Crackdown on Cockroach Janta Party.
- Instagram page hacked.
- My personal Instagram hacked.
- Twitter account withheld
- Back up account also taken down.
Must listen: a former Haryana govt official exposes the reality of Aravalli judgement of SC. We may question the govt on its data claims, but who will question the judges who in 1993 stopped all mining but now have done a U turn, that too on false info?
15 votes INVALID in VP polls? Really? Our MPs can’t even do a simple poll tick mark correctly in a VP polls? Either the votes were deliberately cast invalid or else we have MPs who can’t even get the basics right. Even more intriguing is the names of handful of those who cross-voted: buzz is few MPs used VP poll to settle their internal party political scores. Not a conscience vote but a vote of convenience! 🙏
जिस तरह से चक्रव्यूह में घेर कर अभिमन्यु का वध किया गया था।
उसी तरह से पुलिस, चुनाव आयोग और गुंडागर्दी का इस्तेमाल कर अरविंद केजरीवाल जी को घेर कर हराया गया।
-@Saurabh_MLAgk#EkShaamShahidoKeNaam
वैसे अगर अरविंद केजरीवाल राज्यसभा जाते हैं तो इसमें ग़लत क्या ह��, सत्ता का लालच कैसे है?
1977 में आम चुनाव हारने के बाद जब इंदिरा गांधी जी कर्नाटक से बाई-इलेक्शन लड़कर लोकसभा गईं तो क्या वो ग़लत था, सत्ता का लालच था?
1984 में ��ब अटल बिहारी बाजपेयी जी लोकसभा का चुनाव हारने के बाद, मध्य प्रदेश से राज्य सभा गए तो क्या वो ग़लत था, सत्ता का लालच था?
हाँ, इंदिरा जी और अटल जी के संसद पहुँचने से एक बात ज़रूर हुई- तत्कालीन केंद्र सरकार के बुरे दिन शुरू हो गए!!
तो अब अगर देश की एक राष्ट्रीय पार्टी का शीर्ष नेता देश की संसद में जाता है तो सिवाय बीजेपी और कांग्रेस को, किसे आपत्ति हो सकती है?
बीजेपी को आपत्ति इसलिए है क्योंकि उन्हे��� डर है की कहीं केजरीवाल उनके साथ संसद में वो न कर दें, जो इंदिरा जी ने जनता सरकार के साथ किया था।
और कांग्रेस की चिंता है कि कहीं केजरीवाल अटल जी की तरह तत्कालीन राजीव गांधी सरकार के ख़िलाफ़ सदन की आवाज़ न बन जायें!
इसलिए बीजेपी और कांग्रेस दोनों केजरीवाल के ख़िलाफ़ “नैतिक दबाव” बनाने की कोशिश कर रहे हैं। जैसे राज्य सभा की तरफ़ ��ेखना भी पाप है, धोखा है!!
सोचने की बात है कि केजरीवाल तीन बार मुख्यमंत्री रहे हैं, जनता ने उनके नेतृत्व में उनकी पार्टी को दिल्ली में दो बार और पंजाब में एक बार अभूतपूर्व बहुमत दिया, अगर वो राज्यसभा के लिए उपयुक्त नहीं हैं तो कौन है?
ख़ैर, इस मुद्दे पर आप ने अपना पक्ष पहले ही स्पष्ट कर दिया है, पर देश की राजनीति के लिए अच्छा होगा अगर केजरीवाल राज्यसभा जायें…
अगर गाली गलौज पार्टी की 50 से ज़्यादा सीटें आ रही हैं, तो यह हमारे प्रत्याशियों को संपर्क कर के तोड़न��� की कोशिश क्यों कर रहे हैं?
यह दिखा रहा है कि एक्ज़िट पोल एक साज़िश हैं आम आदमी पार्टी के विधायक तोड़ने की!
इस बार दिल्ली का चुनाव बहुत नज़दीक से देखा, या यूँ कहें तो सक्रिय रूप से भाग लिया।
ये चुनाव दिल्ली के पि���ले तीन चुनावों से बहुत अलग था। महाभारत के रण की तरह, सभ्यता की सारी मर्यादाएं टूटी।
आप की लड़ाई फिर से दिल्ली में सरकार बनाने की थी, और बीजेपी की लड़ाई सिर्फ़ दिल्ली जीतने की।
आप सीमित साधनों के बल पर चुनाव लड़ी, और बीजेपी असीमित संसाधनों के साथ मैदान में थी।
आप का कैंपेन मुद्दों पर था, और बीजेपी की चाहत सिर्फ़ बदलाव थी।
बीजेपी ने चुनाव में हर हथियार का इस्तेमाल किया, और आप ने उसका सामना हर मोर्चे पर डट कर किया।
अब नतीज़ा चाहे जो हो, पर एक बात तो बिलकुल स्पष्ट है कि चुनाव जीतने के लिए बीजेपी किसी भी हद तक जा सकती है, और आप उसका मुक़ाबला किसी भी हद तक कर सकती है…
I bought a car in 2014 for ₹6 lakhs
If I sell it today, I will get ₹1 lakh
As per new rules, I will have to pay 18% GST on the margin (₹6 lakhs - ₹1 lakh = ₹5 lakhs)
So after selling the car,
- I will get ₹10k
- Modi Govt will get ₹90k 🤣
RIP middle class 🙏🙏
No women in Indian history have faced as much abuse, slandering & character assassination as her.
Yet she never spoke ill against anyone, never played victim & always maintained her grace.
Happy birthday to one in a billion, Sonia Rajiv Gandhi ❤️🙏
I feel sorry for Eknath Shinde.
He broke the Shiv Sena, the legacy of Balasaheb Thackeray, at the behest of the cunning BJP.
BJP made him Chief Minister. That was just a short-term tactic to fool all supporters of Shiv Sena.
The Supreme Court allowed a dubious government to continue, despite itself questioning its legality.
After elections, fought under Shinde, BJP has dumped him.
Now BJP does not need Shiv Sena.
Both Shinde and Uddhav Thackeray have been betrayed. But they should have known better.
The BJP plays “ anaconda politics”; it swallows its allies, one step at a time.
Excellent TOI edit on how the former CJI Chandrachud & the SC failed to nip the communal problem of claiming mosques in the bud, during the question of survey of the Gyanvapi mosque. This has led to the mischief in Sambal which may spread to other places
#WATCH | Delhi: On a suit claiming Shiva temple within Ajmer Sharif dargah, Azad Samaj Party's National President Chandrashekhar Azad says, " ...Sambhal, Gyanvapi, Ajmer, all these dramas are being done to divert everyone from key issues like inflation, unemployment, food, education, health, women safety and farmers...so that people in power can run the govt smoothly as there won't be any questions on these issues...what is the ultimate goal of govt?..."
कैलाश गहलोत भी बीजेपी में शामिल हो गए..
न व्यक्ति महत्वपूर्ण रहा, न विचारधारा, अगर कुछ है तो वो सिर्फ़ सत्ता…
मोदी राज में राम का मंदिर तो अयोध्या में बन गया, पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम देश से बहिष्कृत हो गए, समाज को अब उनकी ज़रूरत नहीं रही…
भगवान राम ने रावण पर विजय पाने के लिए सुग्रीव का साथ लिया था, न कि उसके बड़े भाई बालि का।
जबकि बालि भी भगवान राम का भक्त था, सुग्रीव से ज़्यादा ताक़तवर था। उसने तो रावण को अपनी काँख में दबाकर पूरे ब्��ह्मांड का चक्कर भी लगाया था।
भगवान चाहते तो बालि के साथ मिलकर रावण को आसानी से हरा सकते थे। पर उन्होंने ऐसा नहीं किया। क्योंकि बालि भ्रष्ट था, इसलिए मर्यादा पुरुषोत्तम के लिए अयोग्य था।
भगवान राम के लिए सिद्धांत और मर्यादा, रावण पर विजय से भी ज़्यादा महत्वपूर्ण थी।
तभी रावण पर विजय प्राप्त करने के ��ाद वो “धर्म का राज” यानि “राम राज” स्थापित कर पाए।
भगवान राम ये अच्छी तरह जानते थे कि भ्रष्ट और अधर्म की मदद लेकर अगर वो जीत भी गए तो भी “धर्म का राज” स्थापित नहीं कर पायेंगे। लिहाज़ा अलायन्स सुग्रीव के साथ किया, बालि के साथ नहीं।
अब सोचने की बात ये है कि मोदी जी ने जो तमाम तथाकथित वर्तमान और भूतपूर्व भ्रष्ट लोगों का साथ लेकर, अलायन्स करके, जीत हासिल की, उस जीत से किस का राज स्थापित हुआ?
ज़ाह��र है, जब भगवान राम ख़ुद भ्रष्ट सहयोगी की मदद से मिली जीत के दम पर राम राज स्थापित नहीं कर सकते थे, तो मोदी जी क्या ही करेंगे।
इसलिए स्पष्ट है कि मोदी जी का मक़सद "राम राज" नहीं, सिर्फ़ और सिर्फ़ "मोदी राज" की स्थापना और विस्तार है।
लिहाज़ा अपने हर कदम से मोदी जी मर्यादा पुरुषोत्तम को समाज से इतनी दूर धकेल रहे हैं कि आने वाले वक़्त में किसी को याद भी न रहे ��ि भगवान राम कौन थे। यानि जो बाबर नहीं कर सका, वो मोदी जी कर रहे हैं!!
आख़िर यूँ ही नहीं कुछ लोग कहते हैं, "मोदी है तो मुमकिन है…"