वंचित बहुजन आघाडीचे यश!
दिक्षाभूमीवर पंचशील ध्वजाऐवजी हिंदुत्ववादी भगवा ध्वजचे पोस्टर प्रकाशित करून बौद्धांचा आणि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकरांच्या अवमान करणाऱ्या युवक काँग्रेस महाराष्ट्र प्रभारी अजय चिकारा विरोधात वंचित बहुजन आघाडीने ॲट्रॉसिटी कायद्याअंतर्गत गुन्हे दाखल केले.
#Deekshabhoomi #दिक्षाभूमी #Nagpur
The brutal attack on #Hindu women Mani Karmakar, a former chairman of the Women's Commission in Bangladesh, where her fingers were chopped off by Islamists, is a heinous act that underscores the deep-seated hatred towards minorities, women, and children.
Time to travel 6 minutes.
How can you save 5 minutes by building this 300 cr road destroying precious hill slope land?
Who is pushing this project? Why?
A DOOR CLOSED FOR 900 YEARS; a secret room exposed when the guardian of the sacred caves noticed the way cigarette smoke drifted; and the discovery of the world's oldest book. I made a short video to tell the incredible true story of the caverns of sacred art in Dunhuang.
@jansuraajonline बोलायची पद्धत पण कशी आहे,आणि मुख्यमंत्री आहेत हे महाशय? बिहार मध्ये मेंदु असलेली लोकं राज्याबाहेर जाण्यापेक्षा बिहार मध्ये का काही करत नाहीत?
"लड़की पागल है। मर भी गई तो क्या हुआ?"
मुजफ्फरनगर में एक विधवा महिला ने अपनी 14 साल की मानसिक रूप से अस्वस्थ बेटी के पैर का ऑपरेशन करवाया।
महिला सिर्फ ₹8000 दे सकी। अतः इससे नाराज मेरिटधारी डॉक्टर पी. के. चतुर्वेदी ने उसका पैर फिर तोड़ दिया।
ऐसे नृशंस डॉक्टरों की जगह जेल होनी चाहिए। घटना यूपी के मुज़फ्फरनगर क�� है। करीब डेढ़ महीने पहले मानसिक रूप से अस्वस्थ एक नाबालिग बच्ची का पैर टूट गया था। मां रेशमा विधवा हैं। गरीबी एवं लाचारी के कारण वह बच्ची का इलाज कराने में असमर्थ थी। अतः वह जिलाधिकारी कार्यालय जाकर अपनी सारी परेशानी बताई। DM ने उसकी आर्थिक असमर्थता को देखते हुए CMO को आदेश दिया कि बच्ची का इलाज निशुल्क कराया जाए।
अब महिला जिला अस्पताल ��ई। लेकिन पैसे के भूखे डॉक्टरों का निर्मम रवैया देखिए। मां रेशमा कह रही हैं कि जिलाधिकारी कार्यालय से लौटते ही अस्पताल के सभी डॉक्टर एक हो गए और कहा; "तुम डीएम के पास क्यों गईं? क्या डीएम यहां आकर ऑपरेशन करेंगे? अब हम तुम्हारी लड़की का इलाज नहीं करेंगे? लड़की तो पागल (मानसिक बीमार) है, अगर यह मर भी गई तो क्या फर्क पड़ता है?"
जिलाधिकारी के निर्देशों के बावजूद डॉक्टरों का रवैया नहीं बदला। उन्होंन�� महिला से ₹25000 मांगे। मजबूरी में महिला ने किसी से उधार लेकर ₹8000 डॉक्टरों को दिए और बाकी पैसे बाद में देने की बात कही, लेकिन डॉक्टरों को इतना पैसा कम लगा।
ऑपरेशन के कुछ समय बाद अस्पताल से बच्ची को दोबारा जांच के लिए बुलाया गया। वहां मौजूद आर्थोपेडिक सर्जन पी. के. चतुर्वेदी ने जांच के बहाने उसकी बेटी के घुटने को जबरन मोड़ा और बच्ची जोर-जोर से चीखने लगी। मां ने ��ोबारा X-ray कराया तो पता चला कि उसके पैर की हड्डी दोबारा तोड़ दी गई है। बच्ची पूरी रात तड़पती रही और डॉक्टर कहते रहे कि इसे यहां से घर ले जाओ, यहां कुछ नहीं हुआ।
यह घटना अत्यंत ही भयावह एवं पीड़ादायक है। यह दिखाती है कि आज भी सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर एवं स्टाफ गरीब मरीजों के साथ कैसा क्रूर बर्ताव करते हैं। यह सिर्फ एक घटना नहीं है। देश के लगभग सभी अस्पतालों का यही हाल है, जहां गरीब मरीजों को जि��दा मारा जाता है, दुत्कारा जाता है, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं होता।
आप एक बार सरकारी अस्पतालों में जाकर तो देखिए। डॉक्टरों का निर्मम रवैया आपको जीते जी मार देगा। इस मामले में तो स्वयं DM ने निर्देश दिया था। मां विधवा है। बच्ची मानसिक रूप से अस्वस्थ है, लेकिन फिर भी डॉक्टरों की पैसे की भूख खत्म नहीं हुई। पैसे नहीं मिले तो डॉक्टर पी. के. चतुर्वेदी ने अपनी मेरिट का परिचय देते हुए उस बेबस एवं लाचार बच्ची का पैर ही तोड़ दिया। यह भयावह है।
My first tweet on #RajeshExports was in 2014. The suspicion started much earlier. There is something called a smell test. It decades to develop - if you keep your ears and eyes open.
@suchetadalal@BalakrishnanR
Shocking scenes from Kalyan, Maharashtra. Buddhist monks threw themselves in front of bulldozers to save a sacred Buddha statue and memorial, but the authorities pushed ahead with the demolition anyway.
As monks pleaded and protested peacefully, they were allegedly beaten with sticks and dragged aside.
A revered place of worship and remembrance was crushed under heavy machinery, leaving devastation, outrage, and painful questions about the treatment of peaceful religious communities.