अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं
रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥
अर्थ:
मैं पवनपुत्र हनुमान को प्रणाम करता हूँ—
जो अतुलनीय बल के धाम हैं,
जिनका शरीर स्वर्ण पर्वत के समान तेजस्वी है,
जो दुष्टों के लिए अग्नि के समान हैं,
जो ज्ञानियों में श्रेष्ठ हैं,
जो समस्त गुणों के भंडार हैं,
और जो श्रीराम के परम प्रिय भक्त हैं।
Old and rare picture of Gudimallam Parasurameshwar Shivalinga
World's oldest known Shivalinga located at Gudimallam Tirupati district near Renigunta Andhra Pradesh.