@Sheetal2242 बिजली माफी की भीख
रोङवेज किराया माफी की भीख
परीक्षा के समय मुफ्त यात्रा की ��ीख
हज सब्सिडी की भीख
परीक्षा शुल्क मुक्ती की भीख
गैस सब्सिडी की भीख
मुफ्त राशन की भीख
और कितना गिनाना है ।
यह सब टैक्स पेयर के साथ और इस देश समाज के साथ धोखा है ।
@TheTribhuvan अपराधियों की कोई जाति नहीं होती त्रिभुवन जी , अपराधी केवल अपराधी होता है , लेकिन आप जैसा बुद्धिजीवी कहलाने वाला भी जातीय गन्दगी की सङान्ध में गोते लगाना चाहता है , यह देखकर मन बङा विचलित होता है । खैर एक मनुष्य सुलभ दुर्बलताओं से कोई अछूता नहीं है ।
@TheTribhuvan आप जैसा व्यक्ति भ�� इतना दोगलेपन से लिख सकता है , यह मैंने आज पहली बार देखा है , आखिर हो तो सामान्य मनुष्य ही , इसलिए अन्य सामान्य लोगों की तरह किसी न किसी रूप में जातीय गन्दगी घेर ही लेती है , जातीयता हावी हो ही जाती है ।
@MohitBharatYBP घुमा फिरा कर , तोङ मरोड़कर दोगलेपन के नजरिये से मत रखो । यदि तुम्हारे परिवार के पास भी थोङी बहुत आज जमीन है तो वो भी तुम्हे ��सी तरीके से मिली हुई है ।
@MohitBharatYBP जो व्यक्ति अथवा परिवार चाहे वे किसी भी जाति के रहे हों अपने अपने रजवाड़ों में जिस व जितनी मात्रा में जमीन को जोतते थे , साथ ही उसकी " हासल " " बिघोङी " भरते थे , बिना किसी भेदभाव के वही और उतनी मात्रा में जमीन का नामकरण उस व्यक्ति या परिवार के नाम कर दिया गया था । इसलिए बातों को
@MohitBharatYBP उपर्युक्त कथन में पूजनीय बाबा साहब ने तो कृषक जातियों सहित किसी भी जाति का उल्लेख तक नहीं किया है बल्कि मध्यम वर्गीय उन बङे बङे भूमिधारको की ओर केवल संकेत मात्र किया है , फिर आजादी के जब भूमि का राष्ट्रीय करण किया गया तब भी जैसा तुम लिख रहे हो ऐसा भी कुछ नहीं हुआ था बल्कि उस समय
@MohitBharatYBP इस पोस्ट में ऊपर में जी भरकर जाट समाज को गाली देने के बाद अंत में यह भी लिख रहा है " मैं समस्त जाट भाइयों से अपील करता हूँ " इतनी नीचता कहाँ से ले आते हो ।
@ashokgehlot51 कांग्रेस हमेशा दलितों के सम्मान में खङी रहती है , यह तो ठीक ही है , लेकिन यह भी तो बताते चलिए कि बाकी समाजों के बारे में कांग्रेस या अशोक गहलोत की क्या राय है ।
@nirmal_pareek93 तो भाई तथाकथित ��रोपियों को बरी किसी नेता या सरकार ने तो नहीं किया है , बल्कि माननीय न्यायालय ने किया है , इसलिए कोई उलाहना देना भी है सही जगह पर दीजिए, नाहक नेताओं को गाली देने से तो कोई लाभ नहीं है , फिर कुछ ऐसे घड़ियाली आंसूं बहाने वाले , संविधान की खाली कापी लेकर घूमने वाले भी