@airtelindia सबसे कम का रिचार्ज 299 के लिए 28 दिन हेतु आप रिचार्ज कर सकते हैं यानी प्रतिदिन के हिसाब से ₹10 आपके जेब पर खर्च पड़ रहा है!
श्रीमान से अनुरोध है की क्या यह सब सही है हम उसे भारत में रहते हैं जहां प्रतिदिन प्रत्येक व्यक्ति 200 से 300 नहीं कमा पाता
ये एक अति अशोभनीय एवं संवेदनशील मामला है कि महाकुंभ में नारी के मान-सम्मान की रक्षा करने में भाजपा सरकार विफल रही है। महाकुंभ में पुण्य कमाने आई स्त्री शक्ति की तस्वीरों के सरेआम बेचे जाने के समाचार पर श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश है। नारी की गरिमा की सुरक्षा करना सरकार का कर्तव्य है, क्या सरकार इस ऑनलाइन बिक्री से जीएसटी कमाकर इस गोरखधंधे की हिस्सेदारी नहीं बन रही है।
उप्र एवं राष्ट्रीय महिला आयोग तुंरत संज्ञान लेकर सक्रिय हो और समस्त उत्तरदायी लोगों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई हो।
घोर निंदनीय!
BPSC अभ्यर्थी BJP-JDU के संयुक्त धांधली में रोड़े अटकाएँगे, तो 'सुशासनी डंडे' तो खाएँगे ही!
जाहिर है 1, अणे मार्ग में 70वीं BPSC के 'सरकारी सफल अभ्यर्थियों' की सूची बन ��ुकी है!
अब कमाने की हड़बड़ी में ये धूर्त लोग कहाँ किसी की सुनने वाले हैं!
@yadavtejashwi
#TejashwiYadav
#BPSC
#bpsc70th
@Mukesh_Journo लोग कोई भी उत्सव अपनी अपनी भाषा और अपनी अपनी भावनाओं में मनाते हैं अगर बिहार के लोग तमिल के गाने पर उत्सव मनाएंगे और कन्नड़ के लोग भोजपुरी गाने पर उत्सव मनाएंगे तो उत्सव का रंग फीका रह जाएगा जरूरी नहीं हर बार शब्दों पर जाया जाए।
मेरे विचार कुछ गलत लिखा होगा उसके लिए ��्षमा चाहूंगा
‘'घुघुआ माना—खेत खरिहाना’
लेख - देवेंद्र नाथ तिवारी
मधुबनी पेंटिंग - पारुल तोमर
इ गीत, रउआ-हमरा स्मृति में जरूर होई. इ गीत पुरनिया लोग सुनावत रहल ह. सुतले-सुतले अपना घुटना-टखना प बइठा के छोट-छोट बचवन के खेलावत, झुलुआ अस झुलावत रहल ह लोग. एही खेल के ‘घुघुमा माना' कहल जात रहल ह. एकरा के खेलावत बेर इ गीत गावल जात रहल ह—
'घुघुआ माना—खेत खरिहाना,
अगर मगर पुआ पाके ला—
खोईछा चीलर नाचे ला—
चिलरा ��इल खेत खरिहान
ले आइल कतिकवा धान
ओह धान के रिन्हलसि खीर
बाम्हन नेवतलसि ऊ दस बीस
बम्हना के पुतवा दिहलसि असीस
बबुआ जीयसु लाख बरीस।
नया भीति उठे ले- पुरान भीति गिरे ले
सम्हरिह बुढ़िया दाई रे...।'
खेल-खेल में इ गीत नैतिक संदर्भन के सिखावत रहल ह. जब 'नई भीति उठेला' के टेक आवत रहल ह तब बबुआ/बबुनी के पैर के सहारे ऊपर कर दिहल जात रहल ह, आ 'पुरानी भीति' के टेक पर अपन��� के नीचे. बबुआ/बबुनी ख़ुशी से लोटपोट हो जात रहल ह. आ साथे-साथ 'शीर्षासन' के कसरत भी हो जात रहल ह.