36 घंटे बाद चार लोगों को सीतापुर में छोड़ा
सूचना के मुताबिक, ठाकुर शिवम् सिंह, विकास दुबे, रवीन्द्र सिंह और मनोज मिश्रा को दिल्ली पुलिस ने करीब 36 घंटे बाद दिल्ली से ले जाकर उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के बिसवां में छोड़ दिया।
आज कोर्ट में मेरे केस पर सुनवाई हुई। न्यायाधीश महोदय ने अगली सुनवाई तक केस पर पुलिस जाँच के लिए मुझे बुलाने से पूर्व जाँच अधिकारी को मुझे नोटिस देने कहा। यही नोटिस कोर्ट को भी दी जाएगी ताकि कोर्ट यह तय करेगा कि इसमें कोई तर्क है या नहीं।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि हमारे अधिवक्ता @jai_a_dehadrai ने हमारा पक्ष रखा कि उक्त व्यक्ति पर न तो कोई जातिगत टिप्पणी हुई, न ही उसका इस विषय में जातिसूचक शब्दों से कोई अपमान हुआ। अतः, कोई केस ही नहीं बनता।
जय अनंत जी समेत श्री सिंह एवम् प्रत्युष भाई आदि अधिवक्ताओं को मेरा ससम्मान आभार जिन्होंने मेरा पूर्ण पक्ष रखा। अगली सुनाई सप्ताह भर बाद है।
राजस्थान से दिल्ली पहुंचे इस बुजुर्ग की आवाज़ को ध्यान से सुनिए!
सालों का अनुभव लिए यह बुजुर्ग जब अपनी बात रखने राजधानी की सड़कों पर पहुंचता है, तो सवाल सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं रह जाता—सवाल उस व्यवस्था का है जो आम नागरिक की आवाज़ आखिर कब सुनेगी?
The very spirit of law that" let not one innocent get punished , even if 99 accused walk free" is defeated in this case. Let @narendramodi Ji and Hon'ble Supreme Court of India take a note of it.
दिल्ली पुलिस ने हमारे लोगों के साथ देखिए कैसे बर्बरता की है, एक मूक बाधिर व्यक्ति जो सामान्य वर्ग से होने की पीढ़ा लेकर जंतर-मंतर पर अपना विरोध प्रदर्शन करने आया था उसके साथ पुलिस की क्रूरता देखिए,
एक साधारण महिला यह समझ चुकी है कि समाज में क्या गलत हो रहा है, क्यों हो रहा है और इसके पीछे कौन है?
लेकिन विडंबना देखिए कि यही बात नीति-निर्माताओं को समझ नहीं आ रही है।