आरक्षण की नियमावली यही है कि आरक्षित कोटे के कैंडिडेट यदि मेरिट के अनुसार जनरल कैटिगरी में आ जाते हैं तो उनकी गणना जनरल कैटिगरी में होती है, न कि आरक्षित कैटिगरी में।
कारण कि ऐसा नहीं करने पर जनरल कैटिगरी अपने - आप में जनरल के लिए ���रक्षित हो जाएगी जो कि आरक्षण नियम के खिलाफ है।
18 कैरेट सोने की बनी दुनिया की सबसे बड़ी मूर्ति तथागत की है। 13 - 14 वीं सदी की बैंकाॅक में स्थित इस 5500 किलोग्राम वजनी मूर्ति की कीमत आज 20 अरब रुपये से अधिक है। यह लूटेरों से बचाव के लिए पक्की हुई मिट्टी और रंगीन काँच के प्लास्टर ढँकी हुई थी। 1955 में पता चला कि यह सोने की है।
दुनिया को पता है कि भारत ने हमें क्या दिया, लेकिन भारत को नहीं पता है कि हमने दुनि���ा को क्या दिया। इसीलिए भारत में सबसे ऊँची मूर्ति बुद्ध की नहीं है, जबकि चीन, जापान, म्यांमार, थाईलैंड, श्रीलंका, भूटान आदि देशों में बुद्ध से ऊँची किसी की मूर्ति आज तक नहीं बनी है।
पुस्तकाचे नाव - समकालीन राजकारण : आंबेडकरवादी आकलन
लेखक - अॅड. प्रकाश आंबेडकर
पुस्तक प्रकाशन दि. १० मे २०२२
ठिकाण - यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान, मुख्य सभागृह, ज.जगन्नाथराव भोसले मार्ग, नरिमन पॉईंट, मुंबई- ४०००२१
कार्यक्रमाची वे�� - दुपारी ०४ वा.
@PrabuddhBharat2
@Prksh_Ambedkar
नासिक की गुफा सं. 19 से पता चलता है कि भारत में सातवाहन काल में श्रमण मंत्रालय हुआ करता था ���र उस मंत्रालय में कैबिनेट रैंक का मंत्री होता था। ऐसा था श्रमण भारत!
माणगाव परिषदेने दिलेली व्यवस्था इथली आरएसएस-बीजेपी मोडू पाहतेय. जर ही माणगाव परिषदेची व्यवस्था मोडू द्यायची नसेल तर प्रत्येकाने आपण बाबासाहेब आंबेडकर यांच्याशी प्रामाणिक राहिलंच पाहिजे पण,त्याचबरोबर त्यांचे विचार हे अंगीकृ�� केले पाहिजे.
#माणगाव_परिषद
#शाहू_महाराज
#बाबासाहेब
अशा ऐतिहासिक माणगावमध्ये आज माणगाव परिषदेच्या शतकोत्तर समारोपाचे आयोजन करण्यात आले होते. त्यात छ. शाहू महाराज यांचे वंशज श्रीमंत छत्रपती शाहू महाराज यांची प्रमुख उपस्थिती होती.यावेळी विक्रमसिंह तथा राजू पाटील, क्रांती सावंत, विलास कांबळेच आदी उपस्थित होते.
२१ मार्च १९२० रोजी कोल्हापूर संस्थानातील माणगावात पहिल्या अस्पृश्यांच्या परिषदेत छ.शाहू महाराज आणि बाबासाहेब आंबेडकर हे एकत्र आले होते. ह्याच परिषदेत छ.शाहू महाराज हे अस्पृश्यांना उद्देशून म्हणाले होते की, डॉ.बा���ासाहेब आंबेडकर यांच्या रूपाने तुम्हाला तुमचा नेता मिळाला आहे.
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In 1978-79 Atal Bihari was BJP's foreign minister. He landed in China and China declared war on #Vietnam. It was a failure of Intelligence agency. Present BJP is in the same soup. Again Intelligence failure.
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India should guard itself from China. As the recent actions of Russia might inspire the Chinese to claim Arunachal Pradesh, which they have already started.
#RussiaUkraineWar
अवलोकितेश्वर पद्मपाणि की मूर्ति है। बिहार के कुर्किहार से मिली थी। 8 वीं से 12 वीं सदी के बीच की बनी है।
साल 2000 में चोरी चली गई थी।
पिछले दिनों इटली के मिलान में इसे भारतीय वाणिज्यिक दूतावास को सौंप दिया गया है।
अब इसे इटली से भारत लाया जाएगा।
What a sad story: BJP government does not have a foreign policy nor does it understand it. Otherwise would have adviced Indians to leave, when other country's citizens left.