एक जागरूक नागरिक के ���ाते मेरा @PMOIndia और @dgpup से अनुरोध है कि आचार्य प्रशांत जी को मिली हत्या की धमकी पर तुरंत FIR दर्ज हो और ��न्हें Security Cover दिया जाए। समाज और युवाओं को उनके मार्गदर्शन की सख्त जरूरत है।
#ProtectAP
अरसे बाद @Advait_Prashant जी के साथ बैठन��� संभव हुआ. महीनों से चरैवेति चरैवेति…जीवन अंगीकार किए हुए हैं. अपनी किताब ‘Truth without apology’ पर चर्चा के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में आयोजन और संवाद की शृंखला चल रही. अधिकतर जगहें देश के IITs होते हैं.
ख़बर मिली कि अचार्य जी दो-चार दिन के लिए दिल्ली लौटेंगे. फिर तय हुआ कि आचार्य जी के साथ चर्चा रिकॉर्ड करेंगे. ज़ाहिर है यह आग्रह मेरा ही था.
23 जनवरी रात 11 बजे ऑफिस से निकलने के बाद मैं पहुँच गया. मेरे पहुँचने का वक्त अमूमन यही होता है. लौटने के बारे में मुझे भी पता रहता है, सुबह होगी. इस बार भी ऐसा ही हुआ. बादाम के दूध की चाय और फ़्रायर के पकौड़े, अब मेरे लोभ का हिस्सा हो चुके हैं. रात भर की बातचीत और उस बातचीत का हिस्सा जो रिकॉर्ड होता है, उनके दरमियान चार-पाँच दफ़ा चाय-पकौड़े का दौर चलता ही है. इस बार रोहित जी ने कह रखा था कि डिनर साथ करेंगे, सो खाना भी वहीं हुआ.
आचार्य प्रशांत में एक अद्भुत किस्म का जुनून और बेचैनी दोनों साथ दिखते हैं. पटना के बापू सभागार के आयोजन का ज़िक्र करते हुए वे भावुक हो गए. असामान्य बात यह कि रात भर जागने और लंबी बात के बाद भी मैंने कभी उनको थका और सुस्त नहीं पाया.
एक जज्बाती रिश्ता हमारे बीच ठीक वैसे ही बना जैसे हवा पर नमी ठहर जाती है. अनायास. अविभाज्य. सुबह साढ़े चार बजे जब निकलने लगा तो आचा���्य जी ने किताब का नया एडिशन की प्रति भेंट की. “प्रिय, राणा जी को सप्रेम. प्रशांत”
बातचीत दो घंटे की रिकॉर्ड हुई. निकलते समय मैं सुबह की हल्का और ताज़ा था. साथ में नवीन और सतीश जी थे, निहाल थे. यह इंटरव्यू (जिसकी कोई पूर्व तैयारी नहीं होती और वह पान�� सा अपनी राह बनाता चलता है. इसीलिए, बातचीत कहता हूँ) आपको बहुत पसंद आयेगा,विश्वास है.