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#नेशनल_फ्रीडम_यूनियन
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#नेशनल_फ्रीडम_यूनियन
पिछले चार दिनों से मेरे संसदीय क्षेत्र के जैसलमेर जिले के बासनपीर गाँव में जो घटनाक्रम चल रहा है, वह हमारी शांतिप्रिय थार संस्कृति के लिए न सिर्फ चिंताजनक है, बल्कि यह एक सुनियोजित प्रयास सदियों से चली आ रही सामाजिक समरसता को खंडित करने का हैं।
थार क्षेत्र की धरती पर हमेशा अपणायत और जाजम की परंपरा रही है, जहां बुजुर्गों और सामा���िक प्रबुद्धजन समझदारी, भाईचारे और संवाद से बड़े-बड़े विवाद सुलझते रहे हैं। लेकिन इस बार जाजम की जगह साजिश, अफवाह और उकसावे की राजनीति को तरजीह दी गई।
सोशल मीडिया, मंचीय भाषणों और कुछ मीडिया बयानों में जिस भड़काऊ और विभाजनकारी भाष�� का उपयोग किया गया, वह बेहद निंदनीय है। ऐसा माहौल बनाया गया मानो थार के लोग खुद एक-दूसरे के खिलाफ हो गए हो, धार्मिक उन्माद रूपी जंग का रूप देने की कोशिश की गई, लेकिन थार के जागरूक समाज ने इस उकसावे को नकारकर एक बार फिर साबित कर दिया कि हमारी संस्कृति लड़ाई नहीं, समाधान की राह दिखाती है।
मैं थार क्षेत्र के सभी संवेदनशील, जागरूक और शांति प्रिय नागरिकों का दिल से आभार प्रकट करता हूँ, जिन्होंने ताने-बाने को तोड़ने वाली नफरत और उकसावे की राजनीति के मसूंबों को नकारा और शांति बनाए रखी।
हमें राजनीतिक रोटियाँ सेंकने और भड़काने वालों को बेनकाब करने की आवश्यकता हैं। हर जाति, बिरादरी, धर्म में समझदार लोग हैं बुजुर्गों और समझदार लोगों की मध्यस्थता व सामाजिक भूमिका से संवाद स्थापित करने से मामले सुलझते रहे हैं, जहाँ न कोई जात-पात का भेद हो��ा था, न कोई धार्मिक उन्माद। यह "जाजम संस्कृति" सिर्फ फैसला नहीं करती थी, वह समझदारी और रिश्तों को सहेजती थी।
हमारे पूर्वजों ने बहुत गहरी सोच और समझ से भाईचारे की बुनियाद रखी थी, वह कोई संयोग नहीं था। वह इन्सानियत की समझ थी, और अनुभव से उपजी एक सामाजिक बुद्धिमत्ता थी।
"कोई भी समाज तभी ज़िंदा रहता है जब वह अपने अतीत की अच्छाइयों को पहचानकर, वर्तमान की गलतियों से बचता है और भविष्य के लिए एक न्याय��ूर्ण रास्ता तय करता है।"
मैं स्वयं आगामी 19 जुलाई 2025 को थार क्षेत्र के वरिष्ठ नेताओं, समाज के प्रबुद्धजनों और प्रतिनिधियों के साथ बासनपीर गाँव का दौरा कर वहाँ के ग्रामवासियों से संवाद करूँगा, ताकि स्थानीय स्तर पर विश्वास और भाईचारे की पुनः स्थापना सुनिश्चित की जा सके।
हम सब मिलकर इस महान थार भूमि की सांस्कृतिक गरिमा, सामाजिक एकता और संवाद ��ी परंपरा को बनाए रखें।
मेरी राजनैतिक नेताओं से अपील हैं कि स्वार्थपूर्ति के लिए राजनीति को लोगों को बाँटने का नहीं, जोड़ने का माध्यम बनाएं। लोकतांत्रिक और संविधान प्रदत्त अधिकारों के अनुसार हमारा धर्म विवादों को सुलझाने का हैं ना कि तूल देने और दरारें पैदा करने की भूमिका में होना चाहिए।
गत शाम सोमव��र को दिन दहाड़े सरेआम बाड़मेर जिला मुख्यालय पर नवले की चक्की मार्केट में अपराधियों द्वारा दुकानदार प्रजापत परिवार के महिलाओं, पुरूषों पर आतंकी प्रवृति के असामाजिक तत्वों द्वारा पिस्टल और धारदार हथियारों, लोहे के सरियो, लाठियों से जानलेवा हमला करने की घटना निंदनीय एवं शर्मनाक हैं।
इस घटना के लिए पुलिस का लचर रवैया जिम्मेदार हैं क्योंकि पिछले काफी समय से लगातार ��पराधी इस तरीके की घटनाओं का अंजाम दे रहे हैं लेकिन भ्रष्टाचार में लिप्त पुलिस कार्यवाही के बजाय सत्तापक्ष और राजनैतिक दबाव में ढुलमुल रवैया अपना रही हैं अपराधियों को सरंक्षण दे रही हैं, क्योंकि इस घटना से 24 घंटे पहले हुए झगड़े और जानलेवा हमला करने की धमकी देने की सूचना थाने में देने पर भी पुलिस ने कोई कार्यवाही नहीं की।
घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूँ और घटना के बाद प्रशासनिक ��धिकारियों से दूरभाष पर वार्ता कर अपराधियों पर कठोरतम कानूनी कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया।
मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी कानून व्यवस्था का यह दृश्य प्रदेश शासन व्यवस्था की पोल खोल रहा हैं।
@PoliceRajasthan @RajPoliceHelp
इन्हें तो आप जानते ही होंगे, यह विजेंद्र चौहान हैं। इन्हें आपने अक्सर Mock UPSC Interview पेनल में देखा होगा। ये देश में बहुत चर्चित UPSC कोच हैं।
इन्होंने आज एक पोस्ट करके कहा कि
"सबसे बड़ा ख़तरा किसी इस्लाम या ईसाईयत से नहीं है, हिंदुओं को अपना धर्म बस ब्राह्मणवाद के चंगुल से आज़ाद करने की ज़रूरत है।"
इनकी गिनती दे�� के बुद्धिजीवियों में होती है और ये वाकई बुद्धिजीवी हैं भी। यह दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर भी हैं।
इनकी इस पोस्ट के बाद बहुत से लोग इन्हें सोशल मीडिया पर टारगेट कर रहे हैं। आपको क्या लगता है इन्होंने सही कहा या गलत?
हिंदुस्तान डर का देश नहीं है।
हमारे सभी महापुरुषों ने अहिंसा की बात की, डर मिटाने की बात की।
नरेंद्र मोदी, भाजपा और RSS पूरा हिंदू समाज नहीं हैं- जो हिंसा और नफ़रत फैलाता है, वो हिंदू हो ही नहीं सकता।