनी टीचर्स मारे गए हैं. पूरा कॉलेज बिखरा पड़ा है. रूस ने पूरी दुनियां से पत्रकार बुलाए हैं. आप भी जाइए.
@Decentladki1@TheTribhuvan योरोप में बहुत से पत्रकार सोशल मीडिया पर वायरल नहीं होना चाहते. वे अपना लेख लिखते हैं. शुक्रवार की शाम से रविवार की शाम सब कुछ बंद करके दोस्तों, परिवार के साथ समय बिताते हैं. नॉर्वे में तो वीकेंड पर पुलिस चोर दोनों आराम करते हैं. जो वॉर रिपोर्टिंग करते हैं वे फोन ही नहीं रखते
@HelleLyngSvends asked questions and no one gave an answer.
Meanwhile, shamelessly @AmbSibiGeorge was whining about so called Indian history. Does Indian culture allow violation of human rights and atrocities on marginalised people? Why Modi didn't ever hold a press conference?
@sushilakajla2@AryaveerSingh45 राजस्थान में किसी को भी अनिवार्य और वैकल्पिक की बात समझा दो ऐसा सम्भव नहीं है. हम लोग पर्यावरण विषय के अनिवार्य वैकल्पिक स्ट��टस और दोनों स्तर पर भर्ती की बात कॉलेज आयुक्तालय, सीएम के पीए, उच्च शिक्षा सम्भाल रहे RAS, और कॉलेजों के प्रिन्सिपल तक को नहीं समझा पाए हैं. 😬
@Jat_Ethnic आपने वैलिड सवाल उठाए हैं. जबाव किसी के पास नहीं है. लैंग्वेज लैब खोल रही है राज. सरकार अंग्रेजी स्पेनिश जापानी, जर्मन, फ्रेंच के लिए. राजस्थानी उस लैब का हिस्सा नहीं है.
विदेशी भाषा सीखें शिक्षा, रोजगार के लिए.
जापानी बोलने जितनी सीखने पर संबंधित स्किल में 3 लाख मासिक मिल जाता
@Jat_Ethnic आ��� कह रहे हैं कि भाषा पर्यावरण अलग अलग मुद्दा है. पर्यावरण को गेट से बाहर फेंक भाषा को अंदर लिया गया है. NEP में यूजीसी ने MIL को अनिवार्य किया है और पर्यावरण को स्वैच्छिक. यूजीसी के UG कोर्सेस के लिए गाइड लाइन देखिए.
@Jat_Ethnic अलग है. लेकिन अनिवार्य विषय के स्टेटस अनुसार ही उनको ट्रीटमेंट मिल रहा है. राजस्थान के करीबन 20 कॉलेज से आरटीआई से डाटा लिया. जिन कॉलेज में हिंदी ऑप्शनल है वहीं हिन्दी अनिवार्य पढ़ाई जा रही. बाकी में बिना क्लास बच्चे परीक्षा देते. यही हाल अनिवार्य अंग्रेजी , कम्यूटर का है.
@Jat_Ethnic जॉब्स सृजन के लिए चाहिए - फंड, बड़ा सा सिलेबस, पर्याप्त वर्क लोड.
अभी जो अनिवार्य स्टेटस राजस्��ानी का घोषित हुआ है ऐसा ही पर्यावरण विषय का 2004 में हुआ. अभी तक भर्ती नहीं हुई है. सीएम, उसके पीए, आयुक्तालय सब यही कहते हैं कि वर्क लोड नहीं है. कोर्ट में 10 साल से पेंडिंग है मसला.
@pkray11 WEF लंबे समय से बोल रहा है. बग खाओ. कीड़े खाओ. कॉकरोच खाओ. प्रोटीन पाओ. कॉफी पाउडर में तो कॉकरोच का पाउड��� कुछ % तक मिलाने की लीगल अनुमति है. चूंकि बीन्स प्रोसेसिंग मे गिर जाते हैं containers में. मैं तो कॉफ़ी कभी कभी पीता हूं तो बीन्स को अदरक के साथ कूटकर बनाता हूं. 😬
@sushilakajla2 2004 में राजस्थानी भाषा जैसा ही आदेश अनिवार्यता के साथ पर्यावरण विषय पढ़ाने के लिए आया था. सिलेबस बना. किताबें छापी गई. पूरे राज्य में एक भी पर्यावरण के शिक्षक की भर्ती नहीं हुई है. यही हाल इसका होना है. इस भाषा की डिमांड ही नहीं है. सिर्फ RAS में पढ़ने पढ़ाने की फैंसी ड्रेस है.
@pkray11 रूस की विदेश मंत्रा��य प्रवक्ता और उनके घर के बच्चे चाइनीज जानते हैं. इसी तरह कई डिप्लोमेट को सिखाई गई है. ट्रंप ताऊ असहज है. ऐसी हरकतें कर रहा.
@RahulKaswanMP सुप्रिम कोर्ट क�� आदेश से क्या होगा? 2004 में ऐसा ही आदेश अनिवार्यता के साथ पर्यावरण विषय पढ़ाने के लिए आया था. सिलेबस बना. किताबें छापी गई. और लीपा पोती. आपके चूरू कॉलेज में पता करिए कि अनिवार्य पर्यावरण विषय कौन पढा़ रहा है. पूरे राज्य में एक भी शिक्षक की भर्ती नहीं हुई है.