#जगतके_उद्धारक_संतरामपालजी
♦️ भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी का विरोध
संत रामपाल जी महाराज के शिष्य न तो रिश्वत लेते हैं और न ही देते हैं। उनके द्वारा एक स्वच्छ, ईमानदार और भ्रष्टाचार मुक्त समाज का निर्माण धरातल पर किया जा रहा है।
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#जगतके_उद्धारक_संतरामपालजी
♦️ रक्तदान = महादान
इंसानियत की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। संत रामपाल जी महाराज की प्रेरणा से उनके अनुयायी नियमित रूप से विशाल रक्तदान शिविरों का आयोजन करते हैं, जिससे हर साल लाखों लोगों की जान बचाई जा रही है।
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♦️ देहदान और अंगदान का संकल्प
मृत्यु के बाद भी यह शरीर मानवता के काम आ सके, इसके लिए संत रामपाल जी महाराज के हजारों शिष्यों द्वारा लगातार देहदान और अंगदान किए जा रहे हैं।
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♦️ पशु बलि पर रोक
धर्म और देवी-देवताओं के नाम पर होने वाली पशु बलि पर संत रामपाल जी महाराज ने पूर्णतः रोक लगाई है। उन्होंने दुनिया को सत्य ज्ञान देकर मूक जीवों पर दया करना सिखाया है।
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♦️ धर्म जोड़ता है, तोड़ता नहीं
दंगे, फसाद और सांप्रदायिक तनाव से दूर, संत रामपाल जी महाराज सभी धर्मों (हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई) के लोगों को एक मंच पर लाकर प्रेम और भाईचारे के साथ रहना सिखा रहे हैं।
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♦️ अहिंसा परमो धर्मः
जीव हत्या एक महापाप है। संत रामपाल जी महाराज की प्रेरणा से उनके करोड़ों अनुयायियों ने मांसाहार का पूर्ण रूप से त्याग कर दिया है और शुद्ध शाकाहारी जीवन अपना लिया है।
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♦️ आत्महत्या (Suicide) से बचाव
आज के तनावपूर्ण समय में डिप्रेशन और आत्महत्या जैसी समस्याओं का संत रामपाल जी ने आध्यात्मिक ज्ञान से सटीक समाधान दिया है। उनके शिष्य बड़ी से बड़ी मुसीबत में भी धैर्य नहीं खोते।
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♦️ रक्तदान = महादान
इंसानियत की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। संत रामपाल जी महाराज की प्रेरणा से उनके अनुयायी नियमित रूप से विशाल रक्तदान शिविरों का आयोजन करते हैं, जिससे हर साल लाखों लोगों की जान बचाई जा रही है।
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#जगतके_उद्धारक_संतरामपालजी
♦️ वैश्विक शांति का प्रयास
संत रामपाल जी महाराज द्वारा वसुधैव कुटुंबकम (पूरी पृथ्वी एक परिवार है) की भावना के साथ, पूरे विश्व में शांति, दया और परोपकार का संदेश फैलाया जा रहा है ताकि एक संघर्ष-मुक्त वैश्विक समाज का निर्माण हो सके।
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#परमात्मा_चारों_युगमें_आतेहैं
♦️ 'कबीर सागर' (बोध सागर खंड) के अध्याय 'ज्ञान बोध', पृष्ठ 29 में कबीर परमात्मा ने अपनी जानकारी स्वयं दी है:
सतयुग सतसुकृत कहलाये। त्रेता नाम मुनीन्द्र धराये।
द्वापर में करुणामय कहाये। कलियुग नाम कबीर रखाये।।
God Kabir In 4Yugas
#परमात्मा_चारों_युगमें_आतेहैं
♦️ द्वापरयुग में कबीर साहेब 'करुणामय' ऋषि के रूप में प्रकट हुए थे। जब पांडवों का यज्ञ सफल नहीं हो रहा था, तब कबीर साहेब ने अपने भक्त सुपच सुदर्शन के रूप में आकर उस यज्ञ को सफल करवाया था। इसका प्रमाण संत गरीबदास जी की वाणी में मिलता है:
#परमात्मा_चारों_युगमें_आतेहैं
♦️ 'कबीर सागर' (बोध सागर खंड) के अध्याय 'ज्ञान बोध', पृष्ठ 29 ��ें कबीर परमात्मा ने अपनी जानकारी स्वयं दी है:
सतयुग सतसुकृत कहलाये। त्रेता नाम मुनीन्द्र धराये।
द्वापर में करुणामय कहाये। कलियुग नाम कबीर रखाये।।
God Kabir In 4Yugas
#परमात्मा_चारों_युगमें_आतेहैं
♦️कबीर परमात्मा चारों युगों में अलग-अलग नामों से आते हैं। 'कबीर सागर' (बोध सागर खंड) के अध्याय 'भवतारण बोध', पृष्ठ 55 में कबीर जी ने स्वयं बताया है:
सतयुग में सतसुकृत कह टेरा, त्रेता नाम मुनीन्द्र मेरा।
#परम���त्मा_चारों_युगमें_आतेहैं
♦️ द्वापरयुग में कबीर साहेब 'करुणामय' ऋषि के रूप में प्रकट हुए थे। जब पांडवों का यज्ञ सफल नहीं हो रहा था, तब कबीर साहेब ने अपने भक्त सुपच सुदर्शन के रूप में आकर उस यज्ञ को सफल करवाया था। इसका प्रमाण संत गरीबदास जी की वाणी में मिलता है:
सुपच रूप धर
देने वाला) कहा। इसका उल्लेख यजुर्वेद के अध्याय 12, मंत्र 4 में मिलता है, जहाँ स्पष्ट है कि वामदेव ने यजुर्वेद के वास्तविक ज्ञान को समझा और अन्य लोगों को भी समझाया।
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#परमात्मा_चारों_युगमें_आतेहैं
♦️ कबीर साहेब जी सतयुग में 'सतसुकृत' नाम से मनु जी से मिले थे। उन्होंने मनु जी को तत्वज्ञान (यथार्थ ज्ञान) समझाना चाहा, परंतु मनु जी ने सतसुकृत रूप में आए कबीर साहेब के ज्ञान पर विश्वास करने के बजाय उनका उपहास किया और उन्हें 'वामदेव' (विपरीत ज्ञान