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#राज_की_बातें
मेरे ट्वीट लाइक्स में है|
आओ सरल बनाये हम
जीवन की कठिन डगर,
पग पग मिलेगी बाधाएँ
हो समाज या चाहे नगर,
लक्ष्य हासिल करना तो
तेरे बाएँ हाथ का खेल,
बुलंद इरादे लेकर मन में
चलना होगा मगर..!
-जैन राजेन्द्र गुलेच्छा ‘राज’
🌺सुप्रभात
🙏जय जिनेन्द्र
🌞Good Morning
लो आया है सूरज फिर से
सारे जग को जगाने,
रात डूबे थे जिसमें
उस तन्द्रा को भगाने,
नए दिन में फिर से देखो
बिसात नई बिछेगी,
तुझ को भी तो आगे आकर
दाँव नए हैं लगाने.!
-जैन राजेन्द्र गुलेच्छा ‘राज’
बेंगलूरु
सुप्रभात
Good Morning
जय जिनेंद्र
भानु आए हैं पहनकर,
रश्मियों का ताज।
देख रवि की कान्ति न्यारी,
भूमि करती नाज।
मुख सुमन के खिल उठें हैं,
तेज पाकर साथ।
‘राज’ चमका भाग्य अपना,
नीति के कर काज।
-जैन राजेन्द्र गुलेच्छा ‘राज’
🌺सुप्रभात
🙏🏽जय जिनेंद्र
🌞Good Morning
ताजी हवाएं लाई है
फूलों की महक,
पहली किरण ले आई है
आशाओं की चमक,
धीरे से खोल तू
अपनी बंद पलक,
सुबह ने दिखाई है
बस, खुशियों की झलक.!
-जैन राजेन्द्र गुलेच्छा ‘राज’
🌺सुप्रभात
🙏जय जिनेंद्र
🌞Good Morning
देख नज़ारों की अद्भुत माया
दिल में मची है हलचल,
पँछी कलरव शोर मचाते
धार नदी की कलकल।
पत्ता पत्ता बूटा बूटा
महका चमन है सारा,
रुम झूम करती आई देखो
सुबह सुहानी चंचल.!
-जैन राजेन्द्र गुलेच्छा
🌸सुप्रभात
🙏🏽जय जिनेंद्र
🌞Good Morning
दिनकर ने आज फिर
राह नयी दिखायी है,
रात के बाद सवेरा होगा
बात यही सिखायी है,
जीवन में निश्चित ही
होगा वो मानव सफल,
जिसने अपनी क़िस्मत खुद मेहनत से लिखायी है.!
-जैन राजेन्द्र गुलेच्छा ‘राज’
Jain Rajendra Gulechha
🌺सुप्रभात
🙏🏽जय जिनेंद्र
🌞Good Morning
नज़ारे सुबह के नयन को सुहाते हैं,
मनोहर सारे दृश्य मन को लुभाते हैं,
उठ नींद से और जी ले इन पलों को,
ख्वाबों के झूले सिर्फ़ माया में झुलाते हैं..!
-जैन राजेन्द्र गुलेच्छा ‘राज’
🌺सुप्रभात
🙏🏽जय जिनेंद्र
🌞Good Morning
सूरज उभर आया नभ में
अब ऊपर चढ़ता जाएगा,
अभी प्रभात,फिर दोपहरी
बाद शाम भी दिखलायेगा,
बोझ अमिट हसरतों का
कुछ कम कर ले ये ‘राज’
सफर तेरी ज़िन्दगी का फिर
खुद आसान बन जाएगा..!
-जैन राजेन्द्र गुलेच्छा ‘राज’
🌺सुप्रभात
🙏🏽जय जिनेंद्र
🌞Good Morning
अब धूप के थोड़े से
हो गए तेवर कम,
बादल भी दिखाने लगे
नभ में अपने दम।
मौसम ने यूँ ही नहीं
बदली है करवट,
आहट उसने सुन ली है
पड़े मानसून के कदम.!
-जैन राजेन्द्र गुलेच्छा ‘राज’
Jain Rajendra Gulechha
🌺सुप्रभात
🙏🏽जय जिनेंद्र
🌞Good Morning
उजली सुबह संग उमड़ते बादल
ले आये बरसात की आशा,
बदली संग अटखेली करते
सूरज दिखा रहे हैं तमाशा,
तरस रहे थे हम सबके मन
मानो चातक स्वाति को,
मौसम ने भी हमारे मन की
शायद पढ़ ली होगी भाषा..!
-जैन राजेन्द्र गुलेच्छा ‘राज’
Jain Rajendra Gulechha
🌺सुप्रभात
🙏🏽जय जिनेंद्र
🌞Good Morning
रात समेट चुकी है
अपनी चादर काली,
दिनकर ने सजाई है
किरणों से भरी थाली।
वक़्त का हर एक पल
ले आता है संभावनाएं,
जो चूक जाता है मौका
वो रह जाता है खाली..!
जैन राजेन्द्र गुलेच्छा ‘राज’
Jain Rajendra Gulechha
🌺सुप्रभात
🙏जय जिनेन्द्र
🌞Good Morning
सुतेज दिनकर का देख
निस्तेज हो गयी रात,
सुदूर कोने कोने तक
प्रस्फुटित हुई प्रभात,
भीतर जिसके सद्गुणों का
भरा पड़ा हैं उजाला,
उसके हाथों होती हमेशा
दुर्गुणों की बुरी मात..!
-जैन राजेन्द्र गुलेच्छा ‘राज’
Jain Rajendra Gulechha
🌺सुप्रभात
🙏🏽जय जिनेंद्र
🌞Good Morning
सुबह की रश्मि किरणें
आओ आत्मसात करें,
मन मंदिर में आओं कुछ
महकते जज़्बात भरें।
विषय कषायों का तम
'राज' भीतर समाया है,
अंतर की कालिमा पर
प्रकाश का आघात करें।
-जैन राजेन्द्र गुलेच्छा ‘राज’
🌺सुप्रभात
🙏🏽जय जिनेंद्र
🌞Good Morning
सहारा जो मिला है तो,
किनारा भी दिखेगा ही।
अगर माली चमन देखें,
सुमन प्यारा खिलेगा ही।
कभी मत सोचना मानव,
कि मेरा कौन है जग में।
कोई फ़रिश्ता बनकर अपना
कभी ना कभी मिलेगा ही.!
-जैन राजेन्द्र गुलेच्छा ‘राज’
Jain Rajendra Gulechha
🌺सुप्रभात
🙏🏽जय जिनेन्द्र
🌞Good Morning
विजयी सूरज ने रखा कदम,
मानो रजत पाटीदार है।
‘विराट’ रनों जैसी आज
किरणों की बौछार है।
आओ नमन करें हम सादर
नभ के भुवनेश्वर को,
अंधेरे पर हासिल की है जिसने
जीत RCB-सी शानदार है..!
-जैन राजेन्द्र गुलेच्छा ‘राज’
Jain Rajendra Gulechha
🌺सुप्रभात
🙏जय जिनेन्द्र
हुआ आदित्य का आगमन,
दमक उठा हर आँगन मन,
पेड़ की शाखों पर पंछी
कलरव करते होके मगन।
बाहरी सुखों की खातिर देखो
बहुत भटक लिए अब तक हम
संचार करे अब नयी ऊर्जा का
और खोजे हम आतम धन..!
-जैन राजेन्द्र गुलेच्छा ‘राज’
Jain Rajendra Gulechha
🌺सुप्रभात
🙏जय जिनेन्द्र
🌞Good Morning
धरा पर बिखर गई
अब प्रभात की ज्योति,
जाग उठी हैं आँखें सारी
कब तक रहेगी सोती,
बढ़कर आगे जग को 'राज'
चमक दिखा दे अपनी,
जैसे जगमग चमक रहा
वो पड़ा सीप में मोती..!
-जैन राजेन्द्र गुलेच्छा ‘राज’
🌺सुप्रभात
🙏🏽जय जिनेंद्र
🌞Good Morning
घर की दरो-दीवारें
देखो! सारी चहक उठी।
देख उषा के जलवे सुंदर
गलियाँ बहक उठी,
ख़ुद से पहले जिसने भी
दुःख दूसरों का देखा।
जिंदगी उन लोगों की तो
वैसे ही महक उठी!
-जैन राजेन्द्र गुलेच्छा ‘राज’
Jain Rajendra Gulechha
🌺सुप्रभात
🙏🏽जय जिनेंद्र
🌞Good Morning