बहुजन समाज पार्टी, अयोध्या के जिलाध्यक्ष श्री कृष्ण कुमार पासी जी के भतीजे के असामयिक निधन का समाचार सुनकर हृदय को गहरी पीड़ा पहुँची है।
इतनी छोटी उम्र में यूँ अचानक साथ छूट जाना, ये वह दुख है जिसके लिए कोई शब्द पूरा नहीं पड़ता। एक परिवार अपने बच्चों के लिए जो सपने देखता है, जो कल की उम्मीदें बुनता है, वह सब एक पल में रुक जाता है। ऐसे समय में सांत्वना देना आसान नहीं है।
लेकिन इतना ज़रूर कहना चाहूँगा कि श्री कृष्ण कुमार पासी जी को जो लोग जानते हैं, और उनके संघर्ष के साथी रहे हैं, सब आज इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़े हैं।
भावभीनी श्रद्धांजलि।
आज बहुजन समाज पार्टी ने सहारनपुर विधानसभा से फिरोज आफताब को प्रत्याशी घोषित किया।
बीएसपी नेता फिरोज आफताब को सुनिए- सन 2027 में बहुजन समाज पार्टी की सरकार बनने जा रही है।
मुस्लिम समाज अपना एकमुश्त वोट बहुजन समाज पार्टी को देने जा रहा है।
अयोध्या में श्रीराम मन्दिर से चढ़ावे की हुई चोरी, ग़बन व हेराफेरी आदि करने की मीडिया में आएदिन क़िस्म-क़िस्म की आ रही ख़बरें अति-गम्भीर व चिन्तनीय। ऐसे लोग क़तई भी बख़्शे नहीं जाने चाहिये, लेकिन इस मामले का राजनीतिकरण करना भी ठीक नहीं।
साथ ही, अब यहाँ मन्दिर में श्रद्धा के चढ़ावे आदि में आगे कोई भी शिकायत ना आये, इसके लिए देश के दूसरे विख्यात व प्रसिद्ध मन्दिरों में चढ़ावे आदि के हिसाब-किताब के लिए जो वहाँ व्यवस्था है तो उनका यहाँ अयोध्या में भी अनुशरण करके इस प्रकरण को जल्दी ही सुलझाना चाहिये तो यह उचित होगा।
इतना ही नहीं बल्कि देश में राजनीति का अपराधीकरण व अपराध का राजनीतिकरण तथा धर्म का राजनीतिकरण एवं राजनीति का अंध धर्मीकरण ना किया जाये तो यह सही व संवैधानिक होगा, ऐसी बी.एस.पी. की राजनीतिक पार्टियों को देश व जनहित में सलाह और साथ ही देशवासियों से भी यह अपील।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री तथा वर्तमान में सपा सांसद श्री अखिलेश यादव जी को आज उनके जन्मदिन पर उन्हें व उनके परिवार वालों को हार्दिक बधाई एवं उनके अच्छे जीवन व लम्बी उम्र की शुभकामनायें।
भीम आर्मी वाले कहते हैं कि हम जेल-मुकदमों से नहीं डरते हैं। इनकी हरकतें देखिए। थाने में कान पकड़कर बैठे हुए हैं।
प्रयागराज की घटना आपको याद ही होगी, जहां भीम आर्मी वालों के हिंसक प्रदर्शन एवं हुड़दंगई के चलते सैकड़ों लड़कों पर FIR हुई, उन्हें थाने में बैठाकर अपमानित किया गया।
ध्यान देने वाली बात यह है कि घटना के बाद चंद्रशेखर आजाद ने उन्हें पहचानने और भीम आर्मी का कार्यकर्ता होने से तक इनकार कर दिया। नतीजा यह हुआ कि ये लड़के अकेले पड़ गए। इन पर भयंकर जुल्म हुआ। कुछ दिन बाद इस प्रदर्शन के दौरान हुए हमले में एक दलित युवक की मौत की भी खबर आई थी।
यह सिर्फ प्रयागराज की घटना नहीं है। आजमगढ़ में भी यही हुआ था, जहां चंद्रशेखर आजाद की भड़काऊ राजनीति के चलते प्रशासन ने दलित समुदाय की 80 से अधिक गाड़ियां जब्त कर ली थीं। सैकड़ों लड़कों पर एफआईआर हुई थी। आलम यह रहा कि डर के मारे ये लड़के अपनी गाड़ियां तक नहीं छुड़वा सके। ध्यान देने वाली बात है कि इनमें से अधिकांश गाड़ियां वे थीं, जिन्हें समाज के लोगों ने अपनी बहन-बेटियों की शादी के लिए खरीदा था।
अब जरा आप ही सोचिए, बाबासाहेब जिस दलित समाज को Governing Class और मान्यवर कांशीराम जिसे हुक्मरान समाज बनाना चाहते थे, चंद्रशेखर आजाद की राजनीति के चलते आज वे थाने में कान पकड़कर बैठे हैं। क्या यही है तुम्हारी वीरता?
अब उत्तराखंड के टिहरी में द्विज हिंदू लड़की से प्रेम करने पर दलित युवक केतन हत्याकांड को ही देख लो। घटना घटित हुए 19 दिन हो गए हैं। मैंने स्वयं इस पर सबसे पहले पोस्ट किया था। एक नहीं, अनेक पोस्ट किए। उत्तराखंड के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस मुद्दे पर मजबूती से आवाज उठाई। तब जाकर यह मामला राष्ट्रीय पटल पर पहुँचा।
इस मामले में SC-ST Act के तहत FIR दर्ज है। दो हत्यारे गिरफ्तार भी हो चुके हैं। अब 19 दिन बाद चंद्रशेखर आज़ाद कौन-सा न्याय दिलाना चाहते हैं कि जाने के एक दिन पहले प्रशासन को हड़काते हैं और फिर हजारों युवाओं का जत्था लेकर पीड़ित परिवार के यहाँ कूच करने पर उतारू हैं? ऐसे में कानून-व्यवस्था के मद्देनजर प्रशासन तो उन्हें रोकेगा ही। यह सिर्फ भोले-भाले युवाओं को बरगलाने का एक तरीका है और कुछ नहीं।
मेरे मन में चंद्रशेखर आजाद के प्रति कोई घृणा भाव नहीं है। हम तो बस यह समझा रहे हैं कि आप अपनी हवाबाजी के चक्कर में मासूम लड़कों के करियर की बलि मत दीजिए। किसी घटना में पीड़ित परिवार से मिलने जाना है, तो शांति से जाइए। जाने से पहले ही प्रशासन को ललकारकर युवाओं को बरगलाना बंद कीजिए।
हजारों uncaderised लड़कों का जत्था लेकर, शोर-शराबा और नारेबाजी करते हुए किसी पीड़ित के यहां जाना न केवल कानून-व्यवस्था को चुनौती देना है, बल्कि यह पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदनहीनता की भी पराकाष्ठा है। मत भूलिए कि आप दलित समाज में रेप, हत्या एवं अत्याचार से पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे हैं। यह उनके मातम की घड़ी होती है, आप उसे शादी-बारात और ऑर्केस्ट्रा डांस मत बनाइए।
बाबासाहेब ने अपने बच्चों को कुर्सी पर बैठाने का सपना देखा था, थाने में कान पकड़कर बैठाने का नहीं। एक केस में न्याय दिलवाने के बदले 100 युवाओं पर केस करवा देना कौन-सी बुद्धिमानी है?
समाज के युवाओं, लड़ने का एक तरीका होता है। आपको बस इसलिए समझा रहा हूं। हमने सोशल मीडिया के जरिए ही सैकड़ों जातिवादियों पर FIR करवाकर उन्हें जेल भेजवाया है। संविधान को ताक पर रखकर संविधान बचाने की बात करना न केवल मूर्खता है, बल्कि यह बाबासाहेब के अथक संघर्षों का अपमान भी है। इसलिए गंभीर बनकर गहराई से विचार कीजिए, समझ जाएंगे।
केतन हत्याकांड पर न्याय की नौटंकी।
बीते 7 जून को उत्तराखंड के टिहरी में द्विज हिन्दू लड़की से प्रेम करने पर दलित युवक केतन की बर्बर हत्या कर दी गई। उनके एक साथी पर भी जानलेवा हमला किया गया।
इस मामले में मैं शुरू से लिख रहा हूँ। मामले में हत्या सहित SC-ST Act की गंभीर धाराओं में FIR दर्ज है। लड़की के पिता एवं दादा सहित कुल चार हत्यारे गिरफ्तार भी हो चुके हैं; यशवीर सिंह पंवार, विद्या सिंह पंवार, सचिन पंवार एवं सुमित प्रसाद। अन्य पहलुओं की जांच जारी है। मैं स्वयं उत्तराखंड के सामाजिक संगठनों के संपर्क में हूँ और प्रशासन पर हर संभव उचित दबाव बनाया जा रहा है।
अचानक ऐसा क्या हो गया कि 18 दिन बाद चंद्रशेखर आजाद की नींद खुलती है और वह एक दिन पहले ही सरकार एवं प्रशासन को हड़काते हैं कि उन्हें परिजनों से मिलने से न रोका जाए? दरअसल, यह एक गेम है। उन्हें पता है कि ऐसा कहने से हजारों लड़के इकट्ठा हो जाएंगे और प्रशासन उन्हें रोक देगा। बस वही धुरंधर स्टाइल में रील बनाने के लिए शानदार रहेगा। अपने प्रतिनिधि मंडल के साथ शांति से जाइए। बेवजह प्रशासन को ललकारकर युवाओं पर FIR को न्योता क्यों दे रहे हैं? आप तो सांसद हैं। आराम से चले आएंगे लेकिन समाज के मासूम लड़के नप जाएंगे। फिर "फूल बने अंगारे" टाइप की ऐसी हवाबाजी करनी ही क्यों है? खैर छोड़िए, इस रीलबाजी से मुझे क्या।
मेरा सवाल है कि अब जब हत्या की FIR दर्ज हो चुकी है, चार हत्यारे गिरफ्तार भी हो चुके हैं और आगे की अन्य सभी कार्रवाई चल रही है, तो आज 18 दिन बाद पीड़ित परिवार के घर अपना पूरा जत्था लेकर हुड़दंग और नारेबाजी के साथ आप कौन-सा न्याय दिलाने जा रहे हैं? परिवार मातम में है। कम से कम उसकी कद्र तो कीजिए। शोकाकुल परिवार के घर बेवजह हवाबाजी अच्छी बात नहीं होती है।
चंद्रशेखर की फटी शर्ट।
आज नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद का एक वीडियो वायरल है, जिसमें उनकी शर्ट फटी हुई है। दरअसल, वह उत्तराखंड के टिहरी में केतन के परिवार से मिलने जा रहे थे, जिसकी एक द्विज हिंदू लड़की से प्रेम करने पर हत्या कर दी गई थी।
प्रशासन ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया और इस धक्का-मुक्की में उनकी शर्ट फट गई। इसे देखकर दलित समाज के नए-नए लड़के इसे क्रांति समझ रहे हैं और सुबह से ही शोर मचा रहे हैं। अब इस कहानी का दूसरा पहलू समझिए।
चंद्रशेखर आजाद ने कल ही एक वीडियो बनाकर पोस्ट किया था कि वह उत्तराखंड के टिहरी में पीड़ित परिवार से मिलने आ रहे हैं। उन्होंने सरकार को हड़काते हुए कहा कि प्रशासन उन्हें रोके नहीं। अगर उन्हें रोका गया, तो वह सीधे मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे। अब ऐसा सुनते ही भोले-भाले लड़कों में जोश आ जाता है और वे चंद्रशेखर आजाद की रैली में हजारों की संख्या में इकट्ठा हो जाते हैं।
जाहिर सी बात है कि इस स्थिति में कोई भी सरकार सुरक्षा की दृष्टि से चंद्रशेखर को रोकेगी क्योंकि भीम आर्मी के युवाओं में कोई कैडर नहीं है। दरअसल, चंद्रशेखर आजाद स्वयं भी यही चाहते हैं, क्योंकि यही सब करके उन्हें प्रशासन से भिड़ने का मौका मिलता है। अब नए-नए लड़कों को यही तो चाहिए कि उनका नेता न्याय भले न दिलाए, बस साउथ के एक्टर्स की तरह धूम-धड़ाका करता रहे।
चंद्रशेखर आजाद तो चले आते हैं, लेकिन उनके हर आह्वान पर बुलाई गई भीड़ में सैकड़ों लड़कों पर एफआईआर हो जाती है। वे बेचारे सालों तक कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाते रहते हैं। अब चंद्रशेखर आजाद से मेरा सिंपल सा सवाल है:
जिन दलित परिवारों में किसी की हत्या हुई हो, लड़की का रेप हुआ हो, वे दर्द से विलख रहे हों, वहां हजारों की भीड़ लेकर हुड़दंग करना, "शेर आया-भालू आया" के नारे लगवाना और गाड़ी पर खड़े होकर हाथ हिलाते हुए एंट्री लेना शोभा देता है क्या? आप किसी परिवार के मातम में शामिल होने जा रहे हैं या उनके यहां बारात में ऑर्केस्ट्रा देखने जा रहे हैं?
अब तो आप सांसद हो गए हैं। पीड़ित परिवारों की लाश पर राजनीति करने की क्या जरूरत है? क्या जरूरत है कि आप किसी पीड़ित के यहां जाने से पहले ही युवाओं को इकठ्ठा होने का आह्वान कर देते हैं? मातम में परिवार से मिलने जा रहे हैं तो ये सब नौटंकी क्यों? आपकी वजह से गांव-गली के बगलबच्चा लड़के भी "आ रहा हूं फलाने तारीख को" जैसी नौटंकी करते हैं। अब आप सांसद हो गए हैं। रैली सार्वजनिक स्थानों पर की जाती है। मृतक परिवार के घरों पर नहीं। थोड़ा गंभीर बनिए। आप पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने जाते हैं, बेचारे समाज के लड़कों को आपके न्याय की लड़ाई लड़नी पड़ती है।
समाज के युवाओं और पीड़ित परिवारों के भविष्य और उनकी भावनाओं से मत खेलिए। जातिगत उत्पीड़न के मामलों में शांतिपूर्वक 2-4-10 गाड़ियां (जो भी आपको उचित लगे) लेकर जाइए और परिवार से मिलकर उन्हें संबल दीजिए। बेवजह पुलिस को ललकारने और हजारों युवाओं का जत्था लेकर पीड़ित के घर बारात ले जाने वाली ओछी हरकतें बंद कीजिए।
आज छत्रपति राजर्षि शाहू जी महाराज की जयंती है, एक ऐसे महापुरुष को याद करने का दिन, जिन्होंने अपने समय से बहुत आगे की सोच रखी।
1902 में, जब देश का बड़ा हिस्सा जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता से जूझ रहा था, तब शाहू जी महाराज ने पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण लागू कर यह साबित किया कि सत्ता का असली उद्देश्य समाज के आख़िरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति को भी न्याय दिलाना होता है, न कि केवल कुछ लोगों के हितों की रक्षा करना।
मैं मानता हूँ कि हर पीढ़ी को बराबरी की लड़ाई अपने तरीक़े से लड़नी होती है। शाहू जी महाराज ने अपनी पीढ़ी की लड़ाई पूरी ईमानदारी से लड़ी। आज जब संविधान, आरक्षण और समान अवसर जैसे सवालों पर बहसें फिर से तेज़ हैं तो उनका जीवन हमें याद दिलाता है कि लोकतंत्र की ताक़त उसके सबसे ऊँचे पदों से नहीं, उसके सबसे आख़िरी नागरिक के साथ हुए व्यवहार से मापी जाती है।
आज सिर्फ़ श्रद्धांजलि देना काफ़ी नहीं है। उनके अधूरे काम को आगे बढ़ाना हर वंचित और पिछड़े व्यक्ति तक शिक्षा, सम्मान और बराबर अवसर पहुँचाना ही शाहू जी महाराज के लिए हमारी असली श्रद्धांजलि होगी।
छत्रपति राजर्षि शाहू जी महाराज को मेरा कोटि कोटि नमन।
यूपी की राजधानी लखनऊ के एक कोचिंग सेन्टर में आज दोपहर बाद हुई अग्निकाण्ड में अनेक लोगों की मौत तथा और भी कई लोगों के घायल हो जाने की घटना अति-दुखद। इस प्रकार की जानलेवा घटनायें दिल को दहलाने वाली होती हैं तथा कितने ही परिवार की उम्मीदों को बिखेर देती हैं। ऐसी दुखद घटनाओं की रोकथाम के लिये सबको मिलकर सही से काम करने की ज़रूरत है। सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप से काम नहीं चलेगा।
जैसाकि सर्वविदित है कि बी.एस.पी. देश में ’बहुजन समाज’ व अपरकास्ट समाज के ग़रीब शोषित-पीड़ित व उपेक्षितों द्वारा, उनके संवैधानिक हक़ व न्याय आदि के लिये परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के बताये रास्तों पर चलने वाली ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की सच्ची व ईमानदार अम्बेडकरवादी पार्टी है, जो दूसरी पार्टियों की तरह बड़े-बड़े पूंजीपतियों व धन्नासेठों के सहारे और उनके इशारे पर नहीं चलती है बल्कि अपने लोगों के ही तन, मन और धन के बलबूते पर चलती है, जो स्वाभाविक तौर पर संकीर्ण, जातिवादी, साम्प्रदायिक व पूंजीवादी ताक़तों को यह फुटी कौड़ी नहीं सुहाता है और इसी लिये वे समय-समय पर और ख़ासकर चुनाव के नज़दीक आने पर क़िस्म-क़िस्म के हथकण्डे इस्तेमाल करके बी.एस.पी. पार्टी व मूवमेन्ट को तथा उसके आयरनलेडी नेतृत्व को भी बदनाम करने में लगे रहते हैं।
इसी क्रम में मीडिया के एक वर्ग द्वारा दूसरी पार्टियों की चुनावी जुगाड़ आदि पर से लोगों का ध्यान बाँटने तथा उन पर पर्दा डालने के लिये बी.एस.पी. पार्टी उम्मीदवार के चयन को लेकर सवालिया निशान खड़े करते रहते हैं, जबकि बी.एस.पी. को जो भी आर्थिक सहयोग हासिल होता है वह पार्टी उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने पर ही क़ानूनी तौर से ज़्यादातर ख़र्च कर दिया जाता है, जो किसी से भी छिपा हुआ नहीं है। फिर भी उसको लेकर षडयंत्र के तहत् गुमराह करने वाली तरह-तरह की ग़लत बातें व अफवाहें आदि फैलाना मीडिया को शोभा नहीं देता है।
इसके साथ ही यहाँ यह भी सर्वविदित है कि केवल बी.एस.पी. यूपी स्टेट यूनिट के अध्यक्ष श्री विश्वनाथ पाल ही नहीं बल्कि पार्टी के अन्य सभी छोटे-बड़े पदाधिकारी व कार्यकर्तागण भी इस समय पार्टी संगठन की मज़बूती तथा पार्टी के जनाधार को सर्वसमाज में बढ़ाने के साथ-साथ आगामी यूपी विधानसभा आमचुनाव हेतु पार्टी उम्मीदवारों की संभावित सूची बनाने तथा उनकी ठोस स्क्रीनिग करने आदि में लगे हुये हैं और पार्टी की उम्मीदवारी को लेकर उनसे मिलने वालों से अन्य बातों के अलावा उनकी सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक हैसियत के साथ ही उनके पार्टी के प्रति वफादारी व टिकाऊपन आदि को भाँपने के लिये, कोर्ट में जिरह की तरह, उनसे तरह-तरह के सवाल-जवाब भी करते रहते हैं, जिसकी गहराई में गये बिना ही उसे उसके पूरे फेस वैल्यू पर अन्यथा लेना उचित नहीं है, यह मीडिया से भी अनुरोध है तथा पार्टी के लोगों से भी अपील है कि वे विरेाधी पार्टियों के ऐसे प्रायोजित किसी भी षडयंत्र का शिकार होकर गुमराह ना हों बल्कि अपने मिशन 2027 के लक्ष्य में पूरे जी-जान से लगे रहें, जिस बी.एस.पी ज़िन्दाबाद की आपकी जबरदस्त तैयारी को देखकर ही विरोधियों की नींद काफी उड़ी हुई है। जय भीम जय भारत।
सही मायने में देखा जाए तो भाजपा पर हमला करने के लिए @AnandAkash_BSP से बेहतर कोई नेता नजर नहीं आता. 2027 के रण में उनके इसी अंदाज में भाषणों की जरूरत है. मैं समझता हूँ कि उन्हें यूपी में अभी से धमाकेदार शुरुआत कर देनी चाहिए.
बहन जी के प्रति दीवानगी देखी जब प्रत्याशी विपिन दीवान जी ने कि मुझे बहन जी ने भेजा है तो महिला का जवाब आप सुनकर ललाहित हो जाएंगे उन्होंने कहा बस आपने यह बोल दिया और हम कहीं नहीं जाने वाले।।
Congratulations to the Indian Women’s Cricket Team on a remarkable performance today. The skill, the composure, the way they played for each other, that’s what made it special to watch.
And to every young girl across India who tuned in, what you saw today is what’s possible when you trust your team and back yourself. Keep going, champions, we’re all rooting for you in the matches ahead.
यूपी की राजधानी लखनऊ के पड़ोसी ज़िला हरदोई में एक सरकारी अधिकारी शाहाबाद के एसडीएम श्री सुशील मिश्रा पर सरकारी निरीक्षण के दौरान दबंगों द्वारा ईंट व पत्थर आदि से किया गया जानलेवा हमला तथा उसमें उनके घायल होकर इलाज के लिये अस्पताल में भर्ती होने की ख़बर है, जो दुर्भाग्यपूर्ण ही नहीं बल्कि अति-चिन्ताजनक भी है। ऐसी घटनाओं की रोकथाम ज़रूरी है ताकि सरकारी कार्यों में कथित भ्रष्टाचार के साथ-साथ प्रदेश को अराजक तत्वों से बचाया जा सके। सरकार व्यापक जनहित के मद्देनज़र, इस ओर ज़रूर समुचित ध्यान दे।
बसपा में पुराने नेताओं की घर वापसी बहुत तेजी से होने जा रहा है,
आप देखिएगा जो माहौल 2022 में समाजवादी पार्टी के लिए था उससे चार गुना ज्यादा माहौल बहुजन समाज पार्टी के लिए बनेगा 27 में और भाजपा हारेगी।