#जलकुंभी
पहले एक पौधा दिखाई देता है... फिर धीरे धीरे कुछ हफ्तों में तालाब के सब कोनों में एक-दो पौधे तैरते दिखाई देने लगते हैं....
कुछ महीने या सालों में पानी दिखाई देना बंद हो जाता है... सारे तालाब के ऊपर सिर्फ हरा हरा ही दिखाई देता है.... पानी की आक्सीजन खत्म होने लगती है.... अंदर का जीवन, मछलियां मरने लगती हैं...
धीरे धीरे पानी की सड़ांध किलोमीटर दूर से महसूस होनी शुरू हो जाती है.... जिस जिस तालाब में ये जलकुंभी पहुंचती है, उसे उसे खत्म कर देती है....
इलाज...
अगर तो शुरू में ही एक दो पौधों को बाहर निकाल कर फेंक दिया जाए तो वो धूप से सूख जाएंगे....
अगर पूरा तालाब भर गया हो तो सारी जलकुंभी को बाहर निकाल कर सुखाया जाता है.... और सूखने के बाद आग लगा कर बीज तक नाश कर दिया जाता है...
ताकि दुबारा ना पनप सके....
हो सकता है आपके घर के पास के तालाब में एक दो पौधे दिखाई दें... शुरू में आपको ये सुंदर दिखाई देंगे... लेकिन अगर आप अभी इलाज नहीं करेंगे तो धीरे धीरे ये पूरे तालाब पर कब्जा कर लेंगे...
फिर या तो आप सड़ांध सहना या घर बेच कर दूर चले जाना.... दो ही रास्ते होंगे... तीसरा रास्ता समूल नाश का है...
मर्जी है आपकी...
क्योंकि तालाब है आपका...
घर है आपका...
😜
@TheKalchakra सारे गालीबाज़ कुंठित एक जगह इकट्ठे हो गए। जनता की लात से बड़ी चोट लगी है इसलिए अभद्र भाषा का प्रयोग कर मन की कुंठा कम कर रहे हैं ।कानून इस जैसे लोगों को कुछ सभ्यता का पाठ तो जरूर सिखाये ।
@INCIndia@RahulGandhi भगवान शिव और उसकी महिमा को जप तप करने वाला ही समझ सकता है । राजनीति करो । उसमे सनातन के आदि देव देवों के देव भगवान शिव और शक्ति को मत लाओ।
@Sarfarosh_IND इस बद जुबान को यूँ ही कैसे बोलने दिया जाता है । बोलने की आजादी का अर्थ ये नहीं कि कोई कुछ भी बोले। कोर्ट इस चिरकुट के अनुसार चले और गुसपैठियों के वोट कटने से रोके।
@PNRai1@SatishAggarwal9 भारत की जनता बहुत समझदार है वो ऐसा नहीं होने देगी। राष्ट्रवादी लोग शांत रहते हैं पर समय आने पर युद्ध के लिए भी तैयार रहते हैं ।
मुख्य न्यायाधीश के सामने शक्ति प्रदर्शन करना था जो हजूम साथ ले कर पहुँच गए।राजनीति में कोर्ट, राष्ट्रपति और चुनाव आयोग को नहीं घसीटना चाहिए । लोकतंत्र यूँ नहीं चलता। राजनीति जनता के मुद्दों पर होनी चाहिए जो वोट देते हैं। भीड़ तो पैसे खर्च करके भी जुटाई जा सकती है