@Asharamjiashram मां और शिशु के हित में प्रसव से जुड़ी सही जानकारी और जागरूकता जरूरी है। चिकित्सकीय आवश्यकता न हो तो अनावश्यक C-section से बचने और सुरक्षित प्रसव विकल्पों पर डॉक्टर से सलाह लेने के लिए जागरूक बनें।
Suprasav Abhiyan
#NormalDelivery
Say No To C-section
@Asharamjiashram हर माँ और शिशु के लिए सुरक्षित प्रसव सबसे महत्वपूर्ण है। प्राकृतिक प्रसव के लाभों की जानकारी पाएं और C-section का निर्णय केवल चिकित्सकीय आवश्यकता व विशेषज्ञ की सलाह से ही लें।
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#NormalDelivery
Say No To C-section
Sant Shri Asharamji Bapu की प्रेरणा से शुरू हुए Suprasav Abhiyan का उद्देश्य है -
🔹महिलाओं को #NormalDelivery का महत्व बताकर जागरूक करना।
🔹उन्हें आसान घरेलू उपाय व मंत्र प्रयोग बताना जिससे सामान्य प्रसूति हो तथा जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित व स्वस्थ रहें।
🔹Say No To C-section
मातृत्व एक अनमोल अनुभव है। सही जागरूकता, उचित देखभाल और चिकित्सकीय सलाह से सुरक्षित प्रसव की दिशा में कदम बढ़ाएँ। अनावश्यक C-section से बचने के लिए जानकारीपूर्ण निर्णय लें।
Suprasav Abhiyan
#NormalDelivery
Say No To C-section
Pregnancy Awareness का उद्देश्य मातृत्व को सही जानकारी, उचित देखभाल और जागरूकता से सशक्त बनाना है। माँ और शिशु के स्वास्थ्य के लिए सुरक्षा के लिए शांत वातावरण बनाने में सहयोग दे।
#SuprasavAbhiyan
@Asharamjibapu__ शरणागति में अहंकार मिटता है और हृदय गुरुचरणों में समर्पित होता है। स���्ची शरणागति गुरुकृपा को आकर्षित करती है और गुरुकृपा शरणागति को पूर्णता प्रदान करती है। 🙏
Sant Shri Asharamji Bapu
#AsharamjiBapuQuotes
@Asharamjibapu__ श्राद्ध की परंपरा में पितरों के प्रति श्रद्धा, स्मरण और कृतज्ञता का भाव प्रमुख है। भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में श्राद्ध, तर्पण, भगवन्नाम-जप और कीर्तन को पितरों के कल्याण की भावना से जोड़ा गया है।
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#AsharamjiBapuQuotes#श्राद्ध_महिमा
ये जो जगत दिखता है, ये स्थूल जगत है, इसको आदि भौतिक कहते हैं। हमारा शरीर 27 तत्वों का बना है, जब जीव मर जाता है तो 10 तत्व यहाँ छोड़ देत��� है।
पृथ्वी और जल अंश छोड़कर बाकी के 17 तत्वों का सूक्ष्म शरीर बनता है, तो उसने जो देखा है, खाया है, भोगा है तो भोगने, खाने, देखने के निमित्त अब उसके पास शरीर तो है नहीं। पृथ्वी तत्व नहीं है, जल तत्व नहीं है। तेज, वायु और आकाश तीन तत्वों का है तो उनकी तृप्ति के लिए किया जाता है तो फिर वो भावना से ही तृप्त होते हैं। उसमें वस्तु थोड़ी होती है लेकिन संतुष्टि हो जाती है और फिर उनके लिए भगवान के नाम का जप की���्तन करते हैं तो और तृप्त होते हैं और उनकी पुण्याई बढ़ती है तो फिर वो पितृलोक में चले जाते हैं।
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#श्राद्ध_महिमा
@Asharamjibapu__ सच्चे गुरु का हर वचन शिष्य के कल्याण, सुधार और ईश्वरप्राप्ति का मा��्ग प्रशस्त करता है। गुरु की सीख को श्रद्धापूर्वक अपनाना ही सच्ची गुरुसेवा है। 🙏
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@Asharamjibapu__ श्राद्ध आदि सत्कर्मों से पि���रों के प्रति कृतज्ञता और संस्कारों की भावना पुष्ट होती है। सनातन परंपरा में इन्हें परिवार की सुख-शांति और दैवी संस्कारों से जोड़ा गया है। आइए, श्रद्धापूर्वक श्राद्ध करें और आत्मचिंतन करें।
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#AsharamjiBapuQuotes
जिनके घर में श्राद्ध नहीं होता, उनके कुल खानदान में दीर्घ आयुष्य वाली आत्माएं पैदा नहीं होती और सद्बुद्धि वा��े छोरे छोरियां जल्दी पैदा नहीं होते और उनके घर में रोग और कलह - कलेश बना रहता है लेकिन जो श्राद्ध आदि सत्कर्म करते हैं तो दशरथ जी करते तो रामजी प्रगट हुए और रामजी भी करते श्राद्ध दशरथ का तो लव और कुश प्रगट हुए, हनुमान जी को भी बांध के दिखा दिया तो इससे दैवी शक्तियां विकसित होती हैं। #AsharamjiBapuQuotes #श्राद्ध_महिमा
@Asharamjibapu__ संसार की नश्वर वस्तु���ं का सदुपयोग यदि सेवा, साधना और सत्कर्म में होने लगे, तो यही तन-धन आत्मकल्याण का साधन बन जाते हैं। सदुपयोग की यही कला हमें शाश्वत आत्मतत्त्व की ओर ले जाती है।
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अगर सदुपयोग करने की कला आ जाय तो कर्म से मिली हुई चीज नश्वर होने पर भी आप शाश्वत के अधिकारी बनने लगेंगे । आधिभौतिक तन और धन का आध्यात्मिकीकरण आपको आत्मानुभूति कराने में सहायक है ।
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@Asharamjibapu__ श्राद्ध केवल पुत्र का ही अधिकार नहीं माना गया है। परिस्थितिनुसार पत्नी, भाई, चचेरा भाई अथवा दौहित्र (पुत्री का पुत्र) भी श्राद्ध कर सकता है। यह परंपरा पितरों के प्रति श्रद���धा और कर्तव्यभाव को दर्शाती है।
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#श्राद्ध_महिमा
यदि श्राद्ध करने वाला बेटा न हो, श्राद्ध करने में अगर बड़ा पुत्र है तो बड़ा पुत्र श्राद्ध करे अथवा पुत्र नहीं है तो स्त्री श्राद्ध कर सकती है पुरुष का, पति का। सौहद्र भाई, चचेरा भाई भी कर सकता है, जमात (दौहित्र) पुत्री का पुत्र भी कर सकता है। #AsharamjiBapuQuotes#श्राद्ध_महिमा
परिव���र में अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता जीवित रहती है, वहाँ संस्कारों की परंपरा भी जीवित रहती है। पितृ पक्ष हमें अपने पितरों का स्मरण करने और श्राद्ध की महिमा समझने का अवसर देता है।
Pitru Paksha
Shraddh Mahima #AncestralBlessings
@Asharamjibapu__ शरीर और संसार का चिंतन तनाव बढ़ाता है, जबकि भगवन्नाम-जप व भगवद्ज्ञान मन को शांति और जीवन को सही दिशा देते हैं। इसलिए आत्मचिंतन व ईश्वर-स्मरण को जीवन का आधार बनाएं। 🙏
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