All countries should immediately STOP ALL FLIGHTS to and from Russia
Don’t wait until this becomes another pandemic.
If it turns out to be nothing, at worst it’s just a two week flight restriction. If it’s something serious, it would be distrarous.
दिल्ली में इस वक़्त जो हो रहा है, उसका एक ही पैटर्न है - जो औरत सवाल पूछे, उसे चुप कराओ।
जंतर-मंतर पर सैकड़ों लोग हिरासत में लिए गए। महिला प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुरुष पुलिसकर्मियों ने उनके साथ बदसलूकी की। महिला पत्रकारों के कैमरे छीने गए, उन्हें घसीटा गया। एक पत्रकार की शिकायत पर FIR तक दर्ज नहीं हुई।
कुछ हफ्तों पहले शाहीन और नफ़ीसा ने साकेत थाने के अंदर अपने साथ हुई हिंसा और बदसलूकी की आपबीती सुनाई है। सोचिए, थाने के अंदर - वो जगह जहां महिलाएं शिकायत लेकर जाती हैं।
जिन पर महिलाओं की रक्षा की ज़िम्मेदारी है, वही आज उनके लिए ख़तरा बन रहे हैं। और दिल्ली पुलिस किसके अधीन है - यह पूरा देश जानता है।
साकेत थाने का पूरा CCTV फुटेज सार्वजनिक किया जाए। दोषी पुलिसकर्मियों पर तुरंत कार्रवाई हो। शाहीन, नफ़ीसा और जिनके साथ भी दिल्ली पुलिस ने हिंसा और बदतमीज़ी की है उनको न्याय मिले।
अमित शाह जी - आप और आपकी पुलिस महिलाओं से डरती क्यों है?
This is how much Modi Shah willing to go to to save Chor Gyanesh - make Jantar Mantar a war zone for India’s citizens. Yeh taaj uchhale jayenge, Yeh takht giraaye jayenge. Matter of time.
🚨SOS🚨
AISA President Neha Bora has been picked up by Delhi Police in an unauthorised vehicle, WITHOUT A SINGLE FEMALE CONSTABLE!
WE DO NOT KNOW WHERE THEY ARE TAKING THEM! THEIR WHEREABOUTS ARE UNKNOWN!
@DelhiPolice has crossed EVERY LIMIT!
Tomorrow 3 PM
Citizens' March
India Gate to Jantar Mantar
4 PM, Sunday, 4th October 2026
From Streets to Protests, Women Are NOT SAFE!
Delhi Police's assault against women protestors, journalists will not be tolerated!
In the spirit of women taking back the streets:
Rise against Delhi Police!
Rise against anti-women SIR!
Rise for freedom!
Rise against Gyanesh Kumar!
Jantar Mantar 2.0!
कहीं छात्र पेपर लीक के ख़िलाफ़ आंदोलन कर रहे हैं।
कहीं किसान अपनी ज़मीन के लिए लड़ रहे हैं।
कहीं आशा कार्यकर्ता महीनों से मानदेय की मांग कर रही हैं।
कहीं आदिवासी अपने जंगल बचाने के लिए खड़े हैं।
हर आंदोलन अपनी अलग लड़ाई लड़ रहा है इसलिए हर आंदोलन को लगता है कि वो अकेला है।
इसलिए 'सत्याग्रह' - आपका आंदोलन जहाँ भी चल रहा हो, उसकी बात सीधे मुझ तक पहुँचाइए। दो मिनट लगेंगे - दिल्ली आने की ज़रूरत नहीं।
आपका आंदोलन नक्शे पर आ जाएगा - और आप देख पाएँगे कि देश में और कौन-कौन वही लड़ाई लड़ रहा है।
बिखरे हुए आंदोलन दबा दिए जाते हैं। जुड़े हुए आंदोलन सरकारें झुका देते हैं।
👉 https://t.co/hJ8iARr5La
Across the country, people are fighting for their rights - and too often, fighting alone.
Gen Z, students, farmers, Adivasis, Dalits, women - every struggle has its own story. But a lone voice is often easier to silence.
‘Satyagraha’ is an initiative to bring these voices together on one map.
Bapu taught us that truth is our greatest weapon. But an even greater weapon is standing together with the truth.
If you too are fighting against any injustice, share your story. It will take just two minutes.
Your story will find a place on the Satyagraha map. You’ll see who else, like you, is fighting their own battle.
And I will do whatever I can - in Parliament, on the streets, through letters, wherever I am needed - to stand with you. As the Leader of the Opposition, that is my responsibility.
Tell me the story of your Satyagraha here:
👉 https://t.co/hJ8iARr5La
देशभर में लोग अपने हक़ के लिए लड़ रहे हैं - और अक्सर अकेले लड़ रहे हैं।
Gen Z, छात्र, किसान, आदिवासी, दलित, महिलाएँ - हर संघर्ष की अपनी कहानी है। पर जो आवाज़ अकेली उठती है, वो अक्सर दब जाती है।
'सत्याग्रह' इन्हीं आवाज़ों को एक नक्शे पर साथ लाने की पहल है।
बापू ने यही सिखाया था - सच सबसे बड़ा हथियार है। पर उससे भी बड़ा हथियार है, एकता में सच के साथ खड़े होना।
अगर आप भी किसी अन्याय से लड़ रहे हैं - अपनी कहानी भेजिए। दो मिनट लगेंगे।
आपकी कहानी नक्शे पर आएगी। आप देखेंगे कि आपकी तरह और कौन-कौन लड़ रहा है। और मैं जो कर सकता हूँ, करूँगा - संसद में, सड़क पर, खत लिखकर, जहां भी मेरी ज़रूरत हो वहां आपके साथ खड़े होकर - नेता विपक्ष के रूप में ये मेरी ज़िम्मेदारी है।
अपने सत्याग्रह को कहानी मुझे यहां बताएं
👉 https://t.co/hJ8iARr5La
आज गांधी जयंती है।
और आज ही, हज़ारों नौजवान वोट चोरी के ख़िलाफ़ सड़कों पर हैं - शांतिपूर्वक, बिना हिंसा के, अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करते हुए।
उनकी माँग साफ़ है: ज्ञानेश कुमार इस्तीफ़ा दें। लोकतंत्र बचाओ।
और Modi-Shah सरकार का जवाब? लड़के-लड़कियों को सड़कों पर घसीटा जा रहा है। सैकड़ों हिरासत में हैं। उनका कसूर सिर्फ़ यह कि उन्होंने वोट चोरी पर सवाल पूछा।
बापू ने यही सिखाया था - सच बोलो, शांति से लड़ो। और यही सरकार को सबसे ज़्यादा डराता है।
क्योंकि लाठी से भीड़ रोकी जा सकती है, सवाल नहीं।
ज्ञानेश कुमार जाएँगे। और जिस सिस्टम ने उन्हें बिठाया है, वो भी जाएगा।
No permission is required for citizens to protest criminal actions against our democracy. Nothing at all. We’re all with you @NehaAisa - let @DelhiPolice do what they like. Hum Dekhenge.
सत्य, अहिंसा और निर्भयता - यही बापू की सबसे बड़ी विरासत है।
उन्होंने सिखाया कि अन्याय के सामने कभी झुकना नहीं, सत्य और अहिंसा के साथ डटे रहना ही सच्ची ताकत है।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन।
पूरा देश वोट चोरी के खिलाफ़ गुस्से में है - मगर फिर भी BJP-EC की बेशर्मी देखिए कैसे खुलेआम वही किए जा रहे हैं।
कर्नाटक के बेलगावी में एक झटके में लगभग 15 हजार वोटरों के नाम मिटाने की साजिश चल रही थी।
सिर्फ़ तीन दिनों - 22, 23 और 24 सितंबर - में इतने नाम वोटर लिस्ट से हटाने के लिए Form 7 की बाढ़ आ गई।
और निशाने पर कौन? मुसलमान, SC, ST और OBC। क्योंकि इनमें से ज़्यादातर लोग BJP के खिलाफ वोट डालते हैं।
मैंने वोट चोरी के इस तरीके का पहले ही पर्दाफाश किया था - Centralized तरीके से software के जरिए वोट delete किए जाते हैं। "चुनिंदा" लोगों के खिलाफ BJP और EC के लोगों द्वारा मिलकर automated तरीके से थोक में Form 7 भरे जाते हैं - और देखते ही देखते लाखों वोटर लिस्ट से गायब हो जाते हैं। और ये सब ऊपर से नियंत्रित किया जाता है।
कर्नाटक कांग्रेस के नेता इस वक्त कर्नाटक CEO के दफ़्तर में इसके दोषियों के ख़िलाफ़ FIR की मांग कर रहे हैं। CEO इस FIR से मना क्यों कर रहे हैं?
इस तरह से मोदी, शाह और ज्ञानेश मिल कर SIR के ज़रिए लोकतंत्र को खत्म कर रहे हैं। ये देशद्रोह है।
इसलिए मैं कह रहा हूं ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा दे कर approver बन जाना चाहिए, और मोदी शाह के खिलाफ जांच होनी चाहिए।
Stop punishing women for the crimes committed against them.
Across our country, women are afraid to walk the streets, afraid of being harassed, afraid of being raped. And the government’s answer: stay at home.
This is patriarchy at work: a system that blames the victim and shields the criminal. It is time to smash it.
The solution is not to lock women inside. It is to make our streets safe, to confront the mindset of men who mistreat women, and to punish those who attack them, swiftly and without exception.
Thousands of students and young people are on the streets demanding safety for women. I urge even more young women, especially GenZ across India to come out in stronger numbers.
This government is deaf to your pain and will only listen when it’s under pressure.
Peaceful protest is your democratic right, and I stand with you wholeheartedly.
दिल्ली की BJP सरकार के एक मंत्री वीडियो में एक नौजवान को थप्पड़ मारते दिख रहे हैं।
उसका गुनाह? वो वीडियो बना रहा था।
मंत्री के सामने सड़क खोदकर दिखाई जा रही थी, और उसके हाथ में कैमरा था।
ये उस सत्ता का चेहरा है जिसे अब वोटर से डर लगना बंद हो गया है।
सड़क पर सवाल पूछो - थप्पड़।
पेपर लीक पर सवाल पूछो - लाठी।
संसद में सवाल पूछो - माइक बंद।
ये लोग ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि इन्हें अब ये डर ही नहीं कि चुनाव इन्हें हटा सकता है। वोट चोरी यही ख़रीदती है - सिर्फ़ नतीजा नहीं, उसके बाद आने वाला अहंकार भी।
जो सरकार जीत को पक्का मान लेती है, उसे आपकी रज़ामंदी नहीं चाहिए - आपकी ख़ामोशी और अंधभक्ति चाहिए।
बैंक कर्मचारी हड़ताल पर हैं। कारण पूछने पर यही लगा कि जिस बैंक की नौकरी को अच्छी नौकरी में गिना जाता था, उसकी हालत बदतर हो गई है। टारगेट के नाम पर कर्मचारी देर शाम तक रोके जाते हैं, छुट्टी नहीं दी जाती है,
तनाव रोज़ का हिस्सा है। काम करने की जगह भी अच्छी नहीं है। ऐसा लगता है कि बैंकर को सज़ा दी जा रही है कि उन्होंने बैंक की नौकरी क्यों की। लोगों ने बताया कि अत्यधिक तनाव के कारण बीमारियाँ होने लगी हैं।
एक बैंकर ने यह भी बताया-
सुबह 8:00 बजे घर से निकलने वाला बैंकर रात को 8:00 या 9:00 बजे के बाद ही घर लौट पाता है, क्योंकि एनपीए (NPA - गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) को रोकने का भारी दबाव होता है। हर खाते की मंथली ईएमआई (EMI) होती है, और यदि वह 90 दिनों तक जमा न हो, तो खाता एनपीए हो जाता है। ऐसे में रीजनल ऑफिस से ब्रांच हेड पर दबाव आता है कि यह खाता आज किसी भी हाल में एनपीए नहीं होना चाहिए। पहले केवल महीने की आखिरी तारीख को एनपीए रोकने का दबाव होता था, लेकिन अब हर सिंगल डे (प्रतिदिन) यह प्रेशर रहता है।
रात के 9:00 बज रहे होते हैं और रीजनल ऑफिस से फोन आता है कि "किसी भी तरह इस खाते को बचाइए।" थक-हारकर जब ब्रांच हेड को लगता है कि उसे अब घर जाना चाहिए, तो वह अपनी जेब से 2,000, 4,000 या 10,000 रुपये तक की ईएमआई खुद भर देता है। बाद में ग्राहक वह पैसा लौटाता नहीं है, जिससे बैंक मैनेजर के अपने पैसे डूब जाते हैं।
बैंक में दिनभर कई तरह के मानसिक तनाव झेलने पड़ते हैं। आपको रिकवरी के लिए फील्ड में निकलना होता है। वहाँ कोई ग्राहक आपको ब्लैकमेल करता है कि "मेरे घर मत आओ, नहीं तो मैं पैसा जमा नहीं करूँगा, सिर्फ़ फोन पर बात करो।" फोन पर बात करने के दौरान ग्राहक कभी-कभी अभद्र और गाली-गलौज वाली भाषा का प्रयोग करते हैं। उस तनाव में यदि मैनेजर के मुँह से गलती से भी कोई गलत बात निकल गई, तो ग्राहक उसकी कॉल रिकॉर्डिंग करके ब्लैकमेल करने लगता है।
कृपया बैंकर की बात सुनें । कोई रास्ता निकालें।
Hon’ble Chief Justice of India - Siddharth Sharma, son of Justice Sharma practices in Jabalpur, is empanelled by @ECISVEEP, has appeared for them. How can his father hear Gyanesh Kumar CEC’s case? How can he be put out of turn to give relief to CEC daughter?