टूटे दिल को जोड़ना आसान नहीं होता...एक गांठ तो रह जाती है... जो दो लोगों के बीच औपचारिकता की एक अनकही लकीर खींच देती है... अपनेपन की गर्माहट को अजन���ीपन की ओट दे देती है.
----- नविता
समंदर हूं मगर
नदिया सा बहता हूं
मौज में छू कर किनारों को
कहानी रोज गढ़ता हूं
बड़े बेतरतीब हैं
ज़िंदगी के रास्ते मगर
अपनी रवानी में
हर मोड़ को छू कर गुजरता हूं
----- नविता