भैया @AnandAkash_BSP जी और बसपा समर्थक क्या प्लान है आप का आज सपा ने सोशल मीडिया इन्फ्लूंसर 100 से मुलाकात की हड्डी गड्डी सब की जुगाड की है और मुख्य फोकस bsp के वोटर पर होगा उनका बसपा के खिलाफ फेक न्यूज की झड़ी लगने बाली है तो फिर क्या सोचा है कुछ तो सोचना पड़ेगा भैया जी
बहन जी AC में क्यों बैठी हैं?
2000 के आसपास की बात है। उस समय मैं अपने गांव के प्राइमरी स्कूल में पढ़ता था। उस समय जब भी कहीं चुनाव होता था, तो साथ पढ़ने वाले यादव बच्चे बहन जी को "चमारिन", काली *&#, जैसी कई जातिसूचक गालियां देते थे।
बहन जी के पोस्टरों पर गंदे-गंदे इशारे किए जाते, उनका नाम मुलायम सिंह के साथ जोड़कर अश्लील और जातिसूचक गालियां दी जातीं। मेरा गांव में कई जाति के लोग रहते हैं। गांव में चाय की दूकान पर राजनीतिक चर्चा के नाम पर सभी गैर दलित समुदाय के सभ्य से सभ्य लोग चाय की चुस्कीयां लेते हुए बहन जी पर अपमानजनक टिप्पणियां करते और खूब ठहाके लगाते। ये वही लोग थे, जिन्हें हम सम्मान से चाचा, बाबा.. कहकर बुलाते थे। देश में PM इंदिरा गांधी सहित कई महिलाएं CM एवं बड़ी नेता रही हैं लेकिन कोई उन्हें गाली नहीं देता था। सिर्फ बहन जी से ही इतनी नफरत क्यों थी? सिर्फ इसलिए क्योंकि वह दलित हैं।
बुरा तो लगता था, लेकिन तब हम छोटे थे। उस समय मुझमें इतना भावबोध नहीं था, लेकिन इतना जरूर पता था कि वह हमारे समाज की नेता हैं। हमारे बाबा एक पुराना नीला झंडा लेकर बसपा की सभी मीटिंगों और रैलियों में जाते थे। गांव के कुछ बड़े लोग मान्यवर साहब और बहन जी के संघर्षों के बारे में बताते थे। बाबा अपने मिट्टी के घर पर बड़े गर्व से बसपा का झंडा लगाते थे। छोटी उम्र से ही हम सब उनका नाम सुनते ही एक खास अपनापन महसूस करते थे। जब गांव में बसपा का कोई नेता आने वाला होता, तो हम सब खुशी से नाचते हुए बहन जी के पोस्टर लगाया करते थे। रास्ते से साइकिल पर जाते हुए इन पोस्टरों को देखकर बच्चों से लेकर बूढ़ों तक सभी ठहाके लगाकर मसखरी करते थे।
एक बार यादव समाज के लोगों ने गांव में होली मिलन समारोह रखा था। उसमें तूफानी सरोज भी आए थे। उनके सामने गायक ने मुलायम सिंह और बहन जी का नाम जोड़कर मंच से एक अभद्र गीत गाया, लेकिन तूफानी सरोज सुनकर मुस्कुराते रहे, जबकि वह स्वयं दलित हैं। आज उनकी बेटी प्रिया सरोज हमारे लोकसभा क्षेत्र मछलीशहर से सांसद हैं। गांव के दलितों ने जब इसका विरोध किया तो आयोजकों ने माफी मांगी और गायक से माइक बंद करवा दिया।
वहीं, 2007 में जब बसपा की सरकार बनी, तो लोगों के बोल बदल गए। प्रेम से नहीं, डर से। अब दलितों में स्वाभिमान आ गया था। गांव में जो लोग हमारे बुजुर्गों को "रे, बे, ते" कहकर और नाम बिगाड़कर बुलाते थे, वही लोग सम्मान से नाम लेने लगे। अब वही यादव समुदाय के लोग बात-बात पर हंसते हुए तंज कसते थे कि, "अरे भाई, अब तो आप लोगों की सरकार है।" हालांकि अब ऐसा सुनकर बहुत गर्व महसूस होता था। यह सिर्फ मेरे बचपन की कुछ बातें हैं जो मुझे याद हैं। छात्रजीवन और आज का अनुभव बताने के लिए पूरी किताब लिखनी होगी।
लेकिन यह सब मैं आपको क्यों बता रहा हूं? इसलिए कि आप समझ सकें कि बहन जी और बसपा ने समाज को दिया क्या है। जिस रीलबाजी और हवाबाजी को आप संघर्ष समझते हैं, अपने बाप-दादाओं का नहीं तो कम से कम अपने बचपन का दौर याद करो और सोचो कि बहन जी ने उस समय कितना संघर्ष किया होगा। नफरत का आलम यह था कि नन्हे-नन्हे बच्चे तक उन्हें जातिगत गालियां देते थे। यह वह दौर था, जब सोशल मीडिया छोड़िए, समाज के अधिकांश घरों में पुराना हैंडसेट भी नहीं था। तुम्हें बहन जी के AC से दिक्कत है, तो जरा ईमान से बताओ, क्या अखिलेश यादव और राहुल गांधी छप्पर और घास-फूस की झोपड़ी में रहते हैं? या फिर अमित शाह ने चंद्रशेखर आजाद के टाइप-8 बंगले में AC की जगह फर्राटा पंखा लगवाया है?
ऐसा नहीं है कि बसपा में कमियां नहीं हैं। बसपा में अनेक कमियां हैं। इन कमियों के बारे में हम खुलकर लिखते भी हैं। इसलिए कई बार बसपा समर्थक भी मेरे बारे में बहुत अभद्र भाषा लिखते हैं, लेकिन हम इग्नोर करते हैं। हालांकि मैं बसपा का सदस्य भी नहीं हूं, लेकिन बसपा हमारी पार्टी है। हमारा घर है। अतः इन कमियों को लेकर मैंने कई बार बसपा के कोऑर्डिनेटरों को आगाह भी किया है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप बहन जी के त्याग को गाली दें और उनका अपमान करें। वह हमारी आदर्श हैं, गुरूर हैं, हिम्मत हैं और स्वाभिमान हैं।
बसपा की गलती बस इतनी है कि उसकी कोई IT सेल नहीं है। पदाधिकारियों का मानो सोशल मीडिया से छत्तीस का आंकड़ा है। बसपा आज AI के युग में भी 90 के दशक में जी रही है। जिस दिन पार्टी और उसके पदाधिकारी सोशल मीडिया का महत्व समझ जाएंगे और युवाओं से डायरेक्ट संपर्क बना लेंगे, उस दिन सारा पासा पलट जाएगा। उम्मीद है कि बहन जी एक दिन इस पर संज्ञान अवश्य लेंगी। बाकी बहन जी पर अनर्गल टिप्पणी करने वाले लोग या तो अबोध हैं या फिर मूर्ख। जिस दिन कभी शांति से बैठकर आत्मचिंतन करेंगे, उनका सारा भ्रम दूर हो जाएगा।
- सूरज कुमार बौद्ध
शुक्रिया अमित भाई। ❣️☸️
यह वाकया इतना शानदार था कि क्या ही कहें। मेरे साथ पचासों लड़के थे। इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में बतौर अध्यक्ष प्रत्याशी प्रचार के लिए मैं इंग्लिश डिपार्टमेंट के एक क्लासरूम में दो मिनट बोलने के लिए गया।
तब प्रोफेसर ने कहा, "सूरज जी, आप क्लास में जरूर बोलिए, लेकिन आपको सिर्फ अंग्रेजी में बोलना होगा।"
प्रोफेसर को लगा कि लड़का दलित है, अंग्रेजी में कैसे बोल पाएगा। उन्हें लगा कि इस तरह क्लास में इस लड़के का मजाक बन जाएगा, क्योंकि किसी भी प्रोफेसर में कभी ऐसी हिम्मत नहीं हुई कि वह किसी अन्य जाति के छात्र नेता अथवा छात्रसंघ प्रत्याशी से अंग्रेजी में बोलने के लिए बाध्य करे। प्रोफेसर ने कहा कि आप सिर्फ एक मिनट में अपनी बात रखिए। मैं मन ही मन मुस्कुराया और कहा, "सर, मैं सिर्फ 45 सेकंड में अपनी बात रख दूंगा। अंग्रेजी में ही बोलूंगा, आप बस इजाजत दीजिए।"
फिर जब मैंने बोलना शुरू किया, तो वही प्रोफेसर बहुत खुश हुए और पूरी क्लास के सामने हमारी सराहना की। सर को पता नहीं था कि मैं स्वयं उसी इंग्लिश डिपार्टमेंट का छात्र रह चुका हूँ और उनका स्टूडेंट भी रहा हूँ। जब मैंने उन्हें यह बताया, तो वह बहुत खुश हुए।
फिर अध्यक्ष पद के भाषण के दौरान वही प्रोफेसर मैनेजमेंट टीम के मुख्य सदस्यों में शामिल थे। छात्रसंघ की प्राचीर से जब मैं अपना अध्यक्षीय भाषण दे रहा था, तो उन्होंने स्वयं कई बार तालियां बजाकर मेरी सराहना की। उस वीडियो को अभी कल ही किसी भाई ने पोस्ट किया था। भाषण के उपरांत मैंने सर को अपना विनम्र आभार व्यक्त किया। इस तरह जिस प्रोफेसर ने मेरा मजाक उड़ना चाहा था, आगे चलकर वही मेरे शुभचिंतक बन गए थे।
आज दिनांक 01-07-2026 को जनपद बाराबंकी में बहुजन समाज पार्टी द्वारा आयोजित जिलास्तरीय समीक्षा बैठक में शामिल हुआ। बैठक में संगठन की मजबूती, बूथ स्तर तक पार्टी को सशक्त बनाने तथा मिशन 2027 को सफल बनाने को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
#जयभीम#BSP#बाराबंकी#मिशन_2027#बहुजन_समाज_पार्टी
जब आदरणीय बहन @Mayawati जी श्री @myogiadityanath जी को जन्मदिन की बधाई दी थी तो सपाई लोग बहन जी को बी टीम कह रहे थे।
लेकिन अब योगी जी श्री @yadavakhilesh जी को भी जन्मदिन बधाई दिए है तो अखिलेश जी भी बीजेपी की बी टीम हुए और अखिलेश जी बीजेपी नेता के समर्थन मे कई बार बोल चुके भी है
उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव का दौर चल रहा है। चूँकि केवल बसपा ही अनुसुचित जातीयो, अति पिछड़ी जातीयो, अल्पसंख्यक को सुरक्षा, सम्मान, रोजगार दे सकती है। जो की बाबा साहब व मान्यवर कांशीराम साहब के आदर्शों पर आधारित है।।
इसलिए;
1.व्हाट्सएप्प के माध्यम से
https://t.co/NeU4hPo8Po back to सोसाइटी कार्यक्रमो में बसपा के महत्व
3.फेसबुक/ट्विट्टर के माध्यम से
जितना ज्यादा प्रचार हो सके। करना चाहिए।। में ज्यादा से ज्यादा लोगो को व्हाट्सएप्प के माध्यम से जोड़ रहा हूँ, जिससे प्रचार और तीव्र गति से हो सके।।
सबसे मुख्य;
"हमने Pay back to सोसाइटी के कार्यक्रमो में दो से तीन गुना इजाफा कर दिया है, जिससे ज्यादा से ज्यादा को समझाया जा सके। ज्यादा की मदद करने की कोशिस की जा रही है। जिससे वो 50 जानकार को बताएगा तो आंबेडकरवादी आंदोलन का प्रचार व बहुजन मिशन के महत्व का प्रसार हो सकेगा।
Pay back to Society के कार्यक्रम में सिर्फ एक बात में कहता हूं कि;
"बसपा का शासन आ गया तो ऐसे कार्यक्रमो की जरूरत भी नही पड़ेगी। जीरो शुल्क से एससी की सभी जातिया यथा बाल्मीकि, धोबी, पासी, जाटव, खटीक, कोरी, से लेकर तमाम 68 जातीयो को लाभ हुआ है। इसमे कोई यह भी अफवाह का शिकार नही हो सकता कि हमारा हक खाया जा रहा है।"
1.जीरो फीस वाली शीट पर एडमिशन होंगे।
2.स्कॉलरशिप सही समय पर आएगी।
3.स्किल/प्रोफेशनल आधारित शिक्षा पर ज्यादा फोकस दिया जायेगा।
4.रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
5.2012 के बाद जो बैकलॉग बन गया है। उसमे एससी/एसटी/ओबीसी के पद भरे जाएंगे।।
6.सरकारी ठेकों में आरक्षण मिलेगा। जिससे एससी/अत्यंत ओबीसी जातीयो व वर्ग से भी ठेकेदार निकलेंगे।
जब जीरो शीट एडमिशन होगा तब एससी वर्ग से एक बड़ा तबका प्राइवेट सेक्टर के लिए भी तैयार होगा, जैसे 2007 से 2012 के बीच जीरो शुल्क होने के कारण गरीब एससी ने प्रोफेशनल आधारित उच्च शिक्षा ली और लाखों प्राइवेट सेक्टर तक मे लाखो सैलरी ले रहे है, जिनके घर पर लकड़ी के दरवाजे तक टूटे हुए होते थे। मकान जर्जर था। आज आलीशान घर मे रह रहे है। 2012 के बाद यह प्रगति रुक गयी क्योंकि ऊपर जो क्रम 1 से 6 में योजनाएं है, उनपर 2014 के बाद अखिलेश ने रोक लगा दी।।
यह एससी के वर्गों को लाभ पहुचाती है। इतना ध्यान रखना चाहिए।। जिसे doubt है वो स्वयं रिसर्च कर ले कि 2007 से 12 में उनके गरीब से गरीब समाज के बच्चे ज्यादा उच्च शिक्षा लिए या बाद में।
विकास कुमार जाटव
@Mayawati@AnandAkash_BSP@ramjigautambsp@bspindia
समाजवादी पार्टी के प्रमुख एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री तथा वर्तमान में सपा सांसद श्री अखिलेश यादव जी को आज उनके जन्मदिन पर उन्हें व उनके परिवार वालों को हार्दिक बधाई एवं उनके अच्छे जीवन व लम्बी उम्र की शुभकामनायें।
उत्तर प्रदेश का सियासी पारा चढ़ चुका हैं। बीते दिनों पूर्वांचल में बसपा की धुंआधार रैलियों के बाद खुद योगी आदित्यनाथ सहारनपुर जा रहे हैं
1 जुलाई को सहारनपुर देहात में बसपा का प्रत्याशी घोषित होने हैं। 30 जून को सहारनपुर जिले में आनन फानन में 1 जुलाई को योगी आदित्यनाथ का देहात विधानसभा पर कार्यक्रम घोषित हुआ।
योगी कल कार से सहारनपुर में घूमेंगे सहारनपुर देहात विधानसभा मे कार्यक्रम करेंगे और उसी विधानसभा पर बसपा का प्रत्याशी घोषित होगा।
@iamAshwiniyadav B टीम तो तुम भी हो बीच बीच में bjp के नेताओं से तुम्हारा लगाव है और सपा को इसलिए प्रेम है वो यादव पार्टी है तो लगाव बचाव दोनों ही होगा यही तो फर्जी समाजवाद है
प्रश्न : बहुजन नायक की याद में आयोजित कल की बसपा रैली को आप किस प्रकार देखते है?
उत्तर : बहनजी ने मनोवैज्ञानिक रूप से एक बड़ा युद्ध जीत लिया है। जिसमे वर्ष 2022 चुनाव में पर्दे के पीछे चल रहा "सपा-भाजपा गठबंधन" को एक झटके में काउंटर कर दिया।
उदाहरण;
"आकाश आनन्द ने वर्ष 2021 में सार्वजनिक राजनीति में युवाओ से मिलने की घोषणा करी तब मैंने आकाश आनन्द व आनन्द जी को कहा था कि छोटे पम्पलेट, होर्डिंग या अन्य माध्यम से प्रचार को छोड़ो क्योंकि बसपा का प्रचार उंसके युवा फ्री में कर देते है, उंसकी जगह आपको लड़ाई से बाहर दिखाने का नैरेटिव बनाया जा रहा है, उसे काउंटर करने पर ध्यान दो। उस समय के मेरे लेख मेरी वाल पर है। जिसमे यह विस्तार से लिखा हुआ है"
अब हुआ भी ऐसा ही। वर्ष 2022 के चुनाव में बसपा की 1 शीट इसी कारण आई क्योंकि सपा-भाजपा ने नीति बनाई की चुनाव रैली या जमीन पर बसपा का न तो नाम लेंगे, न उंसकी चर्चा करेंगे। लोगो को मनोवैज्ञानिक तौर पर ऐसा संदेश देंगे कि बसपा नाम की कोई पार्टी नही है व केवल सपा-भाजपा नाम की ही दो पार्टी चुनाव लड़ रही है। बहनजी ने हार होने पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसे माना था।
अब आज सपा-कोंग्रेस व उनकी समर्थक कार्यकर्ता/पदाधिकारी, रवीश से लेकर paid वर्कर सोशल मीडिया पर "बसपा व बहनजी" की चर्चा कर रहे है। क्या यह;
"मनोवैज्ञानिक युद्ध जितने जैसा नही है?"
विस्तार से
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बहनजी का मेने पूरा भाषण सुना। जिसमे उन्होंने;
1.योगी व मोदी सरकार पर नफरत फैलाने के आरोप लगाए।
2.सँविधान पर हमले हो रहे है। इसे कहा।
3.मुस्लिमो की स्तिथि बदतर हो रही है। इसे कहा।
4.एससी/एसटी पर सरकार ध्यान नही दे रही। कहा।
5.इंहा तक कि धार्मिक बाबा लोगो द्वारा पूर्व के मनुस्मृति कानून लागू करने की मंशा पर प्रहार किया।
6.ब्राह्मण से लेकर अन्य जातियो को जोड़ने की बात कही। श्री सतीश चंद्र मिश्रा ब्राह्मण व उमा शंकर जी क्षत्रिय व अवधेश पाल जी ओबीसी के तौर पर मंच पर बैठाए गए। जिससे समाज मे संदेश जाए कि;
"नफरत, आपसी कटुता की जगह आपसी समन्वय पर ध्यान दे। हमे वर्ग संघर्ष की जगह आपसी समन्वय बनाकर शोषित वर्गों को सम्मान व मानव अधिकार दिलवाने है""
7.यह सभी था। 80% से ऊपर प्रहार योगी-मोदी सरकार रही। क्योंकि सत्ता में वो ही है। एडमिनिस्ट्रेशन के तौर पर उन्हें टारगेट किया गया और केवल एक जगह यह कहा गया कि;.
"यह प्रेरणा स्थल जँहा मान्यवर साहब को याद किया जा रहा है, इस स्थल को सुरक्षित व संरक्षित करने के लिए हमने नीति बनाई थी कि इंहा टिकट लगेगा, जो टिकट का पैसा आएगा, उसे इसी प्रेरणा स्थल पर खर्च करके रखरखाव दुरुस्त रखा जाएगा। लेकिन अखिलेश यादव ने टिकट का पैसा अन्य जगह खर्च करवाया और इस स्थल पर ध्यान नही दिया, जिससे यह स्थल बर्बाद हो जाये। इसलिए हमने सत्ता में बैठी योगी सरकार को पत्र लिखकर टिकट के पैसे पुनः स्थल पर खर्च किये जायें की माँग की जिसे राज्य सरकार ने मान लिया, इसके लिए हम आभारी है"
8.अब प्रश्न यह है कि;
"राज्य-केंद्र सरकार पर हमला व ऊपर लिखी बातें को कितने न्यूज पेपर, मीडिया समूह ने दिखाई?"
एक ने भी नही। बस प्रेरणा स्थल की सुरक्षा रखरखाव वाली हमारी बात मानी इसलिए आभार, उसे दिखा रही है।
9.अब प्रश्न है कि;
"क्या यह सही हो रहा है?"
10.में इसे पॉजिटिव मान रहा हूँ। क्योंकि;
A. बसपा के खिलाफ नैरेटिव उंसकी स्थापना के समय से फैलाये जाते है। इसलिए कोई नया नैरेटिव आएगा, उसका महत्व नही है। बल्कि पहले कहते थे रैली नही करते, अब करी तो यह नैरेटिव फैला रहे थे कि सपा-कोंग्रेस को नुकसान पहुचाने के लिए रैली कर रहे है।
B. 8 साल बाद इतना जोश बसपा समर्थकों में दिखा। इससे पहले सपा-कोंग्रेस मीडिया ने फैलाना शुरू कर दिया था कि बसपा खत्म हो गयी, रैली नही करती, जनता से रूबरू नही होती, यह पूरा नैरेटिव जो 8 साल से बनाया था वो एक झटके में बसपा समर्थको के दिमाग से इस रैली के कारण हटा। लेकिन यह रैली केवल बसपा समर्थको या पदाधिकारी तक सीमित रहती।
C.लेकिन;
"भाजपा की प्रशंसा करी, इस स्लोगन से यह बात उत्तर प्रर्देश की 22 करोड़ जनता तक जाएगी, जिससे एक नैरेटिव जो जड़ पर प्रहार था कि "बसपा खत्म/गायब/ मैदान में नही है, यह लोगो के दिमाग से खत्म हो जाएगा।
"
D.इसलिए मुझे लगता है कि "बहनजी ने मनोवैज्ञानिक रूप से जनता के दिमाग से सबसे बड़ा नैरेटिव अथार्त बसपा के मैदान में होने या न होने" को खत्म कर दिया और इसलिए यह बात जानबूझकर बोली गयी, बकायदा लिखकर लाई गई थी।
विकास कुमार जाटव
@Mayawati@AnandAkash_BSP@ramjigautambsp
#बहनजी_का_संदेश
#बहनजी_ने_एक_दोगले_को_दोगला_बोला
#KanshiramSahab
#BSP
बसपा वाले खुद बसपा वालों की पोस्ट नहीं देखते हैं मालूम पड़ता है या तो उन्हें सच्चाई से डर लगता है या वे लोग देखते हैं कोई किसी से आगे ना निकल जाए । बसपा वालों कोआपसी तालमेल रखना अति अनिवार्य है तभी बसपा का प्रमोशन होगा । जय बसपा विजय बसपा तय बसपा ही हमारा मुख्य उद्देश्य है ।
जितना सूरज कुमार बौद्ध ने दलितों की आवाज़ बुलंद की है उतना चंदु अपने पूरे जीवन मे नही कर पाएगा ।
चंदु अपराधी का जात धर्म देखकर बोलता है लेकिन सूरज भाई बिना अपराधी का जात धर्म देखे दलित परिवार की आवाज़ बनते है ।
जब चंदु सपा का झंडा उठाकर लफंगई करता था तब सूरज भाई इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में अपने दम पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे ।
सूरज भाई को किसी लफंगे नेता ने आगे नही बढ़ाया है वो अपने और समाज के दम पर आगे बढ़े है और दलितों की आवाज़ उठाकर प्रसिद्धि हासिल की है ।
@SurajKrBauddh
प्रियांशु, जब तुम्हें हमारे बारे में कोई जानकारी नहीं है, तो तुम बेवजह टें-टें करने क्यों आ जाते हो?
चंद्रशेखर जब बिना रजिस्ट्रेशन के एडवोकेट लिखते घूम रहे थे, तब हम इलाहाबाद विश्वविद्यालय से LL.M. करते हुए छात्रों एवं युवाओं की आवाज बुलंद कर रहे थे।
जब चंद्रशेखर आजाद दंगे कराकार जेल में थे, तब हमने उनके समर्थन में इलाहाबाद पुलिस लाइन्स और राजापुर की दीवारों पर "Release Chandrasekhar" और "Repeal NSA" लिखकर विरोध प्रदर्शन किया था। हमारे साथियों को राजापुर थाने की पुलिस ने पकड़ा भी था, लेकिन बाद में ससम्मान छोड़ दिया। हाथरस केस में इंडिया गेट पर प्रदर्शन के कारण मेरे ऊपर FIR दर्ज हुई। हमने वह मुकदमा 6 साल तक लड़ा। अंततः पटियाला हाउस कोर्ट ने हमें निर्दोष करार देते हुए पूरे मुकदमे से डिस्चार्ज कर दिया। हमने चंद्रशेखर के लिए लड़ाइयाँ लड़ी हैं। चंद्रशेखर ने हमारे लिए कब बोला और कब लड़ा? कोई एक घटना बता दो।
चंद्रशेखर जब छुटमलपुर में क्रिकेट खेल रहे थे, तब हम इलाहाबाद विश्वविद्यालय से LL.M. करते हुए बम और गोलियों के बीच छात्रसंघ अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ रहे थे। मुझ पर फायरिंग भी हुई थी, जिसका मामला आज भी इलाहाबाद हाई कोर्ट में लंबित है। हमारे संघर्षों को देखकर चंद्रशेखर ने स्वयं मुझे फोन करके बात की थी।
और तुम कहते हो कि चंद्रशेखर ने मुझे छत्रछाया दी? कब? तुम्हारे सपने में? उल्टा हमने उन्हें मजबूती दी है। जाकर उनसे पूछ लो। ये सब टुच्ची मनगढ़ंत कहानियाँ अपने छपरी गैंग तक ही सीमित रखो। मेरे बारे में फालतू कहानियाँ मत गढ़ा करो।
हमने अपनी पहचान अपने दम पर बनाई है। फालतू हवाबाजी नहीं, बल्कि समाज को न्याय दिलाने के लिए काम किया है। भगवान बुद्ध की अनंत अनुकंपा तथा गुरु रविदास और बाबासाहेब की प्रेरणा से आज सोशल मीडिया के माध्यम से सैकड़ों FIR दर्ज करवाई हैं और सैकड़ों जातिवादियों को जेल भिजवाया है। ध्यान देने वाली बात यह है कि हमने चंद्रशेखर की तरह कोई एजेंडा नहीं चलाया और अपराधियों की जातीय अथवा मजहबी पहचान देखे बिना उनके विरुद्ध कार्रवाई करवाई। हमेशा समाज को सर्वोपरि रखा।
जहाँ तक संभव हुआ है, मैंने समाज के युवाओं को मुकदमों से बचाने का प्रयास किया है और उनकी हर संभव कानूनी सहायता करवाई है। चंद्रशेखर की तरह अपनी राजनीति के लिए हजारों युवाओं पर मुकदमे दर्ज करवाकर उनका करियर खराब नहीं किया। मेरा काम, मेरा समाज और मेरा कर्म, समाज सब जानता है।
बोलने को बहुत कुछ है, लेकिन मैंने ये सब चीजें कभी बोली नहीं है। सच कहूं तो बोलना भी नहीं चाहता हूँ। इससे समाज की ही बदनामी होती है। इसलिए तुम भीम आर्मी के साथियों को सलाह है कि बेवजह ज्यादा उड़ो मत। पर्सनल तो बिल्कुल भी होओ। इसी में तुम्हारी भलाई है। मुझे चंद्रशेखर जैसे किसी की छत्रछाया की जरूरत नहीं है। न कल थी, न आज है और न ही जीवन में कभी चाहिए। कम बोल रहे हैं, ज्यादा समझना।