इंसान ने वक्त से पूछा…..
मैं हार क्यूं जाता हूँ ?
वक्त ने कहा…
धूप हो या छाव हो,
काली रात हो या बरसात हो,
मैं हर वक्त चलता रहता हूँ,
इसलिए मैं जीत जाता हूँ,
तू भी मेरे साथ चल,
कभी नहीं हारेगा……✌️✌️
- हरिओम मीना
@iaspremprakash हमारी सोच ही आधुनिकता को जन्म देती हैंआधुनिकता ही हमारे भविष्य को तैयार करती हैं हमारे हौसले और बुलंदियों ने अपनी जिंदगी सवेरने का जुनून और हौसला देती हैं हमारे हौसले ही हमारी ताकत हैं हमारी जीत
हीआधुनिकता,परिवार,समाज,और देश की जीत में बदल जाती हैं देश की जीत कीआधुनिकता की जीत है
दास्तां सुनाएंगे सफ़र की मंजिल को जिस दिन हासिल कर लेंगे।
क्या कुछ नहीं गवाया यहाँ तक आते आते।
थके हारे खुद को संभा��ते,
गिरते पड़ते खुद को सहलाते ,
खुद के आंसू खुद की पोंछते ,
और मंज़िल की और कदम बढ़ाते।
सफ़र लंबा था , हिम्मत भी अटूट थी ,
विश्वास भी गहरा था,
बस रास्ते की ठोकरें कभी कभी लड़खड़ा देती थी,
उठके खुद के सहारे ही चलते गए,
हौंसला बनाए रखा और कर्म की और बढ़ते गए।
आशाओं के मौसम में कभी निराशाओं के बादल गहराते थे ,
लेकिन फिर से उठते थे और मंज़िल की और कदम बढ़ाते थे ,