1962 में चीन और भारत🇮🇳 के युद्ध में चीन से लड़ने के लिए तेजपुर असम में गोर्खा वीरागंना नारीयाँ पीछे अपने बच्चे और हाथ में बन्दुक लिए हुए।
ऐसी दुर्लभ तस्वीरें अब इतिहास के पन्ने में सिमट कर रह गई है।
दे�� के राष्ट्रपति के हाथों काम के लिए सम्मान मिलना गौरवान्वित करनेवाला था लेकिन खुशी तब डबल हो गई जब राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जी ने बताया कि वो भी न्यूज़ की पाठशाला देखते हैं। 😊